Navagrah Damanak Prayog

नवग्रह दमनक प्रयोग

 

हर व्यक्ति को नवग्रह दमनक प्रयोग अवश्य ही करना चाहिए, क्योंकि अगर ग्रह अनुकूल हों, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में से भी व्यक्ति बिना किसी क्षति के निकल जाता है। परेशानियां फिर भी आती हैं, जीवन है ही परेशानियों और बाधाओं का नाम परन्तु व्यक्ति उनसे घबराता नहीं है और डटकर उनका सामना करता हुआ निरन्तर उच्चता और उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता रहता है।

 

 फिर युद्ध पर जाना हो, व्यापार में संलग्न होना हो, विवाह हो, परीक्षा हो, हर स्थिति में ग्रहों की अनुकूलता आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है और उसके लिए सर्वोच्च उपाय है, यह नवग्रह दमनक प्रयोग।

 


ब्रह्माण्ड गतिशील है और गुरुत्वाकर्षण की वजह से सभी आकाशीय पिण्ड एक दूसरे के निकट आते अथवा दूर जाते हैं, इस प्रकार ग्रहों का पारस्परिक सम्बन्ध बनता है, जो पृथ्वी के निवासियों पर अपना प्रभाव डालता है। इसी कारण ग्रहों और मनुष्यों का परस्पर सम्बन्ध है।

 

आकाश मण्डल में जितने भी ग्रह हैं उन सभी का मानव जीवन पर प्रभाव पड़ता है और आकाश मण्डल में ग्रहों की स्थिति और उनकी गति के कारण मनुष्य जीवन प्रभावित होता है क्योंकि व्यक्ति भी इस ब्रह्माण्ड का एक हिस्सा है और उसका निर्माण पंचतत्वों से हुआ है इसीलिये हमारे ॠषि मुनियों ने ‘यथा पिण्डे यथा ब्रह्माण्डे’ सिद्धान्त का उद्घोष किया।

 

जन्म कुण्डली और मनुष्य

 

व्यक्ति का जब जन्म होता है उस समय आकाश मण्डल में ग्रहों की स्थिति का विवरण ही जन्म कुण्डली कहलाता है अर्थात् जन्म कुण्डली आकाशीय मण्डल का नक्शा है।

 

जन्म कुण्डली का आधार 12 राशियां 27 नक्षत्र और 9 ग्रह एवं 12 लग्न हैं। जिनके द्वारा गणना करने से भविष्य फल पता चलता है, जन्म के समय ग्रहों की स्थिति के अनुसार वे व्यक्ति पर शुभ एवं अशुभ प्रभाव डालते हैं।

 

पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है और एक वर्ष में पूरा एक चक्कर काटती है, इस चक्कर वाले रास्ते को भू चक्र कहते हैं इस भू चक्र को ज्योतिषियों ने 12 भागों में बांटा जिसे जन्म कुण्डली में भाव कहा जाता है।

 

ग्रह फल और उसका निदान

 

यह नवग्रह व्यक्ति पर अपना निश्‍चित रूप से शुभ एवं अशुभ प्रभाव डालते हैं, इन ग्रहों के अशुभ प्रभाव से अवतारी व्यक्ति भी नहीं बच सके। केवल मंत्र साधना द्वारा इनके प्रभाव को न्यून किया जा सकता है। कुछ ज्योतिषी हर व्यक्ति को रत्न धारण करने की सलाह देते हैं उनके इस विचार से मैं पूर्णतया सहमत नहीं हूं ज्योतिष का ज्ञान सागर के समान है जिसमें गोते लगाने वाले व्यक्ति को नित नये अनुभव और ज्ञान प्राप्त होते हैं। नौ ग्रहों में से प्रत्येक ग्रह व्यक्ति पर कुछ शुभ और कुछ विपरीत प्रभाव डालता है।

 

यदि कोई ग्रह आपकी जन्म कुण्डली में अशुभ स्थान पर बैठा है तो उसको अपने अनुकूल करने के लिये आप उसका रत्न धारण नहीं कर सकते जबकि कुछ लोग हर ग्रह के लिये रत्न धारण करने की सलाह देते हैं जो उपयुक्त नहीं है। उदाहरण के लिए यदि कोई आपका शत्रु है और आप उसके हाथ में बन्दूक देंगे तो वह तो आपको ही समाप्त कर देगा। उस व्यक्ति को अपने अनुकूल करने के लिये आपको उसकी सोच, आपके प्रति उसके विचार बदलने होंगे, इसी प्रकार ज्योतिष में भी विपरीत ग्रहों को रत्न धारण करके बलवान नहीं बनाते हैं बल्कि मंत्र साधना द्वारा आप ग्रहों को अनुकूल कर सकते हैं। यदि आपका कोई पड़ोसी आपके प्रति विपरीत विचार रखता है किन्तु आप प्रति दिन उसके प्रति सकारात्मक भाव रखें तो एक दिन उसका नजरिया आपके प्रति अवश्य बदल जाता है, इसी प्रकार यदि कोई ग्रह आपके शत्रु भाव में है तो प्रतिदिन आप उस ग्रह का मंत्र जप करके उसे अपने अनुकूल बना सकते हैं।

 

साधना विधान

 

नवग्रह शांति जीवन में भाग्योदय के द्वार खोलती है। इसी कारण प्रत्येक पूजन, यज्ञ के पूर्व नवग्रह शांति पाठ सम्पन्न किया जाता है। नवग्रह शांति से ग्रहों के कुप्रभावों से बचा जा सकता है, पारिवारिक जीवन में आने वाली बाधाओं से छुटकारा मिलता है और जीवन में उन्नति के नये आयाम खुलते हैं। ग्रहों की अनुकूलता से लक्ष्य को पाने में असफल व्यक्ति भी जल्द ही लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है।

 

इस साधना को किसी भी शुभ मुहूर्त (सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, द्विपुष्कर, त्रिपुष्कर, पुष्य, गुरु पुष्य या अमृत योग) में सम्पन्न किया जा सकता है। यह साधना प्रातः काल में सम्पन्न करनी चाहिए। साधना करने से पूर्व ही अपने पूजा स्थान को साफ स्वच्छ कर लें। साधना स्थल का वातावरण सुगंधित एवं आनन्दमय होना चाहिए।

 

साधक सफेद वस्त्र धारण कर उत्तराभिमुख होकर अपने पूजा स्थान में सफेद आसन पर बैठ जाएं और अपने सामने बाजोट स्थापित कर उस पर श्‍वेत वस्त्र बिछा लें।

 

सर्वप्रथम बाजोट पर गुरु चित्र स्थापित करें और गुरुदेव का पंचोपचार पूजन सम्पन्न कर गुरुदेव से साधना में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त करें।

 

गुरु चित्र के सामने ही एक ताम्र पात्र में सफेद पुष्प की पंखुड़ियों का आसन देकर ‘नवग्रह यंत्र’ स्थापित कर लें तथा धूप, दीप (घी का) प्रज्वलित कर लें।

 

इसके पश्‍चात् नवग्रह यंत्र का विशिष्ट पूजन सम्पन्न करें। इस पूजन में नवग्रह (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु)  के सौम्य मंत्रों से नवग्रह यंत्र का पूजन किया जाता है। प्रत्येक मंत्र का 3 बार जप करते हुए नवग्रह यंत्र का पूजन कुंकुम, अक्षत एवं पुष्प से करें। वे मंत्र इस प्रकार हैं –

 

सूर्य  –  ॥ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः॥
चन्द्र  – ॥ ॐ ऐं क्लीं सोमायै नमः॥
मंगल  – ॥ॐ हुं श्रीं मंगलाय नमः॥
बुध  – ॥ॐ ऐं स्त्रीं श्री बुधायै नमः॥
गुरु  – ॥ॐ ऐं क्लीं बृहस्पत्यै नमः॥
शुक्र  – ॥ॐ ह्रीं श्रीं शुक्रायै नमः॥
शनि  – ॥ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्‍चरायै नमः॥
राहु  – ॥ॐ ऐं ह्रीं राहवे नमः॥
केतु  – ॥ॐ केतवे ऐं सौ स्वाहा॥

 

नवग्रह मंत्रों से नवग्रह यंत्र पूजन के पश्‍चात् नवग्रह माला से निम्न नवग्रह मंत्र की 11 माला जप करें –

 

नवग्रह मंत्र

 

॥ ॐ श्रीं क्लीं सूर्य चन्द्र भौम बुध गुरु शुक्र शनीश्‍चराय राहु केतु मुंथा सहिताय क्लीं नम:॥

 

मंत्र जप के पश्‍चात् नवग्रह यंत्र एवं माला को सुरक्षित स्थान पर रख दें तथा शेष सामग्री को जल में विसर्जित कर दें। इस साधना में साधक को 10 दिन तक नित्य नवग्रह माला से उपरोक्त नवग्रह मंत्र का 11 माला जप करना चाहिए। इस प्रकार इस साधना में उपरोक्त मंत्र की 121 माला का जप बताया गया है। मूल साधना के पश्‍चात् नित्य क्रम में अपने सामने यंत्र स्थापित कर केवल मंत्र जप सम्पन्न करना बताया गया है।

 

आप 121 माला मंत्र जप अपनी सुविधानुसार भी सम्पन्न कर सकते हैं। 121 माला मंत्र जप के पश्‍चात् नवग्रह यंत्र को अपनी ऑफिस की टेबल अथवा व्यापार स्थल पर रखें।

 

मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठायुक्त नवग्रह यंत्र बहुत ही शक्तिशाली यंत्र है। यह आपके और ग्रहों के बीच सामंजस्य स्थापित कर आपके दैनिक जीवन में आ रही समस्याओं का समाधान करता है। प्रतिदिन इसके दर्शन मात्र से ही लोगों के जीवन में अनुकूलता आने लग जाती है। यह नवग्रह दमनक अति तीक्ष्ण एवं अद्वितीय प्रयोग है तथा इसके फलस्वरूप जीवन की सब बाधाएं, कष्ट, व्याधियां, पीड़ा आदि हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं और जीवन सफलता, आनन्द, हर्ष, सुख, प्रेम और दिव्यता की निरन्तर बहती धारा बन जाता है।

 

इस साधना को वर्ष में दो बार तो अवश्य ही सम्पन्न कर लेना चाहिए। साधना से पूर्व आपके पास जो नवग्रह यंत्र हो, उसे जल में विसर्जित कर दें तथा नवीन ऊर्जा से संचरित नवीन नवग्रह यंत्र का पूजन कर उसे अपने पूजा स्थान में स्थापित कर लें।

 

प्राण प्रतिष्ठा न्यौ. – 470/-

Navagraha Damanak Prayog

Every person should accomplish Navagraha Damanak (Subdue) Prayog, as favorable planets facilitate a person to emerge out unscathed from difficult circumstances and situations. Difficulties are ever-present. Difficulties and Problems are synonymous with life. However, this Prayog enables the person to face them heads-on without any undue panic, and facilitates progress ahead towards success and elevation.

The benefic aspects of planets is mandatory to fight battles, grow business, marriage or studies. This Navagraha Subdue Prayog is the best solution to achieve this benefic state.  


This vast universe is full of dynamic energy. All celestial bodies either attract or repel each other due to gravitational forces. This interactive relationship among planets casts impact on the inhabitants of the earth. This is the basic connection between humans and planets.

All planets in the galactic universe impact human life. The pace and position of  the planets in the sky affects human life, as the humans composed of five-elements, are an important part of this universe. This led our ancient sages to expound the principle of “Yathaa Pinde Yathaa Brahmaande“.

 

Horoscope and Human life

The detailed position of the planets in the universe at the instant of a person’s birth is called as the horoscope. Thus horoscope is a basic mapping of the galactic planets.

The basic elements of the horoscope are 12 Zodiacs, 27 Constellations, 9 Planets and 12 Ascendants. The future can be predicted by calculating these aspects. The relative positions of planets at the time of birth decides their benefic or malefic impact on the person.

The earth revolves around the Sun and completes one single revolution in a year. This path of revolution is called Bhu-Orbit, which has been divided into 12 parts by astrologers. Each of these parts is known as Bhaav (or house) in horoscope.

 

Planetary Impact and its Cure

This Navagraha (Nine Planets) definitely cast auspicious and inauspicious impact on the person. Even  incarnated souls could not escape the malefic effect of these planets. Their impact can be reduced only through Mantra Sadhana. Some astrologers advice everyone to wear specific stones. I do not agree with this idea of wearing stones. The depth of astrological sciences is as deep as the ocean, and each dive bestows novel experiences and pearls of wisdom. Every Planet from this Navagraha group casts benefic and malefic impact on the person.

You cannot wear a gem-stone to counter a planet placed at an inauspicious location in your horoscope. The recommendation to wear a gem-stone for each planet is basically flawed. For example if you give a gun to your enemy, then he will certainly shoot you. You need to transform that person’s thoughts and mindset to make him favorable to you. Similarly, one doesn’t gain success in astrology just by wearing gem-stones of the foe planets.  You can make these planets favorable through Mantra Sadhana. One can transform the adverse mindset of a neighbor by positive actions and thoughts. Similarly you can chant the specific Mantra daily to transform a foe planet into a favorable one.

 

Sadhana Procedure

The Navagraha harmony opens the doors of fortune in life. Hence Navagraha Shanti (Harmony) Path is performed at the start of every worship or Yagna. Navagraha Harmony protects us from the malefic impacts of the planets, resolves the upcoming problems of family life and opens new avenues of success in life. Even an unsuccessful person quickly achieves his goal through favorable aspects of planets.

This sadhana can be accomplished in any auspicious muhurath timeslot (Siddhi Yoga, Sarvartha Siddhi Yoga, Dwipushkar, Tripushkar, Pushya, Guru Pushya or Amrit Yoga). This sadhana should be performed in the morning hours. Clean and purify your worship place  before starting the Sadhana. The basic  atmosphere of sadhana place should be fragrant and pleasant.

Seekers should wear white clothes and sit on a white asana-seat facing North direction in his worship place. Setup a wooden board in front of you and spread a white cloth on it.

First, setup Guru-Picture on the Wooden board and obtain blessings from Revered Gurudev for success in Sadhana by performing  Panchopchaar Guru poojan.

Make a bed of petals of white flowers on a copper plate in front of Guru picture and setup “Navagraha Yantra” on it. Light Dhoop (incense) and Deepak Lamp (Ghee).

Thereafter perform special worship of Navagraha Yantra. In this, the Navagraha Yantra is worshipped through Gentle Mantras of Navagraha (Sun, Moon, Mars, Mercury, Jupiter, Venus, Saturn, Rahu, Ketu). Worship Navagraha Yantra by chanting each below mantra three times, offering Kunkum, Akshat and Flowers. These Mantras are:

 

Sun – || Om Hreem Hreem Suryaaya NamaH ||

Moon – || Om Ayeim Kleem Somaayei NamaH ||

Mars – || Om Hoom Shreem Mangalaaya NamaH ||

Mercury –  || Om Ayeim Streem Shree Budhaayei NamaH  ||

Jupiter –  || Om Ayeim Kleem Brihaspatyei NamaH  ||

Venus –  ||Om Hreem Shreem Shukraayei NamaH ||

Saturn –   || Om Ayeim Hreem Shreem Shaneishcharaayei NamaH ||

Rahu –  || Om Ayeim Hreem Raahave NamaH ||

Ketu –  || Om Ketave Ayeim Sou Swaahaa ||

 

After completion of worship of Navagraha Yantra with Navagraha Mantras, chant 11 malas of following Navagraha Mantra with Navagraha Rosary –

 

Navagraha Mantra

 

|| Om Shreem Kleem Surya Chandra Bhoma Budha Guru Shukra Shaneeshcharaaya Raahu Ketu Munthaa Sahitaaya Kleem NamaH ||

 

After completion of Mantra chanting,  place the Navagraha Yantra and Rosary in a  safe place and immerse the remaining Sadhana materials in running water. The Sadhak should chant 11 Malas of the above Navagraha Mantra with Navagraha Rosary daily for 10 days in this Sadhana. Thus one completes 121 malas of this Mantra in this Sadhana. After completion of the main Sadhana, you should chant the Mantras keeping only the Yantra setup in front of you.

You can complete these 121 mala Mantra chanting as per your own convenience. Setup the Navagraha Yantra on your office table or in your business premises after completion of 121 mala mantra chanting.

This Mantra consecrated sanctified enlivened Navagraha Yantra is a very powerful Yantra. It established harmony between you and your planets, and resolves the problems occurring in your daily life. The life takes a favorable turn just at the daily view of this Yantra. This Navagraha Damanak is a highly intensive and unique sadhana practice and it eradicates all kinds of problems, troubles, pains and sufferings from the life for ever, making life full of a pleasant stream of  success, joy, pleasure,  happiness, love and divinity..

This Sadhana practice should be definitely accomplished twice in a year. Immerse your old Navagraha Yantra in running water before starting the Sadhana. Setup new energized fresh Navagraha Yantra in your worship-place after proper worship.

Consecrated Sanctified Sadhana Materials –  470 / –

 

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