Abhishap Mukti Sadhana

अभिशप्त भूमि, अभिशप्त घर-आवास
कैसे होगी शांति?
 
सर्व दोष शाम, अभिशाप मुक्ति
महावीर सर्वबाधा शांति यंत्र
अभिशाप मुक्ति साधना

 

अभिशाप अर्थात् शक्तियों का जड़ हो जाना, बंध जाना और पूर्णता की यात्रा में विराम लग जाना। जीवन खुलकर जीने के लिये है, पर कई बार संघर्ष अन्तहीन हो जाते हैं। जीवन अभिशप्त नहीं होता परन्तु घर, आवास, भूमि अभिशप्त हो सकती है। इसका उपाय कीजिये, हनुमान यंत्र साधना।

 

क्या आपके घर पर किसी प्रकार का साया है? क्या घर भी अभिशाप ग्रस्त हो सकते हैं? ये सवाल आपके मन में कई बार आते हैं और फिर आप इन सवालों को खारिज कर देते हैं, इस भय से कि कहीं आपकी गिनती पढ़े लिखे बेवकूफों में न हो जाए? घर और वह भी प्रेत-बाधा ग्रस्त, यह तो किसी लेखक की कल्पना में हो सकता है, असलियत में नहीं, यही सोच रहे हैं न आप, पर यह सोच पूर्णतया गलत है।

 

कौन है प्रेत?

 

प्रेत एक योनि है। शरीर से जब व्यक्ति परे चले जाते हैं पर कर्म या फिर मोहवश धरती पर बंधे रहते हैं तब वैसी आत्माओं के लिए श्रीमद्भागवतपुराण में भी धुंधकारी प्रेत का वर्णन आता है, जो अपने सात्त्विक प्रवृत्ति के भाई गोकर्ण को विविध रूप धरकर सोते समय आतंकित करता था।

 

इसलिए, यह सोचना कि घर अभिशप्त नहीं हो सकते गलत है। प्रेत तो शरीर-विहीन हैं, विदेह, और अगर मोहग्रस्त हैं, चाहे वे किसी भी कारण से हों तो उनका अपने निवास को छोड़ना कठिन हो जाता है। जैसे कोई व्यक्ति अकाल मृत्यु को प्राप्त हुआ और उसके सांसारिक दायित्व अधूरे रह गए। ऐसी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती क्योंकि मुक्ति का अर्थ कामनाओं से परे जाना है।

 

पर, इस स्थिति में सारे काम अधूरे हैं और उनसे जुड़ी कामनाएं भी अतृप्त हैं, फिर मुक्ति मिलने का तो प्रश्‍न ही नहीं है।

 

किसे प्राप्त होती है भूत-योनि?

 

प्रेत-कल्प में कहा गया है कि नरक में जाने के पश्‍चात प्राणी प्रेत बनकर परिजनों और संबंधियों को अनेकानेक कष्टों से प्रताड़ित करता रहता है। जो व्यक्ति अधार्मिक कार्यों में संलग्न रहते हैं, दूसरों की सम्पत्ति हड़प लेते हैं, परायी स्त्री से व्यभिचार करते हैं, निर्बल को सताते हैं, ऐसे व्यक्ति प्रेत योनि में जाते हैं और घोर कष्ट भोगते हैं। प्रेत योनि में गए ऐसे लोग दुष्ट स्वभावश व्यक्ति (रिश्तेदारों और परिजनों) और घर दोनों को संक्रमित कर देते हैं।

 

कैसे जानें कि आपके घर में प्रेतात्मा का वास है?

 

अगर आपके घर में दुष्टात्मा का वास है तो आपका मन सदैव आशंकित रहेगा। वह घर सदैव ठंडा और अंधेरे से ग्रस्त रहेगा। वहां रहने वाले लोगों के साथ हमेशा कुछ ना कुछ अपशकुन होते रहते हैं। उनका स्वास्थ्य डांवाडोल रहता है। उनको हर समय ऐसा प्रतीत होता है कि कोई पीछे खड़ा है और उनके घर में मनहूसियत का माहौल रहेगा। आपस में कलह का वातावरण होगा, परिवार में खुशहाली नहीं होगी और अकस्मात्  धन-नुकसान के योग बनते रहेंगे।

 

घर-परिवार में बाधा के लक्षण

 

*  परिवार में अशांति और कलह।
*  बनते काम का ऐन वक्त पर बिगड़ना।
*  आर्थिक परेशानियां।
*  योग्य और होनहार बच्चों के की पढ़ाई / रिश्तों में अनावश्यक अड़चन।
*  परिवार के सदस्यों की आपस में अनबन।
*  परिवार के सदस्यों का अवसाद और निराशा का शिकार हो जाना।
*  घर के मुख्य द्वार पर अनावश्यक गंदगी का जमा होना।
*  इष्ट की अगरबत्तियों का बीच में बुझ जाना।
*  भरपूर घी, तेल के बाद भी इष्ट का दीपक बुझ जाना।
*  पूजा या खाने के समय घर में कलह की स्थिति बनना।

 

ये तेरा घर – ये मेरा घर –

 

मकान, घर नहीं होता है। घर उसमें रह रहे लोगों से होता है। घर ही सुख-सुविधा का केन्द्र बिन्दु है। घर में हंसी-खुशी का माहौल रहना चाहिए। सुख-संपत्ति में वृद्धि होनी चाहिए। जीवन के सारे सुख घर की परिधि में ही व्याप्त हैं, इसलिए घर को बाधा विहीन रखना अनिवार्य है, क्योंकि किसी भी प्रकार की बाधा भी आपको बंधन में डाल देती है।

 

प्रेत बाधा दूर कर देंगे हनुमान

 

निखिल-शिष्य बंधन में अभिशप्त जीवन जीएं, यह गुरु को बिलकुल भी स्वीकार नहीं। घर पर आई प्रेत बाधा के निवारण हेतु हनुमान-महावीर सर्व बाधा शान्ति यंत्र अत्यंत प्रभावशाली है। वैसे भी हनुमान जी के विषय में सर्वविदित है

 

भूत-पिशाच निकट नहीं आवें
महावीर जब नाम सुनावें
बजरंग बाण में स्पष्टतः लिखा है कि

 

भूत, प्रेत, पिशाच निसाचर ।
अग्नि, बेताल, काल, मारी मर ।
इन्हें मारु तोहे सपथ राम की ।
राखु नाथ मरजाद नाम की ।
सत्य होहु हरि सपथ पाई के ।
रामदूत धरु मारु धाई के ।
राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहन्दीपुर बालाजी हनुमानजी का सुप्रसिद्ध मंदिर दुष्ट आत्माओं से छुटकारा दिलाने के लिए बहुत ही शक्तिशाली मंदिर माना गया है। दुष्ट आत्माएं चाहें आपको प्रताड़ित करें, या फिर आपके घर को, हनुमानजी की शक्ति के समक्ष वे हार जाती हैं। जैसे सूर्य के उगते ही अंधेरा समाप्त हो जाता है, उसी तरह हनुमानजी की आराधना समस्त प्रेत बाधा दूर कर देती है।

 

हनुमानजी को महावीर भी कहा गया है। इसका अर्थ है कि ना तो इनसे अधिक या इनके बराबर कोई ताकतवर है। इसलिए दुष्ट शक्ति चाहे कितनी ही खतरनाक या उग्र हो, हनुमानजी की कृपा से बेचैन होकर बाधा भाग खड़ी होती हैं।

 

यह तो सर्वविदित है कि कलियुग में एकमात्र जीवन्त देव हनुमान हैं। लंका युद्ध में दुष्ट शक्तियों के संहार में हनुमानजी का विशेष योगदान रहा।

 

लंका दहन, रावण पुत्र अक्षय कुमार का संहार और रावण वध इन सबमें हनुमानजी की विशेष भूमिका रही है।

 

रुद्रांश हनुमान

 

जेहि शरीर रति राम सों सोई आदरहिं सुजान
रुद्रदेह तजि नेह बस बानर में हनुमान
यह भी माना जाता है कि रावण ने अपने दस सिरों को अर्पित करके रुद्र के दस रूपों को तो प्रसन्न कर लिया था, पर रुद्र का एकादश रूप हनुमान हैं और रावण वध के लिए हनुमानजी ने रामकार्य को पूर्ण करने हेतु जन्म लिया। सृष्टि में जब भी दुष्ट शक्तियां हमें व्यथित करेंगी, उनका संहार पवन पुत्र हनुमान की कृपा से हो जाएगा।

 

हनुमान महावीर सर्वबाधा शान्ति यंत्र आपके घर में से हर प्रकार की बाधा का नाश कर देगा। इसलिए, आशंकाग्रस्त होकर जीना छोड़ें और हनुमान शांति यंत्र स्थापित करें। जहां पवन पुत्र आ जाते हैं, वहां किसी भी प्रकार की बाधा नहीं रह सकती। क्योंकि

 

को नहीं जातन है जग में कपि
संकट मोचन नाम तिहारो।

 

साधना विधान

 

इस साधना के लिए अपने परम्परागत पूजन में कोई विशेष परिवर्तन नहीं करना है। हनुमान जयंती अथवा किसी भी मंगलवार की रात्रि में इस साधना को प्रारम्भ किया जा सकता है। वस्त्र आदि का रंग लाल हो और दिशा दक्षिण हो।

 

हनुमान शिष्यत्व के उच्चतम स्वरूप हैं और हनुमान की साधना वास्तव में शिष्य स्वरूप में करने पर ही पूर्ण होती है। हनुमान जयन्ती को यह महत्वपूर्ण साधना गुरुदेव निखिल के आशीर्वाद के बिना संभव ही नहीं है। अतः गुरुदेव का विधिवत् पूजन अवश्य ही सम्पन्न कर लेना चाहिए।

 

अपने सामने एक बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को स्थापित करें। इसके पश्‍चात् हाथ जोड़कर गुरुदेव निखिल का ध्यान करें –

 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

 

निखिल ध्यान के पश्‍चात् जल से स्नान करावें –

 

ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥

 

इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पंचोपचार पूजन करें –

 

ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।
(धूप, दीप दिखायें)

 

अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें।

 

इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –

 

ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः

 

गुरु पूजन के पश्‍चात् मूल साधना-पूजन निम्न प्रकार सम्पन्न करें। इसी बाजोट पर गुरु चित्र के साथ ही हनुमान का वीर मुद्रा में अथवा पर्वत उठाए हुए चित्र स्थापित कर लें। चित्र के सम्मुख ही पुष्पों का आसन देकर ताम्रपत्र पर अंकित ‘गृहदोष मुक्ति हनुमान यंत्र’ स्थापित करें।

 

यंत्र का पूजन सिंदूर एवं लाल पुष्प से करें तथा शुद्ध घी मिश्रित गुड़ का भोग लगाएं, ध्यान रखें की इस साधना में सुगन्धित द्रव्य आदि का प्रयोग नहीं करना है। अगरबत्ती के स्थान पर लोबान की धूप देना उचित माना गया है। लोबान का धूप कर, तेल का बड़ा दीपक जला लें। इसके पश्‍चात् मूंगा माला से निम्न मंत्र का एक माला मंत्र जप करें –

 

मंत्र
॥ हं हनुमते रुद्र आत्मकाय हुं फट्॥
उपरोक्त मंत्र साधक को उच्चारण में प्रथम बार कठिन लग सकता है, किन्तु इसके वर्णों के संगुफन में एक विचित्र सी ऊर्जा छिपी हुई है जिसका अनुभव साधक जब मंत्र जप तीव्रता से करता है तो स्वयं अनुभव कर सकता है। इस काल में ऐसा भी अनुभव हो सकता है मानों कोई बाह्य शक्ति सारे शरीर को झिझोड़ रही है तथा हाथ से माला भी गिर सकती है किंतु ये सब केवल इस मंत्र की ऊर्जा का ही परिणाम है, अतः साधक कदापि भयभीत न हों। यदि माला छूटने से मंत्र-जप खण्डित हो जाए तो पुनः प्रारम्भ (सुमेरू) से मंत्र-जप करें।

 

रात्रि में साधना सामग्री को पूजा स्थल में ही रहने दें। अगले दिन ‘गृहदोष मुक्ति हनुमान यंत्र’ को एक लाल वस्त्र में बाधंकर घर में किसी ऐसे सुरक्षित स्थान पर रख दें, जहां किसी के हाथ न लगें। इस यंत्र के प्रभाव स्वरूप इतर योनियां अपने आप भयभीत होकर घर से निकल जाती हैं और तीन महीनों में आपको स्वयं लगने लगेगा कि आपके घर की हवा-वायु हल्की हो गयी है। आपको अपने घर में एक अद्भुत शान्ति का वातावरण प्राप्त होगा।

 

शेष सामग्री को किसी वृक्ष की जड़ में डाल दें। उपरोक्त साधना के फलस्वरूप जहां साधक को गृह-शुद्धि प्राप्त होती है वहीं भगवान श्री हनुमान की कृपा का फल भी प्राप्त होता है और यदि साधक आगे के जीवन में भी संयम पूर्वक रह कर भगवान श्री हनुमान की आराधना करें तो कई अन्य लाभ भी प्राप्त होते रहते हैं। यह ध्यान रखें कि जिस दिन यह साधना सम्पन्न करें उस दिन केवल फलाहार अथवा दुग्ध-आहार ही ग्रहण करें, मौन रहें तथा ब्रह्मचर्य का पालन करें।

 

प्राण प्रतिष्ठा न्यौछावर -600/-

Lord Hanuman Eradicates Obstacles

Hanuman Jayanti – 31 March 2018

Cursed Land – Cursed Home

How to get peace?

Destroy all defects – Remove curses

 

Mahaveer Sarv Baadhaa Shanti Yantra

Abhishaap Mukti Sadhana

 

Curse – Suppression of the energies, Stifling down, and a disruption in the divine journey to Perfection. Life should be lived freely, however, sometimes the struggles-toils become infinite. The life cannot be cursed upon, however, the home and land can be cursed into damnation. Hanuman Yantra Sadhana is the best method to eradicate this problem.

 

Does any spirit cast an evil eye upon your house? Can houses be cursed? These questions do enter into your mind sometimes, but you dismiss them, for fear of being labelled as an educated idiot. You consider an hunted house as a mere figment of a writer’s imagination. This thought is  completely incorrect.

 

Who is a ghost?

Ghost is a celestial unworldly being.  When a spirit moves away from the body, it can still remain tied down on earth due to the person’s actions (Karma) or deep attachments. The Holy text ShreemadBhaagwatpoorana also mentions Ghost Dhoondhkaari, who used to terrorize his saatvik noble brother Gokarna by assuming various forms during his sleep.

Therefore, you are mistaken if you believe that the houses cannot be cursed. The ghosts are Videha, without any body form. It becomes very difficult for them to leave their habitat if they develop attachments due to any reason. For example, a person might die a premature sudden death without completing his or her worldly obligations. Such a soul doesn’t attain liberation.

The literal meaning of liberation is to move beyond the wishes-desires. However, in such situations of incomplete tasks,  the wishes remain unfulfilled. So, how will the soul attain liberation?

 

Who attains the Ghost-form?

The Pret-Kalpa states that the soul descending into hell assumes a ghostly form to terrorize and torture the family and relatives. People engaging in immoral activities, stealing others’ wealth, committing adultery or harassing the weak; go into Preta (Ghost) form to suffer terrible agonies. Such nasty natured people afflict both their kins (family-relatives) and homes.

 

How to identify if your home is afflicted with ghosts?

Your mind will always remain apprehensive if an evil ghost resides in your house. Such a house will always feel cold and dark.  People residing there  will always suffer ordeals and continuously suffer ill-health. They always sense someone standing behind them, and the house environment will always be negative and pessimistic. They will suffer from frequent discords, loss of wealth and absence of joy-happiness.

 

Symptoms of affliction to Home-Family

* Unrest and discord in family

* Obstruction and failure in every task

* Financial problems

* Unnecessary interruptions in studies of intelligent children, or deterioration in relationships

* Conflict among family members

* Depression and despair among the family members

* Deposit of unnecessary garbage at the main entrance of the house.

* Sudden extinguish of holy fragrances

* Extinguish of holy lamps, even when they are filled with extra quantity of ghee or oil

* Dissonance at worship or eating time

 

Your house – My house

Mere physical building does not constitute a  home. The family members make it a home. Home is the focal point of happiness and joy. It should always be  joyful-jovial, leading to augmentation of wealth and prosperity.  All joys of life emanate from the home. Therefore, it is supreme responsibility to keep it free from any kinds of problems or troubles. Any kind of problem creates a ring of bondage around you.

 

Lord Hanuman will eradicate Ghost afflictions

The Guru will never accept any kind of affliction-bondage in the life of Nikhil disciples. Hanuman-Mahaveer Sarvbaadhaa Shanti Yantra is highly effective in mitigating the ghost afflictions from home. It is well known about Lord Hanumanji-

 

Bhoot-Pishaacha Nikata Nahin Aaven

Mahaveera Jaba Naama Sunaaven

 

The Bajrang Baan clearly states that

 

Bhoot, Preta, Pishaacha Nishaachara |

Agni, Betaala, Kaala,  Maaree Mara |

Inhen Maaru Tohe Sapatha Raama Kee |

Raakhu Naatha Marajaada Naama Kee |

Satya Hohu Hari Sapatha Paaee Ke|

Raamdoota Dharoo Maaroo Dhaaee Ke |

The Mehandipur Balaji Hanuman temple located in the  Dausa district of Rajasthan is  considered to be a very powerful shrine to obtain riddance from evil spirits. All kinds of evil spirits get vanquished by the power of Lord Hanuman, even if they try to torture either you or your home. The Sadhana of Lord Hanuman eradicates entire ghost-afflictions, in the same way as the rising sun eradicates the darkness.

Lord Hanuman has also been called as Mahaveer. This means that no-one is either as powerful, or more powerful than Him. Thus divine blessings of Lord Hanuman instantly vanquishes any wicked power, regardless of its ferocity or intensity.

It is well known that Lord Hanuman is the only living God in Kali Yuga. Lord Hanumanji made unique contributions in destruction of evil powers during the Battle of Lanka.

Lord Hanumanji played a special role in the burning of Lanka, killing of Akshaya Kumar, son of Ravana, and killing of   Ravana himself.

 

Rudraansha Hanuman

 

Jehi Shareera Rati Raama Som Soee Aadarahim Sujaana

Rudradeha Taji Neha Basa Baanara Me Hanumaana

It is also believed that Ravana had offered his 10 heads to please 10 forms of Lord Rudra. However, Lord Hanuman is eleventh form of Lord Rudra. Lord Hanuman incarnated to fulfill Lord Ram’s tasks of killing Ravana. Pawan Putra Lord Hanuman will terminate the evil powers of the universe, whenever they distress us.

Hanuman Mahaveer Sarvbaadhaa Shanti Yantra will destroy all kinds of problems-obstacles in your house. Therefore, leave the fear of tensions and setup Hanuman Shanti Yantra. Obstacles evaporate automatically upon receipt of the divine grace of Lord Pawan Putra. Because

 

Ko Nahee Jaanata Hei Jaga Me Kapi

Sankata Mochana Naama Tihaaro |

 

Sadhana Procedure

This Sadhana does not require any special change in our traditional worship. This Sadhana can be started on the night of Hanuman Jayanti or any Tuesday. You should wear Red colored clothes and sit facing South direction.

Lord Hanuman is the highest form of discipleship and one can accomplish Sadhana of Lord Hanuman  only in the form of a disciple. It is simply not possible to accomplish this significant Sadhana of Hanuman Jayanti in absence of divine grace-blessings of Gurudev Nikhil. Therefore, proper worship of Gurudev should definitely be completed.

Spread a Red colored cloth on a wooden board in front of you and setup  Guru Picture/ Statue/Yantra/Paduka on it. Meditate on the divine form of  Gurudev Nikhil with folded hands –

 

GururBrahmaa GururVishnuH Gururdevo MaheshwaraH |

GuruH Saakshaat Par Brahmaa Tasmei Shree Guruve NamaH ||

 

Bathe the Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka with water after Nikhil meditation –

 

Om Nikhilam Snaanam Samarpayaami ||

 

Then wipe with a clean cloth. Perform Panchopchaar worship-poojan with Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken rice), Pushpa (Flowers), Neivedh (Sweets/Fruit offering), Dhoop (Incense) – Deep (Lamp); chanting following mantras –

 

Om Nikhilam Kumkum Samarpayaami |

Om Nikhilam Akshtaan Samarpayaami ||

Om Nikhilam Pushpam Samarpayaami ||

Om Nikhilam Neivedhyam Nivedayaami ||

Om Nikhilam Dhoopam Aardhyaapayaami, Deepam Darshayaami ||

(Show Dhoop, Deep)

 

Now rotate three Achmaani (spoonful) water around the  Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka and drop it on ground. Then chant 1 rosary-round of Guru Mantra with Guru Mala –

 

Om Param Tatvaaya Naaraayanaaya Gurubhayo Namah

 

After completing Guru worship, perform the Lord Hanuman Sadhana-worship in the following way. Setup picture of Lord Hanuman in Veer Pose or carrying-mountain, on the same wooden board, near to Guru picture. Setup copper inscribed “Grahdosh Mukti Hanuman Yantra” on a seat of flowers in front of the picture.

Worship the Yantra with vermilion and red flowers. Offer bhoga of Jaggery mixed with pure ghee. You should note that you should not use any perfumed aromatic material in this Sadhana. Lobaan incense is preferable than agarbatti incense. Light a big lamp (deepak) of oil, after offering Lobaan incense. Thereafter chant 1 mala of following Mantra with Moonga Mala

 

Mantra

||  Ham Hanumate Rudra Aatmakaaya Hoom Phat ||

 

The above mentioned Mantra might initially be difficult for the Sadhak to pronounce, but a strange powerful energy is hidden within the combination of its characters. The Sadhak can himself sense this strong energy by pronouncing the Mantra with rapid intensity. It is possible to experience any external power shaking up your body, and the mala may also fall down from your hands. However, all these are mere manifestations of the power of this Mantra, and so, the Sadhak should not get afraid. If the Mantra-chanting gets interrupted due to falling down of the mala, then the Mantra-chanting should be restarted from the Sumeru.

Leave the Sadhana materials in the worship place throughout the night. Wrap the “Grahdosh Mukti Hanuman Yantra” in a red cloth next day, and hide it in a safe place, where nobody can access it. The ghosts-ghouls leave the house automatically, being frightened of this Yantra. You yourself will feel a wonderful lightness in your house after three months. You will sense a marvelous peaceful  environment in your home.

Bury the remaining Sadhana materials  in the root of a tree. This Sadhana bestows purity in the house, apart from divine grace of Lord Shree Hanuman. The Sadhak will continue to obtain many other benefits if he performs worship of Lord Shree Hanuman retaining full celibacy-purity.  Remember to eat only fruits or milk-based food, stay silent and follow full celibacy on the day of the Sadhana

Praana Pratishthaa Nayouchaawar- 600 / –

 

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