Veer Vital Sadhana

वीर वैताल साधना
अदृश्य शक्ति का प्रवाह

 

क्या आपने कभी विचार किया है कि ब्रह्माण्ड में कितनी अृदश्य शक्तियों का प्रवाह हो रहा है? कई शक्तियां आपको दिखाई नहीं देती है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि शक्तियां होती ही नहीं है। वैताल शिव के प्रमुख गण है, जिन्होंने दक्ष राज के यज्ञ का विंध्वस कर शिव सत्ता स्थापित की हर व्यक्ति वैताल साधना सम्पन्न कर अपने चारों और एक सुरक्षा चक्र स्थापित कर सकता है। वैताल साधना ऐसी ही अद्वितीय तंत्र साधना है जिसके पूर्ण होने पर वैताल हर समय सुरक्षा प्रहरी के रुप में साधक के साथ रहता है।

 


वैताल भगवान शिव का ही अंश स्वरूप हैं, शिव के गणों में वैताल नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अपनी दैवीय शक्तियों के कारण प्राचीन काल से ही भगवान शिव के विशिष्ट गण वैताल की साधना का प्रचलन रहा है।

 

इतिहास साक्षी है, कि सांदीपन आश्रम में भगवान श्री कृष्ण ने भी वैताल सिद्धि प्रयोग सम्पन्न किया था, जिसके फलस्वरूप वे महाभारत में अजेय बन सके, और जीवन में अद्वितीय सिद्ध हो सके, हजारों बाणों के बीच भी वे सुरक्षित रह सके। विक्रमादित्य ने भी वैताल सिद्धि प्रयोग कर अपने जीवन के कई प्रश्‍नों को सुलझा लिया था।

 

आगे चलकर गुरु गोरखनाथ और मछिन्दरनाथ तो वैताल साधना के सिद्धतम आचार्य बने और उन्होंने वैताल साधना द्वारा उन्होंने अपने जीवन में साधनात्मक उपलब्धियों को सहज ही प्राप्त कर लिया। महान् तंत्र वेत्ता और गोरख तंत्र के आदि गुरु गोरखनाथ प्रणीत वैताल साधना, इस साधना को आज भी गोरख पंथ प्रमुख रूप से सम्पादित करता है।

 

वैताल उत्पत्ति

 

एक बार राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। उस आयोजन में भगवान शिव को उचित मान-सम्मान नहीं दिया गया, इस कारण उनकी पत्नी सती जो राजा दक्ष की पुत्री थीं, व्यथित हो गईं और यज्ञ कुण्ड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिये। इस कारण भगवान शिव अत्यन्त क्रोधित हुए, उनके क्रोध से तीनों लोक थर्राने लगे, पेड़ों से पत्ते झड़ गये, चारों तरफ बिजलियां कड़कने लगीं और समुद्र में तूफान सा आ गया।

 

उसी क्रोध के आवेश में भगवान शिव ने अपनी जटा की एक लट को तोड़कर दक्ष के यज्ञ में होम कर दी, फलस्वरूप एक अत्यन्त तेजस्वी पराक्रमी बलवान और साहसी वीर की उत्पत्ति हुई जिसे ‘वैताल’ शब्द से संबोधित किया गया।

 

यज्ञ में से वैताल को प्रकट होते देख सारे देवता और दानव थर थर कांपने लगे, उसकी ज्वालाओं के सामने सारे देवता लोग झुलसने लगे और ऐसा लगने लगा कि यह पराक्रमी यदि चाहे तो पूरे भूमण्डल को एक हाथ से उठा कर समुद्र में फेंक सकता है।

 

भगवान शिव की शक्ति से उत्पन्न वैताल को भगवान शिव ने स्वयं आज्ञा दी की – जो साधक तुम्हारी साधना कर तुम्हें प्रत्यक्ष प्रकट करें, उसके सामने शांत स्वरूप में उपस्थित होना और जीवन भर उसकी छाया की तरह रक्षा करना, …यही नहीं, अपितु वह जीवन में तुम्हें जो भी आज्ञा दे, जिस प्रकार की भी आज्ञा दे उस आज्ञा का पालन करना ही तुम्हारा कर्त्तव्य होगा।

 

गोरक्ष संहिता के अनुसार वैताल साधना के निम्न आठ लाभ हैं –

 

1. वैताल साधना से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, यह अत्यन्त सौम्य और सरल साधना है। जब वैताल साधना सिद्धि होती है, तो मनुष्य रूप में सरल प्रकृति और शांत रूप में वैताल प्रकट होता है, और जीवन भर दास की तरह साधक के कार्य सम्पन्न करता है।

 

2. वैताल सिद्धि होने पर वह छाया की तरह अदृश्य रूप से साधक के साथ बना रहता है, और प्रतिपल प्रतिक्षण उसकी रक्षा करता है। प्रकृति, अस्त्र शस्त्र या मनुष्य उसका कुछ भी अहित नहीं कर सकते, किसी भी प्रकार से उसके जीवन में न तो दुर्घटना हो सकती है और न उसकी अकाल मृत्यु ही संभव है।

 

3. ऐसे साधक के जीवन में शत्रुओं का नामो निशान नहीं रहता, वह कुछ ही क्षणों में अपने शत्रुओं को परास्त करने का साहस रखता है, और उसका जीवन निष्कंटक और निर्भय होता है, लोहे की सीखंचें या कठिन दीवारें भी उसका कुछ भी अनिष्ट नहीं कर सकतीं।

 

4. वैताल भविष्य सिद्धि सम्पन्न होता है, अतः अपने जीवन या किसी के भी जीवन के भविष्य से सम्बन्धित जो भी प्रश्‍न पूछा जाता है, उसका तत्काल उत्तर प्रामाणिक रूप से मिल जाता है, ऐसा व्यक्ति सही अर्थों में भविष्य दृष्टा बन जाता है।

 

5. जो साधक वैताल को सिद्ध कर लेता है, वह वैताल के कन्धों पर बैठ कर अदृश्य हो सकता है, एक स्थान से दूसरे स्थान पर कुछ ही क्षणों में जा सकता है और वापिस आ सकता है, उसके लिए पहाड़, नदियां या समुद्र बाधक नहीं बनते।

 

ऐसा साधक कठिन से कठिन कार्य को वैताल के माध्यम से सम्पन्न करा लेता है, और चाहे कोई व्यक्ति कितनी ही दूरी पर हो, उसे पलंग सहित उठा कर अपने यहां बुलवा सकता है, और वापिस लौटा सकता है, उसके द्वारा गोपनीय से गोपनीय सामग्री प्राप्त कर सकता है।

 

6. वैताल सिद्धि प्रयोग सफल होने पर साधक अजेय, साहसी, कर्मठ और अकेला ही हजार पुरुषों के समान कार्य करने वाला व्यक्ति बन जाता है।

 

वास्तव में वैताल साधना अत्यन्त सौम्य और सरल साधना है, जो भगवान शिव की साधना करता है वह वैताल साधना भी सम्पन्न कर सकता है। जिस प्रकार से भगवान शिव का सौम्य स्वरूप है, उसी प्रकार से वैताल का भी आकर्षक और सौम्य स्वरूप है। इस साधना को पुरुष या स्त्री सभी सम्पन्न कर सकते हैं।

 

यद्यपि यह तांत्रिक साधना है, परन्तु इसमें किसी प्रकार का दोष या वर्जना नहीं है। गायत्री उपासक या देव उपासक, किसी भी वर्ण का कोई भी व्यक्ति इस साधना को सम्पन्न कर अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकता है।

 

सबसे बड़ी बात यह है, कि इस साधना में भयभीत होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, घर में बैठकर के भी यह साधना सम्पन्न की जा सकती है। साधना सम्पन्न करने के बाद भी साधक के जीवन में किसी प्रकार अन्तर नहीं आता, अपितु उसमें साहस और चेहरे पर तेजस्विता आ जाती है, फलस्वरूप वह जीवन में स्वयं ही अपने अभावों, कष्टों और बाधाओं को दूर कर सकता है।

 

आज के युग में वैताल साधना अत्यन्त आवश्यक और महत्वपूर्ण हो गई है, दुर्भाग्य की बात यह है कि अभी तक इस साधना का प्रामाणिक ज्ञान बहुत ही कम लोगों को था, दूसरे साधक ‘वैताल’ शब्द से ही घबराते थे, परन्तु ऐसी कोई बात नहीं है। जिस प्रकार से साधक लक्ष्मी, विष्णु या शिव आदि की साधना सम्पन्न कर लेते हैं, ठीक उसी प्रकार के सहज भाव से वे वैताल साधना भी सम्पन्न कर सकते हैं।

 

साधना समय

 

शिव कल्प 28 जनवरी 2017 से 12 मार्च 2017 के मध्य किसी भी दिन इस साधना को सम्पन्न कर सकते हैं। इसी शिव कल्प की फाल्गुन शुक्ल तृतीया (01 मार्च 2017) वैताल सिद्धि दिवस है। इस मुहूर्त में यह साधना सम्पन्न करना श्रेष्ठ फलदायी माना गया है। फाल्गुन मास सदाशिव की, साधना सिद्धि का मास है। इस मास में साधना कीे जाय तो सफलता की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।

 

साधना सामग्री

 

इस प्रयोग में न तो कोई पूजा और न कोई विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है, तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार इस प्रयोग में केवल तीन उपकरणों की जरूरत होती है।

 

1. तांत्रोक्त वैताल यंत्र, 2. रुद्र मंत्र आवेशित तांत्रोक्त वैताल माला और 3. भगवान शिव का चित्र।

 

इसके अलावा साधक को अन्य किसी प्रकार की सामग्री जल पात्र या कुंकुम आदि की जरूरत नहीं होती, यह साधना रात्रि को सम्पन्न की जाती है, परन्तु जो साधक न भयभीत हों, और न विचलित हों, वे निश्‍चिन्त रूप से इस साधना को सम्पन्न कर सकते हैं।

 

साधना विधान

 

साधक रात्रि को दस बजे के बाद स्नान कर लें और स्नान करने के बाद अन्य किसी पात्र को छुए नहीं। पहले से ही धोकर सुखाई हुई काली धोती को पहन कर काले आसन पर दक्षिण की ओर मुंह कर घर के किसी कोने में या एकान्त स्थान में बैठ जाएं।

 

अपने सामने लकड़ी के एक बाजोट पर गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका स्थापित कर लें और साथ ही भगवान शिव का चित्र भी स्थापित कर दें। वैताल साधना में सफलता हेतु गुरु से आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें। इस हेतु सर्वप्रथम निखिल ध्यान करें –

 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

 

निखिल ध्यान के पश्‍चात् गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को जल से स्नान करावें –

 

ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥

 

इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पंचोपचार पूजन करें –

 

ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।                               (धूप, दीप दिखाएं)

 

अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें। इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –

 

ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः

 

गुरु मंत्र जप के पश्‍चात् गुरु चित्र के सम्मुख ही एक लोहे के पात्र या स्टील की थाली में काजल से एक गोला बनाएं और उस गोले में वैताल यंत्र को स्थापित कर दें जो मंत्र सिद्ध प्राणश्‍चेतना युक्त हो। यंत्र स्थापन के पश्‍चात् हाथ जोड़कर वैताल का ध्यान करें।

 

ध्यान

 

धूम्र-वर्ण महा-कालं जटा-भारान्वितं यजेत्
त्रि-नेत्र शिव-रूपं च शक्ति-युक्तं निरामपं॥
दिगम्बरं घोर-रूपं नीलांछन-चय-प्रभम्
निर्गुण च गुणाधरं काली-स्थानं पुनः पुनः॥

 

ध्यान के उपरान्त साधक वैताल माला से निम्न मंत्र की 101 माला मंत्र जप सम्पन्न करें। यह मंत्र छोटा होते हुए भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है और मुण्ड माला तंत्र में इस मंत्र की अत्यन्त प्रशंसा की हुई है।

 

वैताल मंत्र

 

॥ॐ वैताल यक्ष यक्ष क्षं क्षीं क्षूं क्षैं क्षः स्वाहा॥

 

101 माला मंत्र जप करते समय किसी प्रकार आलस्य नहीं लायें, शांत भाव से मंत्र जप करते रहें। यदि खिड़की, दरवाजे खड़खड़ाने लगे तो भी अपने स्थान से न उठें। मंत्र जप के पश्‍चात् बेसन के लड्डुओं का भोग यंत्र के सामने अर्पित कर दें। इस प्रकार यह साधना पूर्ण होती है।

 

दूसरे दिन साधक प्रातः काल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर वह वैताल यंत्र, वैताल माला और वह भोग किसी मन्दिर में रख दें अथवा नदी तालाब या कुएं में डाल दें, भगवान शिव और गुरु चित्र को पूजा स्थान में स्थापित कर दें।

 

वास्तव में ही यह अत्यन्त गोपनीय प्रयोग है, अतः यह प्रयोग सामान्य व्यक्ति को, निन्दा करने वाले को, तर्क करने वाले दुराचारी को नहीं देना चाहिए और न इसकी विधि समझानी चाहिए।

 

वस्तुतः यह आपके जीवन का सौभाग्य है, कि योगीराज के द्वारा ऐसा तेजस्वी और अद्भुत वैताल प्रयोग प्राप्त हुआ है, जिसे आप समय-समय पर सम्पन्न कर जीवन को पूर्णता प्रदान कर सकते हैं।

 

साधना सामग्री – 450/-

Shiva Kalpa

Maagh Shukla Pratipada 28 January 2017

to Holi Parv 12 March 2017

 

Veer Vetaal Sadhana

Flow of Invisible Power

 

Have you ever thought about the flow of invisible powers within the universe. You cannot see many powers, but it does not mean that those powers do not exist. Vetaal is the main Gana of Lord Shiva, who setup Lord Shiva’s primacy by destroying the Yagya of King Daksha. Every person can setup a protection ring around himself by performing the Vetaal Sadhana. Vetaal Sadhana is a unique Tantrik Sadhana, in which Vetaal remains with the Sadhak and protects him at all times.


Vetaal is a microsome of Lord Shiva. Vetaal is a prominent primary Gana of Lord Shiva. The divine powers of Vetaal, primary Gana of Lord Shiva has motivated Sadhaks to perform Sadhana of Vetaal, since ancient ages.

History bears witness that Lord Shree Krishna also accomplished Vetaal Siddhi prayog in Sandipan ashram, which granted him invincibility in the Mahabharata. He remained protected even while facing thousands of arrows. King Vikramaditya also resolved many problems of his life by accomplishing Vetaal Siddhi prayog.

Later Guru Gorakhnath and Macchindernath became accomplished masters of Vetaal Sadhana and they easily acquired many spiritual accomplishments in their life. The Gorakh panth prominently conducts this Vetaal Sadhana even today, which was described by Guru Gorakhnath, great Tantra Master and initiating Guru of Gorakh Tantra.

 

Origin of Vetaal

Once King Daksha organized a huge yagna. He did not appropriately honour Lord Shiva in that organization, which distressed His spouse Sati, who was daughter of King Daksha. She jumped into the sacrificial fire and gave up her life. This made Lord Shiva very angry, the three universes got terrified of his anger, the leaves fell from the trees, the lightening started flashing every where and a furious tempest thundered in the sea.

In this furious rage, Lord Shiva tore a braid from His hair and offered it in the sacrificial Yagya fire of King Daksha. This resulted in origin of a highly stunning, strong, courageous, heroic personality, who was named as Vetaal.

All the Gods and Demons trembled with fear upon seeing the origin of Vetaal from the Yagya fire, his stunning flames started scorching all the Gods, and it seemed that this mighty personality could easily pick up and throw the entire earth into the ocean.

Lord Shiva Himself commanded Vetaal, who originated from His Shakti that – You should stay in gentle form with the Sadhaks who perform your Sadhana, and protect them throughout their life like a shadow… moreover it will be your duty to obey all the commands which the Sadhak directs you to.

Goraksh Sanhita states following benefits  from performing Vetaal Sadhana –

  1. There is no need to be afraid of Vetaal Sadhana, it is a very gentle and simple Sadhana. A gentle and simple natured Vetaal manifests in human form upon accomplishing of Vetaal Sadhana, and He completes the tasks of the Sadhak like a slave throughout his life.
  2. He accompanies the Sadhak like a shadow in an invisible form after accomplishing of the Vetaal Siddhi, and protects him at each and every moment. The natural calamities, arms-armaments or humans cannot harm him in any way, no accident can harm him in his life, and premature death is impossible.
  3. The enemies cannot exist in this Sadhak’s life. He acquires courage to defeat his enemies in a few moments. His brave life is trouble-free and iron-bars or hard-walls cannot confine him.
  4. Vetaal possesses clairvoyant skills, so he can immediately provide accurate answers to whatever questions are asked about current life or about future. Such a person becomes a true clairvoyant.

Such a Sadhak can accomplish even the most difficult tasks through medium of Vetaal. He can fetch any person, wherever he is, towards him, even with his bed. He can similarly send any person back, and can obtain any type of confidential-secret materials.

  1. After accomplishing Vetaal Sadhana, the Sadhak becomes invincible, brave, dynamic and strength. He can himself perform tasks of thousand persons.

In reality, the Vetaal Sadhana is an extremely simple and gentle Sadhana, whoever practices Lord Shiva’s Sadhana, can easily accomplish Vetaal Sadhana. Vetaal is also very attractive and gentle, similar to gentle nature of Lord Shiva. Any man or woman can perform this Sadhana.

Although it is a tantrik practice, it is free from any blemish or taboo. Any Gayatri-worshipper or God-worshipper, any person of any class, can achieve success in his life by performing this Sadhana.

The biggest fact is that there is no need to be afraid of this Sadhana, it can also be accomplished at one’s own home. Nothing changes in the Sadhak’s life after accomplishment of this Sadhana, rather he gets filled with courage and intensity. Therefore, he can eradicate problems, shortcomings, obstacles and sufferings from his own life himself.

The Vetaal Sadhana is very necessary and significant in today’s age. Unfortunately very few people have authentic knowledge about this Sadhana practice, and Sadhaks used to fear from the very word “Vetaal”. But the reality is different. As the Sadhaks perform Lakshmi, Vishnu or Shiva Sadhanas, similarly they can easily accomplish Vetaal Sadhana.

 

Sadhana Duration

This Sadhana can be performed on any day during the Shiva Kalpa from January 28, 2017 to March 12, 2017. The Vetaal Siddhi Diwas is falling this year on Falgun Shukla Tritiya of Shiva Kalpa (01 March, 2017). It is considered extremely fruitful to accomplish Sadhana during this auspicious muhurath. The chances of success in the Sadhana increase manifold if the Sadhana is performed in this month.

 

Sadhana Materials

There is no requirement of any specific Sadhana materials or special worship in this Sadhana. According to Tantrik scriptures, only three major articles are required in this Sadhana.

  1. Tantrokt Vetaal Yantra
  2. Rudra Mantra Aaveshit Taantrokt Vetaal Mala
  3. Picture of Lord Shiva

There is no need of any other Sadhana material like water-tumbler, kumkum etc. This Sadhana is accomplished within the night. The Sadhaks who do not get terrified or distracted, can certainly perform this Sadhana.

 

Sadhana Procedure

The Sadhak should take bath after 10 pm in night, and should not touch anything after the bath. After wearing an earlier dried black dhoti, he should sit facing South direction, in a corner or solitary place in the house on a black seat-asana.

Set-up Guru Picture/ Guru Statue/ Guru Paaduka/ Guru Yantra on a wooden-board in front of yourself and also setup picture of Lord Shiva. You should surely obtain blessings from Guru for success in Vetaal Sadhana. First meditate on the divine form of Gurudev Nikhil –

 

GururBrahmaa GururVishnuH Gururdevo MaheshwaraH |

GuruH Saakshaat Par Brahmaa Tasmei Shree Guruve NamaH ||

 

After Nikhil meditation, bathe the Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka with water –

Om Nikhilam Snaanam Samarpayaami ||

 

Then wipe with a clean cloth. Perform Panchopchaar worship-poojan with Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken rice), Pushpa (Flowers), Neivedh (Sweets/Fruit offering), Dhoop (Incense) – Deep (Lamp); chanting following mantras –

Om Nikhilam Kumkum Samarpayaami |

Om Nikhilam Akshtaan Samarpayaami ||

Om Nikhilam Pushpam Samarpayaami ||

Om Nikhilam Neivedhyam Nivedayaami ||

Om Nikhilam Dhoopam Aardhyaapayaami, Deepam Darshayaami ||

(Show Dhoop, Deep)

 

Now rotate three Achmaani (spoonful) water around the  Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka and drop it on ground. Then chant 1 rosary-round of Guru Mantra with Guru Mala –

Om Param Tatvaaya Naaraayanaaya Gurubhayo Namah

 

After completing Guru poojan, draw a circle on an iron-plate or a steel-plate with Kajal, and setup Mantra consecrated and enlivened Vetaal Yantra within that circle. After setting up the Yantra, meditate on Vetaal with folded hands.

 

Meditation

Dhoomra-Varna Mahaa-Kaalam Jataa-Bhaaraanvitam Yajet

Tri-Netra Shiv-Roopam Cha Shakti-Yuktam Niraamapam ||

Digambaram Ghor-Roopam Neelaanjhan-Chaya-Prabham

Nirgun Cha Goonaadharam Kaali-Sthaanam PoonaH PoonaH ||

 

After meditation, chant 101 mala (rosary-rounds) of following Mantra with Vetaal Mala. This small-looking Mantra is highly significant, and it has been praised highly even in Munda Mala Tantra.

 

Vitaal Mantra

|| Om Vitaal Yaksha Yaksha Ksham Ksheem Kshoom Ksheim KshaH Swahaa ||

 

Do not get lazy during this Mantra chanting of 101 malas, continue to chant quietly with full consciousness. Do not get up from your place even if you feel any vibrations on the windows or doors. Offer Besan-laddoos to the Yantra after completion of Mantra chanting. Thus this Sadhana gets accomplished.

Next day morning, after completing bath etc., the sadhak should offer that Vetaal Yantra, Vetaal Mala and bhoga-offering in a temple or immerse in a river, pond or a well. Setup pictures of Lord Shiva and Gurudev in your place of worship.

Really, this is a very confidential prayoga practice, so this prayoga procedure should not be given or explained to an average person, or to a person who habitually criticizes or argues.

In fact, it is the good fortune of your life that we have been able to obtain this amazing intense prayog from Yogiraaj. You can obtain perfection in every area of your life by accomplishing it in golden opportune times.

 

Sadhana Materials – 450/-

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