Ram Raksha Vajra Kavach

महाकवि वाल्मीकि ने रामायण की रचना के पूर्व नारद मुनि से पूछा, मनुष्यों का सर्वांगीण विकास कैसे हो सकता है? आगे उन्होंने पूछा कि क्या इस जगत में ऐसा कोई है, जो सद्गुणी होने के साथ में शक्तिशाली हो, मर्यादा में रहने वाला हो, सत्यवादी हो, दृढ़प्रतिज्ञ और करुणावान भी हो? जो असाधारण चरित्र का धनी, प्रबल उत्साही, सबके कल्याण का इच्छुक, बुद्धिमान, किसी भी संदेह से परे, सक्षम और मनोरम हो? क्या कोई ऐसा है जो आत्म-संतुष्ट, क्रोध को वश में करने वाला, ईर्ष्यारहित और अतिसाहसी हो?

 

वस्तुत: वाल्मीकि किसी ऐसे नायक की खोज में थे, जो सभी गुणों से पूर्ण और समस्त दोषों से परे हो।

 

वाल्मीकि द्वारा पूछे गए इन प्रश्‍नों को सुनते ही नारद मुनि समझ गए की वह कौन हैं जिनके पास ये सब गुण है, नारद अपने अंत:करण में झांकने लगे और खुद को इस प्रश्‍न का उत्तर उचित ढंग से प्रस्तुत करने के लिए तैयार करने लगे। नारद के हृदय में ‘इन प्रश्‍नों’ से सम्बन्धित अनेकानेक विचार उत्पन्न होने लगे जो सारे गुणों और विशेषताओं के अथाह सागर थे।

 

नारद मुनि ने ध्यान किया और उसके बाद अपने नेत्रों को खोलते हुए उन्होंने वाल्मीकि जी से कहा कि – वे जिसकी खोज में हैं, जो सभी गुणों से परिपूर्ण हैं, वे अन्य कोई नहीं हैं वे स्वयं भगवान ‘श्रीराम’ ही हैं।

 

इस जगत में प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी नायक की खोज में रहता है, जिसकी वह आराधना कर सके, जिसे अपना आराध्य बना सके। व्यक्ति के द्वारा उस सर्वशक्तिमान की आराधना करना, पूजन करना इन सभी का अर्थ है कि उस इष्ट की छवि को मन में पूरी तरह से बसा लेना और नित्य अपने आदर्श नायक के पदचिन्हों पर चलने का प्रयत्न करना।

 

ऐसा ही आदर्श व्यक्तित्व प्रभु श्रीराम का भी है, जिनके पदचिन्हों पर चलकर प्रत्येक व्यक्ति इस भव सागर को पार कर सकता है। भगवान राम का जीवन आदर्श का प्रतीक है। कहा जाता है कि – जिसने राम को जान लिया उसने सबकुछ जान लिया। श्रीराम का जीवन एक ऐसी किताब है जिस पर हर मानव का अधिकार है।

 

अगर संसार श्रीराम के आदर्श को जीवन में उतार ले तो संसार से भय, युद्ध, लालच, ईर्ष्या, द्वेष, शोषण आदि तमाम बुराईयां समाप्त हो जाएं।

 

मानव जीवन के लिए शिक्षा –

 

आज संसार में कुछ लोग केवल बाह्य-सौन्दर्य को देखकर ही प्रसन्न हो जाते हैं। वे व्यक्ति के मन और विचारों को नहीं देखते, उसकी शारीरिक सुंदरता में ही रम जाते हैं। जो मनुष्य की सबसे बड़ी भूल है जीवन में प्रधानता तो शुद्ध मन और अच्छे विचारों की ही है, यह तन तो एक न एक दिन नष्ट हो जाता है पर विचार की प्रधानता तो बनी रहती है, वह किसी न किसी रूप में झलकती है।

 

जीवन में श्रेष्ठ विचारों का निर्माण श्रेष्ठ चरित्र से ही हो सकता है। भगवान श्रीराम के विचारों को आत्मसात् कर मनुष्य अपना सर्वांगीण विकास कर सकता है। भगवान श्रीराम को आत्मसात् करने का ही एक माध्यम है – श्रीराम वज्र रक्षा कवच

 

भगवान राम के जन्म के पूर्व ‘राम’ नाम का उपयोग ईश्‍वर के लिए होता था अर्थात ब्रह्म, परमेश्‍वर, ईश्‍वर आदि की जगह पहले ‘राम’ शब्द का उपयोग होता था, इसीलिए इस शब्द की महिमा और बढ़ जाती है तभी तो कहते हैं कि राम से भी बढ़कर श्रीराम का नाम है। ‘राम’ शब्द की ध्वनि हमारे जीवन के सभी दुःखों को मिटाने की ताकत रखती है। यह हम नहीं ध्वनि विज्ञान पर शोध करने वाले वैज्ञानिक बताते हैं कि राम नाम के उच्चारण से मन शांत हो जाता।

 

राम रक्षा वज्र (यंत्रराज) कवच धारण करने से –

 

  1. ज्जीवन के सभी मनोरथ पूरे होते हैं।
  2. पूर्वजन्मकृत दोषों एवं पापों का नाश होता है।
  3. आने वाली आपत्तियां स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।
  4. ग्रहकलेश में भी पूर्ण शांति प्राप्त होती है।
  5. मित्रों से मित्रता सुदृढ़ होती है तथा शत्रु भी अनुकूल हो जाते हैं।
  6. संकट के समय राम रक्षा वज्र कवच धारण कर हनुमान मंत्र के साथ इस स्तोत्र का पाठ किया जाये तो अपूर्व बल एवं शक्ति प्राप्त होती है।
इसके अलावा राम रक्षा वज्र कवच की महानता का वर्णन करना ठीक उसी प्रकार होगा जिस प्रकार सूर्य को दीपक दिखाना।

 

गुरुदेव ने तो एक बार अपने प्रवचन में कहा कि ‘जिसके घर में राम-कृष्ण और गुरु का चित्र स्थापित नहीं है वह घर ही श्मशान की भांति है जहां मनुष्य नहीं भूत-प्रेत, पिशाचों का निवास होता है।

 

वास्तव में राम रक्षा वज्र कवच सभी प्रकार की बाधाओं की शांति के लिये तंत्र रक्षा कवच के समान ही फलप्रद है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि यह यंत्र पूर्णतः मंत्र-सिद्ध प्राण प्रतिष्ठायुक्त होना चाहिये।

 

साधना विधान

 

चैत्र नवमीं अर्थात् राम नवमीं अथवा किसी भी शुभ मुहूर्त में अपने पूजा स्थान में प्रातः उत्तर अथवा पूर्व की ओर मुख कर लाल रंग के आसन पर बैठें, सामने श्रीराम का हनुमान सहित चित्र स्थापित हो और इसके पास में गुरुचित्र, गुरु पादुका अथवा गुरु यंत्र स्थापित करें।

 

इसके साथ ही एक थाली में स्वास्तिक बनाकर पुष्प और अक्षत का आसन देकर मंत्रसिद्ध प्राण प्रतिष्ठायुक्त राम रक्षा वज्र कवच स्थापित करें और कवच पर पुष्प अर्पित करें। गुरुचित्र तथा राम के स्वरूप पर माल्यार्पण करें। गुरुचित्र और भगवान श्रीराम के चित्र पर कुंकुम से तिलक करें। भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को तिलक लगायें। स्वयं अपने ललाट पर सिन्दूर का तिलक करें तथा एक हनुमान भक्त के रूप में कवच का पूजन सम्पन्न करना है। पूजन क्रम में सर्वप्रथम गुरु पूजन सम्पन्न करें। दोनों हाथ जोड़कर गुरुदेव निखिल का श्रद्धापूर्वक ध्यान करें –

 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

 

निखिल ध्यान के पश्‍चात् गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को जल से स्नान करावें –

 

ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥

 

इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पंचोपचार पूजन करें –

 

ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।    (धूप, दीप दिखाएं)

 

अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें। इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –

 

ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः

 

गुरु पूजन के पश्‍चात् हनुमान का पंचोपचार पूजन करें और हनुमान पूजन के पश्‍चात् भगवान श्रीराम का पूजन नीचे दी गई विधि अनुसार सम्पन्न करें। सर्व प्रथम न्यास स्वरूप भगवान श्रीराम के सभी अंगों का पूजन करते हुए भगवान श्रीराम के चित्र पर कुंकुम से तिलक करें।

 

अंगन्यास

 

ॐ श्रीरामचन्द्राय नमः, पादौ पूजयामि। (चरणों)
ॐ श्रीराजीववलोचनाय नमः, गुल्फौ पूजयामि। (टखनों)
ॐ श्रीरावणाहन्तकाय नमः, जानुनी पूजयामि। (घुटनों)
ॐ श्रीविश्‍वरूपाय नमः, जङ्घे पूजयामि। (जांघों)
ॐ श्रीवाचस्पतये नमः, उरू पूजयामि। (नितम्ब)
ॐ श्रीलक्ष्मणाग्रजाय नमः, कटिं पूजयामि। (कमर)
ॐ श्रीविश्‍वमित्रप्रियाय नमः, नाभिं पूजयामि। (नाभि)
ॐ श्रीपरमात्मने नमः, हृदयं पूजयामि। (हृदय)
ॐ श्रीकण्ठाय नमः, कण्ठं पूजयामि। (कण्ठ)
ॐ श्रीसर्वास्त्रधारिणे नमः, बाहू पूजयामि। (भुजाओं)
ॐ श्रीरघुद्वहाय नमः, मुखं पूजयामि। (मुख)
ॐ श्रीपद्मानाभाय नमः, जिह्वां पूजयामि। (जिह्वा)
ॐ श्रीदामोदराय नमः, दन्तान् पूजयामि। (दांतों)
ॐ श्रीसीतापतये नमः, ललाटं पूजयामि। (ललाट)
ॐ श्रीज्ञानगम्या नमः, शिरः पूजयामि। (सिर)
ॐ श्रीसर्वात्मने नमः, सर्वाङ्गं पूजयामि। (सभी अंगों)

 

इसके पश्‍चात् दोनों हाथ जोड़कर ध्यान करें –

 

श्रीराम गोविन्द मुकुन्द कृष्ण
श्रीनाथ विष्णो भगवन्नमस्ते।
प्रौढारिषड् वर्ग महाभयेभ्यो
मां त्राहि नारायण विश्वमूर्ते॥
हे श्रीराम, गोविन्द, मुकुन्द, कृष्ण, श्रीनाथ, विष्णो, भगवन्! आपको नमस्कार है। हे विश्वमूर्ति – विश्वरूप नारायण! आप काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ और मत्सर रूपी प्रबल शुत्रओं के भीषण भय से मेरी रक्षा कीजिये।

 

ध्यान के पश्‍चात् निम्न मंत्र का एक माला जप करें –

 

॥ ॐ रां रामाय नमः॥

 

मंत्र जप के पश्‍चात् लाल धागे में पिरोकर इस यंत्र को धारण करें तथा हर समय इसे धारण किये रहें। यह कवच शिष्य के लिये एक राम वरदान है। जो हर समय उसकी रक्षा करता रहता है।

 

कवच धारण करने के पश्‍चात् साधक को माह में एक बार ‘राम रक्षा स्तोत्र’ का पाठ अवश्य ही सम्पन्न करना चाहिए। इस दिव्य स्तोत्र का पाठ तो प्रत्येक शिष्य साधक को सम्पन्न करना ही चाहिए।

 

वास्तव में राम रक्षा कवच जीवन का वह वरदान है जो दुर्लभ व्यक्तियों को ही प्राप्त होता है और यह भी सत्य है कि यह कवच केवल गुरु कृपा से ही प्राप्त हो सकता है। इसे धारण करने के पश्‍चात् कुछ ही दिनों में मुख मण्डल पर एक विशेष ताजगी तथा आभा आ जाती है। इसके बारे में अधिक लिखना अनिवार्य नहीं है। यह तो धारण करने के पश्‍चात् ही जान सकते हैं लेकिन यह भी सत्य है कि राम के समान प्रत्यक्ष देव को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।

 

शुभ मुहूर्त में पत्रिका कार्यालय में गुरुदेव के निर्देश में सीमित संख्या में ‘राम रक्षा वज्र कवच’ का निर्माण किया गया है प्रत्येक कवच मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त है और आपको दिये गये पूजन विधान के अनुसार पूजा करने के बाद इसे गले में धारण करना है। यह कवच वास्तव में रक्षा, समृद्धि और वृद्धि का महान् कवच है और  इसे धारण कर साधक हनुमान की भांति निडर, बलशाली, कार्यशील हो जाता है।

 

राम रक्षा कवच – 1500/-
5 April 2017

Ram Navami

Ram Raksha Vajra Kavach

Protection Everywhere – Victorious Everywhere

Glory Everywhere – Fortune Everywhere

Wear – Chant – Anusthaan

 

The great poet Valmiki questioned sage Narada before composing Ramayana, How can a human achieve all-round development? Next he asked – Is there any person in this world, who is both powerful and virtuous, adheres to the rules, is truthful, determined and compassionate as well? One who has strong character, highly enthusiastic, is ever-willing for everyone’s welfare, is intelligent, beyond any confusion-doubt, is fully capable and lovable? Is there anyone who is self-satisfied, has conquered anger, is devoid of jealousy and is extraordinary brave?

Actually, Valmiki was in search of a hero who has all types of abilities-capabilities, and is beyond all kinds of faults or defects.

After listening to these questions asked by Valmiki, Narada Muni immediately identified the one who possesses all these noble qualities.  Narada started looking within his own self and started to prepare himself to provide a presentable response. Numerous thoughts related to ‘these questions’ started arising in Narada’s heart about the depth of all these noble qualities and characteristics.

Narada Muni meditated and after opening his eyes he replied to Valmikiji that – The one whom you seek, one who has all these noble attributes, is none other than Lord “Shree Ram” Himself.

In this world, every person seeks a role-model in his life, whom he can worship and admire. The worship and prayers to that Almighty by the person  involves imbibing complete image of that divine being into his own self, and to endeavour to fully follow the footsteps of the ideal.

Lord Shree Ram is one such ideal personality, and any person can cross this world by following His footsteps. The life of Lord Ram is a symbol of noble ideal. It is said that – one who understands Ram, he comprehends  everything. The life of Shree Ram is a book to which every human has equal right to study and follow.

If this world follows the ideals of Shree Ram within the life, then all the evils of fear, war, envy, jealousy, exploitation etc. will end from the world.

 

Learnings for the human life –

Today, some people in this world become happy after seeing only the  external beauty. They do not study the persons’ mind and thoughts, rather they get immersed within the physical beauty only. This is the biggest mistake of man. The primary emphasis in life should be placed on pure mind and good thoughts, this body will eventually get destroyed one day. However the primacy of the thoughts stays immortal, they appear in one or the other form.

The perfect thoughts in life can only created through an ideal noble character. A person can attain all-round development by assimilating the thoughts-attributes of Lord Shree Ram. The sole medium of realizing Lord Shree Ram is – Shree Ram Vajra Raksha Kavach.

The word “Ram” was used to signify Almighty before birth of Lord Ram. The word Ram used to be used in place of Brahma, Almighty or God. Therefore, the glory of this word is magnificent. It is said that the word Shree Ram is more glorious then Lord Ram Himself. The vibration of the word “Ram” has the strength to eradicate all sorrows from our life. The audio researchers have also stated that the mind attains peaceful calm state upon uttering the word Ram.

The benefits of wearing the Ram Raksha Vajra (Yantra-raj) Kavach are –

* All wishes of the life get fulfilled.

* All sins and faults of previous lives get destroyed.

* The upcoming obstructions automatically terminate.

* The domestic life becomes peaceful and harmonious.

* The relationships with friends strengthen and the enemies also become favourable.

* One attains immense strength and power if one chants this Stotra (wearing Ram Raksha Vajra Kavach) along with Hanuman Mantra in times of grave crisis.

Moreover, describing the greatness of Ram Raksha Vajra Kavach will be similar to demonstrating the capabilities of a simple lamp to Sun.

Gurudev had once stated in His sermon that “A house which does not have a photo-picture of Ram-Krishna and Guru, is akin to a cremation-cemetery, where ghosts-ghouls and vampires dwell instead of humans.

In reality, the Ram Raksha Vajra Kavach is as potent as Tantra Raksha Kavach to eradicate all kinds of obstacles. The only requirement is that this Yantra should be fully Mantra consecrated and Prana-enlivened.

 

Sadhana Procedure

In the morning of Cheitra Navami i.e. Ram Navami, or on any other auspicious muhurath, sit facing North or East direction on a Red asana-seat in your worship place. Place a picture of Lord Ram along with Lord Hanuman, and place Guru-picture, Guru-Paduka or Guru-Yantra near it.

Draw a Swastik on a plate, make a seat of flowers and Akshat-rice on it and set up the Mantrasiddha Prana Pratisthayukt Ram Raksha Vajra Kavach on this seat. Offer flowers to the Kavach. Offer Flower-garlands to Guru-picture and Lord Ram picture. Make a tilak-mark on Guru-picture and Lord Ram with kumkum (vermillion). Make a tilak-mark on Hanuman, the eternal devotee of Lord Shree Ram. Make a mark of tilak on your own forehead, and the worship of this Kavach has to be performed in the form of a Hanuman-devotee.

 

First perform Guru worship. With folded hands, meditate on the divine form of Gurudev Nikhil –

GururBrahmaa GururVishnuH Gururdevo MaheshwaraH |

GuruH Saakshaat Par Brahmaa Tasmei Shree Guruve NamaH ||

 

Bathe the Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka with water after Nikhil meditation –

Om Nikhilam Snaanam Samarpayaami ||

 

Then wipe with a clean cloth. Perform Panchopchaar worship-poojan with Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken rice), Pushpa (Flowers), Neivedh (Sweets/Fruit offering), Dhoop (Incense) – Deep (Lamp); chanting following mantras –

Om Nikhilam Kumkum Samarpayaami |

Om Nikhilam Akshtaan Samarpayaami |

Om Nikhilam Pushpam Samarpayaami |

Om Nikhilam Neivedhyam Nivedayaami |

Om Nikhilam Dhoopam Aardhyaapayaami, Deepam Darshayaami |

(Show Dhoop, Deep)

 

Now rotate three Achmaani (spoonful) water around the  Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka and drop it on ground. Then chant 1 rosary-round of Guru Mantra with Guru Mala –

Om Param Tatvaaya Naaraayanaaya Gurubhayo Namah

 

After Guru-poojan worship, perform Panchopchaar-poojan worship of Lord Hanuman. After completing Lord Hanuman worship, perform poojan-worship of Lord Shree Ram as per the procedure detailed below. First, make a tilak-mark on Lord Shree Ram picture after worshipping all body-organs of Lord Shree Ram through Nyaasa.

 

Angnyaasa

Om Shreeramachandraaya NamaH, Paadou Poojyaami | (Feet)

Om Shreerajeevavalochanaaya NamaH, Gulfou Poojyaami |  (Ankles)

Om Shreeravanaahantakaaya NamaH, Jaanooni Poojyaami  | (Knees)

Om Shreevishwaroopaaya NamaH, Janghei Poojyaami  | (Thighs)

Om Shreevaachaspataye NamaH, Uroo Poojyaami  | (Buttocks)

Om Shreelakshmanaagrajaaya NamaH, Katim Poojyaami  | (Waist)

Om Shreevishwamitrapriyaaya NamaH, Naabhim Poojyaami  | (Navel)

Om Shreeparamaatmanei NamaH, Hridyam Poojyaami  | (Heart)

Om Shreekanthaaya NamaH, Kantham Poojyaami  | (Neck)

Om Shreesarvaastradhaarinei NamaH, Baahu Poojyaami |  (Shoulders)

Om Shreeraghudavhaaya NamaH, Mukham Poojyaami  | (Face)

Om Shreepadmanaabhaaya NamaH, Jiwhaam Poojyaami  | (Tongue)

Om Shreedaamodaraaya NamaH, Dantaan Poojyaami  | (Teeth)

Om Shreeseetaapatayei NamaH, Lalaatam Poojyaami  | (Forehead)

Om Shreegyaangamyaa NamaH, ShiraH Poojyaami  | (Head)

Om Shreesarvaatmane NamaH, Sarvaangam Poojyaami  | (All organs)

 

Thereafter meditate with folded hands –

Shreeram Govinda Mukunda Krishan

Shreenath Vishnou Bhagwannmastyei |

Proudhaarishad Varga Mahaabhayeibhyou

Maam Traahi Naaraayan Vishwamoortei ||

 

O Shree Ram, Govind, Mukund, Krishna, Sreenath, Vishnou, Bhagwan! Greetings to you. O Vishwamurti – Vishwaroop Narayan! Protect me from the terrible enemies like lust, anger, pride, attachment, greed and jealousy.

 

After meditation, chant a rosary-round of the following mantra –

|| Om Raam Raamaay NamaH ||

 

After completion of mantra chanting, wear this Yantra after tying it with a read thread, and you should wear this Yantra at all times. This Kavach is a boon from Lord Ram to the disciple. This will provide protection to him at all times.

After wearing the Kavach, the Sadhak should chant complete “Ram Raksha Stotra” at least once every month. Every disciple-Sadhak should certainly chant this divine Stotra.

In reality, Ram Raksha Kavach is a boon, which only some rare people attain. It is also true that this Kavach can be received only through Guru’s grace. One’s face becomes radiant and ever-fresh after wearing this Kavach for a few days. It is not necessary to write anything more about it. You can realize it only after wearing it, but it is also true that there is no need to certify a direct God like Lord Ram.

The magazine office has prepared only a limited number of “Ram Raksha Vajra Kavach” articles  through Gurudev’s guidance-instructions in auspicious muhuraths. You will need to wear this around your neck after completing the worship-poojan. This Kavach is in fact a magnificent armour of protection, prosperity and development-growth and the Sadhak becomes fearless, powerful and dynamic like Lord Hanuman after wearing it.

Ram Raksha Kavach – 1500/-

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