Shukra Sadhana

शुक्र ग्रह का विवेचन

नवग्रह सभी मनुष्यों के जीवन को प्रभावित करते हैं। जीवन में जो भी सुख के क्षण या दुःख के बादल घिरते हैं, वे नवग्रह से प्रभावित होते हैं। जब सूर्य का सकारात्मक प्रभाव होता है तब आप सम्मान प्राप्त करते हैं, मंगल शौर्य देता है, चन्द्रमा मानसिक शान्ति देता है। बुध की उत्तम दशा में कार्य कुशलता आती है। गुरु के उत्तम प्रभाव से ज्ञान आता हैं। शनि शुभ होते हैं तो कार्य शीघ्रता से सम्पन्न होते हैं, पर शुक्र की शुभता प्राप्त हो जाए तो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष सभी कुछ मिल जाता है। ऐसी है, शुक्र की माया जिससे साधक और जन-साधारण सब प्रभावित होते है।

 

चलिए विश्‍लेषण करते हैं शुक्र के प्रभाव का, इस आलेख में। बहुत संभव है शुक्र साधना द्वारा जीवन को शुभता की ओर मोड़ कर सभी अर्थों में समृद्ध करने का।

 

शुक्र साधना

 

जीवन से क्या अपेक्षाएं रखते हैं आप? साधारणतः प्रत्येक मनुष्य चाहता है कि उसके रूप और वाणी में ओज हो, व्यक्तित्व में आकर्षण हो और लोग उससे बात करने के लिए, उसके सान्निध्य के लिए लालायित रहें। सीधे-सादे शब्दों में उसके व्यक्तित्व में चुम्बकीय आकर्षण हो और जो उसे एक बार देखे या उससे बात कर ले, उसके लिए उसे भूलना कठिन रहे। ऐसा व्यक्तित्व शुक्र की शुभ दशा में ही संभव है।

 

वृहद पाराशर शास्त्र में लिखा है कि
सुखीकान्त व पुः श्रेष्ठ सुलोचना भृगु सुतः
कान्यकर्ता कफाधिक्या निलात्मा वक्रमूर्धजः
शुक्र की कृपा से साधक सुन्दर मुख, कान्ति युक्त शरीर, बड़े-बड़े नेत्र तथा सभी प्रकार के रोग-शोक से मुक्त और सौन्दर्य प्रधान मन का व्यक्तित्व प्राप्त करता है।

 

धर्म और अर्थ की प्राप्ति

 

इतना तो साधक जानते हैं कि जीवन में आर्थिक समृद्धि के लिए शुक्र की कृपा अनिवार्य है। अगर शुक्र शुभ हैं तो स्वतः वैभव-विलास के साधन एकत्र हो जाएंगे। वैसे भी शुक्र ग्रह की स्वामिनी महालक्ष्मी हैं, इसलिए शुक्र को समर्पित दिन शुक्रवार को महालक्ष्मी व्रत रखने की परिपाटी है। अर्थ और धर्म जुड़े हुए हैं क्योंकि धर्म बिना धन आता नहीं है और आप जीवन में बेरोक-टोक सफलता की सीढ़ियां चढ़ना चाहते हैं तो शुक्र साधना अवश्य कीजिए।

 

काम का आकर्षण

 

विवाह संस्कार की सफलता शुक्र की कल्याणकारी दशा में ही संभव हैं। शुक्र का शाब्दिक अर्थ वीर्य या पौरुष है और अक्षुण्ण यौवन और दुर्दान्त पौरुष दोनों के लिए शुक्र ही आधार हैं। श्रीकृष्ण आजीवन सोलह कलाओं से युक्त रहे और ऊर्जावान रहे।

 

उनके जीवन में बाल लीलाओं से लेकर महाभारत कालीन उनके व्यवहार में, अर्जुन को गीता का ज्ञान देने और उसके बाद के उनके पूरे जीवन में जरा भी कहीं ठहराव नहीं दिखता है, वे हमेशा दूसरों को नित्य नवीन ऊर्जा प्रदान करते रहे। शुक्र की ऊर्जा से युक्त व्यक्ति का ऐसा व्यक्तित्व सदा ही बना रहता है शुक्र की ऊर्जा से ही परिपूर्ण श्रीकृष्ण ने कामदेव के अवतार स्वरूप अपने पुत्र प्रद्युम्न को जन्म दिया अर्थात् श्रेष्ठ पुत्र प्राप्त किया।

 

मनोनुकूल लड़के या लड़की से विवाह के लिए शुक्र साधना अधिक अनुकूल होती है। विवाह में बाधा आ रही हो अथवा विवाह की बात-चीत बार-बार असफल हो रही हो और शादी नहीं हो पा रही हो, तो शुक्र साधना करने से ऐसी बाधा दूर हो जाती है।

 

मोक्ष की प्राप्ति

 

मोक्ष का अर्थ मुक्ति होता है, पर मुक्ति का अर्थ कामनाओं से मुक्ति होता है। मुक्ति का अर्थ कामनाओं की तृप्ति है और साधकों के लिए साधना मार्ग पर पूर्णता है। अगर आपकी साधना सिद्धि संशंकित है तो शुक्र साधना उसे सफल करने में मदद कर सकती है। कामनाओं की प्राप्ति के लिए शुक्र साधना अचूक है।

 

शुक्र ग्रह और हीरा

 

नौ ग्रहों में सूर्य को राजा, चन्द्रमा को राजमाता और शुक्र को रानी कहा गया है। चन्द्रमा और शुक्र दोनों ही स्त्री ग्रह हैं, पर चन्द्रमा का प्रेम स्नेहिल है- मां की तरह। वहीं शुक्र मन मोहता है, उसमें आकर्षण है, आसक्ति है और वासना है।

 

शुक्र का रत्न हीरा है। ज्योतिष के अनुसार हीरे के शुभ फल से मनुष्य को सुख, समृद्धि  और ऐश्‍वर्य प्राप्त होता है।

 

हीरे का आम जीवन और ज्योतिष में महत्त्व –

 

1.  नवरत्नों में हीरा सबसे कीमती और कठोर है।
2.  हीरा पहनने से जीवन में निरन्तर सुख, सौन्दर्य और सम्पन्नता बढ़ती है।
3.  हीरा वैवाहिक जीवन और खून के रिश्तों पर सीधा असर करता है।
4.  मधुमेह या रक्त से जुड़ी समस्या हो तो हीरा नहीं पहिनें।
5.  हीरे के साथ मूंगा या गोमेद नहीं पहिनें, ऐसा करने से चरित्र खराब होता है।
6.  हीरा जितना अधिक सफेद होगा, उतना अच्छा होगा।
7.  ग्लैमर, फिल्म या मीड़िया क्षेत्र के लोगों के लिए हीरा लाभकारी होता है।
8.  दागदार हीरा अपयश का कारण हो सकता है।
9.  प्रेम और दाम्पत्य के सन्दर्भ में भी हीरा लाभदायक है। इसीलिए शादी की अंगूठी में हीरा प्रयुक्त होता है।
10.  अनामिका ऊंगली (ठळपस ऋळपसशी) में हीरा पहिनना चाहिए, इसको धारण करने से अर्थ (धन), वैवाहिक जीवन और प्रेम सम्बन्धों में स्थिरता प्राप्त होती है।

 

जीवन का सौन्दर्य – शुक्र साधना

 

शुक्र को सुन्दरता का प्रतीक और सुख का कारक माना जाता है। शुक्र की चमक एवं शान अन्य ग्रहों से अलग व निराली है। इसी सुन्दरता के लिए शुक्र जाना जाता है। शुक्र की साधना से शुक्र को बलवान बनाकर सौन्दर्य व ऐश्‍वर्य प्राप्त किया जा सकता है। आज हर व्यक्ति अपने जीवन को आरामदायक एवं ऐश्‍वर्यशाली बनाने के लिए अपनी हैसियत से ज्यादा आरामदायक वस्तुओं पर खर्च करता है। यदि आप भी जिन्दगी को आकर्षक, ऐश्‍वर्यपूर्ण और आराम से भरपूर बनाना चाहते हैं तो शुक्र को बलवान बनाने हेतु पुरुषोत्तम मास (16 मई 2018 से 13 जून 2018) में अवश्य ही शुक्र साधना सम्पन्न करें।

 

बिना शुक्र की अनुकूलता के किसी भी व्यक्ति के जीवन की सार्थकता संभव नहीं है इन्हीं बातों को रेखांकित करते हुए पूज्यपाद सद्गुरुदेव ने गहन अध्ययन कर, संन्यास जीवन में हिमालय की कन्दराओं में अपने गुरु के चरणों में बैठकर विशिष्ट साधनाओं का अवलोकन कर, तत्कालीन ॠषियों से सम्बन्ध स्थापित कर, प्रामाणिक रूप से ग्रहों का वास्तविक ज्ञान प्राप्त किया तथा उसे समाज के लिए उपलब्ध कराया।

 

शुक्र ग्रह साधना का विशेष मुहूर्त

 

पुरुषोत्तम मास तो भगवान विष्ण्ाु और उनकी अर्धांगिनी भगवती लक्ष्मी का मास है, विष्णु और लक्ष्मी की कृपा एवं शुक्र सिद्धि दोनों की पूर्णता जीवन को पूर्णत्व प्रदान करने का सबसे श्रेष्ठ मार्ग है। आप सभी निखिल शिष्य-साधकों के जीवन में पूर्णता हेतु आपकी इस पत्रिका के इसी अंक में शुक्र साधना का समावेश किया गया है। शुक्र साधना वैसे तो किसी भी शुक्रवार को सम्पन्न की जा सकती है। परन्तु आने वाले समय में विशिष्ट दिवस –

 

18 मई 2018 (अधिक मास शुक्रवार),
25 मई 2018 पुरुषोत्तमा कमला एकादशी,
29 मई 2018 अधिक मास पूर्णिमा,
1 जून 2018 (अधिक मास शुक्रवार),
8 जून 2018 (अधिक मास शुक्रवार)
10 जून 2018 (रविवार) को पुरुषोत्तमा एकादशी है।

 

इन शुभ अवसरों पर शुक्र साधना को अवश्य ही सम्पन्न करें। लक्ष्मीवान, ऐश्‍वर्यवान व्यक्ति के व्यक्तित्व की आभा ही अलग होती है। ऐसी आभा केवल और केवल शुक्र साधना से ही संभव है।

 

साधना सामग्री – साधक को इस साधना में स्वयं तीसा यंत्र की प्राणप्रतिष्ठा क्रिया करनी पड़ती है। साथ ही तीन सामग्री आवश्यक है – ‘मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त शुक्र यंत्र’, ‘शुक्र आकर्षण मुद्रिका’ और ‘श्‍वेत हकीक माला’। इसमें शुक्र आकर्षण मुद्रिका परम प्रभावशाली होती है।

 

शुक्र साधना विधान

 

साधक पूर्व दिशा की ओर मुख कर सफेद रंग के आसन पर बैठे। अपने सामने एक बाजोट पर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर  गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका स्थापित कर लें और दोनों हाथ जोड़कर गुरुदेव निखिल का ध्यान करें –

 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
निखिल ध्यान के पश्‍चात् गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को जल से स्नान करावें –

 

ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥

 

इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पंचोपचार पूजन करें –

 

ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।                               (धूप, दीप दिखाएं)

 

अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें। इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –

 

ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः

 

गुरु पूजन के पश्‍चात् शुक्र की मूल साधना-पूजन निम्न प्रकार सम्पन्न करें –

 

बाजोट के आगे ही एक सफेद कागज पर सफेद चन्दन से निम्न प्रकार के तीसा यंत्र का अंकन कर लें। अंकित यंत्र का कुंकुम, अक्षत, पुष्प आदि से संक्षिप्त पूजन कर लें।

 

शुक्र साधना में नारियल के तेल अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। बाजोट पर एक बड़ा नारियल या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित कर दें जो मंत्र जप तक प्रज्जवलित रहे। तेल में चन्दन भी मिला देना चाहिये।

 

दीपक प्रज्वलित करने के पश्‍चात् बाजोट पर एक बड़ी थाली में अक्षत से एक निम्न प्रकार का तारा चक्र (ल) बनाएं। अक्षत के उस आसन पर निम्न मंत्र बोलते हुए मंत्र सिद्ध प्राणप्रतिष्ठित ‘शुक्र यंत्र’ को स्थापित करें –

 

शुक्र स्थापन मंत्र

 

ह्रीं हिमकुन्द मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्र प्रवक्तारम् भार्गवं प्रजमाम्यहम्॥
ॐ भूभुर्वः स्वः शुक्रः इहागच्छ इहतिष्ठः।
शुक्राय नमः।
इसके बाद ‘शुक्र आकर्षण मुद्रिका’ को दाहिने हाथ की मुट्ठी में बंद कर शुक्र का ध्यान करें –

 

ॐ श्‍वेतः श्‍वेताम्बरधर किरीटि च चतुर्भुजः।
दैत्यगुरुः प्रशान्तश्‍च साक्षसूत्र कमण्डलुः॥
उपरोक्त प्रकार से ध्यान के बाद मुद्रिका को यंत्र के मध्य में रख दें। फिर कुंकुम से यंत्र पर निम्न मंत्र बोलते हुए सात बार तिलक करें –

 

ॐ भाग्यदाय नमः पाद्यं् समर्पयामि।
ॐ शुभदाय नमः आचमनीयं समर्पयामि।
ॐ दैत्यगुरवे नमः स्नानं समर्पयामि।
ॐ भोगकराय नमः गन्धं समर्पयामि।
ॐ श्‍वेताम्बराय नमः धूपं दीपं दर्शयामि।
ॐ सर्वैश्‍वर प्रदाय नमः नैवेद्यं निवेदयामि।
ॐ शुक्राय नमः आचमनीयं समर्पयामि।
इसके बाद ‘सफेद हकीक माला’ से निम्न मंत्र का 7 माला जप करें –

 

शुक्र साधना मंत्र
॥ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥
नित्य मंत्र जप के बाद यंत्र के समक्ष हाथ जोड़कर शुक्र स्तोत्र का पाठ करें। इस साधना को तीन बार अवश्य सम्पन्न करना है। साधना समाप्ति पर सफेद वस्त्र एवं चावल किसी को दान में देना लाभप्रद होता है।

 

 प्राण प्रतिष्ठा न्यौछावर – 600/-
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