Sapt Matruka Poojan Sadhana

क्या आपकी संतान का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता?
क्या आपकी संतान विद्या में कमजोर है?
क्या आपकी संतान तीव्र तेज नहीं है?
क्या आपकी संतान को बार-बार नजर लग जाती है

तो आवश्यक है –

सप्त मातृका पूजन साधना
बालकों की सर्वांगीण उन्नति एवं आयु रक्षा हेतु


मां की नजर में बच्चा बड़ा हो भी जाए तो भी बच्चा, ही रहता है। अगर, आपको ऐसा लगता है कि आपकी संतान किसी ग्रह दशा से प्रभावित है, या फिर उसके जीवन की तरक्की रुक गई है, बने हुए काम बिगड़ रहे हैं, तब आपको सप्तग्रह मातृकासाधना अवश्य सम्पन्न करनी चाहिए।


मातृवात्सल्यविदनाम् में वर्णित है कि शुंभ और निशुंभ नामक राक्षसों से लड़ते समय महासरस्वती की सहायता के लिए सभी देव अपनी-अपनी शक्ति भेजते हैं। वे सात शक्तियों ही सप्तमातृकाएं हैं और उनकी सेनापति हैं काली। ये सप्त मातृकाएं निम्नलिखित हैं –

1. माहेश्हरी – जो पंचमुखी हैं और वृषभ पर सवार हैं, उनके हाथ में त्रिशूल हैं।

2. वैष्णवी – गरुड़ पर सवार हैं। उनके हाथों में चक्र, गदा और पद्म हैं।

3. ब्रह्माणी – वे चार मुखों वाली हैं और हंस पर सवार हैं, उनके हाथों में कमण्डली और अक्षमाला हैं।

4. ऐन्द्री – वे इन्द्र की शक्ति हैं और ऐरावत पर सवार हैं, उनके हाथ मेंे वज्र है।

5. कौमारी – वे छः मुखों वाली हैं और मोर पर सवार हैं।

6. नारसिंही – इनका मुख शेरनी का है और उनके हाथ में गदा और खड्ग हैं।

7. वाराही – इनका मुख वाराह का है जो सफेद रंग के भैंसे पर सवार हैं। उनके हाथों में चक्र, खड्ग, तलवार और ढ़ाल हैं।

इन सप्तमातृकाओं का पूजन ही सप्तषष्ठी पूजन है। कथा है कि शुंभ और निशुंभ का तो युद्ध में सप्तमातृकाओं ने वध कर दिया, पर शुंभ का पुत्र दुर्गम कौए का रूप बनाकर उनसे बच गया, क्योंकि शत्रु के पुत्र के प्रति भी इन सप्तमातृकाओं के मन में वात्सल्य का भाव उमड़ पड़ा।

उनके इस कृत्य से प्रसन्न होकर महासरस्वती ने इन सप्तमातृका शक्तियों को आशीर्वाद दिया कि जो भी मनुष्य अपने घर में बच्चे के जन्म के बाद इन सप्तमातृकाओं का पूजन करेगा, उस बच्चे की आप रक्षक बनना। तब से, बच्चे के जन्म पर छठी महोत्सव, इन सप्तमातृकाओं का पूजन हैं।

मातृका शब्द का अर्थ जन्मदात्री, धात्री और मां है। सप्तमातृकाओं की पूजा नवजात शिशु की हर प्रकार के अनिष्टों से रक्षा करती हैं और इसी कारण बच्चे के जन्म पर उनकी पूजा का प्रावधान षष्ठी को है।

पर, जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, उसके जीवन में संघर्ष और बाधाओं में भी बढ़ोत्तरी होती जाती है। कई बार ये बाधाएं रोग के रूप में आती हैं, तो कई बार बच्चे का सर्वांगीण विकास बाधित हो जाता है। अतएव, एक ऐसी साधना अनिवार्य थी जिससे बच्चों पर आयी ग्रह-जनित बाधा का निराकरण किया जा सके। पर यह साधना आप अपने बच्चों के लिए कर सकते हैं साथ ही साथ स्वयं के लिए कर सकते हैं, क्योंकि मां की नजर में बच्चा बड़ा भी हो जाए तो बच्चा ही रहता है। अगर, आपको ऐसा लगता है कि आपको ग्रह-जनित बाधाएं है तो आप इन बाधाओं के निवारण के लिए सीधे ग्रहों की साधना नहीं करके उनकी माताओं की साधना कर सकते हैं, जो अत्यधिक प्रभावकारी हैं, क्योंकि जब आपने मां को प्रसन्न कर लिया तो उस क्षण पुत्र को भी मां की बात अवश्य माननी पड़ेगी।

इसलिए, ग्रह-जनित बाधाओं के निराकरण हेतु ‘सप्त मातृका पूजन साधना’ अवश्य करें।

मां की नजर में बच्चा बड़ा हो भी जाए तो बच्चा, ही रहता है। अगर, आपको ऐसा लगता है कि आपकी संतान किसी ग्रह दशा से प्रभावित है, या फिर उसके जीवन की तरक्की रुक गई है, बने हुए काम बिगड़ रहे हैं, तब आपको सप्तग्रह माता साधना अवश्य सम्पन्न करनी चाहिए।

साधना विधान

यह साधना एक दिवसीय और रात्रिकालीन है। साधक को चाहिए कि किसी भी शुभ मुहूर्त या शुक्ल पक्ष की षष्ठी अथवा किसी भी गुरुवार को स्नान आदि से निवृत्त होकर रात को श्‍वेत धोती धारण कर उत्तराभिमुख होकर श्‍वेत आसन पर बैठें। फिर अपने समक्ष लकड़ी के एक बाजोट पर श्‍वेत वस्त्र बिछाकर उस पर ‘सप्त माता यंत्र (ताबीज)’ स्थापित कर उसका पंचोपचार से पूजन करें और फिर उस पर निम्न मंत्र का उच्चारण करता हुआ कुंकुम से रंगे हुए चावल अर्पित करें।

ॐ माहेश्‍वरी नमः। ॐ वैष्णवी नमः। ॐ ब्रह्माणी नमः। ॐ ऐन्द्री नमः। ॐ कौमारी नमः। —ॐ नारसिंही नमः। ॐ वाराही नमः।

फिर ‘सौभाग्यदायिनी माला’ से निम्न मंत्र की 21 मालाएं मंत्र जप करें।

मंत्र

॥ॐ ऐं क्लीं सौः सप्तमातृकाः सौः क्लीं ऐं ॐ फट्॥

साधना के उपरांत व्यक्ति समस्त साधना सामग्री एवं पूजन सामग्री को अगले ही दिन किसी तालाब, कुएं आदि में विसर्जित कर दें। फिर घर आकर 1, 3, 5 या 7 जितनी सामर्थ्य हो उतनी छोटी कन्याओं को भोजन, वस्त्र, दान दक्षिणा दें। ऐसा करने से साधना पूर्ण सफल होती है, और संतान के ऊपर से समस्त ग्रह कोप एवं क्रूर ग्रहों के प्रभाव समाप्त हो जाते हैंै। दुर्दिन समाप्त होते हैं और सुख के दिन आते हैं।

वास्तव में ही यह साधना अचूक एवं प्रामाणिक है आज तक इसे असफल होते नहीं देखा गया है… अगर आप पर अथवा आपके बच्चे पर किसी ग्रह की दशा भारी है, तो फिर समय गंवाए बगैर आपको इसे सम्पन्न करना ही चाहिए।

प्राण प्रतिष्ठा न्यौछावर – 450/-

Does your child suffer from disease?
Is your child weak in studies?
Is the development of your child slow?
Does your child get afflicted by evil-eye frequently?

 

If so, then  –

 

Sapta Maatrika Poojan Sadhana

Is Mandatory, for the overall growth and protection of the children


Even when a child grows out of childhood, the mother continues to view him as a small baby from her maternal perspective. If you feel that your child is afflicted with any malefic planetary combination, or if his development-progress in life has got blocked,  or situations has worsened, then you should definitely perform Saptagrah Maatrika Sadhana.


 

The Maatrivaatsalyavidanaam holy scripture states that all Gods sent their own Energy-Powers to assist Mother Goddess MahaSaraswati during the battle against Shumbha and Nishumbha demons. Those seven powers are the Sapta-Maatrikaas Themselves, and Mother Goddess Kali is Their chief-commander. These Sapta Maatrikaas are –

  1. Maaheshhari– Is Panchamukhi (Five-Faced) and rides on a Bull, She holds a Trishul (Trident) in Her hand.
  2. Vaishnavi– Rides a Garuda. She holds Chakra, Mace and Padma (Lotus) in Her hands.
  3. Brahmaani– She is Four-Faced and rides a Swan, She holds a Kamandali and Akshamala in Her hands.
  4. Aeindri – She is power of Lord Indra and rides Airavata Elephant, She holds Vajra in Her hands.
  5. Koumaari – She is Six-Faced and rides a Peacock.
  6. Naarasinghi – She has a Lioness face and holds Mace and Kadag in Her hands.
  7. Vaaraahi– She has a Boar face and rides a white colored Buffalo. She holds Chakra, Khadag, Sword and Shield in Her hands.

 

Worship of these Sapta-Maatrikaas is the SapthaShashti worship itself. The story states that Sapta-Maatrikaas killed Shumbha and Nishumbha in the battlefield, but Durgam, son of Shumbha, escaped in the form of Crow. The Sapta-Maatrikaas had developed maternal love even towards the son of their arch enemy.

Pleased with Their contribution, Goddess MahaSaraswati blessed these Sapta-Maatrikaas that They will become protector of any child, whose parents worship These Sapta-Maatrikaas after the birth of the child. Since then, the tradition of Chhathi Mahotsava, after birth of child, started, which, in essence is the worship of These Sapta-Maatrikaas.

The literal meaning of word Maatrikaa is the Birth-giver, Protector and Mother. The worship of Sapta-Maatrikaas protect the newborn from all kinds of evils and, therefore, there is a provision to worship Them on the Shashthi (Sixth Day) after birth of the child.

However, as the child grows, the struggles and obstacles in his life also increases. These obstacles arrive often in the form of illness, and often block the overall development of the child. Hence, there was a need for a Sadhana, to resolve the adverse impact of malefic planets on children. You can do this Sadhana for your children, or for yourself, because even a grown-up child always remains a baby from the mother’s maternal view. If you face obstacle-adversities due to malefic planets, then you can perform the Sadhana of the mother of those planets instead of the planets themselves. This practice is more effective, because, once you have pleased the Mothers,  the planet (child) will have to obey the commands of Their Mothers.

Thus you should definitely perform “Sapta Maatrika Poojan Sadhana” to resolve the obstacles-problems generated due to planetary impacts.

Even a grown-up child remains a baby in Mother’s view. If you feel that your child is afflicted by some adverse planetary combination, or the child’s development-growth has got blocked, or the situation is getting worsened, then  you should definitely perform the Sapta-Griha Maata Sadhana practice.

 

Sadhana Procedure

This is a single day nocturnal sadhana.The Sadhak should start this Sadhana on any auspicious Muhurath, or Shashthi (Sixth Moon-day) of Shukla (Bright) Fortnight, or on any Thursday. The Sadhak should wear White colored Dhoti after taking a bath, and sit facing North direction on a White Asana. Spread White colored cloth on a wooden board in front of you, and setup “Sapta Maataa Yantra (Tabeeja)“. Perform Its Panchopchaar poojan-worship, and offer rice grains colored with Vermilion (Kumkum), whilest chanting following Mantras.

Om Maaheshvari NamaH |

Om Veishnavi NamaH |

Om Brahmaani NamaH |

Om Aeindri NamaH |

Om Koumaari NamaH |

Om Naarasinghi NamaH |

Om Vaaraahi NamaH |

 

Then chant 21 malas (rosary-rounds) of following Mantra with “Soubhaagyadaayinee Mala“.

 

Mantra

|| Om Ayeim Kleem SouH SaptamaatrikaaH SouH Kleem Ayeim Om Phat ||

 

After completion of the Sadhana, the Sadhak should drop the entire set of Sadhana and worship articles in a pond or well next day. Then he should donate food, clothes and money to 1 .3. 5. 7 or whatever-possible number of small girls. Thus this Sadhana gets accomplished,  and the adverse impact of all planets (strong or malefic) to the offspring gets terminated, the misfortune ends, and happy days start.

In fact, this sadhana is authentic and is highly effective. It has never been seen to be unsuccessful till date … If you or your child are facing adverse malefic planets, then you should definitely perform this Sadhana without wasting any time.

Consecrated and Sanctified Sadhana articles – 450 /-

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