MahaKaal Sadhana

महाकाल साधना
महाकाल अर्थात् सर्वत्र विजय
महाकाल अर्थात् समस्याओं का शमन
महाकाल अर्थात् रोग-शोक का नाश

 

हर माह मासिक शिवरात्रि, प्रदोष अर्थात् किसी सोमवार को संकल्प लेकर महाकाल साधना अवश्य करें। अपने जीवन में महाकाल का स्वागत करें, जो पूर्णता प्रदान करने वाले महादेव हैं…

 

‘काल’ का अर्थ मृत्यु नहीं है, काल तो जीवन को एक क्षण में ही पूर्णता दे सकता है, सफलता दे सकता है, बशर्ते एक स्फुर्ल्लिंग हो, एक चिंगारी हो, कुछ कर गुजरने की क्षमता हो। संसार में महाकाल साधना से ऊंची कोई साधना ही नहीं है। यह अद्वितीय साधना है, श्रेष्ठतम साधना है।

 

वैसे शरीर समाप्त होना ही है, काल का भक्ष्य बनना ही है, आपके जीवन की गति वही है। …परन्तु यदि उससे बचना है, तो महाकाल साधना करनी ही पड़ेगी।

 

नेगेटिव साइड आप सोचेंगे, तो कोई रोक नहीं सकता आपको बल्कि आप तो दु:खी हैं ही, आपके साथ जो बैठेंगे, वे भी दु:खी हो जाएंगे। समाज में ऐसे सैकड़ों हैं और कहीं दूर नहीं, आपके अपने परिवार में, सम्बन्धियों में, रिश्तेदारों में आपको ऐसे लोग बहुसंख्या में मिल जाएंगे। जब आप बहुत प्रसन्नता और प्रफुल्लता से भरे हों, तो बैठिए पांच मिनट उनके पास और वे कहेंगे कि –  ˆ

 

‘‘सब बेकार है! कहां भटक रहा है, कुछ नहीं है। मेरे बेटे कपूत हो गए। बहू कहना नहीं मानती, पत्नी भी बदल गई, पैसा आया नहीं…’’ जीवन का इसके अलावा उनका चिन्तन ही नहीं है और उनके पास बैठेंगे, तो आप भी वैसे ही बन जाएंगे।

 

ऐसे जीवन नहीं चल सकता। यह जीवन है ही नहीं.. भौतिकता और अध्यात्म दोनों में पूर्णता प्राप्त करना ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए।

 

भौतिकता में पूर्ण धन, मान, यश, प्रतिष्ठा, पद प्राप्त करें। बीच में अन्धकार का पक्ष जीवन में आता है, आर्थिक प्रगति रुक जाती है मगर वे क्षणिक हैं! परीक्षा मात्र होती हैं। यह देखने का क्षण होता है, कि संयम है या नहीं, कहीं पांव तो नहीं लड़खड़ा रहे।

 

…और जीवन में आध्यात्मिकता भी हो। गुरु के पास बैठना, सर्वजनहितार्थ निर्माण करना, जन सेवा करना ये आध्यात्मिकता के पक्ष हैं। दोनों प्रकार से पूर्णता प्राप्त करने पर यदि जीवन पूर्ण हो तो वह अत्यन्त सुखदायक होता है। इसलिए महाकाल की साधना आवश्यक है।

 

महाकाल साधना के अलावा और कोई ऐसी साधना नहीं, जिससे जीवन के सभी नेगेटिव आयाम अनुकूल बन जाएं। इसलिए महाकाल को महादेव माना गया है।

 

महाकाल साधना जीवन की श्रेष्ठ साधना कही ही इसलिए जाती है, कि जीवन की जो भी न्यूनता हो – धन की, यश की, मान की, पद की, प्रमोशन की, व्यापार की, परिवार की, पति-पत्नी की, पुत्र-पुत्रियों की, शत्रुता की, शादी में विलम्ब की, कोर्ट की, कचहरी की, मकान की, जायदाद की उनका समाधान इस तीक्ष्ण साधना के द्वारा संभावित हल ही नहीं, निश्‍चित हल प्राप्त होता है।

 

जीवन में जितनी इच्छाएं आप बढ़ाएंगे, तो समस्याएं उसी अनुपात में बढ़ेंगी ही। व्यापार में सौ झंझट होते हैं इन्कम टैक्स, सेल्स टैक्स और न जाने क्या-क्या परन्तु भय खाने से कुछ नहीं होगा और न ही मैं यह कहता, कि इच्छाएं न हों। हों, परन्तु पुरुषार्थ भी हो, ताकि उनका सामना कर सकें, उन पर विजय प्राप्त कर सकें और हम उन पर हावी हो सकें, बजाय इसके कि वे हम पर हावी हो जाएं।

 

इच्छाएं नहीं होंगी, तो जीवन पशुवत् हो जाएगा। गाय, भैंस को इच्छा नहीं होती कोई। जो मिल गया, उसी में सन्तुष्ट। परन्तु मानव सर्वथा नवीनता और उच्चता की ओर अग्रसर होना चाहता है। मानव यानि नित्य नवीनता और इसके लिए संघर्ष तो करना ही पड़ेगा। प्रगति भी तभी होती है जब इच्छा हो, कामना हो, तभी समाज और राष्ट्र और व्यक्ति प्रगति कर सकते हैं।

 

क्यों आप दरिद्र रहें? क्यों आपके जीवन में अभाव रहें? क्यों दब कर रहें, डर कर रहें? इनको जीवन में समाप्त करना ही होगा और वह होगा प्रयास द्वारा, पुरुषार्थ द्वारा, संयम द्वारा।

 

तो जो भी आवश्यक इच्छाएं हैं, पॉजीटिव कामनाएं हैं, वे पूरी होनी ही चाहिए। इसलिए महाकाल साधना की जाए ताकि भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से, सफलता और पूर्णता प्राप्त हो।

 

यह महाकाल की साधना पहले मैंने स्वयं सिद्ध की है, शिष्यों को कराई है और इसलिए दमखम के साथ कह सकता हूं, कि साधना करिए आपको सफलता मिलेगी, यदि आप साधना करें तो श्रद्धा के साथ सम्पन्न करें… श्रद्धा नहीं तो सब व्यर्थ है। इष्ट और गुुरु के प्राणों से जुड़ने की क्रिया है महाकाल साधना।

 

साधना विधान

 

महाकाल साधना बहुत विशिष्ट प्रयोग है। महाकाल साधना मासिक शिवरात्रि, प्रदोष से अथवा सोमवार की रात्रि से ही आरम्भ करनी चाहिए। इसके लिए प्राणप्रतिष्ठा युक्त ‘महाकाल यंत्र’ और ‘काली हकीक माला’ आवश्यक है।

 

स्नान आदि करके दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। अपने सामने एक बाजोट पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर गुरु चित्र स्थापित करें। गुरु चित्र पर कुंकुम से तिलक करें तथा साधना में सफलता की कामना करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्पमाला, धूप, दीप, नैवेद्य इत्यादि से संक्षिप्त पूजन सम्पन्न करें। इसके पश्‍चात् एक थाली में कुंकुम से त्रिभुज (ी) बनाकर उसके मध्य में एक बिन्दी लगाएं। इस त्रिभुज के मध्य में पुष्पों का आसन देकर ‘महाकाल यंत्र’ को स्थापित करें। यंत्र का पूजन कुंकुम, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप इत्यादि से सम्पन्न करें।

 

उसके पश्‍चात् साधक अपनी समस्याओं के समाधान हेतु दृढ़ निश्‍चय होकर अपनी समस्या भगवान महाकाल को मानसिक रूप से बता दें और प्रार्थना करें कि उसकी समस्या जड़ सहित समाप्त हो जाए। इसके पश्‍चात् साधक अपने हाथ में जल लेकर निम्न संकल्प लें कि –

 

ॐ विष्णु र्विष्णु र्विष्णुः श्रीमद्भगवतो विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अस्य ब्रह्मणो द्वितीय परार्द्वे श्‍वेत वाराह कल्पे जम्बूद्वीपे भरतखंडे आर्यावर्तै देशान्तर्गते पुण्य क्षेत्रे कलियुगे, कलि प्रथम चरणे अमुक गोत्रोत्पन्नोऽहं (अपना गौत्र बोलेंें) अमुक शर्माऽहं (अपना नाम बोलेंें) अमुक कामना (कामनाओं या इच्छाओं का नाम लें) सिद्वयर्थं साधना करिष्ये।

 

ऐसा बोलकर जल जमीन पर छोड़ दें।

 

तत्पश्‍चात् निम्न मंत्र की काली हकीक माला से 21 माला जप करें। महाकाल साधना 7 दिवसीय साधना है, प्रत्येक दिन गुरु पूजन के पश्‍चात् मंत्र जप सम्पन्न करना है।

 

मंत्र
॥ ॐ कं कां कालपुरुषाय महाकालाय फट्॥
सात दिन साधना को पूर्णता के साथ सम्पन्न करने के पश्‍चात् यंत्र और माला को नदी अथवा तालाब में प्रवाहित कर दें। इस प्रकार यह साधना सम्पन्न होती है।

 

साधना की पूर्णता के पश्‍चात् आप स्वयं जांच सकते हैं कि आपकी समस्या का समाधान हुआ या नहीं, आप पल-प्रतिपल समस्या के समाधान को होते स्वयं देख सकते हैं। जरूरत है तो मात्र धैर्य और विश्‍वास की।

 

और आप स्वयं अनुभव करेंगे, कि अनुकूलता प्राप्त हो रही है। कोई विकट समस्या हो, तो साधना से पूर्व संकल्प करें, कि इसके समाधान के लिए आप साधना कर रहे हैं। और फिर भविष्य में कोई समस्या उत्पन्न हो जाए, तो मन ही मन मंत्र का उच्चारण करें, तो आप देखेंगे, कि वह अपने आप ही समाप्त होती जा रही है।

 

…और यही साधना इस मार्ग में भी अत्यन्त सहायक सिद्ध होती है। व्यक्ति को एक व्यक्तित्व की प्राप्ति होती है और वह गुरु के प्राण तत्त्व से जुड़कर, उसमें पूर्णत: लीन होकर उस परम आनन्द को उपलब्ध हो जाता है, जिसे ब्रह्मानन्द कहते हैं, जिसे ‘मृत्योर्मा अमृतं गमय:’ कहते हैं।

 

साधना सामग्री – 480/-

Mahaakaal Sadhana

Mahakaal i.e. Victory Everywhere

Mahakaal i.e.  End of All Problems

Mahkaal  i.e. End of diseases-sadness

You should definitely perform Mahakaal Sadhana on every monthly Shivraatri, Pradosh or Monday after making firm determination. Welcome Lord Mahakaal in your life, the God to grant Completeness ….

“Kaal” does not mean death; Kaal can grant Perfection to life within a single moment, it can grant success within a single moment.  The only requirement is a sparkling, a spark, a capability to achieve. No Sadhana in this world is superior than Mahakaal Sadhana. It is the best Sadhana practice, the greatest  Sadhana.

This body will definitely expire,  and death will eat it  one day. This is the final consequence of your life… You will have to perform Mahakaal Sadhana practice to avoid this fate.

Nobody can stop you from thinking about the negative side. If you are sad, then those sitting with you will also become sad. There are thousands of such people in this society, and you can easily find many such people within the circle of your own family, friends and relatives. Try to sit with them for five minutes when you are feeling happy and joyful, and they will say that –

“Damn it! All of it is a waste. What are you striving around for, there is nothing. My sons have turned bad. My children do not listen to me. My wife has also changed. My money hasn’t arrived yet…” They do not have any other thoughts in life apart from these negativities. You will become like them if you live in their company.

You cannot lead life like this. This is not life. The sole goal of life should be to obtain perfection in both materialism and spirituality.

You should achieve full wealth, earn respect-prestige, receive honor-recognition and attain high positions in your material-physical life. Sometimes darkness creeps in into life and material progress stops. However, there are transient phases. These are the tests of life, to check whether you have patience or not. Are you able to stick to your resolves.

… And spirituality should also be a part of your life. Spirituality includes sitting with your Guru, building up new things to serve society,  serving people etc. Life becomes very pleasant when we achieve perfection in both streams. Therefore it is important to accomplish Mahakaal Sadhana.

No other Sadhana except Mahkaal Sadhana can favorably transform the negative dimensions of life. Therefore Mahakaal has been considered as Mahadev.

Mahakaal Sadhana is termed as the best Sadhana because it provides definite solution to counter deficiencies within life – of wealth, prestige, honor, position, promotion, business, family, marital, children, enemies, marriage delays, court, house, property etc. It grants a definite solution  instead of a probable resolution.

The problems in life increase in accordance with the increase in desires. There are hundreds of hassles in business – income tax, sales taxes etc. etc.  However, you will not achieve anything through fear. I also do not ask you to stop having desires-wishes. You should have Purusharth-capability to face these Absence of desires will convert our human life into similar existence as that of animals-creatures. A cow or buffalo does not have any wish. They remain happy with whatever they receive. However a human being always wishes to progress ahead towards higher position and innovation. Humankind means continuous innovation and struggle for betterment. Desires and wishes provide fuel to make progress. Only this can lead to growth-development of a person, society and nation.

Why should you remain struck in poverty? Why should you suffer deficiencies in your life? Why should you lead a life of fear? You definitely have to counter and stop these situations in life. You can do this through your efforts, actions and patience-control.

The necessary desires and positive wishes should be fulfilled. Therefore you should perform Mahakaal Sadhana to achieve complete success and perfection in both streams – Material and Spiritual.

I have myself successfully accomplished this Mahakaal Sadhana and my disciples have also successfully achieved this Sadhana. Therefore I can say with full conviction that you will definitely obtain success after performing  this Sadhana. You should perform Sadhana with full faith. Everything is useless in absence of faith and trust. Mahakaal Sadhana is the medium to spiritually link with the Divinity and Guru.

Sadhana Procedure

Mahakaal Sadhana is a very special Sadhana practice. Mahakaal Sadhana should be started only from monthly Shivraatri, Pradosh or Monday night. It is mandatory to perform this Sadhana with Praan-Pratishthaa-yukt consecrated-sanctified “Mahakaal Yantra” and “Black Hakeek Mala“.

Sit facing South direction after taking a bath. Spread yellow cloth on a wooden board in front of you and set up Guru picture on it. Anoint Guru-Picture with Kumkum (Vermilion) and perform a minor Guru-Worship using Kumkum, Akshat (Unbroken Rice), Pushpmala (Flower-garland), Dhoop (Incense), Deep (Lighted lamp), Neivedya (offering), wishing for complete success in Sadhana.

After this, make a triangle with Kumkum in a plate, and make a mark in its center. Make a  seat of flowers in  the center of the triangle and place “Mahakaal Yantra” on this seat.  Worship Yantra with Kumkum, Akshat, Flowers, Dhoop, Deep etc.

Thereafter, to resolve the problems, with full determination, the Sadhak should mentally tell about his problems to Lord Mahakaal and pray to terminate his problem completely (from its basic root-cause). Then the Sadhak should make a resolve taking water in his palm that –

|| Om Vishnu Virshnu VirshnuH Shreemadbhagavato Vishnoraagyayaa Pravartamaanasya Asya Brahamano Dwiteeya Paraardve Sweta Vaaraaha Kalpe Jambudweepe Bharatakhande Aaryaavarte Deshaantargate Punya Kshetre Kaliyuge, Kali Prathama Charane Amuk Gotrotpannoham (Speak your Gotra) Amuk Sharmaaham (Speak your name) Amuk Kaamanaa (Speak your wishes-desires) Siddhyartham Saadhanaa Karishye ||

After speaking above, let the water flow onto ground.

Thereafter, chant 21 mala (rosary rounds) of below Mantra with Black Hakeek Mala. The Mahakaal Sadhana is a 7 day Sadhana, the Mantra chanting should be done daily after performing Guru-worship.

Mantra

|| Om Kam Kaam Kaalapurukshaaya Mahaakaalaaya Phat ||

After completion of Seven day Sadhana, drop the Yantra and Mala in a river or pond. Thus this Sadhana gets completed.

After completion of Sadhana, you can yourself ascertain if your problem is getting resolved or not. You can yourself see the problem getting solved in front of you. You only require patience and faith-trust.

And you yourself will feel favorable results. If you are facing a serious problem, then you should include resolution of that problem in the resolve-determination before starting the Sadhana practice. And if the problem arises in future, then you should mentally chant the Mantra. You will find the problem getting resolved on its own.

… and this Sadhana is also very helpful in pursuing this path. The personality of the person enhances and he merges with the divine element of Guru, and fully  absorbs within the ultimate Joy, which is also called as Brahmaanand. It is also known as “Mrityormaa Amritam GamayaH

Sadhana Materials – 480/-

error: Content is protected !!