Shukra Sadhana

शुक्र ग्रह का विवेचन

नवग्रह सभी मनुष्यों के जीवन को प्रभावित करते हैं। जीवन में जो भी सुख के क्षण या दुःख के बादल घिरते हैं, वे नवग्रह से प्रभावित होते हैं। जब सूर्य का सकारात्मक प्रभाव होता है तब आप सम्मान प्राप्त करते हैं, मंगल शौर्य देता है, चन्द्रमा मानसिक शान्ति देता है। बुध की उत्तम दशा में कार्य कुशलता आती है। गुरु के उत्तम प्रभाव से ज्ञान आता हैं। शनि शुभ होते हैं तो कार्य शीघ्रता से सम्पन्न होते हैं, पर शुक्र की शुभता प्राप्त हो जाए तो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष सभी कुछ मिल जाता है। ऐसी है, शुक्र की माया जिससे साधक और जन-साधारण सब प्रभावित होते है।

 

चलिए विश्‍लेषण करते हैं शुक्र के प्रभाव का, इस आलेख में। बहुत संभव है शुक्र साधना द्वारा जीवन को शुभता की ओर मोड़ कर सभी अर्थों में समृद्ध करने का।

 

शुक्र साधना

 

जीवन से क्या अपेक्षाएं रखते हैं आप? साधारणतः प्रत्येक मनुष्य चाहता है कि उसके रूप और वाणी में ओज हो, व्यक्तित्व में आकर्षण हो और लोग उससे बात करने के लिए, उसके सान्निध्य के लिए लालायित रहें। सीधे-सादे शब्दों में उसके व्यक्तित्व में चुम्बकीय आकर्षण हो और जो उसे एक बार देखे या उससे बात कर ले, उसके लिए उसे भूलना कठिन रहे। ऐसा व्यक्तित्व शुक्र की शुभ दशा में ही संभव है।

 

वृहद पाराशर शास्त्र में लिखा है कि
सुखीकान्त व पुः श्रेष्ठ सुलोचना भृगु सुतः
कान्यकर्ता कफाधिक्या निलात्मा वक्रमूर्धजः
शुक्र की कृपा से साधक सुन्दर मुख, कान्ति युक्त शरीर, बड़े-बड़े नेत्र तथा सभी प्रकार के रोग-शोक से मुक्त और सौन्दर्य प्रधान मन का व्यक्तित्व प्राप्त करता है।

 

धर्म और अर्थ की प्राप्ति

 

इतना तो साधक जानते हैं कि जीवन में आर्थिक समृद्धि के लिए शुक्र की कृपा अनिवार्य है। अगर शुक्र शुभ हैं तो स्वतः वैभव-विलास के साधन एकत्र हो जाएंगे। वैसे भी शुक्र ग्रह की स्वामिनी महालक्ष्मी हैं, इसलिए शुक्र को समर्पित दिन शुक्रवार को महालक्ष्मी व्रत रखने की परिपाटी है। अर्थ और धर्म जुड़े हुए हैं क्योंकि धर्म बिना धन आता नहीं है और आप जीवन में बेरोक-टोक सफलता की सीढ़ियां चढ़ना चाहते हैं तो शुक्र साधना अवश्य कीजिए।

 

काम का आकर्षण

 

विवाह संस्कार की सफलता शुक्र की कल्याणकारी दशा में ही संभव हैं। शुक्र का शाब्दिक अर्थ वीर्य या पौरुष है और अक्षुण्ण यौवन और दुर्दान्त पौरुष दोनों के लिए शुक्र ही आधार हैं। श्रीकृष्ण आजीवन सोलह कलाओं से युक्त रहे और ऊर्जावान रहे।

 

उनके जीवन में बाल लीलाओं से लेकर महाभारत कालीन उनके व्यवहार में, अर्जुन को गीता का ज्ञान देने और उसके बाद के उनके पूरे जीवन में जरा भी कहीं ठहराव नहीं दिखता है, वे हमेशा दूसरों को नित्य नवीन ऊर्जा प्रदान करते रहे। शुक्र की ऊर्जा से युक्त व्यक्ति का ऐसा व्यक्तित्व सदा ही बना रहता है शुक्र की ऊर्जा से ही परिपूर्ण श्रीकृष्ण ने कामदेव के अवतार स्वरूप अपने पुत्र प्रद्युम्न को जन्म दिया अर्थात् श्रेष्ठ पुत्र प्राप्त किया।

 

मनोनुकूल लड़के या लड़की से विवाह के लिए शुक्र साधना अधिक अनुकूल होती है। विवाह में बाधा आ रही हो अथवा विवाह की बात-चीत बार-बार असफल हो रही हो और शादी नहीं हो पा रही हो, तो शुक्र साधना करने से ऐसी बाधा दूर हो जाती है।

 

मोक्ष की प्राप्ति

 

मोक्ष का अर्थ मुक्ति होता है, पर मुक्ति का अर्थ कामनाओं से मुक्ति होता है। मुक्ति का अर्थ कामनाओं की तृप्ति है और साधकों के लिए साधना मार्ग पर पूर्णता है। अगर आपकी साधना सिद्धि संशंकित है तो शुक्र साधना उसे सफल करने में मदद कर सकती है। कामनाओं की प्राप्ति के लिए शुक्र साधना अचूक है।

 

शुक्र ग्रह और हीरा

 

नौ ग्रहों में सूर्य को राजा, चन्द्रमा को राजमाता और शुक्र को रानी कहा गया है। चन्द्रमा और शुक्र दोनों ही स्त्री ग्रह हैं, पर चन्द्रमा का प्रेम स्नेहिल है- मां की तरह। वहीं शुक्र मन मोहता है, उसमें आकर्षण है, आसक्ति है और वासना है।

 

शुक्र का रत्न हीरा है। ज्योतिष के अनुसार हीरे के शुभ फल से मनुष्य को सुख, समृद्धि  और ऐश्‍वर्य प्राप्त होता है।

 

हीरे का आम जीवन और ज्योतिष में महत्त्व –

 

1.  नवरत्नों में हीरा सबसे कीमती और कठोर है।
2.  हीरा पहनने से जीवन में निरन्तर सुख, सौन्दर्य और सम्पन्नता बढ़ती है।
3.  हीरा वैवाहिक जीवन और खून के रिश्तों पर सीधा असर करता है।
4.  मधुमेह या रक्त से जुड़ी समस्या हो तो हीरा नहीं पहिनें।
5.  हीरे के साथ मूंगा या गोमेद नहीं पहिनें, ऐसा करने से चरित्र खराब होता है।
6.  हीरा जितना अधिक सफेद होगा, उतना अच्छा होगा।
7.  ग्लैमर, फिल्म या मीड़िया क्षेत्र के लोगों के लिए हीरा लाभकारी होता है।
8.  दागदार हीरा अपयश का कारण हो सकता है।
9.  प्रेम और दाम्पत्य के सन्दर्भ में भी हीरा लाभदायक है। इसीलिए शादी की अंगूठी में हीरा प्रयुक्त होता है।
10.  अनामिका ऊंगली (ठळपस ऋळपसशी) में हीरा पहिनना चाहिए, इसको धारण करने से अर्थ (धन), वैवाहिक जीवन और प्रेम सम्बन्धों में स्थिरता प्राप्त होती है।

 

जीवन का सौन्दर्य – शुक्र साधना

 

शुक्र को सुन्दरता का प्रतीक और सुख का कारक माना जाता है। शुक्र की चमक एवं शान अन्य ग्रहों से अलग व निराली है। इसी सुन्दरता के लिए शुक्र जाना जाता है। शुक्र की साधना से शुक्र को बलवान बनाकर सौन्दर्य व ऐश्‍वर्य प्राप्त किया जा सकता है। आज हर व्यक्ति अपने जीवन को आरामदायक एवं ऐश्‍वर्यशाली बनाने के लिए अपनी हैसियत से ज्यादा आरामदायक वस्तुओं पर खर्च करता है। यदि आप भी जिन्दगी को आकर्षक, ऐश्‍वर्यपूर्ण और आराम से भरपूर बनाना चाहते हैं तो शुक्र को बलवान बनाने हेतु पुरुषोत्तम मास (16 मई 2018 से 13 जून 2018) में अवश्य ही शुक्र साधना सम्पन्न करें।

 

बिना शुक्र की अनुकूलता के किसी भी व्यक्ति के जीवन की सार्थकता संभव नहीं है इन्हीं बातों को रेखांकित करते हुए पूज्यपाद सद्गुरुदेव ने गहन अध्ययन कर, संन्यास जीवन में हिमालय की कन्दराओं में अपने गुरु के चरणों में बैठकर विशिष्ट साधनाओं का अवलोकन कर, तत्कालीन ॠषियों से सम्बन्ध स्थापित कर, प्रामाणिक रूप से ग्रहों का वास्तविक ज्ञान प्राप्त किया तथा उसे समाज के लिए उपलब्ध कराया।

 

शुक्र ग्रह साधना का विशेष मुहूर्त

 

पुरुषोत्तम मास तो भगवान विष्ण्ाु और उनकी अर्धांगिनी भगवती लक्ष्मी का मास है, विष्णु और लक्ष्मी की कृपा एवं शुक्र सिद्धि दोनों की पूर्णता जीवन को पूर्णत्व प्रदान करने का सबसे श्रेष्ठ मार्ग है। आप सभी निखिल शिष्य-साधकों के जीवन में पूर्णता हेतु आपकी इस पत्रिका के इसी अंक में शुक्र साधना का समावेश किया गया है। शुक्र साधना वैसे तो किसी भी शुक्रवार को सम्पन्न की जा सकती है। परन्तु आने वाले समय में विशिष्ट दिवस –

 

18 मई 2018 (अधिक मास शुक्रवार),
25 मई 2018 पुरुषोत्तमा कमला एकादशी,
29 मई 2018 अधिक मास पूर्णिमा,
1 जून 2018 (अधिक मास शुक्रवार),
8 जून 2018 (अधिक मास शुक्रवार)
10 जून 2018 (रविवार) को पुरुषोत्तमा एकादशी है।

 

इन शुभ अवसरों पर शुक्र साधना को अवश्य ही सम्पन्न करें। लक्ष्मीवान, ऐश्‍वर्यवान व्यक्ति के व्यक्तित्व की आभा ही अलग होती है। ऐसी आभा केवल और केवल शुक्र साधना से ही संभव है।

 

साधना सामग्री – साधक को इस साधना में स्वयं तीसा यंत्र की प्राणप्रतिष्ठा क्रिया करनी पड़ती है। साथ ही तीन सामग्री आवश्यक है – ‘मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त शुक्र यंत्र’, ‘शुक्र आकर्षण मुद्रिका’ और ‘श्‍वेत हकीक माला’। इसमें शुक्र आकर्षण मुद्रिका परम प्रभावशाली होती है।

 

शुक्र साधना विधान

 

साधक पूर्व दिशा की ओर मुख कर सफेद रंग के आसन पर बैठे। अपने सामने एक बाजोट पर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर  गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका स्थापित कर लें और दोनों हाथ जोड़कर गुरुदेव निखिल का ध्यान करें –

 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
निखिल ध्यान के पश्‍चात् गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को जल से स्नान करावें –

 

ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥

 

इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पंचोपचार पूजन करें –

 

ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।                               (धूप, दीप दिखाएं)

 

अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें। इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –

 

ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः

 

गुरु पूजन के पश्‍चात् शुक्र की मूल साधना-पूजन निम्न प्रकार सम्पन्न करें –

 

बाजोट के आगे ही एक सफेद कागज पर सफेद चन्दन से निम्न प्रकार के तीसा यंत्र का अंकन कर लें। अंकित यंत्र का कुंकुम, अक्षत, पुष्प आदि से संक्षिप्त पूजन कर लें।

 

शुक्र साधना में नारियल के तेल अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। बाजोट पर एक बड़ा नारियल या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित कर दें जो मंत्र जप तक प्रज्जवलित रहे। तेल में चन्दन भी मिला देना चाहिये।

 

दीपक प्रज्वलित करने के पश्‍चात् बाजोट पर एक बड़ी थाली में अक्षत से एक निम्न प्रकार का तारा चक्र (ल) बनाएं। अक्षत के उस आसन पर निम्न मंत्र बोलते हुए मंत्र सिद्ध प्राणप्रतिष्ठित ‘शुक्र यंत्र’ को स्थापित करें –

 

शुक्र स्थापन मंत्र

 

ह्रीं हिमकुन्द मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्र प्रवक्तारम् भार्गवं प्रजमाम्यहम्॥
ॐ भूभुर्वः स्वः शुक्रः इहागच्छ इहतिष्ठः।
शुक्राय नमः।
इसके बाद ‘शुक्र आकर्षण मुद्रिका’ को दाहिने हाथ की मुट्ठी में बंद कर शुक्र का ध्यान करें –

 

ॐ श्‍वेतः श्‍वेताम्बरधर किरीटि च चतुर्भुजः।
दैत्यगुरुः प्रशान्तश्‍च साक्षसूत्र कमण्डलुः॥
उपरोक्त प्रकार से ध्यान के बाद मुद्रिका को यंत्र के मध्य में रख दें। फिर कुंकुम से यंत्र पर निम्न मंत्र बोलते हुए सात बार तिलक करें –

 

ॐ भाग्यदाय नमः पाद्यं् समर्पयामि।
ॐ शुभदाय नमः आचमनीयं समर्पयामि।
ॐ दैत्यगुरवे नमः स्नानं समर्पयामि।
ॐ भोगकराय नमः गन्धं समर्पयामि।
ॐ श्‍वेताम्बराय नमः धूपं दीपं दर्शयामि।
ॐ सर्वैश्‍वर प्रदाय नमः नैवेद्यं निवेदयामि।
ॐ शुक्राय नमः आचमनीयं समर्पयामि।
इसके बाद ‘सफेद हकीक माला’ से निम्न मंत्र का 7 माला जप करें –

 

शुक्र साधना मंत्र
॥ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥
नित्य मंत्र जप के बाद यंत्र के समक्ष हाथ जोड़कर शुक्र स्तोत्र का पाठ करें। इस साधना को तीन बार अवश्य सम्पन्न करना है। साधना समाप्ति पर सफेद वस्त्र एवं चावल किसी को दान में देना लाभप्रद होता है।

 

 प्राण प्रतिष्ठा न्यौछावर – 600/-

Purushottam Month

Special Sadhana Details

 

Description of Planet Shukra (Venus)

 

The Navagrahas (Nine Planets) affect the lives of all human beings. The Navagrahas impact all moments of happiness or dark clouds of sorrow within the life. The positive effect of Planet Sun bestows respect, that of Mars Planet bestows courage and of Moon  Planet provides mental peace. The auspiciousness of Mercury Planet provides enhanced productivity and work efficiency. Knowledge comes from positive effect of Planet Jupiter. The auspiciousness of Planet Saturn results in quick turnaround of all tasks. However, the positive effect of Planet Venus provides Dharma (Virtue-Morality), Artha (Wealth), Kaama (Desires-Pleasures) and Moksha (Salvation).  Such impact of Planet Venus affects Sadhaks and all other people.

Let’s analyze the impact of Planet Venus in this article. It is greatly possible to  enrich life in all fields by utilizing the  auspiciousness of Planet Venus through Sadhanas.

 

Planet Venus Sadhana

 

What do you expect from life? Generally, every person wishes for a fascinating body and voice, an enticing personality, and a magnetizing feeling of attracting others towards him or her. Generally speaking, the core desire is to have a magnetic attraction in  personality, and to evoke strong recollection by anyone interfacing with him or her.  Such a captivating personality is possible only in the auspicious phase of Planet Venus.

 

The Vrihad  Parashar scripture text states that-

Sukheekaant Va PuH Shreshtha Sulochanaa Bhrigu SutaH

Kaanyakartaa Kafaadhikyaa Nilaatmaa VakramoordhajaH

 

The Sadhak obtains a beautiful face, an attractive intense body, large eyes, riddance from ailments and a beauty driven mind through divine grace of Planet Venus.

 

Obtaining Morality-Wealth (Dharma-Artha)

All Sadhaks know that divine grace of Planet Venus is mandatory for material prosperity in life. The positivity of Planet Venus will automatically bestow all splendor and luxury resources. Goddess MahaLakshmi drives Planet Venus, and , therefore there is a usual practice to keep fast for Goddess MahaLakshmi on Friday, the day of Planet Venus. Both morality and Wealth are entwined with each other as wealth doesn’t appear in absence of morality. You should definitely perform Sadhana of Planet Venus for uninterrupted growth of success in life.

 

Attraction of Kaama (Pleasures)

A successful marriage is possible only in the auspicious state of Planet Venus. The literal meaning of the Hindi word Shukra for Planet Venus is semen or virginity. The core essence of Venus is unabated youth and strong virility. Lord Shree Krishna accomplished sixteen Kalas and stayed extremely energetic throughout His life.

Not a single instance of stagnation is visible in his life, right from his early childhood to His accomplishments during Mahabharata, teaching Gita to Arjuna or even during the later years of His life. He continued to radiate and diffuse extreme energy to others. Such a personality is possible only in a person blessed with positive energy from Planet Venus.  This positive energy of Planet Venus enabled Him to give birth to His son Pradyumna, an incarnation of God Kaamdev Himself. Thus the positive energy of Planet Venus enabled Him to beget an excellent progeny.

Venus is more appropriate for marriage with a suitable boy or girl. One can perform Sadhana of Planet Venus if the talks of marriage are constantly breaking down, or if the marriage proposals are constantly getting interrupted.

 

Attainment of  Salvation

Salvation literally means liberation, but in this specific case, it refers to liberation from wishes and desires. The fulfillment of wishes leads to Salvation and accomplishment of Sadhana provides perfection to Sadhaks. The Sadhana of Planet Venus can help you if you are doubtful about attaining success in Sadhana. Venus Sadhana is perfect for fulfillment of all wishes and desires.

 

Venus Planet and Diamond

Among the  nine planets, Planet Sun is generally termed as the King, Planet Moon is considered as the Queen-Mother and Planet Venus is regarded as the Queen. Both Planet Moon and Planet Venus are considered as the female planets, however, the love bestowed by Planet Moon is generally maternal in nature. On the other hand, the love bestowed by Planet Venus is captivating, attractive, and is full of attachment and lust.

Diamond is the jewel of Planet Venus. Astrology states that positive benefits of diamond  bring happiness, prosperity and riches to the person.

 

Importance of diamond in  common life and astrology –

  1. Diamond is the most precious and hard stone among the Navratnas.
  2. Wearing diamond enhances the happiness, beauty and prosperity in life.
  3. Diamond directly impacts marital life and blood relationships.
  4. Do not wear diamond if you are suffering from diabetes or any blood related ailment.
  5. Do not wear coral or onyx along with diamond, as doing so damages the character.
  6. The more white the diamond is, the better it will be.
  7. Diamond is beneficial for people working in the glamor, film or media fields.
  8. Stained diamond may become  the cause of failure.
  9. Diamond is also beneficial in terms of love and marriage. Therefore, diamond is used in the wedding ring.
  10. The diamond should be worn in the ring finger.  It bestows wealth and stability in  marital life and love relationships.

 

Beauty of Life – Planet Venus Sadhana

Planet Venus is considered as a symbol of beauty and a strong factor for pleasure. The brightness and splendor of Planet Venus is uniquely different from that of other planets. Planet Venus is known for its beauty. Sadhana of Planet Venus strengthens the Planet Venus, thereby bestowing beauty and luxury. Today everyone spends extravagantly to purchase comfortable  items to enhance his comfort and opulence. You should definitely perform  Planet Venus Sadhana during Purushottam Month (May 16, 2018 to June 13, 2018) to strengthen Planet Venus with an aim to make your life more mesmerizing, luxurious and comfortable.

It is just not possible to understand the meaning of a person’s life in absence of a favorable Planet Venus. Pujya Gurudev devoted himself to intensive study in His ascetic life, comprehended the vital intricacies of special Sadhanas in deep Himalayan caves whilest sitting in the holy feet of His Guru, set up connections with contemporary sages to collect authentic knowledge about the planets Navagrahas, and finally made this divine knowledge available to the vast masses.

 

Special auspicious moment for Planet Venus Sadhana

Purushottam Month is the month of Lord Vishnu and His divine consort Goddess Bhagwati Lakshmi. The confluence of divine blessings from Lord Vishnu and Goddess Lakshmi, and accomplishment of Planet Venus Sadhana, is the best method to achieve perfection in life. The Planet Venus Sadhana has been detailed in this very issue of your own magazine to enable complete perfection in lives of all you Nikhil disciples. Planet Venus Sadhana can generally be accomplished on any Friday. However, some of the forthcoming special moments are –

May 18, 2018 (Adhik Month Friday),

May 25, 2018 Purushottam Kamala Ekadashi

May 29, 2018 Adhik Month Poornima (Full Moon)

June 1, 2018 (Adhik Month Friday),

June 8, 2018 (Adhik Month Friday)

On June 10, 2018 (Sunday), there is Purushottam Ekadashi.

 

You should definitely accomplish Planet Venus Sadhana on these auspicious occasions. The aura of a wealthy opulent person is highly distinguished. Such a divine aura is possible only through Planet Venus Sadhana.

 

Sadhana Materials – The Sadhaks have to consecrate-sanctify the Teesa Yantra himself in this Sadhana. Additionally 3 more Sadhana articles are required – “Mantra Siddha Praana Pratishtha Yukt Shukra Yantra“, “Shukra Aakarshan Mudrika” and “White Hakeek Mala“. The Shukra Aakarshan Mudrika is extremely beneficial.

 

Planet Venus Sadhana Procedure

The Sadhak should sit facing East direction on a white colored asana. Spread a white cloth on a wooden board in front of you. Setup  Guru Picture/ Statue/Yantra/Paduka on it and meditate on the divine form of  Gurudev Nikhil with folded hands –

GururBrahmaa GururVishnuH Gururdevo MaheshwaraH |

GuruH Saakshaat Par Brahmaa Tasmei Shree Guruve NamaH ||

 

Bathe the Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka with water after Nikhil meditation –

Om Nikhilam Snaanam Samarpayaami ||

 

Then wipe with a clean cloth. Perform Panchopchaar worship-poojan with Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken rice), Pushpa (Flowers), Neivedh (Sweets/Fruit offering), Dhoop (Incense) – Deep (Lamp); chanting following mantras –

Om Nikhilam Kumkum Samarpayaami |

Om Nikhilam Akshtaan Samarpayaami ||

Om Nikhilam Pushpam Samarpayaami ||

Om Nikhilam Neivedhyam Nivedayaami ||

Om Nikhilam Dhoopam Aardhyaapayaami, Deepam Darshayaami ||

(Show Dhoop, Deep)

 

Now rotate three Achmaani (spoonful) water around the  Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka and drop it on ground. Then chant 1 rosary-round of Guru Mantra with Guru Mala –

Om Param Tatvaaya Naaraayanaaya Gurubhayo Namah

 

After completing Guru worship, perform the main Planet Venus Sadhana-worship in the following way-

 

Inscribe Teesa Yantra on a white paper with white chandan (sandalwood) in front of the wooden board. Perform a quick worship of the inscribed Yantra through Kumkum, Akshat, Flowers etc.

A lamp of either coconut oil or sesame (til) oil should remain lighted-up throughout the Planet Venus Sadhana. Light a large coconut oil or sesame oil lamp on the wooden board, which can stay lighted up during the entire Mantra chanting period. Chandan (sandalwood) should be mixed with the oil

After lightening the lamp, make a Tara Chakra on a big plate with Akshat. Place the plate on the wooden board. Chanting the following Mantra, setup Mantra Siddha Praana Pratishthit “Shukra Yantra” on this seat of Akshat-

 

Planet Venus Establishment Mantra

Hreem Himakunda Mrinaalaabham Deityaanaam Paramam Gurum |

Sarvashaastra Pravktaaram Bhaargavam Prajamaamyaham ||

Om BhoobhoorvaH SwaH ShukraH Ihaagachcha IhatishthaH Shukraaya NamaH |

 

Thereafter clasping the “Shukra Aakarshan Mudrika” in the fist of right hand, meditate on divine Planet Venus –

 

Om ShwetaH Shwetaambaradhara Kireeti Cha ChaturbhujaH |

DeityaguruH Prashaantashcha Saakshasootra KamandaluH ||

 

Place the ring on the center of the Yantra after completion of the above meditation. Then make Seven marks on the Yantra with Kumkum chanting following Mantras-

 

Om Bhaagyadaaya NamaH Paadham Samarpayaami |

Om Shubhadaaya NamaH Aachamaneeyam Samarpayaami |

Om Deityaguruve NamaH Snaanam Samarpayaami |

Om Bhogakaraaya NamaH Gandham Samarpayaami |

Om Shwetaambaraaya NamaH Dhoopam Deepam Darshayaami |

Om Sarveishvara Pradaaya NamaH Neivedhyam Nivedayaami |

Om Shukraaya NamaH Aachamaneeyam Samarpayaami |

 

Thereafter, chant seven malas of the following mantra with “White Hakeek Mala” –

 

Planet Venus Sadhana Mantra

||  Om Draam Dreem Droum SaH Shukraaya NamaH ||

 

After completion of Mantra chanting, fold your hands towards Shukra Yantra and chant Shukra Stotra. You should definitely accomplish this Sadhana three times.  It is beneficial to donate white clothes and rice to someone after completion of the Sadhana.

 

Praana Pratishthaa Nayochaawara – 600 /-

 

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