Saraswati Yantra Poojan

 

10 फरवरी 2019
सरस्वती जयन्ती

 

सा विद्या परमा मुत्रेर्हेतुभुता सनातनी
संसार बन्ध हेतुश्‍च सैव सर्वेश्वरी

 

सरस्वती यंत्र पूजन

 

विद्या शब्द केवल ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। अच्छाई और बुराई के भेद को समझने की परख है और लक्ष्यों को सिद्ध करने का कौशल है।

 

आजीवन विद्यार्थी बनें… विद्या ही परम तत्व है…

 


सरस्वती-साधना प्रत्येक व्यक्ति को अवश्य ही सम्पन्न करनी चाहिए। जीवन में परीक्षाएं तो पग-पग पर चलती ही रहती हैं, प्रत्येक माता-पिता चाहते हैं कि उनके बालक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करें, हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी स्मरण शक्ति तीव्र हो, इन्टरव्यू में, नौकरी में सफलता प्राप्त हो, जो बात कहे वह दूसरों पर प्रभाव डाले, नेतृत्व की क्षमता का विकास हो, तो उसे सरस्वती साधना अवश्य करनी चाहिए। इसके अलावा कोई दूसरा मार्ग नहीं है और जब एक बार सरस्वती सिद्ध हो जाती हैं तो वे अपनी कृपा जीवन भर बनाये रखती हैं क्योंकि मां सरस्वती लक्ष्मी की तरह चंचला नहीं हैं, उनका तो स्थायी निवास रहता है।

 

इस बार दिनांक 10 फरवरी 2019 को सरस्वती जयंती है यह एक महाकल्प है। इस शुभ अवसर पर सरस्वती की साधना कर हम अपने जीवन को एक श्रेष्ठ आधार प्रदान कर सकते हैं। पत्रिका में कई बार सरस्वती साधना के बारे में लिखा गया, लेकिन मुझे यह लिखते हुए खेद है कि लोगों की रूचि सरस्वती-साधना में कम और लक्ष्मी-साधना में ज्यादा रहती है, जबकि वास्तव में होना यह चाहिए कि वे अपने पूरे परिवार के साथ सरस्वती-साधना सम्पन्न करें, जिससे परिवार में श्रेष्ठता, साहस, धैर्य एवं सतत् जिज्ञासा आये और बालकों को भी सरस्वती साधना सम्पन्न करवाने से उनके जीवन का आधार श्रेष्ठ बनता है और वे बड़े होकर अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में पूर्ण सफल होते हैं।

 

साधना विधान

 

सरस्वती साधना की पूर्णता हेतु सर्वप्रथम गुरु पूजन सम्पन्न करें। इस हेतु अपने सामने एक बाजोट पर गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका स्थापित कर लें तथा दोनों हाथ जोड़कर गुरुदेव निखिल का ध्यान करें –

 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
निखिल ध्यान के पश्‍चात् गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को जल से स्नान करावें –

 

ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥

 

इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें और कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पूजन करें –

 

ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।      (धूप, दीप दिखाएं)

 

अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें। इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –
ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः

 

इसके पश्‍चात् मूल पूजन निम्न प्रकार सम्पन्न करें। गुरु चित्र के समीप ही सरस्वती के चित्र को स्थापित करें और सरस्वती चित्र को अष्टगंध अथवा चंदन से तिलक लगायें।

 

अपने सामने एक थाली में सबसे पहले अष्टगंध से एक त्रिभुज बनाकर उसके बीच में ‘ऐं’ बीज मंत्र लिखें। तांत्रोक्त क्रिया में यह सरस्वती का विग्रह माना जाता है। इसके ऊपर पुष्प एवं अक्षत चढ़ाएं।

 

 अब अंकित ‘ऐं’ बीज मंत्र पर मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त जो कि धारण करने योग्य सरस्वती यंत्र है उसे स्थापित करें। परिवार के प्रत्येक बालक के लिये पृथक-पृथक सरस्वती यंत्र आवश्यक हैं। उन सब यंत्रों को कुंकुम, अक्षत, पुष्प, चन्दन अर्पित करें। एक ओर घी का दीपक जलाएं तथा दूसरी ओर सुगन्धित अगरबत्ती प्रज्वलित करें। सभी यंत्रों के लिए केवल एक ही दीपक और अगरबत्ती जलाना पर्याप्त है।

 

विनियोग

 

दाएं हाथ में जल लेकर संकल्प करें –

 

ॐ अस्य श्री वाग्वादिनी-शारदा मंत्रस्य मार्कण्डेयक्ष्वलायनौ ॠषि स्रग्धरा-अनुष्ट्भौ छन्द्सी श्री सरस्वती देवता श्री सरस्वती प्रसाद सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।

 

जल को जमीन पर छोड़ दें।

 

न्यासः

 

निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए विभिन्न अंगों को दाएं हाथ से स्पर्श करें।

 

ॐ श्रीं नमः सहस्रादि।
ॐ ऐं नमः भाले।
ॐ क्लीं नमो नेत्र-युगले।
ॐ ऐं नमः कर्णद्वये।
ॐ सौं नमः नासापुटद्वये।
ॐ नमो नाभौ।
ॐ ह्रौं नमः कंठे।
ॐ श्रीं नमो हृदये।
ॐ ऐं नमो हस्त-युगे।
ॐ क्लें नमः उदरे।
ॐ सौं नमः कट्यां।
ॐ ऐं नमो गुह्ये।
ॐ क्लीं नमो जंघायुगे।
ॐ ह्रौं नमो जानु-द्वये।
ॐ श्रीं नमः पादादि सर्वांगे।
इसके बाद यंत्रों को दूध और जल से स्नान कराएं और उसके बाद वस्त्र से पौंछ दें, उसी थाली में पुनः सभी प्राण प्रतिष्ठित सरस्वती यंत्रों को स्थापित करें। उनका पूजन गंध, कुंकुम, अक्षत, पुष्प इत्यादि से करें और प्रसाद अर्पण करें। इसके पश्‍चात् हाथ जोड़कर निम्न ध्यान करें –

 

ध्यान

 

दोनों हाथ जोड़कर सरस्वती का निम्न ध्यान करें –
मुक्ता-कान्ति-निभां देवीं, ज्योत्स्ना-जाल-विकाशिनीम्।
मुक्ता-हार-युतां शुभ्रां, शशि-खण्ड-विमण्डिताम्॥
विभ्रतीं दक्ष-हस्ताभ्यां, व्याख्यां वर्णस्य मालिकाम्।
अमृतेन तथा पूर्ण, घटं दिव्यं च पुस्तकम्॥

 

देवी सरस्वती आपकी देह-कान्ति मुक्ता की चमक के समान उज्ज्वल हैं, ज्योत्स्ना जैसा प्रकाश उससे निकल रहा है, वे मोतियों के हार से विभूषित हैं, शुभ्र-वर्णा हैं और अर्ध-चन्द्र से शोभायमान हैं। वागीश्‍वरी देवी चतुर्भुजा हैं। दाएं हाथों में से एक में व्याख्या मुद्रा और दूसरे में वर्ण-माला धारण किए हुए हैं। बाएं हाथों में एक में अमृत-पूर्ण कुम्भ है और दूसरे में पुस्तक है। ऐसे दिव्य स्वरूप को हृदय से नमन करता हूं, आप मेरे जीवन में ज्ञान रूप में सदैव स्थापित हों।

 

इसके बाद सरस्वती मंत्र की एक माला मंत्र-जप घर का मुखिया करे –

 

सरस्वती मंत्र
॥ ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं वाग्देव्यै नमः॥
बालक मंत्र उच्चारण कर सकते हों तो उनसे वसन्त पंचमी साधना के दिन विशेष रूप से गुरु मंत्र का 11 बार उच्चारण अवश्य करवायें, इसके साथ ही सरस्वती के मूल बीज मंत्र ‘ॐ ऐं ॐ’ का भी थोड़ी देर उच्चारण अवश्य करवायें।
अब परिवार का मुखिया अपने हाथों में पुष्प ले और गुरुदेव के विग्रह, पादुका इत्यादि पर पुष्प अर्पण करें। अपने बालकों से भी यही क्रिया सम्पन्न करवाएं और प्रत्येक बालक को एक-एक ‘सरस्वती यंत्र’ गुरुदेव के चित्र के स्पर्श कराकर उन्हें धारण करवा दें। इस दिन बालकों को उपहार स्वरूप पुस्तक, पेन इत्यादि अवश्य भेंट करें।

 

प्रति सरस्वती यंत्र – 210/-

10 February 2019

Saraswati Jayanti

 

Saa Vidhyaa Paramaa Mutrerhetubhutaa Sanaatanee

Sansaara Bandh Hetuscha Seiva Sarveshshwaree

Saraswati Yantra Worship

The word “Vidhya” (learning in English) does not mean  mere gaining knowledge, rather it is the art of living the life. It is the wisdom to differentiate between the goodness and evil. It is the skill to attain success in the desired objectives.

Be a student over the entire lifetime … Vidya is the ultimate element …


Every person should accomplish Saraswati Sadhana. The life is full of tests at every step. Every parent wants his or her child to obtain good marks in their examinations. Everyone wants to  improve his memory and to achieve success in interviews and jobs. You should definitely accomplish Saraswati Sadhana, if you wish to influence others with your words or desire to develop leadership qualities. There is simply no other way to achieve this goal. Goddess Saraswati bestows Her grace for the entire lifetime, after accomplishment, as She is not fickle like Goddess Lakshmi. She stays firm.

Saraswati Jayanti is occurring on 10 February 2019 this year. It is a Mahakalp. We can give a strong base to our life by performing Saraswati Sadhana on this auspicious day. We have published many articles on Saraswati Sadhana in the magazine in the past, however, it is a sad fact that the Sadhaks are much more interested in Lakshmi Sadhana compared to Saraswati Sadhana. However, the Sadhaks should accomplish the Saraswati Sadhana with their entire family, to enable development of excellence, courage, patience and continual curiosity. Accomplishment of Saraswati Sadhana by children  improves their basic foundation of life, and enables them to achieve full success in their chosen fields.

 

Sadhana Procedure

You should first perform Guru Poojan to achieve success in Saraswati Sadhana.

Setup Guru Picture/Statue/Yantra/Paduka on a wooden board in front of you, and meditate on the divine form of Gurudev Nikhil with folded hands –

 

GuruBrahmaa GururVishnuH Gururdevo MaheshwaraH |

GuruH Saakshaat Par Brahmaa Tasmei Shree Guruve NamaH ||

 

Bathe the Guru Picture/Statue/Yantra/Paduka with water after Nikhil meditation –

 

Om Nikhilam Snaanam Samarpayaami ||

 

Then wipe with a clean cloth. Perform Panchopchaar worship-poojan with Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken Rice), Pushpa (Flowers), Neivedh (Sweets/Fruit offerings), Dhoop (Incense) – Deep (Lamp) –

 

Om Nikhilam Kumkum Samarpayaami ||

Om Nikhilam Akshtaan Samarpayaami ||

Om Nikhilam Pushpam Samarpayaami ||

Om Nikhilam Neivedhyam Samarpayaami ||

Om Nikhilam Dhoopam Aardhyaapayaami, Deepam Darshayaami ||

                              (show Dhoop, Deep)

 

Now rotate three Achmani (spoonful) water around the Guru Picture/Statue/Yantra/Paduka and drop it on ground. Then chant 1 rosary round of Guru Mantra with Guru Mala –

 

Om Param Tatvaaya Naaraayanaaya Gurubhayo NamaH

 

Thereafter perform the main worship as detailed below. Setup Saraswati Picture near Guru-Picture and apply a mark on Saraswati-Picture with Ashtagandha or Chandan.

Draw a triangle on a plate with Ashtagandha, and write ‘ऐं’ Beeja Mantra in its center. This represents Saraswati deity in Tantra. Offer flowers and Akshat.

Now setup the Mantra consecrated-energized wearable Saraswati Yantra on the  just written ‘ऐं’ Beeja Mantra. A separate Saraswati Yantra is required for each child in the family. Offer Kumkum, Akshat, Flowers and Chandan on all these Yantras. Light ghee lamp on one side and fragrant incense on the other side. Only a single lamp and single incense is enough for all Yantras.

 

Viniyoga

Pledge taking water in right palm –

 

Om Asya Shree Vaagvaadinee-Shaaradaa Mantrasya Markandeyakshvalaayanou Rishi Shtragdharaa-Anushtbhou Chandsee Shree Saraswatee Devataa Shree Saraswatee Prasaada Siddhayarthe Jape ViniyogaH ||

Drop the water on the ground.

 

Nyaasa –

Touch various body-parts with right hand chanting following Mantras.

Om Shreem NamaH Sahastraadi |

Om Ayeim NamaH Bhaale |

Om Kleem Namo Netra-Yugale |

Om Ayeim NamaH Karnadwaye |

Om Soum NamaH Naasaaputadwaye |

Om Namo Naabhou |

Om Hroum NamaH Kanthe |

Om Shreem Namo Hridaye |

Om Ayeim Namo Hasta-Yuge |

Om Kleim NamaH Udare |

Om Soum NamaH Katyaam |

Om Ayeim Namo Guhye |

Om Kleem Namo Janghaayuge |

Om Hroum Namo Jaanu-Dwaye |

Om Shreem NamaH Paadaadi Sarvaange |

Thereafter bathe the Yantras with milk and water. Wipe with a clean cloth, and setup all Mantra consecrated-energized Yantras in the same plate. Worship them through Gandha, Kumkum, Akshat, flowers etc. and offer prasaad. Then meditate with folded hands –

 

Meditate

Meditate on the divine form of Goddess Saraswati with folded hands –

 

Muktaa-Kaanti-Nibhaam Devim, Jyotstraa-Jaala-Vikaashineem |

Muktaa-Haara-Yutaam Shubhraam, Shashi-Khanda-Vimanditaam ||

Vibhranteem Daksha-Hastaabhyaam, Vyaakhyaam Varnasya Maalikaam |

Amriten Tathaa Poorna, Ghatam Divyam Cha Pustakam ||

 

O Goddess Saraswati, the aura of your holy form shines brightly like pearl, radiating with the intensity of thousands of Suns. She is adorned with pearl necklace, has pure holy skin and is decked with half-moon. Goddess Vaagishwaree has four hands. One right hand displays Vyaakhyaa Mudra, while the other right hand holds alphabet rosary. One left hand carries pot filled with divine nectar, and the other has divine book. I pray to such pious form with all my heart. May you  permanently illuminate my life with divine wisdom and knowledge.

 

Then the  head of the house should chant 1 rosary Saraswati Mantra –

 

Saraswati Mantra

|| Om Hreem Ayeim Hreem Vaagdevyei NamaH ||

 

If children are able to speak, then they should chant Guru Mantra 11 times on the Vasant Panchami Sadhana day. They should also chant the basic Beeja Mantra of Goddess Saraswati – ” Om Ayeim Om ” for some time.

Now the head of the house should take flowers in his hands, and offer flowers to Gurudev Picture or Paaduka. The children should repeat this process and each child should wear one “Saraswati Yantra” after touching it with Gurudev picture. You should definitely gift a pen or book etc. to children on this day.

Each Saraswati Yantra – 210 /-

 

 

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