Shani Mudrika

जीवन में आत्मविश्‍वास, इच्छाशक्ति तथा मितव्ययता प्राप्ति हेतु
जीवन में शुभ, तत्काल तथा निश्‍चित फल प्राप्ति हेतु
जीवन में व्यवस्थित, व्यावहारिक तथा परिश्रमी बनने हेतु

 

धारण करें
शनि मुद्रिका

 

शनि शक्तिशाली, पराक्रमी रहस्मय देव हैं और साधक को तत्काल फल प्रदान करते हैं

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में उतार-चढ़ाव, लाभ-हानि, सुख-दुःख की स्थिति चलती रहती है। मनुष्य जीवन का तात्पर्य ही नित नयी चुनौतियों का सामना करना है, बाधाओं पर विजय प्राप्त करने पर ही मनुष्य को आनन्द की प्राप्ति होती है। सभी जानते हैं कि मनुष्य जीवन में कुछ ऐसे दोष होते हैं। जिनके कारण उसके जीवन में नित-नयी समस्याएं पनपती ही रहती हैं इस प्रकार की समस्याओं को ज्योतिष में दोष की संज्ञा दी गई है। ये दोष मूल दोष कहलाते हैं। ये दोष तीन प्रकार के होते हैं – ग्रह दोष, पितृ दोष और शरीर दोष –

 

ग्रह दोष

 

इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि ग्रहों का प्रभाव मनुष्य तो क्या, देवताओं पर भी पड़ता है और देवता भी उन ग्रहों के प्रभाव से सुख और दुःख को भोगते ही हैं। वैज्ञानिकों ने भी यह सिद्ध कर दिया है कि आकाश मण्डल में स्थित ग्रहों का प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता ही है और उनकी वजह से मानव को विविध प्रकार के कष्ट भोगने पड़ते हैं। नवग्रहों में भी सूर्य, मंगल, राहु और शनि अत्यन्त क्रूर एवं घातक ग्रह हैं। इनके प्रभाव से सभी को विविध प्रकार के कष्ट एवं दुःख भोगने पड़ सकते हैं। जब भी शनि ग्रह का दुष्प्रभाव मनुष्य जीवन में आता है तो उसका घर, परिवार, उसका कुटुम्ब, उसका दाम्पत्य जीवन तहस-नहस हो जाता है, उसका आर्थिक स्रोत समाप्त हो जाता है और उसके जीवन में कुछ नहीं बचता और एक प्रकार से वह गरीब बनकर दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हो जाता है।

 

पितृ दोष

 

आज की पीढ़ी इस बात को स्वीकार करे या ना करे व्यक्ति को पितृ दोष भी भुगतना ही पड़ता है। हमारे माता-पिता, बड़ा भाई या अन्य कोई सम्बन्धी जब अकाल मृत्यु को प्राप्त हो जाता है, या मृत्यु के बाद भी उसकी इच्छाएं-भावनाएं अतृप्त बनी रहती हैं, तो वे उन इच्छाओं की पूर्ति के लिए अपने सम्बन्धियों को यातना दुःख और कष्ट देकर अपनी बात मनवाने का प्रयत्न करते हैं। मैंने अनुभव किया है, कि पितृ दोष की वजह से घर में निरन्तर उपद्रव होते रहते हैं, लड़के या लड़कियां कहना नहीं मानते, पति या पत्नी को एक-एक मिनट में गुस्सा आने लगता है इस प्रकार के कई कार्य घर में होने लगते हैं, जिससे सारा वातावरण दूषित हो जाता है। इसका मूल पितृ दोष ही है और पितृ दोष शांति शनि ग्रह की कृपा से संभव है। पितृ दोष पीड़ित व्यक्ति की कुण्डली में यदि शनि ग्रह शत्रु घर में स्थित होता है तो उस व्यक्ति पर तो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अवश्य ही शनि ग्रह बाधा शांति हेतु साधना सम्पन्न करनी चाहिए।

 

शरीर दोष अर्थात् रोग वृद्धि

 

कभी कभी घर में ऐसी बीमारी घर कर जाती है, कि घर का कोई न कोई सदस्य बीमार बना ही रहता है और काफी बड़ा बजट उन लोगों की चिकित्सा में व्यय हो जाता है। इलाज कराने पर दो चार दिन तो अनुकूलता दिखाई देती है उसके बाद फिर वैसा ही दृश्य या वैसी ही स्थिति बन जाती है। इस प्रकार से घर के मालिक को, उसकी पत्नी को, बहू को, बेटी को, पुत्र को या पोते पोतियों को विविध प्रकार के कष्ट भोगने पड़ते हैं और इन बीमारियों से कोई छुटकारा दिखाई नहीं देता।

 

शनि ग्रह बाधा होने पर अथवा कुण्डली में उसकी प्रतिकूल अवस्था में ऐसा ही प्रभाव दिखाई देता है और इस प्रकार की स्थितियों से अनुकूलता प्राप्त करने का केवल एक ही तरीका है कि शनि की अनुकूलता प्राप्त की जाए।

 

इतना निश्‍चित है कि यदि आपके जीवन में ग्रह दोष, पितृदोष और शरीर दोष हैं तो इसका कारण शनि की प्रतिकूलता है। इस स्थिति में शनि साधना सिद्ध मुहूर्त में अवश्य करनी चाहिये। शनि साधना हेतु शनि जयंती श्रेष्ठ साधनात्मक मुहूर्त है। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष 30 (अमावस्या) शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष गुरुवार 25 मई 2017 को शनि जयंती है।

 

शनि की अनुकूलता के लिए प्रत्येक साधक को शनि जयंती अथवा किसी भी अमावस्या या शनिवार को यह प्रयोग अवश्य सम्पन्न करना चाहिए। शनि मुद्रिका धारण करने से शनि बाधा रूपी दोष से मुक्ति प्राप्त होती है तथा उसके जीवन से रोग, शोक, दुःख, दारिद्र्य, पितृदोष आदि समाप्त होते हैं और परिवार में सभी दृष्टियों से अनुकूलता आती है।

 

साधना सामग्री

 

साधना के लिये विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, घर में जितने भी सदस्य हैं, उन सभी के नाम की ‘तांत्रोक्त शनैश्‍चरी मुद्रिका’ प्राप्त कर लेनी चाहिये जो कि तांत्रोक्त दोष निवारण मंत्रों से मंत्रसिद्ध और रोगादि बाधाओं से निवृत्ति हेतु प्राण प्रतिष्ठा युक्त है। इस मुद्रिका पर तांत्रोक्त नवग्रह मंत्रों के पांच हजार जप सम्पन्न किये हुए हैं। इस प्रकार से मंत्रसिद्ध मुद्रिका पर यह प्रयोग किया जाना चाहिए।

 

शनि मुद्रिका हेतु पत्रिका कार्यालय को पत्र लिखते समय स्वयं का नाम और परिवार के सदस्यों का नाम लिख भेजें जिनके लिए यह प्रयोग सम्पन्न करना है। पत्र भेजते समय आप उनका नाम उम्र और उनका आप से क्या सम्बन्ध है, जैसे वह आपकी पत्नी है, पुत्र है, पुत्रवधु है, पिता है, या अन्य कोई सम्बन्ध है, वह लिखकर भेजना चाहिये जिससे कि सभी सम्बन्धित लोगों के लिये अलग-अलग मुद्रिकाएं भेजने की व्यवस्था की जा सके।

 

साधना प्रयोग

 

यह रात्रिकालीन साधना है। इसे रात्रि में प्रथम प्रहर के पश्‍चात् सम्पन्न करना चाहिए।

 

शनि बाधा शांति की इस साधना को 25 मई 2017 गुरुवार अथवा किसी भी शनिवार या अमावस्या को सम्पन्न किया जा सकता है।

 

रात्रि में साधक स्नान कर शुद्ध नीले अथवा काले वस्त्र धारण कर दक्षिण दिशा की ओर मुंह कर काले आसन पर बैठ जाएं।
साधना प्रारम्भ करने से पूर्व हाथ में जल लेकर संकल्प करें कि मैं (अपना नाम), गोत्र, घर के (सदस्यों के नाम) सदस्यों के रोगों, ग्रह बाधा, पितृदोष निवारण हेतु शनि मुद्रिका के साथ यह विशेष प्रयोग सम्पन्न कर रहा हूं। गुरुदेव मुझे शक्ति प्रदान करें और मेरी कामना पूर्ण हो।

 

संकल्प के पश्‍चात् अपने सामने एक बाजोट पर थाली में काजल से अष्टदल बनाकर उसमें सभी शनि मुद्रिकाओं को रख दें और तेल का दीपक प्रज्वलित कर लें।

 

शनि मुद्रिकाओं पर काजल से रंगे हुए चावल चढ़ाते हुए ‘‘ॐ शं ॐ’’ मंत्र का 31 बार उच्चारण करें।

 

शनि साधना के पूजन क्रम में इसके बाद निम्न करन्यास तथा हृदयादिन्यास सम्पन्न करें –

 

करन्यास

 

शनैश्‍चराय अंगुष्ठाभ्यां नमः।
मन्दगतये तर्जनीभ्यां नमः।
अधोक्षजाय मध्यमाभ्यां नमः।
कृष्णांगाय अनामिकाभ्यां नमः।
शुष्कोदराय कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
छायात्मजाय करतल कर पृष्ठाभ्यां नमः।

 

हृदयादिन्यास

 

शनैश्‍चराय हृदययाय नमः।
मन्दगतये शिरसे स्वाहा।
अधोक्षजाय शिखायै वषट्।
शुष्कोदराय नेत्रत्रयाय वौषट्।
छायात्मकजाय अस्त्राय फट्॥

 

न्यास के पश्‍चात् ‘मूंगा माला’ से निम्न शनि गायत्री मंत्र और शनि सात्विक मंत्र की 1-1 माला मंत्र जप करें –

 

शनि गायत्री मंत्र

 

ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युपुरुषाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात्॥
शनि सात्विक मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः॥

 

शनि गायत्री और शनि सात्विक मंत्र जप के पश्‍चात् शनि के तांत्रोक्त मंत्र की 5 माला मंत्र जप मूंगा माला से करनी है।

 

शनि तांत्रोक्त मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।

 

मंत्र जप के पश्‍चात् दोनों हाथ जोड़कर शनि ग्रह बाधा शांति के लिए निम्न श्‍लोक का 11 बार पाठ करें –

 

कोणस्थः पिंगलो वभु्रः कृष्णो रौद्रान्तको यमः
सौरिः शनिश्‍चरो मन्दः पिप्पलादेन संस्तुतः।
एतानि दश नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्
शनिश्‍चर कृता पीड़ा न कदाचित भविष्यति॥
कोणस्थ, पिंगल, वभ्रु, कृष्ण, रौद्र, अन्तक, यमः, सौरि, शनिश्‍चर, मन्द इन दसों नामों का उच्चारण जो व्यक्ति करता है, उसे शनिदेव पीड़ा नहीं देते।

 

इसके पश्‍चात् सफेद पुष्पों पर काजल की बिन्दी लगाकर शनि मुद्रिका पर अर्पण करते हुए निम्न वन्दना करें –

 

नीलद्युतिं शूलधरं किरीटिनं, गृध्रस्थितं त्रासकरं धनुर्धरम।
चतुर्भुजं सूर्यसूतं प्रशान्तं, वन्दे सदाऽभीष्टकरं वरेण्यम्॥

 

साधना समाप्ति के बाद मुद्रिकाओं तथा मूंगा माला को उसी स्थान पर रहने दें तथा अगले दिन प्रातः मुद्रिकाओं के सम्मुख हाथ जोड़कर पुनः उपरोक्त श्‍लोक का उच्चारण करें तथा ‘ॐ शं ॐ’ मंत्र बोलते हुए मुद्रिकाओं को धारण कर लें। परिवार के प्रत्येक सदस्य को उसकी विशिष्ट शनि मुद्रिका धारण करायें, जिससे कि समस्त प्रकार के उपद्रव और बाधाएं शांत हो सकें।

 

यदि कोई सदस्य मुद्रिका धारण नहीं कर सके तो उसकी मुद्रिका लाल कपड़े में बांधकर सुरक्षित स्थान पर रख दें और संभव हो तो प्रतिदिन मुद्रिका को उसका स्पर्श अवश्य कराएं।

 

साधना में प्रयुक्त मूंगा माला को भी लाल कपड़े में बांध कर सुरक्षित स्थान पर रख दें। सवा माह पश्‍चात् अथवा किसी भी अमावस्या को मूगा माला एवं शनि मुद्रिका को जल में विसर्जित कर दें।

 

साधना सामग्री – मूंगा माला – 150/-, शनि मुद्रिका प्रति – 240/-
Shani Jayanti

25 May 2017

 

To achieve self-confidence, will-power and expense-control within life

To obtain fortune, quick and definite results

To become systematic, practical and industrious in life

 

Wear

Saturn Ring (Shani Mudrika)

 

Saturn is a powerful, strong mysterious God and He grants immediate results to the Sadhak


 

Every man experiences ups-downs, profit-loss, happiness-sorrow in his life. The meaning of the human life is to face new challenges daily. A person obtains happiness upon winning over the obstacles. Everyone knows that there are some such mistakes-deficiencies in human life, which cause growth of new problems in the life. Such problems are referred as faults-deficiencies in astrology. These are basic defects. There are three types of such defects – Planetary Defects, Ancestral Defects and Physical Defects –

 

Planetary Defects

It is a gospel truth that the planets influence not only humans, but Gods as well, and even the Gods have to face happiness and sorrow under the influence of these planets. The scientists have also proven that the planets of the sky cast their influence on the human life, and a person has to suffer various types of sufferings due to them. Sun, Mars, Rahu and Saturn are extremely cruel and deadly planets in Navagrahas. Everyone has to face various kinds of sufferings and distress under their influence. Whenever the bad-malefic influence of the Saturn planet comes on a person, it ruins his house, family and his domestic life. His earnings dwindle, all of his savings vanish and he gets compelled to lead a wretched life of poverty.

 

Ancestral Defects

Today’s generation may or may not accept this truth, but the fact is that a person has to bear the effects of the ancestral defect. When our parents, elder brother or any other relative dies a premature death suddenly, or if his wishes-desires remain unfulfilled at the time of the death, then they try to cast pain and sufferings to their living relatives to get their wishes fulfilled. I have experienced that ancestral defects cause continuous turmoil in the house, the children refuse to obey their parents, the husband-wife become short-tempered, and many such malefic events contaminate and poison the domestic harmony. The root cause of this disharmony is ancestral defect, and these ancestral defects can be removed only through blessings of Lord Saturn. If the Saturn-planet is located in the enemy-house in the horoscope of a ancestral-defect victim, then that person’s life resembles purgatory. Such a person should definitely accomplish Sadhana to eradicate the malefic effects of Lord Saturn.

 

Physical Defects i.e. growth of diseases

Occasionally, an illness enters a home, such that the house-members stay ill for a long period, and a large amount of money is spent for their treatment. The treatment cures the diseases for two-four days, and the diseases relapses again. Thus the head of the family, his wife, son,  daughter, daughter-in-law or grand-children suffer from many kinds of diseases, with no relief within sight.

Obstruction of Lord Saturn, or Saturn’s presence in an adverse situation in the horoscope leads to such conditions, and there is only one way to get rid of such problems, and gain favour of Lord Saturn.

It is certain that if a planetary defect, ancestral defect or physical defect exists in your life, then you are afflicted with adversity of Lord Saturn. In such a situation, you should definitely perform Shani Sadhana in a Siddha auspicious moment. Shani Jayanti is the most excellent spiritual time-period to perform Sadhana of Lord Saturn. The 30th day (Amavasya) of Krishna (Dark-moon) Paksha of Jyeshtha month is celebrated as Shani Jayanti. This year, the Shani Jayanti is on 25 May 2017.

Every Sadhak should perform this Sadhana practice on Shani Jayanti or on any Amavasya or Saturday to obtain compatibility with Lord Saturn. Wearing Shani (Saturn) Ring liberates one from the impediments and problems caused by Lord Saturn; and eradicates diseases, sorrow, sadness, poverty and ancestral-defects from his life. It brings all-round good fortune to the family.

 

Sadhana Materials

This Sadhana does not require any special material. You should obtain “Tantrokt Shaneshchari Mudrika (Ring)” for all members of the family. Such a ring is Pran-pratishtit consecrated and sanctified with special Tantrokt Mantras to eradicate problems and riddance from illness and other obstacles.

Five thousand Mantra chantings of Tantrokt Navgrah Mantras have been performed on this ring. This Sadhana practice should be accomplished on such a Mantra Siddha ordinated ring.

You should mention the names of yourself and your family members while requesting for the Saturn Mudrika ring to perform Sadhana. You should also mention the age and the relationship (like your wife, son, daughter-in-law, father etc.), so that suitable arrangements can be made to send separate rings for each person.

 

Sadhana Procedure

This is a nocturnal Sadhana. It should be performed after the first-prahar of the night.

This Sadhana to eradicate Shani-obstructions can be performed on Thursday 25 May 2017 or on any Saturday or Amavasya (New-Moon night).

Adorn pure blue or black garments after taking fresh bath in the night, and sit facing South direction on a black asana.

Before starting the Sadhana, take water in our hand and pledge thus – I (your name) of <> Gotra am performing this special Sadhana practice through  Shani Mudrikas to eradicate diseases, planetary-defects, ancestral-defects for my family members (names of family members). Let Gurudev bless me with strength and my wish gets fulfilled.

 

After the pledge-resolution, make a Ashtadal (Eight-petalled lotus) using Kajal (black mascara) on a steel-plate kept on a wooden board in front of you. Set up all Shani Mudrikas on this and light an oil lamp.

 

Offer rice coloured with kajal on the Shani Mudrikas by chanting the following Mantra 31 times

“Om Sham Om”

 

Thereafter perform the following Karnyaasa and Hridyaadinyaasa in the following order –

 

Karnyaasa

Shaneishcharaaya Angusthaabhyaam NamaH |

Mandagataye Tarjaneebhyaam NamaH |

Adhokshajaaya Madhyamaabhyaam NamaH |

Krishnaangaaya Anaamikaabhyaam NamaH |

Shushkodaraaya Kanishthikaabhyaam NamaH |

Chaayaatmajaaya Karatala kara Pristhabhyaam NamaH |

 

Hridyaadinyaasa

Shaneishcharaaya Hridayayaaya NamaH |

Mandagataye Shirase Swaahaa |

Adhokshajaaya Shikhaayei Vashat |

Shushkodaraaya Netratrayaaya Voushat |

Chaayaatmakajaaya Astraaya Phat |

 

After Nyaasa, chant 1 Mala each of following Shani Gayatri Mantra and Shani Saatvik Mantra using Moonga Mala

 

Shani Gayatri Mantra

Om Bhagabhavaya Vidhmahe Mrityupurushaaya Dheemahi Tanno ShaniH Prachodayaat ||

 

Shani Saatvik Mantra

Om Sham Shaneikshcharaaya NamaH ||

 

After completing Shani Gayatri and Shani Saatvik Mantra japa, you need to chant 5 Mala Mantra Japa of Shani Tantrokt Mantra using Moonga Mala.

 

Shani Tantrokt Mantra

Om Praam Preem Proum SaH Shanaye NamaH |

 

After completion of Mantra chanting, with folded hands, chant following Shloka 11 times for removal of obstructions from Planet Shani (Shani Grah Baadhaa Shaanti) –

 

Konastha Pingalo VabhruH Krishno, Roudraantako YamaH

SouriH Shanishcharo MandaH Pippalaadena SanstutaH |

Etaani Dasha Namaani Praatarutthaaya YaH Pathet

Shanishchara Kritaa Peedaa Na Kadaachita Bhavishyati ||

 

Lord Shanideva does not cause trouble to a person who chants the ten names Konastha, Pingala, Vabhru, Krishna, Roudra, Antaka, YamaH, Souri, Shanishchara, Manda.

 

Thereafter, marking a dot (bindi) of black-kajal on white flowers, offer them on Shani Mudrika chanting the following prayer –

Neeldhyutin Shooladharam Kireetinam, Gridhrasthitam Traasakaram Dhanurdharam |

Chaturbhujam Sooryasootam Prashaantam, Vande Sadaaabhishtakaram Varenyam ||

 

After completion of Sadhana, let the Mudrikas (rings) and Moonga Mala remain there. Chant the above Shloka with folded hands in front of the Mudrikas next day morning, and wear the Mudrikas chanting “Om Sham Om”.

Each member of the family should wear his or her own Mudrika, to eradicate and quieten all types of problems and obstacles.

 

If a family-member cannot wear the Mudrika due to some reason, then wrap his Mudrika in a red cloth and keep it in a safe place. If possible, touch the Mudrika to his body on a daily basis.

 

Wrap the Moonga Mala also in a red cloth and place it in a safe place. Drop the Moonga Mala and the Mudrika in a running water stream after 1.25 months or on a Amavasya.

 

Sadhana Materials: Moonga Mala – 150/- Each Shani Mudrika – 240/-

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