Third Eye Activation Sadhana

खोलने हैं मन के द्वार
सब संभव है

 

त्रिनेत्र जागरण साधना

 

नेत्र क्या है? आन्तरिक शक्ति और बाह्य नेत्र और हमारे भीतर तीसरे नेत्र का समायोजन, जब-तब यह तीसरा नेत्र क्रियाशील नहीं होता है तो मानव जीवन में दुर्भाग्य, दुःख आते रहते हैं, विषाद आता है, पीड़ा होती है, सम्बन्ध टूटते हैं, शरीर की हानि होती है, मन उदासीन रहता है उसे अपनी क्रियाओं का ही फल प्राप्त नहीं होता है। यह स्थिति भाग्यहीनता और दुर्भाग्य की स्थिति कही जाती है।

 

यह भाग्योदय तो स्वयं की साधना द्वारा जाग्रत हो सकता है और यह केवल उसी स्थित में उदय होगा जब भीतर का तीसरा नेत्र जाग्रत होगा।

 

 

त्रिनेत्र जागरण साधना

 

यह 11 दिन की साधना है तथा रात्रि को ही सम्पन्न करनी होती है। इसमें ‘आज्ञा चक्र जागरण यंत्र’ तथा ‘भूत-भविष्य माला’ का प्रयोग होता है। दोनों पूर्ण प्राण-प्रतिष्ठा युक्त हों। रोज 11 माला, मंत्र जप करना होता है। 12 वें दिन यंत्र और माला दोनों को नदी में प्रवाहित कर देना है।

 

आप पूर्ण मनोयोग एवं श्रद्धापूर्वक साधना करते हैं तो 11 वें दिन तक सफलता मिलती ही है और बहुत से साधकों को मिली भी है, आवश्यकता है श्रद्धा, समर्पण तथा अनुरक्तता की।

 

मंत्र-जप से पहले और पश्‍चात गुरु-पूजन, गुरु-ध्यान अवश्य करें। दीक्षा प्राप्त की हो तो पांच माला गुरु मंत्र जप करें, प्रतिदिन साधना से पहले और बाद में। साधना में गुरु चित्र का भी स्थापन अवश्य करें।

 

साधना विधान

 

त्रिनेत्र जागरण साधना को किसी भी अमावस्या अथवा रविवार से प्रारम्भ किया जा सकता है। देवपितृ अमावस्या 29 दिसम्बर 2016 इस साधना को प्रारम्भ करने का श्रेष्ठ मुहूर्त है।

 

यह रात्रि कालीन साधना है अर्थात् रात्रि दस बजे के बाद ही इसे सम्पन्न किया जाता है। साधना दिवस पर साधक एक सफेद आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर बैठ जाएं। अपने सामने एक लकड़ी के बाजोट या चौकी पर सफेद वस्त्र बिछा दें तथा उस पर गुरु चित्र/विग्रह/ गुरु यंत्र/ गुरु पादुका स्थापित कर साधना में सफलता हेतु दोनों हाथ जोड़कर गुरुदेव निखिल का ध्यान करें –

 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

 

निखिल ध्यान के पश्‍चात् गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को जल से स्नान करावें –

 

ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥

 

इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पंचोपचार पूजन करें –

 

ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान् समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।                              (धूप, दीप दिखाएं)

 

अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें। इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –

 

ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः

 

गुरु पूजन के पश्‍चात् गुरु चित्र के सम्मुख ही चावल की ढेरी पर ताम्र-पात्र में ‘आज्ञा चक्र जागरण यंत्र’ स्थापित करें। तेल का दीपक लगा दें, साधना में केवल तेल का दीपक लगाएं चाहे कोई भी तेल हो।

 

तत्पश्‍चात बाएं हाथ में जल लेकर संकल्प लें कि –

 

‘मैं (अपना नाम) तृतीय नेत्र जागरण के लिए इस तीव्र प्रयोग को सम्पन्न कर रहा हूं।’

 

तत्पश्‍चात जल को जमीन पर छोड़ दें।

 

संकल्प के पश्‍चात् दोनों हाथों में पुष्प लेकर निम्न ध्यान मंत्र का पाठ करें –

 

अज्ञानामाम्बुजं तछिमकर सदृशं ध्यानाधाम प्रकाशम्।
हक्षाभ्यां वै कलाभ्याम् परिलसित वपुर्नेत्र पत्रं सुशुभ्रम्॥
तन्मध्ये हाकिनी सा शशिसम धवला वक्त्रषट्कम दधाना।
विद्यां मुद्रां कपालं डमरु जपवटीं विभ्रती शुद्धचित्ता॥

 

पुष्प यंत्र पर अर्पित कर दें। इसके पश्‍चात् भूत-भविष्य माला से निम्न मंत्र का 11 माला जप करें –

 

॥ ॐ ह्लीं क्लीं भूत-भविष्य वर्तमानानि दर्शय ह्लीं क्लीं ॐ फट् ॥

 

ऐसा 11 दिन तक निरंतर करें। 12 वें दिन माला एवं यंत्र को जल में प्रवाहित कर देने के पश्‍चात आप नित्य पांच मिनट तक इस मंत्र का बिना गणना किए जप करें।

 

यह प्रयोग वास्तव में जीवन की एक अनमोल निधि है तथा यह इतना तीव्र प्रयोग है कि 11 वें दिन तक आपको विचित्र अनुभव होने आरंभ हो जाते हैं। यों तो एक बार आपको भविष्य के संकेत मिलने लग जाएंगे, तो जीवन पर्यन्त मिलते ही रहेंगे परन्तु आगे भी अगर आप मंत्र जप करते रहते हैं तो आपकी पराशक्तियां और अधिक तीव्र होती जाएंगी।

 

और फिर एक समय ऐसा भी आ सकता है कि घटनाएं बिलकुल स्पष्ट एक चलचित्र की भांति आपके सामने स्पष्ट होने लग जाएंगी। ऐसा 11 दिन के भीतर भी हो सकता है, परन्तु यह निर्भर करेगा आपकी श्रद्धा पर, आपके विश्‍वास पर और आपकी लगन पर।

 

और एक बार पूर्ण आज्ञा चक्र जाग्रत हो जाए तो फिर जीवन की कोई समस्या, कोई दुर्घटना आपके लिए अकस्मात नहीं हो सकती। आप पहले से ही भांप लेंगे कि क्या होने वाला है और भांप ही नहीं लेंगे अपितु उसका समाधान, उससे बचाव भी आपको पूर्णत: स्पष्ट हो जाएगा। वास्तव में ही यह जीवन का एक अद्भुत प्रयोग है जिसके माध्यम से आप सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए उस उच्चता तक पहुंच सकते हैं जिसे पूर्णता कहा गया है।

 

साधना सामग्री – 430/-
DevPitra Amavasya

29 December 2016

 

Open the doors of mind

Everything is possible

Trinetra Jaagran Sadhana

Until our third eye activates, we continue to face misfortune and sorrows. We keep suffering, our relationships break up, our health deteriorates, worries and tensions fill our mind, and we do not receive the rightful fruits of our own actions. We continue to suffer through this state of disaster and misfortune.

We can alter our destiny by performing Sadhanas ourselves, and the fate changes only after awakening of the inner third eye.

 

Trinetra Jaagran (Awakening) Sadhana

This 11-day Sadhana should be performed only in the night-time. “Aagya Chakra Jaagran Yantra” and “Bhoot-Bhavishya Mala” are used in this Sadhana. Both of these Sadhana items should be Divine consecrated and sanctified. 11 Mala Mantra Japa should be completed daily. The Yantra and the Mala should be immersed into a river (or a running stream of water) on the 12th day.

You will certainly obtain success by the 11th day if you perform Sadhana with full concentration and faith. Many Sadhaks have already obtained success. Faith, Dedication and Trust are the key elements for success.

You should perform Guru-worship and Guru-meditation both before and after the Mantra-chanting. You should complete 5 mala Guru Mantra both before and after the Sadhana daily, if you have obtained Diksha. You should also setup Guru-picture during the Sadhana.

 

Sadhana Procedure

The Trinetra Jaagran Sadhana can be started on any New-Moon(Amavasya) or Sunday. DevPitra Amavasya on 29 December 2016 is the best muhurath moment to accomplish this Sadhana.

This is nocturnal Sadhana i.e it should be initiated only after 10 pm. The Sadhak should sit on a White Asana facing either  East or North direction. Spread a white cloth on a wooden board in front, and setting up Guru Picture/ Guru Statue/ Guru Paaduka/ Guru Yantra; meditate on the divine form of Gurudev Nikhil to pray for success in the Sadhana-

 

GururBrahmaa GururVishnuH Gururdevo MaheshwaraH |

GuruH Saakshaat Par Brahmaa Tasmei Shree Guruve NamaH ||

 

Bathe the Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka with water after Nikhil meditation –

Om Nikhilam Snaanam Samarpayaami ||

 

Then wipe with a clean cloth. Perform Panchopchaar worship-poojan with Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken rice), Pushpa (Flowers), Neivedh (Sweets/Fruit offering), Dhoop (Incense) – Deep (Lamp); chanting following mantras –

Om Nikhilam Kumkum Samarpayaami |

Om Nikhilam Akshtaan Samarpayaami ||

Om Nikhilam Pushpam Samarpayaami ||

Om Nikhilam Neivedhyam Nivedayaami ||

Om Nikhilam Dhoopam Aagrapayaami, Deepam Darshayaami ||

(Show Dhoop, Deep)

 

Now rotate three Achmaani (spoonful) water around the  Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka and drop it on ground. Then chant 1 rosary-round of Guru Mantra with Guru Mala –

Om Param Tatvaaya Naaraayanaaya Gurubhyo Namah

 

After completing Guru poojan, make a mound of rice grains in front of Guru-picture and setup “Aagya Chakra Jaagran Yantra” in a copper plate on it. Light an oil lamp. You should light only oil lamp in this Sadhana. You may use any type of oil.

Thereafter taking water in your left hand, pledge thus –

“I (your name) am performing this intense Sadhana prayog to activate my inner third eye.”

Then pour the water on the ground.

After resolution, taking flowers in your hand, recite the following Dhyaan-meditation Mantra-

 

Aagyaanaamaambujam Tachimkara Sadrisham Dhyaanaadhaam Prakaasham |

Hakshyaabhyaam Vei Kalaabhyaam Parilasit Vapurnetra Sushubhram ||

Tanmadhye Haakinee Saa Shashisam Dhavalaa Vaktrakshatkam Dadhaanaa |

Vidhyaam Mudraam Kapaalam Damaru Japavatim Vibhratee Shuddhachittaa ||

 

Offer the flowers on the Yantra. Then chant 11 mala or following Mantra using the Bhoot-Bhavishya Mala-

|| Om Hleem Kleem Bhoot-Bhavishya Vartamaanaani Darshay Hleem Kleem Om Phat ||

 

Continue this process for 11 days. After immersing the Yantra and the Mala into running water-stream on 12th day, you should regularly chant this Mantra without counting for 5 minutes.

 

This prayog is a valuable trove of life and it is so intense, that you will start to experience strange experiences by the 11th day. You will start to sense the future, and will continue to get them throughout your life, moreover your para-normal powers will continue to enhance if you regularly  chant mantra.

And a day will come when you will be able to clearly view the future events, just like a movie. You may achieve this within 11 days also, but this depends upon your faith, trust and persevering passion.

And, after activation of Aagya Chakra, any problem or event of life will no longer be a unknown accident. You will sense the future events beforehand. Apart from sensing future events, you will also be able to clearly visualize how to prevent or avoid any future accident. This is really an important Sadhana in life, and you should use this medium to progress ahead on the path to Perfection-Totality.

Sadhana Materials – 430 /-

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