Rati Anangh Sadhana

वसंन्त पंचमी  10 फरवरी 2019

रति अनंग साधना

प्रेम-आकर्षण-मोहन

प्रेम का उपमा रसधार से की जाती है, जब तक प्रेम रसधार प्रवाहित होती रहती है, तब तक जीवन में आनन्द भी आता रहता है…
अपने आप पर विचार कीजिये, क्या आपके जीवन की प्रेमधार शुष्क हो रही है, क्या जीवन नीरस हो रहा है?
रति सौन्दर्य का उच्चतम स्वरूप है और अनंग पुरुष तत्व का उच्चतम स्वरूप है… दोनों का मिलन, आपके जीन में निरन्तर रहे… प्रेम प्रवाह कीजीये, अपने जीवन में, प्रेम ही सर्वोत्तम रस है…

* प्रेम जीवन का रस है। प्रत्येक रिश्ता प्रेम जल से ही सींचा जाता है।
* जब यह प्रेम ईश्‍वर के प्रति उमड़ता है तब भक्ति बनकर शुद्ध हो जाता है।
* गुरु के प्रति प्रेम समर्पण बन जाता है।
* परिवार के प्रति प्रेम उत्तरदायित्व निर्वाह या कर्त्तव्य बन जाता है।
* किसी प्रिय या जीवनसाथी के प्रति प्रेम जीवन की धुरी बन जाता है।
प्रेम के विषय में कबीर सरीखे संत भी मुखर हो जाते हैं। मीरा तो प्रेम दीवानी ही थीं। राधा-कृष्ण का प्रेम मिसाल है तो सीता के लिए राम लंका पार चले गए। प्रेम की शक्ति में बहुत बल है। इससे बड़ी कोई प्रेरणा नहीं है, पर इस प्रेम को निभाना सरल नहीं है।
नेह निबाहन कठिन है, सबसे निबहत नाहि
चढ़बो भोम तुरंग पर, चलबो पाबक माहि
कबीर दास

 

प्रेम को निभाना अत्यन्त कठिन है, हर कोई इसको निभा नहीं पाता। जिस प्रकार मोम के घोड़े पर चढ़कर आप आग के बीच नहीं चल सकते उसी प्रकार प्रेम को जाने और समझे बिना प्रेम निभाना संभव नहीं है।

 

अब, प्रेम तो शुरूआत से संयुक्त है। प्रेमवश ही सीता श्रीराम को अग्नि परीक्षा देती हैं और प्रेमवश ही जोड़े अग्नि के चारों ओर सात जन्मों के बन्धन में बंध जाते हैं।

 

कब जीवन में अनिवार्य है अनंग रति साधना

 

वर्तमान समय में गृहस्थी भी किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। एक ओर महंगाई की आंच है तो दूसरी ओर अतृप्त कामनाओं की तपिश है।

 

ऐसे में प्रेम जल का दम्पति के बीच शुष्क हो जाना स्वाभाविक है। अगर आप भी अपने निजी संबंधों मेें उदासीपन या उदासीनता अनुभव कर रहे हैं तब पुरुषों को अनंगदेव-कामदेव और स्त्रियों को सौन्दर्य एवं प्रेम की देवी-रति के शरणागत होने की आवश्यकता है।

 

1. दाम्पत्य को पुनः नवीन बनाना हो

 

सीधी सी बात है, दाम्पत्य समय बीतने के कारण नहीं थकता है, वरन् समयाभाव रिश्तों को ठंडा कर देता है। वर्तमान समय में प्रतियोगिता बहुत बढ़ गई है और स्वयं को सिद्ध करने की होड़ में कई बार हम जीवनसाथी के प्रति रूखे और अनमने से हो जाते हैं।

 

आपसी प्रेम ही विवाह को सफल तो बनाता है, पर उसका भी एक सूत्र है। आपमें इतनी सहनशक्ति और प्रेम होना चाहिए कि आपको बार-बार अपने जीवनसाथी से प्रेम हो पाए, उसे ही उत्तम कोटि का प्रेम कहते हैं।

 

प्रीत पुरानी ना होत है, जो उत्तम से लाग
सौ बरस जल में रहे, पात्थर ना छोरे आग
प्रेम में आंच है तो समय उसे शीतल कदापि नहीं कर सकता है। जैसे सौ बरस तक पानी में रहकर भी पत्थर अपनी उष्मा नहीं खोता है मतलब रगड़ने पर आग शर्तिया लगेगी फिर भी रिश्तों में असहिष्णुता उभरने लगे, मन भारी होने लगे या साथी का मन भटकने लगे तो उसे अनुकूल करने के लिए तंत्र, अनंग रति साधना का मार्ग सुझाता है।

 

2. अपने प्रति सजगता कायम रखना हो

 

कई बार दाम्पत्य वैचारिक मतभेद के कारण टूटता तो नहीं है, वरन् आलस्य के कारण बिखर जाता है। पति-पत्नी अपने रख-रखाव, रूप-यौवन को लेकर निश्‍चिंत हो जाते हैं। सोचने लगते हैं कि अब तो शादी हो गई अब किसके लिए बनें, संवरें? रूप यौवन तो जीवन में नवीनता बनाए रखने का मार्ग है, इसमें आकर्षण है और प्रेम-बन्धन है। स्वयं के प्रति उदासीनता दरअसल अपने और साथी के प्रति क्रूरता है।

 

अनंग रति साधना स्त्रियों में रूप लावण्य बरकरार रखने का प्रामाणिक मार्ग है। इसे नियमित रूप से सम्पन्न करने पर आपके व्यक्तित्व में ओज, निखार और आकर्षण तत्व दृढ़ होंगे।

 

ऐसी अपेक्षा कदापि ना रखेंे कि आपने साधना सम्पन्न की और झुर्रियां लापता हो गईं, वजन 10 किलो घट गया। रति साधना आपके मन को सरस कर देगी। मन जैसे ही ऊर्जान्वित हुआ आप जीवन को एक नए जोश के साथ देखना शुरू करेंगी और उन निर्णयों को लेगें जिनसे आपका कायाकल्प हो सके। जैसे – संयमित भोजन, नियमित योग, ध्यान, अनंग रति मंत्र जप आदि।

 

धीरे-धीरे आपकी आंखों में एक आकर्षण आएगा और उसके सम्मोहन में सभी बंधने लगेंगे (जीवनसाथी भी)। स्त्री-पुरुषों सबके लिये यह बात लागू होती है।

 

3. वैचारिक मतभेद की समाप्ति ः प्रेम का पुनरागमन

 

कई बार पति-पत्नी के बीच छत्तीस का आंकड़ा स्थापित हो जाता है। अहं की निःशब्द लड़ाई होती है जिसमें एक साथी दूसरे के समक्ष झुकने को तैयार नहीं होता है। पति-पत्नी जीवन पथ पर मित्र हैं और वैचारिक मतभेद मैत्री में खटास डाल देते हैं।

 

ऐसे में अनंग रति साधना एक प्रभावी उपाय है, बिखरते सम्बन्धों को जोड़ने का। कामदेव-रति का सम्मोहन पर्याप्त है वैवाहिक मतभेद को दूर करने के लिए या फिर शुष्क प्रिय को सरस करने के लिए।

 

विचार परामर्श में नहीं उलझें, वसन्तोत्सव के तीक्ष्ण मौके पर मन को पुनः नवीन करें। प्रेम के प्रवाह से जीवनसाथी को हतप्रभ कर दें कामदेव रति साधना के द्वारा!

 

साधना सामग्री

 

इस साधना में ‘अनंग यंत्र’ ‘रति प्रीति सप्तबिन्दु मुद्रिका’ ‘आनन्द मंजरी माला’ के अतिरिक्त पुष्प मालाएं, कपूर, इत्र, अगर, कुंकुम, आंवला, चंदन, पुष्प, वृक्षों के पत्ते, पीला वस्त्र, सफेद, काला, लाल व पीला रंग अर्थात् गुलाल और अबीर आवश्यक हैं। इस साधना में आठ प्रकार से कामदेव की पूजा सम्पन्न की जाती है जिससे पूर्ण सिद्धि प्राप्त हो।

 

वसन्त पंचमी (10 फरवरी 2019) रति अनंग साधना को सम्पन्न करने का श्रेष्ठ मुहूर्त है, इसके अतिरिक्त किसी भी सर्वार्थ सिद्धि योग को भी सम्पन्न किया जा सकता है।

 

साधना विधान

 

अनंग उपनिषद ग्रन्थ में कथन है कि साधना से पूर्व ही साधक को वृक्ष के पत्ते, डालियां ला कर उन्हें जल से धो कर निम्न मंत्र से पूजन करना चाहिए।
॥अशोकाय नमस्तुभ्यं कामस्त्री शोकनाशनः॥

 

अर्थात् हे वृक्ष देव! मैं उस कामदेव की पूजा करता हूं, जिनकी पूजा से सब प्रकार के शोक नष्ट हो जाते हैं और कामदेव रति उन शोक इत्यादि को नष्ट कर नित्य आनन्द से भर देते हैं।

 

इसे पीले कपड़े से ढंक कर अपने पूजा स्थान में रखना चाहिए।

 

अब साधक अपने सामने चावल की आठ ढेरियां बना कर उन पर ‘आठ लघु नारियल’ स्थापित कर आठ कामों का पृथक पूजन करें, ये आठ काम हैं – काम, भस्म शरीर, अनंग, मन्मथ, बसन्तसखा, स्मर, इक्षुधनुर्धर एवं पुष्पबाण इनका पूजन क्रम निम्न प्रकार से है –

 

कपूर से  – ॐ क्लीं कामाय नमः।
गोरोचन से  – ॐ क्लीं भस्मशरीराय नमः।
इत्र से  – ॐ क्लीं अनंगाय नमः।
अगर से  – ॐ क्लीं मन्मथाय नमः।
कुंकुम से  – ॐ क्लीं वसन्तसखाय नमः।
आंवला से  – ॐ क्लीं स्मराय नमः।
चंदन से  – ॐ क्लीं इक्षुधनुर्धराय नमः।
पुष्पों से  – ॐ क्लीं पुष्पबाणाय नमः।
अब अपने सामने रखे हुए अनंग यंत्र तथा ‘रति प्रीति मुद्रिका’ पर वृक्ष के पत्ते तथा माला निम्न श्‍लोक पांच बार पढ़ कर चढ़ानी चाहिए।

 

सर्व रत्नमयी नाथ दमिनीं वनमालिकाम्।
गृहाण देव पूजार्थ सर्वगन्धमयीं विभो॥
इसके साथ प्रसाद और सुपारी भी अर्पित करें तथा घी का दीपक जला कर दायीं और रख दें।

 

इस साधना का आधार – कामदेव गायत्री मंत्र, आकर्षण मंत्र है। ये मंत्र अत्यन्त ही प्रभावशाली हैं इन मंत्रों का जप इस पूरे पूजन क्रम के पश्‍चात् ‘आनन्द मंजरीमाला’ से उसी स्थान पर बैठे-बैठे पांच-पांच माला मंत्र जप करना चाहिए। पहले पांच माला ‘कामेदव गायत्री मंत्र’ का जप करें। उसके पश्‍चात् पांच माला ‘आकर्षण मंत्र’ का जप करें।

 

कामदेव गायत्री मंत्र

 

॥ कामदेवाय विद्महे पुष्पबाणाय
धीमहि तन्नो अनंग प्रचोदयात्॥
आकर्षण मंत्र
॥ ॐ कामायै रत्यै अनंगो वद आकर्षण सम्मोहनाय फट्॥
इस प्रकार मंत्र जप के पश्‍चात् अपने सामने कामदेव तथा रति को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए प्रणाम करना चाहिए कि जगत को रति प्रीति प्रदान करने वाले, जगत को आनन्द कार्य प्रदान करने वाले देव, आप को प्रणाम करता हूं तथा आप मेरे शरीर में स्थायी आवास करें एवं मेरी वांछित इच्छाओं को फल प्रदान करें। इस प्रकार जीवन में प्रेम, सौन्दर्य, सम्मोहन, आकर्षण की कामना करते हुए रति-अनंग साधना पूर्ण करें।

 

साधक को चाहिए कि वह प्रतिदिन एक माला कामदेव गायत्री मंत्र का जप अवश्य ही करें।

 

साधना के पश्‍चात् साधक यंत्र तथा मुद्रिका को पुष्प के साथ पीले कपड़े में बांध कर पूजा स्थान में रखें तथा किसी विशेष कार्य पर जाते समय इसे (पीले कपड़े सहित) अपने बैग अथवा अपनी जेब में रख सकते हैं।

 

प्रेम आकर्षण सम्मोहन हेतु रति अनंग साधना ही प्रभावकारी है। जिसमें सफलता निश्‍चित प्राप्त होती है, नियमित मंत्र जप अवश्य करें।
प्राण प्रतिष्ठा न्यौ. – 450/-

Vasant Panchami

10 February 2019

Rati Anang Sadhana

Love-Attraction-Captivation

 

A flowing stream symbolizes love. The continual flow of love stream keeps bestowing joy in life…

Take a step back and consider. Is this stream of love drying out in your life? Is life losing its jade?

Rati is the pinnacle of beauty and Anang is the apex of masculinity…. The union of both, should continue throughout your life … Let the love flow, in your life. Love is the ultimate elixir…


* Love is the divine elixir of life. It nurtures each relation in life.

* The flow of this love towards God, purifies it into devotion.

* The love towards Guru converts into a surrender onto Him.

* The love towards family assumes the form of duty or responsibility.

* Love towards the beloved  becomes the pivot of life.

 

Even saints like Kabir become emotional on this topic of love. Meera was mad in love. The love between  Radha-Krishna is an exemplar illustration, while Lord Rama crossed sea to Lanka for the sake of Mother Sita.  There is a lot of power in the force of love. No other motivation is greater than this, but it is not an easy affair  to sustain this love.

 

Prem Nibaahan Kathin Hai, Sabse Nibahat Naahi

Chadbo Bhom Turang Par, Chalbo Paabak Maahi

 

-Saint Kabir Das

 

It is very difficult to sustain love, it is not everyone’s cup of tea. You cannot cross fire by riding on a horse made of wax. Similarly, it is not possible to sustain love without understanding and comprehending about it.

The union-merger is inbuilt within love. Sita takes the test-of-fire for the sake of Her love to Lord Shree Ram. The couples bind themselves together for seven births around the fire, for the sake of love.

 

When is Anang Rati Sadhana required in life

The current family life is not less than any test of fire. The flaming inflation attacks from one side, while the heat of insatiable desires scalds from the other.

The love between couples eventually dries out, caught between these two binds. If you are also feeling sadness or apathy in your personal relations, then it becomes mandatory for males to take blessings from  Ananga-Dev- Lord Kamdev and for females from the Goddess Rati – the Goddess of beauty and love.

 

  1. Rekindling the flame

Frankly, the extent of time doesn’t ebb out the love between couple, rather the paucity of time kills the flame.  This is the age of competition, and we sometimes become  rude and ruthless towards our life partner in the race to prove ourselves.

The mutual love is the key to a successful marriage, but there is a catch. You should have enough patience and love to rekindle the love-flame with your spouse. Such love ranks as the best category.

 

Preet Puraanee Naa Hota Hai, Jo Uttam Se Laag

Sou Baras Jal Mein Rahe, Patthar Na Chore Aag

 

The fire in love cannot be smothered by cold vagaries of time. A piece of stone doesn’t lose its inherent heat even after staying in water for hundreds of years. It will definitely spark upon rubbing. The Tantra recommends that whenever you start feeling  intolerance within the relationship, or when the mind starts getting numb or your spouse starts wavering, then Anang Rati Sadhana is the best way to rekindle that flame.

 

  1. To Stay Alert

Sometimes the relationship doesn’t crack due to  ideological differences, however, the indolence kills it out. Both spouses become complacent about their looks,   fitness and personality. They stop dressing up for each other, as the wedding is already done. Youth and Beauty are the mediums to induct novelty and freshness in the life. They stimulate attraction and bonds of love. Indifference towards your own looks and personality is actually an act of cruelty to your spouse.

Anang Rati Sadhana is a proven way to maintain beauty and elegance in women. Regular practice of this Sadhana develops allure, charm and appeal in your personality.

However, do not expect that accomplishment of this Sadhana will magically make your wrinkles disappear, or reduce your weight by 10 kilos. Rati Anang Sadhana will energize your mind. The invigoration of your mind will prompt you to take a fresh look at everything, and take apt decisions to rejuvenate yourself like – balanced diet, regular Yoga, meditation, Anang Rati Mantra chanting etc.

Gradually the charm in your eyes will increase, and this will captivate everyone (including your spouse). This fact is applicable to both sexes.

 

  1. Termination of ideological differences: Love rejuvenates

Sometimes both spouses are constantly skirmishing with each other. The inherent ego doesn’t let them bend down  to bury their differences. Both husband-wife are best friends for life, but such mutual differences spoil this beautiful relation.

Anang Rati Sadhana is an effective remedy to reconnect such wilting relationships. The magnetic attraction of Kamdev-Rati is enough to eradicate these mutual differences or to bring warmth within such cold relations.

Do not get entangled in intellectual debate. Rather refresh your mind on the eve of onset of the spring.  Delight your spouse by showering him or her with love, through this Kamdev Rati Sadhana

 

Sadhana Materials

Apart from “Anang Yantra“, “Rati Preeti Saptbindu Mudrika” and “Anand Manjari Mala“, you will require flower garlands, camphor, perfume, Agar, Kumkum, Aamla, Sandalwood, flowers, leaves, yellow cloth, Gulal colors – White, Black, Red and Yellow, and Abeer to perform this Sadhana. Lord Kamdev is worshipped bin eight different ways, to obtain full success in this Sadhana.

Vasant Panchami (10 February 2019) is an excellent auspicious moment to perform Rati Anang Sadhana. It can also be performed on any Sarvaarth Siddhi Yoga.

 

Sadhana Procedure

Anang Upanishad text states that the Sadhak should wash leaves and twigs with water and worship them with following Mantra before the Sadhana itself –

 

|| Ashokaaya Namastubhyam Kaamastree ShokanaashanaH ||

i.e. O Tree God!  I pray to Lord Kaamdev, whose worship eradicates all sorrows and to divine Kaamdev-Rati who replaces those sorrows with ever-present joy.

 

It should be covered with yellow cloth and kept in the worship place.

Now the Sadhak should make eight piles of rice, and after setting up “Eight Laghu Nariyals” on them, worship eight Lord Kaams separately. These eight Lord Kaams are – Kaam, Bhasma Shareer, Anang, Manmatha, Basantasakhaa, Smara, Ikshudhanurdhara and Pushpabaana. The worship process is –

 

With Camphor – Om Kleem Kaamaaya NamaH |

With Gorochan – Om Kleem Bhasmashareeraaya NamaH |

With Perfume – Om Kleem Anangaaya  NamaH |

With Agar – Om Kleem Manmathaaya  NamaH |

With Kumkum –  Om Kleem Basantasakhaaya  NamaH |

With Aamla – Om Kleem Smaraaya  NamaH |

With Sandalwood – Om Kleem Ikshudhanurdharaaya  NamaH |

With Flowers – Om Kleem Pushpabaanaaya  NamaH |

 

Now offer leaves and mala on Anang Yantra and “Rati Preeti Mudrika” kept in front of you, chanting following Shloka 5 times.

 

Sarva Ratnamayee Naatha Damineem Vanamaalikaam |

Grihaana Deva Poojaartha Sarvagandhamayeem Vibho ||

Also offer Prasaad and Supaari along with it, and keep a lighted Ghee lamp on right side.

 

The root basis of this sadhana are – Kaamdev Gayatri Mantra and Aakarshan Mantra. These are extremely effective Mantras.  5 mala count of these Mantras should be chanted sitting at the same place with “Aanand Manjarimala”  after completion of this entire worship. First chant 5 malas of “Kaamdev Gayatri Mantra”. Then chant 5 malas of “Aakarshan Mantra”.

 

Kaamdev Gayatri Mantra

|| Kaamdevaaya Vidamahe Pushpabaanaaya Dheemahi Tanno Ananga Prachodayaata ||

 

Aakarshan Mantra

|| Om Kaamaayei Ratyei Anango Vada Aakarshana Sammohanaaya Phat ||

 

After completion of this Mantra chanting, you should pray offering flowers to Lord Kaamdev and Goddess Rati that  – O bestower of love-passion to this world, divine bestower of  joy-pleasure to this world, I salute you and beseech you to reside permanently in my body and grant fulfilment to my wishes and desires.

Thus you complete the rituals of Rati Anang Sadhana, the portent of love, beauty, attraction and captivation in life.

 

The Sadhak should definitely chant 1 mala of Kaamdev Gayatri Mantra daily.

After completion of Sadhana, the Yantra and Mudrika should be tied along with the flowers, in a yellow cloth, and kept in the worship place. You can keep this (tied in yellow cloth) in your bag or pocket while going for any important appointment.

The Rati Anang Sadhana is extremely effective for love-magnetism-attraction. One definitely achieves success in this Sadhana. You should certainly chant Mantra regularly.

Praana Pratishthaa Sadhana Materials – 450/-

 

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