Tantra Utkilan Tripura Sadhana

 

तंत्र उत्कीलन त्रिपुरा साधना
यदि हम जीवन का गहराई से विश्‍लेषण करें, तो पायेंगे, कि व्यक्ति हर पल, हर क्षण, भय एवं बाधाओं से आशंकित रहता है। गहराई से विश्‍लेषण करने पर ऐसा ही प्रतीत होता है कि मनुष्य की शक्तियां कीलित हो गई हैं। शक्तियों का यह कीलन स्वार्थी लोगों द्वारा या उनकी स्वयं की गलतियों से भी हो सकता है। इस कारण जीवन में भय का वातावरण बना रहता है और यह भी सत्य है कि निर्भय हुए बिना जीवन का आनन्द संभव ही नहीं है।

 

जीवन में निर्भयता एवं बाधाओं के निवारण के लिए व्यक्ति अनेक उपाय करता ही रहता है। जिस प्रकार कांटे से कांटा निकाला जा सकता है उसी प्रकार जीवन में कुछ ऐसी बाधाएं, ऐसी समस्याएं होती हैं जिन्हें उच्च तंत्र साधनाओं द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है।

 

आवश्यकता केवल इस बात कि है कि हम अपने जीवन का विश्‍लेषण करें तथा इस बात को समझें कि हमारे जीवन में जो घटित हो रहा है वह सामान्य है अथवा असामान्य। सामान्य समस्याओं का हल तो सामान्य प्रयोगों से किया जा सकता है। किन्तु असामान्य समस्याओं का हल तो विशेष तंत्र प्रयोगों से ही संभव है और इस हेतु उच्चस्तरीय तंत्र साधनाएं सम्पन्न करनी होती हैं। इस हेतु गुरुदेव के मार्गदर्शन में श्रेष्ठ उपाय है – ‘तंत्र उत्कीलन त्रिपुरा साधना’।

 

त्रिपुर भैरवी दस महाविद्याओं में अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं तीव्र शक्ति स्वरूपा हैं। इनकी कृपा से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सुरक्षा प्राप्त होेने लगती है और समस्त बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। इनकी तंत्र शक्ति के माध्यम से साधक पूर्ण क्षमतावान एवं वेगवान बन सकता है।

 

भगवती त्रिपुर भैरवी, महाभैरव की ही शक्ति हैं, उनकी मूल शक्ति होने के कारण उनसे भी सहस्र गुणा अधिक तीव्र तथा क्रियाशील हैं। साधक जिन लाभों को भैरव साधना सम्पन्न करने से प्राप्त करता है, जैसे शत्रुबाधा निवारण, वाद-विवाद मुकदमा आदि में विजय, आकस्मिक दुर्घटना टालना, रोग निवारण आदि इस साधना के माध्यम से इन विषम स्थितियों पर भी आसानी से नियंत्रण कर सकता है।

 

कैसा भी वशीकरण प्रयोग करवा दिया गया हो, कैसा भी भीषण तांत्रिक प्रयोग कर दिया गया हो, दुर्भावना वश वशीकरण प्रयोग कर दिया गया हो, गृहस्थ या व्यापार बन्ध प्रयोग हुआ हो, तो तंत्र उत्कीलन त्रिपुरा साधना सम्पन्न करने पर वह बेअसर हो जाता है।

 

उच्च स्तरीय तंत्र प्रयोग

 

जब किसी व्यक्ति पर या उसके परिवार पर द्वेष वश तांत्रिक प्रयोग होता है, तो वह परिवार अत्यन्त कष्ट भोगने के लिए विवश हो जाता है। तांत्रिक बाधा के कारण उसके समस्त कार्य बाधित हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में तंत्र साधना सम्पन्न करने पर व्यक्ति का जीवन निष्कंटक तथा तेजस्वी क्षमताओं से युक्त हो जाता है।

 

लोग साधना करते हैं, मंत्र, अनुष्ठान करते हैं और जब सफलता नहीं मिलती तब या तो दोष मंत्र, अनुष्ठान पर ही डालते हैं अथवा अपने दोषों का फल स्वयं भुगतते हैं और गुरुदेव जी को कहते हैं कि – मैं इतनी बार आपके पास आया, इतनी बार अनुष्ठान किया पूरी विधि से कार्य किया, इनसे सफलता नहीं मिली तो शास्त्र ही झूठे हैं, क्या किसी ने यह विचार किया है, …हो सकता है, मेरी ही क्रिया प्रक्रिया, मेरी ही क्षमता में कोई दोष हो, मेरे ही पाप कर्मों के कारण सफलता नहीं मिल रही हो, क्या ऐसा तो नहीं है, कि मेरा जीवन ही कीलित किया हुआ हो, …प्रत्येक साधक को इस प्रश्‍न पर भी विचार करना आवश्यक है।

 

कीलन दोष क्या है?

 

कीलन का तात्पर्य है, एक बन्धन। जिस प्रकार एक खूंटे से बंधा पशु उस खूंटे के चारों ओर तो चक्कर लगा सकता है लेकिन वह सीमा से आगे नहीं बढ़ सकता, खूंटे से गले तक की रस्सी किसी के लिए छोटी हो सकती है और किसी के लिए बड़ी, परन्तु बन्धन तो बन्धन ही है, वह एक पक्षी की भांति स्वच्छन्द विचरण तो नहीं कर सकता,  इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति की शक्तियों का कीलन किया हुआ है, और यह कीलन उसके कर्मों के कारण, उसके दोषों के कारण, उस पर किये गये किसी तांत्रिक प्रयोगों द्वारा आदि शक्ति के प्रभाव से हो जाता है, और जब तक यह दोष दूर नहीं हो जाता तब तक वह कितना ही प्रयास करे, उसके कार्य सफल नहीं हो पाते, उसके देखते-देखते उसके साथ वाले जीवन की दौड़ में आगे निकल जाते हैं और वह एक पशु की भांति अपने ही स्थान पर बंधा छटपटाता रहता है।

 

उत्कीलन क्या?

 

क्या कीलन दोष का कोई उपाय है? क्या कीलन दोष ऐसा कलंक है, जिसे उतारा ही नहीं जा सकता? क्या साधक अपने भीतर अपनी शक्ति का उस स्तर तक विकास नहीं कर सकता, जिससे कीलन दोष दूर हो जाय?

 

ठीक यही प्रश्‍न तंत्र के आदि रचियता भगवान शिव से पार्वती ने किया था कि – हे प्रभु! आप तो भक्तों पर परम कृपा करने वाले हैं, आगम-निगम बीज मंत्रों के स्वरूप हैं, भक्ति मुक्ति के प्रदाता हैं फिर आपने मन्त्रों का कीलन क्यों किया? क्यों सांसारिक प्राणियों को मंत्र सिद्धि में पूर्णता प्राप्त नहीं होती?

 

देवों के देव महादेव ने कहा, कि जैसे-जैसे युग बदलेगा वैसे-वैसे लोगों में भक्ति-प्रीति कम होगी, राग, द्वेष, ईर्ष्या, विरोध, शत्रुता में वृद्धि होगी, एक प्राणी दूसरे प्राणी को देखकर प्रसन्न नहीं होगा, अपितु ईर्ष्या करेगा और इस ईर्ष्या के वशीभूत अपनी शक्तियों का उपयोग बुरे कार्यों में करेगा, यदि ऐसे गलत व्यक्तियों के हाथ में मंत्र सिद्धि, तंत्र सिद्धि लग गई तो वे संसार में विपत्ति की स्थिति उत्पन्न कर देंगे।

 

उत्कीलन महाविद्या

 

मनुष्य जीवन में ऐसा ही हो रहा है, कुछ स्वार्थी व्यक्तियों या स्वयं की कुछ गलतियों के कारण भी जीवन कीलित हो जाता है और उसके द्वारा किये गये कार्यों का उसे पूर्ण फल नहीं मिल पा रहा है। जीवन में उसे किसी भी प्रकार के कीलन को समाप्त करने हेतु ही पत्रिका के इन पृष्ठों पर गुरुदेव की आज्ञा से विशेष ‘तंत्र उत्कीलन त्रिपुरा साधना’ प्रकाशित की जा रही है। जिससे कीलन दोष शांत करने में सफलता प्राप्त होगी, वह अपने ऊपर अन्य व्यक्तियों द्वारा किये गये तंत्र दूर कर सकेगा, अपने तंत्र ज्ञान को अपनी रक्षा के लिए प्रयोग कर सकेगा।

 

साधना विधान

 

यह साधना विशेष रूप से होली की रात्रि को 10 बजे के पश्‍चात् सम्पन्न करें। इस साधना हेतु आवश्यक है – ‘तांत्रोक्त उत्कीलन यंत्र’, ‘11 तांत्रोक्त फल’ और ‘भैरवी माला’ आवश्यक है।

 

मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठिायुक्त ‘तांत्रोक्त उत्कीलन यंत्र’ विशेष रौद्र शिव एवं त्रिपुरा के मंत्रों से प्राण प्रतिष्ठित किया गया है। इस यंत्र के सामने जब साधक मंत्र जप करता है तो कैसा ही कीलन प्रयोग हुआ हो वह स्वतः ही समाप्त हो जाता है।

 

अपने सामने एक बाजोट पर लाल कपड़ा बिछा दें तथा उस लाल कपड़े पर कुंकुम से रंगे चावल और अष्टगन्ध फैला दें, उस पर एक पंक्ति में तिल तथा सरसों बराबर मात्रा में मिलाकर उनकी 11 ढेरियां बनाएं तथा प्रत्येक ढेरी पर एक-एक ‘तांत्रोक्त फल’ रख दें, अब इनके सामने ही ‘तांत्रोक्त उत्कीलन यंत्र’ को दूध से धोकर एक ताम्र पात्र में स्थापित कर दें। यंत्र और तांत्रोक्त फल का पंचोपचार पूजन करें। सर्वप्रथम विनियोग करें –

 

विनियोग –

 

ॐ अस्य श्री सर्वयंत्रमंत्राणां उत्कीलनमंत्र स्तोत्रस्य मूल प्रकृतिर्ॠषिर्जगतीच्छन्दः, निरंजनी देवता क्लीं बीजं ह्रीं शक्तिः, ह्रः लौं कीलकं सप्तकोटिमन्त्रयन्त्रतन्त्रकीलकानां संजीवन सिद्धर्थे जपे विनियोगः।

 

विनियोग के पश्‍चात् त्रिपुर भैरवी का ध्यान निम्न मंत्र का जप करते हुए करें –

 

उद्यद्भानु सहस्र कांति मरुणा क्षौमां शिरोमालिकाम् रक्तालिप्त पयोधरां जपपटीं विद्यामभीतिं वरम् हस्ताब्जैर्दधतीं त्रिनेत्र विलसद् वक्त्रार विन्द श्रियम् देवी बद्ध हिमांशु रत्न मुकुटां वन्दे – रमन्दस्तिाम्।

 

भगवती त्रिपुर भैरवी की देह कान्ति उदीयमान सहस्र सूर्यों की कांति के समान है। वे रक्त वर्ण के रेशमी वस्त्र धारण किए हुए हैं। उनके गले में मुण्ड माला तथा दोनों स्तन रक्त से लिप्त हैं। वे अपने हाथों में जप-माला, पुस्तक, अभय मुद्रा तथा वर मुद्रा धारण किए हुए हैं। उनके ललाट पर चन्द्रमा की कला शोभायमान है। रक्त कमल जैसी शोभा वाले उनके तीन नेत्र हैं। आपके मस्तक पर रत्न जटित मुकुट है तथा मुख पर मन्द मुस्कान है। आपको मेरा प्रणाम स्वीकार हो।

 

अपने दाहिने हाथ से तांत्रोक्त उत्कीलन यंत्र को स्पर्श करते हुए निम्न मंत्रों का उच्चारण करें –

 

ॐ मण्डूकाय नमः। ॐ कालाग्निरुद्राय नमः। ॐ मूलप्रकृत्यै नमः। ॐ आधारशक्त्यै नमः। ॐ कूर्माय नमः। ॐ अनन्ताय नमः। ॐ वाराहाय नमः। ॐ पृथिव्यै नमः। ॐ सुधाम्बुधये नमः। ॐ सर्वसागराय नमः। ॐ मणिद्विषाय नमः। ॐ चिन्तामणि गृहाय नमः। ॐ श्मशानाय नमः। ॐ पारिजाताय नमः। ॐ रत्न वेदिकायै नमः। ॐ मणिपीठाय नमः। ॐ नानामुनिभ्यो नमः। ॐ शिवेभ्यो नमः। ॐ शिवमुण्डेभ्यो नमः। ॐ बहुमांसास्थिमोदमान शिवोभ्यो नमः। ॐ धर्माय नमः। ॐ ज्ञानाय नमः। ॐ वैराज्ञाय नमः। ॐ ऐश्‍वर्याय नमः। ॐ अधर्माय नमः। ॐ अज्ञानाय नमः। ॐ अवराज्ञानाय नमः। ॐ अनैश्‍वर्याय नमः। ॐ आनन्दकन्दाय नमः। ॐ सर्वतत्वात्मपद्माय नमः। ॐ प्रकृतिमयपत्रेभ्यो नमः। ॐ विकारमयकेसरेभ्यो नमः। ॐ पंचाशद्वर्णढ़यकर्णिकायै नमः। ॐ अर्कमण्डलाय नमः। ॐ सोममण्डलाय नमः। ॐ महीमण्डलाय नमः। ॐ सत्वाय नमः। ॐ रजसे नमः। ॐ तमसे नमः। ॐ आत्मने नमः। ॐ अन्तरात्मने नमः। ॐ परमात्मने नमः। ॐ ज्ञानात्मने नमः। ॐ क्रियायै नमः। ॐ आनन्दायै नमः। ॐ ऐं पारयै नमः। ॐ परापरायै नमः। ॐ निस्धानाय नमः। ॐ महारुद्र भैरवाय नमः॥

 

मंत्र उच्चारण के पश्‍चात् मानसिक रूप से भगवान सदाशिव का ध्यान करें तथा भगवान सदाशिव से तंत्र बाधाओं से मुक्त कराने का निवेदन करें।

 

भगवान शिव के ध्यान के पश्‍चात् साधक ‘त्रिपुर भैरवी माला’ से निम्न भैरवी उत्कीलन मंत्र की एक माला जप करें।
मंत्र
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं षट् पंचाक्षराणाम उत्कीलय उत्कीलय स्वाहा। ॐ जूं सर्वमन्त्र यन्त्र तन्त्राणां संजीवनं कुरु कुुरु स्वाहा॥
भैरवी उत्कीलन मंत्र पश्‍चात् साधक निम्न त्रिपुर भैरवी मंत्र की 3 माला मंत्र जप करें –

 

मंत्र
॥ह्सैं ह्सकरीं ह्सैं॥
मंत्र जप की पूर्णता पर शक्ति स्वरूपा त्रिपुरा से तंत्र बाधाओं की समाप्ति की प्रार्थना करें तथा समस्त साधना सामग्री को लाल कपड़े में बांधकर होली की अग्नि में विसर्जित कर दें।

 

अन्य किसी मुहूर्त पर साधना प्रारम्भ करने पर सात दिन तक नित्य साधना सम्पन्न करने के पश्‍चात् आठवें दिन समस्त साधना सामग्री को किसी निर्जन स्थान पर जमीन में गाड़ दें। यह विशेष तांत्रोक्त प्रयोग प्राण प्रतिष्ठित साधना सामग्री पर ही सम्पन्न किया जा सकता है।

 

साधना सामग्री – 490/-

Tantra Science

Special Tantra Sadhana for Holi Night

 

Has anyone blocked up your Powers?

Do you feel weak at all times?

Is your progress blocked by impediments?

 

Perform this

 

Tantra Utkeelan Tripura Sadhana

 

Destroy Blackmagic done by others …

Remove the impediments to progress ahead in life …

 

A deep analysis of human life indicates that every person is forever apprehensive  of fears and obstacles at every second of his life. Detailed investigation reveals a complex tie-up of all his powers-energies into a bind up knot.  The possible reasons for this knot-blockage of powers might be either  a malicious action by some selfish people or a possible mistake by the person himself. This creates an environment of fear within the life. This fear has to be destroyed to attain the joy of life.

Every person takes many steps to eradicate the fears and  obstacles in his life. A thorn can be pulled out using another thorn only. Similarly only superior Tantra practices can remove the obstacles-problems of life.

It is important to analyze our own life to determine if anything unusual is occurring in life. The normal problems can be resolved through general procedures. However, a solution to abnormal-unusual problems is possible only through special Tantra practices and one needs to perform elevated High-level Tantrik Sadhanas. The best way to accomplish it, as per Gurudev’s guidance, is “Tantra Utkeelan Tripur Sadhana“.

Tripura Bheiravi is highly significant and intense power-Shakti among the ten Mahavidhyas. She bestows blessings for success in all spheres of life and eradicates all kinds of obstacles. The Sadhak can enhance his powers and capacity through Her Tantra powers.

Bhagwati Tripura Bheiravi is the power of MahaBheirav, and is thousand times more intense and powerful, being the core root power. The general accomplishments of Bheirav Sadhana – resolution of critical situations like overcoming enmity, victory in litigation, prevention of sudden accident, riddance from diseases etc., can be easily obtained through this Sadhana.

Any kind of malicious Tantric blackmagic impediment like Captivation-Hypnotism, Blackmagic, blockage of business or home, can be easily neutralized by performing Tantra Utkeelan Tripur Sadhana.

 

Superior Sadhana Practice

When a malicious  blackmagic is done against a person or family, then that family has to suffer terrible adversities. Their progress gets blocked through Tantric obstructions. Accomplishment of Tantra Sadhanas during such situations eradicates these terrible conditions and enhances potential capabilities.

Many people do not achieve desired success in Sadhanas, Mantra-chanting  or Anusthaans.  They, then start blaming the Mantra-Anusthaan for their failure, and seek Gurudev – I have not been able to achieve success even by meeting you multiple times, or by completing Anusthaan with proper procedure. Are the scriptures wrong?  Has anyone tried to analyze the causes of the failure themselves –  It could be due to their own flaws, could be due to shortcomings in their own capabilities or procedures, or due to their own sins. Every Sadhak should carefully analyze if someone has maliciously blocked progress in his life through blackmagic-Tantra.

 

What is blockage of progress?

The literal meaning of the word Blockage is a bind-tie up. An animal fastened to a peg can only rotate around the peg, but cannot move out of the limited circle. The size of the fastened ropeline might be large or small, but a bind-up it sure is. He cannot freely fly around like a bird. Similarly the blockage of anyone’s powers due to his own Karma-actions, his flaws, or Tantrik blackmagic will not eradicate by itself. These impediments will not let him succeed inspite of any degree of efforts. His peers will progress ahead, while he will continue to struggle tied to the peg.

 

What is Utkeelan?

Is there any remedy for this blockage? Is it impossible to remove these blockages and impediments. Is it possible for a Sadhak to enhance his own inner powers enough, to eradicate these blockages.

A similar query was posed by Mother Parvati to Lord Shiva, the composer of Tantra – “O Lord! You are highly gracious to your devotees. You are the form of Aagam-Nigam Beej Mantras. You liberate your devotees. Then why did you disable the Mantras? Why the worldly humans are unable to successfully accomplish the Mantra Sadhanas?

Lord Mahadev, God of the Gods, explained that with the passage of time, and changes of eras, the devotion will decrease in people. On the other hand,  negative attributes like  anger, hatred, jealousy, antagonism and  hostility will increase. Instead of seeking pleasure in other’s company, people will get jealous, and this envy will force them to misuse their powers in bad deeds. Successes within Mantra-Tantra accomplishments by these people will destruct this world.

 

Utkeelan Mahavidya

Such situations are occurring in our lives. Our lives get blocked due to our own mistakes or malefic actions by selfish people. This does not enable us to achieve proper results of our efforts. The special “Tantra Utkeelan Tripura Sadhana” is being published in these pages on command of Pujya Gurudev, to eradicate all kinds of impediments-blockages. This will help to achieve success by eliminating the blockage-impediments, enable removal of  the blackmagic done on others, and will grant capability to use  Tantra knowledge for own protection.

 

Sadhana Procedure

This Sadhana practice should be especially performed on the Holi night after 10 pm. The Sadhana materials – “Taantrokt Utkeelan Yantra“, “11 Tantrokt Phal” and “Bheiravi Mala” are required for this Sadhana.

Mantra Siddha Praan Pratisthaayukt “Taantrokt Utkeelan Yantra” has been  consecrated-sanctified with special Rudra Shiva and Tripura Mantras. Chanting of Mantras in front of this Yantra automatically eradicates all kinds of blackmagic blockages.

Spread Red cloth on a wooden board in front, and sprinkle Kumkum dyed Red colored rice and Ashtgandha on it. Mix Sesame-seeds and Mustard-seeds in equal proportion and make 11 mounds of this mixture in a single straight line. Place one “Taantrokt Phal” on each of these mounds. Setup “Taantrokt Utkeelan Yantra” in a copper plate in front of this line, after washing it with milk.

Perform Panchopchaar poojan of Yantra and Taantrokt Phal. First perform Viniyoga –

 

Viniyoga –

Om Asya Shree Sarvayantramantraanaam Utkeelanmantra Strotrasya Moola PrakritirrishirjagatichchandaH, Niranjanee Devataa Kleem Beejam Hreem ShaktiH , HraH Loum Keelakam Saptakotimantrayantratantrakeelkaanaan Sanjeevan Siddhayarthe Jape ViniyogaH |

 

After Viniyoga, meditate on Tripur Bheiravi chanting the following Mantra –

 

Uddadbhaanu Sahastra Kaanti Maroonaa Kshomaan Shiromaalikaam Raktaalipta Payodharaam Japapateem Vidhyaamabheetim Varam Hastaabjeirdadhateem Trinetra Vilasad Vaktraara Vinda Shriyam  Devee Baddha Himaanshum Ratna Mukutaam Vande – Ramandasitaam |

 

The aura intensity from the physical form of Mother Bhagwati Tripura Bheiravi has the brilliance of thousand rising suns. She is  adorned with red colored silk garments.  A skull garland hangs in her neck and both breasts are covered with blood. She holds Japa-Mala, Book, Abhay-Blessing Mudra and Vara-Boon Mudra in Her hands. The Moon shines spectacularly on Her forehead. Her three eyes splendors like blood lotus. You wear a jeweled gem-studded crown on Your head  and a loving smile on your face. Please accept my devotion.

 

Touching the Taantrokt Utkeelan Yantra with your right hand, chant following Mantras –

Om Mandukaaya NamaH |

Om  Kaalaagnirudraaya NamaH |

Om  Moolaprikrityei NamaH |

Om  Aadhaarashaktyei NamaH |

Om  Koomaarya NamaH |

Om  Anantaaya NamaH |

Om  Vaaraahaaya NamaH |

Om  Prithivyei NamaH |

Om  Sudhaambudhayei NamaH |

Om  Sarvasaagaraaya NamaH |

Om  Manidwikshaaya NamaH |

Om  Chintaamani Grihaaya NamaH |

Om  Shamashaanaaya NamaH |

Om  Paarijaataaya NamaH |

Om  Ratna Vedikaayei NamaH |

Om  Manipeethaaya NamaH |

Om  Naanaamunibhyo NamaH |

Om  Shivebhyo NamaH |

Om  Shivmundebhyo NamaH |

Om  Bahumaansaasthimodamaana Shivobhyo NamaH |

Om  Dharmaaya NamaH |

Om  Gyaanaaya NamaH |

Om  Veiraagyaaya NamaH |

Om  Aishvaryaaya NamaH |

Om  Ardharmaaya NamaH |

Om  Agyaanaaya NamaH |

Om  Avaraagyaanaaya NamaH |

Om  Aneishvaryaaya NamaH |

Om  Aanandkandaaya NamaH |

Om  Sarvatatvaatmapadhmaaya NamaH |

Om  Prakritimayapatrebhyo NamaH |

Om  Vikaaramayakesarebhyo NamaH |

Om  Panchaashadvarnadhyakarnikaayei NamaH |

Om  Akkarmandalaaya NamaH |

Om  Somamandalaaya NamaH |

Om  Maheemandalaaya NamaH |

Om  Satvaaya NamaH |

Om  Rajase NamaH |

Om  Tamase NamaH |

Om  Aatmane NamaH |

Om  Antaraatmane NamaH |

Om  Paramaatmane NamaH |

Om  Gyaanaatmane NamaH |

Om  Kriyaayei NamaH |

Om  Aanandaayei NamaH |

Om  Ayeim Paarayei NamaH |

Om  Paraaparaayei NamaH |

Om  Nishdhaanaaya NamaH |

Om  Mahaarudra Bheiravaaya NamaH |

 

After Mantra-chanting, meditate on holy form of Lord Shiva and request Lord SadasShiva for liberation from the Tantric blockages and obstacles.

After meditation of Lord Shiva,  chant one mala of the following Bheiravi Utkeelan Mantra using “Tripur Bheiravi Mala” –

 

Mantra

Om Hreem Hreem Hreem Kshat Panchaaksharaanaam Utkeelaya Utkeelaya Swahaa | Om Joom Sarvamantra Yantra Tantraanaam Sanjeevanam Kuru Kuru Swahaa ||

 

After Bheiravi Utkeelan Mantra, the Sadhak should chant 3 mala of the following Tripur Bheiravi Mantra-

 

Mantra

|| Hseim Hsakareem Hseim ||

After completion of the Mantra chanting, the Sadhak should pray to Shakti Swaroopa Tripura to terminate all kinds of  Tantra blockages and obstacles. Wrap the entire Sadhana materials into a red cloth and drop into the Holi fire.

If performing this Sadhana on any other Muhurath, then the Sadhak should continue this Sadhana for seven days. Dig a hole in some lonely uninhabited place and bury the Sadhana materials in that hole. This special Taantrokt practice can only be performed on Praana Pratishthita consecrated-sanctified Sadhana materials.

Sadhana Materials  – 490/-

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