स्वप्नेश्‍वरी साधना (Swapneswari Sadhana)

 स्वप्न
स्वप्नों के बारे में पिछले पांच हजार वर्षों से बराबर शोध हो रहा है और अभी तक यह गुत्थी ज्यों की त्यों उलझी हुई है कि क्या स्वप्नों का वास्तविक जीवन में कोई महत्व है भी या नहीं? कुछ लोग स्वप्नों को मन की विकृति बताते हैं, तो कुछ लोगों की यह धारणा है कि स्वप्न वास्तव में ही भविष्य के पथ-प्रदर्शक हैं और जहां व्यक्ति उलझ जाता है, जहां व्यक्ति को कोई रास्ता दिखाई नहीं देता; वहां स्वप्न उसकी बराबर मदद करते हैं। आखिर सत्य क्या है, आप स्वयं जानिये और अपनी राय हमें लिखें –

इस संसार में प्राय: प्रत्येक जीव स्वप्न देखता है, लेकिन मनुष्य ही ऐसा प्राणी हैं जो उनकी अनुभूति को व्यक्त कर पाता है। स्वप्न दो प्रकार के होते हैं जाग्रत अवस्था के स्वप्न तथा सुप्त अवस्था (सुषुप्ति) के स्वप्न ।

जाग्रत अवस्था के स्वप्न पूर्णत: हमारी मानसिकता, हमारे अनुभव व कल्पना पर निर्भर करते हैं। परन्तु सुप्त अवस्था के स्वप्न उपरोक्त कारणों पर तो निर्भर करते ही हैं, लेकिन कुछ स्वप्न ऐसे भी होते हैं जो कि हमारे अवचेतन मन द्वारा देखे जाते हैं, और ये स्वप्न स्वतन्त्र होते हैं, इन स्वप्नों में इतनी ताकत होती है कि ये भविष्य में घटित होने वाली घटना को दिखा देते हैं। ये स्वप्न किसी के जीवन में होने वाले बदलावों का पूर्व चित्रण होते हैं। वैज्ञानिकों ने इनकी परिभाषा देने की कोशिश तो की परंतु अधूरी, उनके पास इस प्रश्‍न का कोई हल नही हैं, कि भविष्य में घटित होने वाली घटना स्वप्न में पहले ही कैसे दिखाई दे जाती है?
भारतीय शास्त्रों की जितनी प्राचीनता हैं, उतना ही इनका विस्तार भी है। भारतीय धर्म के अनुसार हमारी आत्मा अजर व अमर है, स्वप्न हमारी आत्मा पर निर्भर हैं और हमारी आत्मा परमात्मा का अंशावतार है। हमारी आत्मा व मन की शक्ति अपार है।
स्वप्न – हमारे पूर्व जन्म का लेखा जोखा
महर्षि वेदव्यास अपने ग्रंथ ‘ब्रह्मसूत्र’ में बताते हैं कि – हमारे मस्तिष्क में पूर्व जन्मों का तथा भविष्य का लेखा-जोखा सुप्त अवस्था में रहता है। आत्मा के कर्म बंधन में होने के कारण इनका आभास हर किसी को नहीं हो पाता। निद्रा अवस्था में देखे गये स्वप्न कई प्रकार के होते है। लेकिन इनमें दो प्रकार की विशेष अनुभूति होती है प्रथम वे स्वप्न जिनको देखकर मन प्रसन्न हो जाता है अर्थात शुभ स्वप्न, दूसरे वे स्वप्न होते हैं जिन्हें देखकर हमे नींद नहीं आती।
कुछ स्वप्न इतने प्रभावशाली होते हैं कि व्यक्ति के जीवन को पूर्ण रूप से बदल देते हैं । व्यक्ति शुभ व अशुभ दोनों प्रकार के स्वप्न देखता है।
पिप्पलाद ॠषि की स्वप्न व्याख्या –
महर्षि पिप्पलाद ने स्वप्न के बारे में बताते हुए कहा कि –
अत्रैष देवः स्वप्ने महिमानमनु भवति।
यद् दृष्टं दृष्टमनुपश्यत श्रुत श्रुतमेवार्थ मनुश्रणोति।
देश विगन्तरैश्च प्रत्यनुभूतं पुनः पुनः प्रत्यनुभवति दृष्टं चादृष्टं च श्रुत चाश्रुतं चानुभूतं चाननुभूतं च सच्चासच्च सर्व पश्यति सर्वः पश्यति।
स्वप्नावस्था में जीवात्मा ही मन और सूक्ष्म इन्द्रियों द्वारा अपनी विभूति (परम सत्ता की ताकत) का अनुभव कराती है। उसने पिछले अनेक जन्मों में जहां कहीं भी जो कुछ बार-बार देखा सुना और अनुभव किया हुआ है उसी को स्वप्न में बार-बार देखता-सुनता और अनुभव करता है।
परन्तु यह नियम नहीं है कि जागृत अवस्था में मनुष्य ने जिस प्रकार जिस ढंग से जिस जगह जो घटना देखी, सुनी और अनुभव की है, उसी प्रकार यह स्वप्न में भी अनुभव करता है, अपितु स्वप्न में जागृत की किसी घटना का कोई अंश किसी दूसरी घटना के किसी अंश के साथ मिलकर एक नये ही रूप में उसके अनुभव में आता है।
अतः यह स्वप्न में देखे और न देखे हुये को भी देखता है, सुने और न सुने हुये को भी सुनता है, अनुभव किये और अनुभव में न आये हुये को भी अनुभव करता है। जो वस्तु हो गई है और जो वस्तु आगे घटित होने वाली होती है, उसे भी देख लेता है।
इस प्रकार स्वप्न में वह विचित्र ढंग से सब घटनाओं का बार-बार अनुभव करता है और स्वयं भी सब कुछ देखता है, उस समय जीवात्मा के अतिरिक्त कोई दूसरी वस्तु नहीं रहती।
महर्षि पिप्पलाद ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि – स्वप्नावस्था में मन उदान वायु के अधीन हो जाता है, उदान वायु द्वारा मन जब हृदय गुहा में पहुंच जाता है तो मन की शक्ति समाप्त होकर वह आत्मा में परिणित हो जाती है। उस मोहित अवस्था का नाम ही स्वप्न है और उस समय जो कुछ सुख-दुःख की अनुभूति होती है वह मन को नहीं आत्मा को ही होती है।
स्वप्न और याज्ञवल्क्य
ऋषि याज्ञवल्क्य ने कहा है कि – स्वप्न का संसार बड़ा ही अद्भुत है और चमत्कारी भी है। क्योंकि इस निद्रा यज्ञ में इंसान उन ऊंचाइयों को छू लेता है, जिसकी कल्पना तक जाग्रत अवस्था में कोई व्यक्ति नहीं कर पाता। हमारे मस्तिष्क को दिन भर जो विचार, सिग्नल मिलते हैं और भावनाएं जागृत होती हैं जिन्हें हम चाह कर के भी प्रकट नहीं कर पाते वे हमारे अवचेतन मन में दर्ज होते जाते हैं रात को जब शरीर आराम कर रहा होता है तब ये स्वप्न रूप में प्रकट होती हैं ।
आधुनिक विज्ञानियों ने स्वप्न विषयक जिन तथ्यों का पता लगाया, उनमें से अधिकांश ऋषियों के निष्कर्षों से मेल खाते पाए गए हैं। बृहदारण्यक में जाग्रत एवं सुषुप्त अवस्था के समान मानव के मन की तीसरी अवस्था स्वप्न अवस्था मानी गई है। जिस प्रकार मनुष्य के संस्कार उसे जाग्रतावस्था में आत्मिक संतोष और प्रसन्नता प्रदान करते हैं, उसी प्रकार जो भी स्वप्न आएंगे वे उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं के प्रतिबिंब ही होंगे।
जब कोई स्वप्न देखता है, तो उसकी आंखों की पुतलियां ठीक उसी प्रकार घूमती हैं जिस प्रकार जाग्रतावस्था में कोई भी दृश्य आदि देखते समय घूमती हैं। अर्थात आंखें उस समय बंद रहते हुए भी देखती हैं।
जागते हुए जो दिवा स्वप्न हम देखते हैं वे मात्र कल्पनाएं ही होती हैं पर सुषुप्तावस्था में जो दृश्य हम देखते हैं उन्हें स्वप्न कहते हैं। निरर्थक, असंगत स्वप्न उथली नींद में ही आते हैं जो उद्विग्न करने वाले होते हैं। वस्तुतः मनुष्य निरंतर जागता नहीं रह सकता। मनुष्य अपने जीवन का एक तिहाई भाग निद्रा में व्यतीत करता है और निद्रा का अधिकांश भाग स्वप्नों से आच्छादित रहता है।
स्वप्न तो सेतु है –
भारतीय शास्त्रों में स्वप्न को दृश्य और अदृश्य के बीच का द्वार अर्थात संधि द्वार मानते हैं। मनुष्य इस संधि स्थल से इस लोक को भी देख सकता है और उस परलोक को भी। इस लोक को संधि स्थान व स्वप्न स्थान कहते हैं।
यस्त्वा स्वप्नेन तमसा मोहयित्वा निपद्यते
अर्थात मनुष्य को अज्ञातनतावश और पापी मन के कारण ही विपत्ति सूचक दुःस्वप्न आते रहते हैं। इनके निराकरण का उपाय बतलाते हुए ऋषि पिप्पलाद कहते हैं कि – यदि स्वप्नावस्था में हमें बुरे भाव आते हों तो ऐसे दुःस्वप्नों को पाप-ताप, मोह-अज्ञान एवं विपत्ति जन्य जानकर उनके निराकरण के लिए उपासना शुरू कर देनी चाहिए ताकि हमारी दुर्भावनाएं, दुर्जनाएं, दुष्प्रवृत्तियां शांत हो जाएं जिससे मन में सद्प्रवृत्तियों, सदाचरणों, सद्गुणों की अभिवृद्धि हो और शुभ स्वप्न दिखाई देने लगें और आत्मा की अनुभूति होने लगे।
वाल्मीकि रामायण के प्रसंगों से स्पष्ट है कि – बुरे स्वप्न जीवन में आने वाली दुरवस्था का मनुष्य को बोध कराते हैं। साथ ही अच्छे स्वप्न आने वाले शुभ समय का ज्ञान कराते हैं।
जब हमें कोई अच्छे सुखद स्वप्न दिखाई देते हैं, तो हमारा मन पुलकित हो जाता है, हमें सुख की अनुभूति होने लगती है और हम प्रसन्न हो जाते हैं। परंतु जब हमें बुरे स्वप्न दिखते हैं तो मन घबरा जाता है, हमें एक अदृश्य भय सताने लगता है और हम दुःखी हो जाते हैं। विद्वानों के अनुभवों से हमें यह बात ज्ञात होती है कि इस तरह के बुरे, डरावने स्वप्न दिखाई देने पर यदि नींद खुल जाए तो हमें पुनः सो जाना चाहिए।
यह आवश्यक है कि यदि कोई बुरा स्वप्न देखें तो उठकर हाथ-पैर धो लें, गुरु और देवता का स्मरण कर पुनः अवश्य सो जाएं। बुरे स्वप्न देखने के पश्‍चात् रात भर जागने से उस स्वप्न का प्रभाव मस्तिष्क में जमा हो जाता है और शरीर भी उसी के अनुसार क्रिया करने लगता है। अतः बुरे सपने के प्रभाव को समाप्त करने के लिये पुनः सोना आवश्यक है, जिससे अवचेतन मन सही दिशा में जा सके और चिन्ता से मुक्त हो सके।
स्वप्न क्या कहते हैं?
हर स्वप्न कुछ-न कुछ कहता है। कुछ स्वप्न निराश कर देते हैं, तो कुछ स्वप्न जीवन में खुशियों भर देते हैं। सपनों का संबंध हमारी आत्मा से होता है। जब व्यक्ति नींद में होता है, तब उसका शरीर आत्मा से अलग होता है, क्योंकि आत्मा कभी सोती नहीं। जब मानव निद्रावस्था में होता है तो उसकी पांचों ज्ञानेंद्रियां उसका मन और उसकी पांचों कर्मेंद्रियां अपनी-अपनी क्रियाएं करनी बंद कर देती हैं और व्यक्ति का मस्तिष्क पूरी तरह शांत रहता है। उस अवस्था में व्यक्ति को एक अनुभव होता है, जो उसके जीवन से संबंधित होता है। उसी अनुभव को स्वप्न कहा जाता है।
सपने में चौंकाने वाली खोजें और आविष्कार हुए हैं। यहां तक कि लोगों के भाग्य भी बदल गए हैं। हमें भी कई बार सपने में कोई संकेत मिलता है, लेकिन हम उसे समझ नहीं पाते। सपने हमारी भाषा नहीं बोलते। वह मनुष्यों से संकेतों में बात करते हैं।
इन्हीं स्वप्नों के माध्यम से भूत, भविष्य और वर्तमान की जानकारी हासिल की जा सकती है।
सब कुछ संग्रह होता है – मस्तिष्क में
वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे मस्तिष्क के आसपास चौबीस करोड़ रक्त वाहिनियों और शिराओं की एक मोटी पट्टी बनी हुई है, जो मानव के चेतन और अचेतन दृश्य और अदृश्य बिम्बों को लेकर उस पट्टी पर सुरक्षित जमा रखती है, और समय आने पर वे बिम्ब ही स्वप्न का आकार लेकर व्यक्ति के सामने होते हैं।
रूसी वैज्ञानिकों के अनुसार स्वप्न को व्यर्थ का समझ कर टाला नहीं जा सकता, वास्तव में ही स्वप्न पूर्ण रूप से यथार्थ और वास्तविक होते हैं, यह अलग बात है कि हम इसके समीकरण, सिद्धान्त और अर्थों को समझ नहीं पाते। दूसरी बात यह है कि स्वप्न कुछ क्षणों के लिए आते हैं, और अदृश्य हो जाते हैं, जिससे कि व्यक्ति प्रातः काल तक उन स्वप्नों को भूल जाता है, परन्तु यह बात निश्‍चित है कि एक स्वस्थ व्यक्ति प्रत्येक रात में तीन से लगाकर सात स्वप्न अवश्य देखता है।
स्वप्न तो वरदान है –
स्वप्न, मानव-जीवन को ईश्‍वर का सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वोत्तम वरदान है। यह दैवी वरदान चराचर जगत् में केवल मनुष्य को ही मिला है, जो कि उसके मानव-जीवन की सर्वोत्तम निधि कही जा सकती है।
कोई मनुष्य बिना स्वप्नों के जीवित नहीं रह सकता। यदि वह जीवित है, सक्रिय है, तो निश्‍चित है कि वह स्वप्न देखता है। अंग्रेजी में यह कहावत है कि – ‘अ ारप ुहे वेशी पेीं वीशरा वेशी पेीं श्रर्ळींश.’ शेक्सपियर ने भी एक स्थान पर कहा है कि – ‘ऊीशराी रीश र्ीीलह र्ीींीष री ुश रीश ारवश ेष.’
हम स्वस्थ हों, तो स्वप्न में हम उसी प्रकार भाग लेते हैं, जिस प्रकार से वास्तविक जीवन में हमारा क्रियाकलाप है। स्वप्न मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं – 1. जाग्रतावस्था स्वप्न और 2. निद्रावस्था स्वप्न।
पहले प्रकार का स्वप्न कवियों, दर्शनिकों एवं प्रेमी-प्रेमिकाओं का होता है। प्रेमी जाग्रतावस्था में अपनी प्रेमिका के बारे में सोचता है और फिर कुछ क्षणों में वह उसके सामने साकार सी हो जाती है।
दूसरे प्रकार का स्वप्न है निद्रावस्था स्वप्न। जब हम शरीर को शिथिल छोड़कर पूर्ण विश्राम की स्थिति में होते हैं, तब भी स्वप्न आते हैं, कभी तो वे स्वप्न हमारे साकार जगत् के हेाते हैं, कभी वे अद्भुत और अनोखे होते हैं। इन स्वप्नों को भी मुख्यतः तीन भागों में बांट सकते हैं।
स्वप्न के भेद – 1. वास्तविक जीवन के स्वप्न, 2. अद्भुत अपूर्व स्वप्न, 3. भविष्य सूचक स्वप्न।
इन स्वप्नों में भी कुछ स्वप्न शुभ होते हैं तो कुछ स्वप्न अशुभ होते हैं।
शुभ स्वप्न
गाय, हाथी, रुई, सफेद वस्तुएं, सफेद पुष्प, राजा, राज परिवार का कोई सदस्य, ब्राह्मण, ज्योतिषी, सुहागिन स्त्री, गुरु, पुष्प लिये हुए व्यक्ति, चांदी का बर्तन, दही, चावल, दूसरों को मिष्ठान्न खिलाना, फल, श्‍वेत वस्त्र, ध्वजा, ध्वजायुक्त रथ, कमल, विवाह, स्त्री से प्रेम व्यक्त करना, धन प्राप्ति, समुद्र स्नान, तैरना, शिव मन्दिर, देवमूर्ति, मुर्दा, बालक-बलिकाएं, बैल, ऊंचा मन्दिर, राज्य सिंहासन, चन्द्र-दर्शन, तारे चमकना, दुष्ट को दण्ड देना, शत्रुदमन, खङग प्राप्त होना, सर्प, परी, अप्सरा, या गन्धर्व दिखना, संगीत-मण्डली, फलदार वृक्ष, शर्बत पीना या पिलाना, तोरण, तीर्थयात्रा, गंगा-स्नान, धार्मिक स्थानों पर जाना, बंधन मुक्ति, शरीर का बढ़ना, सिर पर छाता रखना, शेर, दुग्धपान, अपने शरीर से या नाभि से वृक्षादि की उत्पत्ति, देवार्चन व्रत, पहाड़ को उड़ते हुए देखना, पहाड़ पर चढ़ना, रोना, रोते हुए व्यक्ति को देखना, कुटुम्बी की मृत्यु, विशाल भीड़, भीड़ में भाषण देना, सवारी चढ़ना, अश्‍वारोहरण, किला फतह करना, पुस्तक, ग्रंथ रचना, महात्मा के दर्शन आदि शुभ स्वप्न कहे जाते हैं।
अशुभ स्वप्न
जलती हुई चिता, राक्षस, दुष्ट व्यक्ति का मिलना, तिरस्कृत या अपमानित होना, राख, सूखा पेड़, कांटेदार पेड़, बियाबान जंगल, फांसी लगना, घबराना, पसीने-पसीने होना, घी लेना, मीठी चीज खाना, बन्दर, जंगली जानवर पर चढ़ना, भैंस या भैंसा, शरीर पर कीचड़ लगना, एक्सीडेंट, केश गिरना, दांत टूटना, खाली बर्तन लेकर भटकना, लाल वस्त्र या काले वस्त्र पहनना, परदेश गए पुरुष या स्त्री की मृत्यु की सूचना, गुड़ खाना, मलीन वस्त्र धारण कर भटकना, सांपों से क्रीड़ा, सांप का पेट में घुसना, हवा में उड़ना, आंधी आना, प्रलय, बाढ़ में बहना, दक्षिण दिशा की यात्रा, जलाशय सूखना, दलदल में फंसना, किसी स्त्री या पुरुष से जबरदस्ती लिपटना, चोरी करना या घर में चोरी होना, ग्रहण, उल्लू दर्शन, भूत-प्रेत व पिशाचों से साक्षात्कार, शिखर गिरना, पहाड़ टूटना, कोलाहल आदि अशुभ स्वप्न कहे जाते हैं।
सार रूप में कहा जा सकता है कि स्वप्न प्रत्येक मनुष्य के जीवन में अवश्य आते हैं। स्वप्न कुछ संकेत अवश्य देते हैं, स्वप्न जो जागने के बाद याद रहते हैं, उस पर मनुष्य को विचार करना चाहिये। स्वप्न कोई और लोक से नहीं आते, स्वप्न आपकी भावनाओं, इच्छाओं और कल्पना के स्वरूप होते हैं।

अज्ञात से ज्ञात की ओर यात्रा ही मनुष्य को पशु से अलग करती है। प्रकृति के और अपने जीवन के सारे रहस्यों को मनुष्य सुलझाना चाहता है। इसके लिये वह निरन्तर प्रयास भी करता है।
इस दिशा में स्वप्न भविष्य दर्शक क्रिया कही जा सकती है। स्वप्न एक संकेत है कि आपके पूर्व जन्म में क्या घटित हुआ था और आगे भविष्य में क्या घटित होगा।
अपने स्वप्नों को भलीभांति समझने के लिये इष्ट साधना सर्वोत्तम कही जाती है। स्वप्नों के संसार को पूरी तरह से समझने के लिये प्रत्येक साधक को कई बार स्वप्नेश्‍वरी साधना अवश्य करनी चाहिए। स्वप्नेश्‍वरी आद्या शक्ति सरस्वती का एक स्वरूप है। यह उस ज्ञान का स्वरूप है, जो आपके मस्तिष्क में अप्रत्यक्ष रूप से स्थापित है, आपको विभिन्न संकेत देता रहता है।
इस आद्या शक्ति की सम्पूर्ण साधना
स्वप्नेश्‍वरी साधना
आद्या शक्ति सरस्वती का स्वरूप
स्वप्नों के अर्थ को भलीभांति समझने के लिये यह आवश्यक है, साधक पूर्ण मनोयोग से स्वप्नेश्‍वरी साधना सम्पन्न करे और उसमें पूर्णता प्राप्त करे, तब उसे स्वप्न में प्रश्‍नों के उत्तर सहज ही मिल जाते हैं।
किसी भी शुक्रवार को साधक रात्रि में 10 बजे के पश्‍चात् दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके अपने सामने एक बाजोट पर सफेद वस्त्र बिछा दें। बाजोट पर गुरु चित्र, गुरु पादुका, गुरु यंत्र   स्थापित कर गुरुदेव निखिल का पंचोपचार पूजन करें तथा सर्वप्रथम गुरु ध्यान करें –
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
निखिल ध्यान के पश्‍चात् गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को जल से स्नान करावें –
ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥
इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पंचोपचार पूजन करें –
ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान् समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।
(धूप, दीप दिखाएं)
अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें। इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –
ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः
गुरु पूजन के पश्‍चात् गुरु चित्र के समीप ही पीली सरसों की ढेरी बनाएं। अब साधक दाहिने हाथ में जल लेकर निम्न विनियोग सम्पन्न करें।
विनियोगः
अस्य स्वप्नेश्रीमन्त्रस्य उपमन्युॠषिः   बृहतीच्छन्दः स्वप्नेश्वरी देवता ममाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोग।
इसके पश्‍चात् साधक बांएं हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ से जल से निम्न अंगों का स्पर्श करें।
करन्यासः
ॐ श्रीं अंगुष्ठाभ्यां नमः।
स्वप्नेश्वरी तर्जनीभ्यां नमः।
कार्य मध्यमाभ्यां नमः।
मे अनामिकाभ्यां नमः।
वद कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
स्वाहा करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।
इति करन्यासः।
इसके पश्‍चात् साधक हृदय की शुद्धता के लिए बांएं हाथ में जल लेकर निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए दाहिने हाथ से अंगों पर जल स्पर्श कराएं।
हृदयादिषडङ्गन्यासः
ॐ श्रीं हृदयाय नमः।
स्वप्नेश्वरी शिरसे स्वाहा।
कार्य शिखायै वषट्।
मे कवचाय हुम्।
वद नेत्रत्रयाय वौषट्।
स्वाहा अस्त्राय फट्।
इति हृदयादिषडङ्गन्यासः।
इसके पश्‍चात् साधक स्वप्नेश्‍वरी देवी का ध्यान निम्न ध्यान मंत्र से पूर्ण करें।
ध्यान
ॐ वराभये पद्मयुगं दधानां
करैश्चतुर्भिः कनकासनस्थानम्।
सिताम्बरां शारदचन्द्रकान्ति
स्वप्नेश्वरी  नौमि विभूषणाठ्याम्॥
स्वप्नेश्‍वरी देवी के ध्यान के पश्‍चात् साधक सरसों की ढेरी पर नौ सुपारी स्वप्नेश्‍वरी देवी के नौ पीठ शक्ति के रूप में स्थापित करें। प्रत्येक पीठ शक्ति का मंत्र जप करते हुए उस पर कुंकुम का तिलक करें।
पूर्व दिशा में प्रारम्भ करें –
ॐ जयायै नमः॥1॥ ॐ विजयायै नमः॥2॥ ॐ अजितायै नमः॥3॥ ॐ अपराजितायै नमः ॥4॥ ॐ नित्यायै नमः॥5॥ ॐ विलासिन्यै नमः॥6॥ ॐ दोग्ध्रयै नमः॥7॥ ॐ अघोरायै नमः॥8॥ मघ्ये ॐ मङ्गलायै नमः॥9॥
इसके पश्‍चात् साधक सुपारियों के मध्य ‘स्वप्नेश्‍वरी यंत्र’ स्थापित करे तथा उसका दैनिक पूजा विधान के अनुसार पूजन करे। पूजन के पश्‍चात् साधक निम्न मंत्र की 11 माला मंत्र जप स्वप्न सिद्धि विजय माला से करें।
मंत्र
ॐ श्रीं स्वप्नेश्वरी कार्य मे वद स्वाहा।
शुक्रवार से प्रारम्भ कर अगले शुक्रवार को यह साधना सम्पन्न करनी होती है, और ‘स्वप्नेश्‍वरी सिद्धि’ प्राप्त हो जाती है, फिर जब भी किसी प्रकार के प्रश्‍न का उत्तर जानना हो, तो वह प्रश्‍न एक कागज पर लिखकर यंत्र के सामने रख दें, और माला मंत्र जप करें। मंत्र जप के पश्‍चात् कागज को तकीये के नीचे रखकर सो जाएं।
साधना की पूर्णता के पश्‍चात् यंत्र को जल में विसर्जित कर दें तथा माला को अलग रख दें। जिस दिन कोई विशेष समस्या हो तो 1 माला मंत्र जप कर सो जाएं, प्रश्‍न का उत्तर अवश्य प्राप्त होता है।
रात को अवश्य ही स्वप्नेश्‍वरी देवी उपस्थित होकर उसके प्रश्‍न का उत्तर स्पष्ट रूप से बता देती हैं जो कि साधक को स्मरण रहता है। इसके माध्यम से साधकों ने अद्वितीय सफलताएं और लोकप्रियता प्राप्त की है।
साधना सामग्री – 330/-
Dream

Dreams have been researched continuously for the last five thousand years, and yet this complex mystery still exists whether there is any  significance of the dreams in real life or not? Some people explain away the dreams as illusions of mind, and some people believe that the dreams are really the guiding indicators for the future, and when a person gets struck, when a person doesn’t see any way forward, the dreams provide assistance at that stage. After all, what is the truth, Know yourself and send us your opinion –


In this world, almost every living being has the capability to dream, but humans are the only beings who can articulate their experiences. There are two kinds of dreams – the dreams of the awakened conscious state, and the dreams of sleep (deep sleep).

The dreams of the awakened state depend completely upon our mindset, our experience and imagination.However the dreams of sleep depend not only on the above reasons, but there are some dreams that are seen through our subconscious mind, and these dreams are independent, there is so much strength in these dreams that these dreams can show the events due to occur in the future. These dreams depict the prior changes in one’s life. Scientists have tried to define them, but their explanation is incomplete, they do not have any solution to this question, how can dreams show us the events which are due to occur in future?

The older the Indian scriptures are, the more expanded in their scope they are. According to Indian religion, our soul is immortal and eternal, the dreams depend upon our soul-spirit and our soul is a part-component of the divine Almighty. The power of our soul and mind is boundlessly immense.

 

Dream – Account of our previous lives

Maharishi Ved Vyas has explained in his treatise “Brahmasootra” that – the account of our past lives and future events exists in our brain in a dormant state. Everyone cannot experience this due to bonds of karmas. The dreams seen in sleep state are of many types. However, two types of sensations are especially significant, first those dreams which make the mind happy i.e. auspicious dreams; and secondly, the nightmares, which do not let us sleep.

Some dreams are so powerful that they change the person’s life completely. A person experiences both good and bad dreams.

 

Dream interpretation by Pippalada Rishi –

Maharishi Pippalada has explained about the dreams that –

Attreksh DevaH Swapne Mahimaanamanu Bhavati |

Yad Drishtam Drishtramanupashyat Kshrut Kshrutmevaartha Manukshranoti ||

Desh Vigantarekshra Pratyanubhutam PunaH PunaH Pratyanubhavati Drishtam Chaadrarkshtam Cha Kshruta Chakshrutam Chaananubhutam Cha Sachchasachch Sarv Pashyati SarvaH Pashyati |

 

The soul-life demonstrates its greatness (ultimate power) in the dream-state through mind and subtle senses. Whatever he has repeatedly seen, heard and experienced in past incarnations, he repeatedly sees, listens and experiences in the dream state.

But it is not a rule that whatever event a man has seen, heard or experienced in a particular way or particular location in the waking state; he will experience the same in the dream-state; rather during the dreams part of a wakeful event merges with a component of some other event to create a completely new experience.

So he sees in dream whatever he has seen or not seen, listens whatever he has heard or not heard, experiences whatever he has experienced or not experienced. Whatever event has occurred and whatever is due to occur in future, he also manages to sees that.

Thus he repeatedly experiences all events in an amazing way, sees himself  everything, there is no other object at that time except the life-soul.

Maharishi Pippalada also clarified that – the mind comes in control of Udaan Vayu during the dream-state, when the mind reaches the heart-cavity under the influence of the Udaan Vayu, then the power of mind transforms into the soul. This hypnotic state is called as the dream, and the joys or sorrows experienced at that time, are not experienced by the mind, rather by the soul itself.

 

Dream and Yagyavalkya

Sage Yagyavalkya explained that – the world of dreams is very wonderful and miraculous. Because in this sleep-state the humans reach those heights, which they cannot even imagine in their wakeful state. Whatever thoughts and signals our brain receive throughout the day, the emotions which get activated, which we cannot display even if we wish to, all of these get recorded in our  subconscious mind, and at night when the body is resting, they emerge and appear as the dreams.

Whatever facts the modern scientists have explored about the topic of dream, a majority of them match the findings of sages and Rishis.  Brihdarnayak has considered the dream-state as the third state of the mind after the conscious and unconscious states. As the karmas of man provide spiritual satisfaction and happiness within his wakefulness state, similarly the dreams will be a reflection of bright prospects of the future.

When one sees a dream, his eye balls spin around in the same manner, as they spin during the wakefulness-state while watching any scene. This means that the eyes continue to see even when they are closed.

The dreams which we see in wakefulness state are mere imagined fantasies, but the scenes which we see during sleeping are termed as the dreams. The redundant, inconsistent dreams come only during shallow sleep, which cause distress. In fact, humans cannot continue to be awake all the time. Man spends a third of his life in sleep and most of the sleep is covered with the dreams.

 

Dream is a Bridge –

The Indian scriptures consider dreams as a gateway between the visible and the invisible. A man can see this world through this doorway, as well as the other universes. This world is also called as gateway-bridge or dream-location.

Yastwa Swapnen Tamasa Mohayitwa Nipadhyate

meaning, the ignorance and sinful mind of a person causes him to see the evil-indicating portends and nightmares. Sage Pippalada explaining its cure explains that – If we get nightmares during our sleep, then considering these evil-portends as evil-sin, lust-ignorance and troubles-obstacles, we should start worship-poojan to resolve them, so that our evil-intentions, evil-tendencies and evil-inclinations calm down and get replaced by elevation of virtuous-thoughts, virtuous-feelings and virtuous-qualities, and we start to see good dreams and experience our soul.

The episodes of Valmiki Ramayana makes it clear that – the nightmares indicate the upcoming misfortune to man, and similarly, the good dreams provide knowledge of auspicious times.

When we see any nice pleasant dream, our mind becomes ecstatic, we begin to experience pleasure and we get happy. However, when we see any nightmare, our mind gets afraid, an invisible fear of persecution starts torturing us, and we fall into sorrow. The experiences of scholars tell us that if we wake up after seeing such a scary nightmare, we should go back to sleep.

It is important after seeing a bad dream, to wash hand-feet after getting up, remember Guru and God, and certainly go back to sleep. Staying awake after seeing a nightmare accumulates those negative effects of that dream into the brain, and the body also starts behaving accordingly. So, it is important to go back to sleep to eliminate the effect of nightmare, so that the subconscious mind progresses in the right direction and becomes free of worry.

 

What do the dreams portend?

Every dream says something or the other. Some dreams cause frustration, while other dreams fill our life with happiness. The dreams are connected to our soul. When a person falls asleep, then his body separates from the soul since the soul never sleeps. When a person is asleep, his five knowledge-senses, his mind, and his working-senses suspend their activities, and his brain is completely at rest. At that moment, the person gets an experience, which is related to his life. This experience is called a dream.

Astounding discoveries and inventions have occurred during dreams. Even the fate of the people have also changed. We also get many hints during our dreams, but we cannot understand them. The dreams do not speak our language. They speak to humans in signals.

We can obtain information about the past, present and future through these dreams.

 

Everything gets accumulated – in the brain

Scientists state that there is a thick strip of two hundred and forty million blood vessels and neurons around the brain, which securely stores the conscious and subconscious scenes, the visible and invisible images on that strip, and these images manifest as dreams in due course of time,

According to Russian scientists we should not dismiss dreams as inconsequential, in reality the dreams are completely true and real, it is another matter that we cannot comprehend the equations, principles and meaning of the dreams. Secondly, the dreams come for a few moments, and then disappear, so that the person forgets those dreams by the morning, however it is certain that a healthy person sees three to seven dreams every night.

 

Dream is a boon –

Dream is the best and greatest gift to human life from God. This divine blessing has been imparted only to human race in the living-world, which can termed as the best endowment for the human life.

No man can live without dreams. If he is alive, is active, then it is certain that he sees dreams. There is proverb in English that – “A man who does not dream does not live”. Shakespeare has also said at one place – “Dreams are such stuff as we are made of”.

If we are healthy, then we take parts in a dream, in a similar way as other activities in real life. There are two main kinds of dreams – 1. Wakefulness Dreams and 2. Sleep Dreams.

The first kind of dream is the dream of poets, philosophers and lovers. A lover thinks about his love in his wakeful state, and he visualizes her in front of him in a few moments.

The second kind of dream is the sleep dream. When we are asleep in full relaxed state, then we get dreams, some of these dreams are of our real life, and sometimes they are amazing and unique. These dreams can also largely divided into three types.

Types of dreams – 1. Real Life Dream, 2. Amazing Adventures dream, 3. Future Presage Dream

Some of these dreams are good auspicious, while others are bad nightmarish inauspicious.

 

Auspicious dream

Cow, elephant, cotton, white goods, white flower, king, royal family members, the Brahmins, the astrologers, married woman, Guru, person having flowers, silver dishes, yoghurt, rice, feed sweets to others, fruit, white clothing, flags, flagged chariot, lotus, marriage, expressing love to woman, receipt of money, sea bathing, swimming, Shiva temple, God idol, dead body, boy-girl, bull, high towering temple, king’s throne, seeing the moon, shining stars, to punish the wicked, destroying enemies, obtaining sword, snake, fairy, nymph, seeing Gandharva, music-orchestra, fruit tree, drinking or feeding juice, archway, pilgrimage, Ganga-bath, visiting religious places, liberation from bond, increased body, umbrella on head, lion, milk lactation, germinating tree etc from body or the navel, Fasting or praying to Gods, viewing a flying mountain, mountain climbing, crying, viewing a crying person,death of a close relative, huge crowds, making speech to a crowd, riding a vehicle, riding a horse, winning a fort, book, writing a book, vision of a saint etc. are termed as  auspicious dreams.

 

Inauspicious dream

Burning pyre, monster, meeting an evil person, insult or humiliation, ash, dry trees, thorny trees, wilderness forest, hanging by neck, jittery-nervous , sweating profusely, taking ghee, eating something sweet, monkey, climbing on a wild animal, buffalo or bison, getting mud on body, accident, hair loss, tooth breakage, wandering with empty pots, wearing red or black clothes, news about death of a man or woman who has migrated overseas, eating gur(molasses), wandering around in dirty clothes, playing with snakes, snake entering the belly, flying in the air, tempest, deluge, flood, travelling south, drying of water reservoir, steeped in the swamp, Embracing a man or woman by force, committing burglary or theft in the house, Eclipse, seeing owl, meeting ghosts and vampires, fall of peak or top, rupture in mountain, noise etc. are termed as inauspicious dream.

 

In essence, it can be said that the dreams come in the life of every person. The dreams give some indicating signal, the dreams which one remembers upon waking, the person should think deeply about those dreams.  The dreams do not come from any other universe, the dreams are a manifestation of your own emotions, wishes and imagination.

 


 

 

The journey from the unknown towards the known is what separates humans from animals. The man wants to unravel all the mysteries of nature and his own life. He continuously makes many efforts to achieve this.

In this context, the dreams can be considered as a future forecasting process. Dream is an indication of what happened in past lives and what will occur in the future.

The Isht Sadhana is considered as the best Sadhana to comprehend our own dreams. Every Sadhak should practice Swapneshwari Sadhana multiple times to properly understand the world of dreams. Swapneshwari is a form of Aadhya Shakti Saraswati. This is a form of the knowledge, which is present in an invisible form in your brain, which keeps on giving you various prompts and indications.

The complete Sadhana process of this  Adya Shakti

Swapneshwari Sadhana

A form of Adya Shakti Saraswati

 

To fully understand and comprehend the meanings of dreams, it is necessary for the Sadhak to accomplish Swapneshwari Sadhana with full focus, and when he successfully accomplishes it, then he obtains answers naturally in the dreams.

On any Friday night after 10 pm, sit facing south, and spread a white cloth on a wooden board in front of you. Setup Guru Picture, Guru Paaduka, Guru Yantra and perform Panchopchaar poojan of Gurudev Nikhil. First, meditate on divine form of Gurudev-

GururBrahmaa GururVishnuH Gururdevo MaheshwaraH |

GuruH Saakshaat Par Brahmaa Tasmei Shree Guruve NamaH ||

 

Bathe the Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka with water after Nikhil meditation –

Om Nikhilam Snaanam Samarpayaami ||

 

Then wipe with a clean cloth. Perform Panchopchaar worship-poojan with Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken rice), Pushpa (Flowers), Neivedh (Sweets/Fruit offering), Dhoop (Incense) – Deep (Lamp) chanting following mantras –

Om Nikhilam Kumkum Samarpayaami |

Om Nikhilam Akshtaan Samarpayaami ||

Om Nikhilam Pushpam Samarpayaami ||

Om Nikhilam Neivedhyam Nivedayaami ||

Om Nikhilam Dhoopam Aardhyaapayaami, Deepam Darshayaami ||

(Show Dhoop, Deep)

 

Now rotate three Achmaani (spoonful) water around the  Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka and drop it on ground. Then chant 1 rosary-round of Guru Mantra with Guru Mala –

Om Param Tatvaaya Naaraayanaaya Gurubhayo Namah

 

After completing Guru poojan, make a mound of Yellow-sarson (mustard) near Guru’s picture. Now taking water in your right hand, perform following Viniyoga –

ViniyogaH

Asya Swapneshrimantrasya UpamanyurishiH BrihatichchhandaH Swapneshwari Devata Mamaabhishtasiddhayarthe Jape Viniyoga |

 

Then the Sadhak, taking water in left palm will touch the following following body-parts with water using right hand chanting following mantras –

 

KaranyaasaH

Om Shreem Angushthaabhyaam NamaH |

Swapneshwari Tarjanibhyaam NamaH |

Kaarya Madhyamaabhyaam NamaH |

Me Anaamikaabhyaam NamaH |

Vad Kanishthikaabhyaam NamaH |

Swaha Karatalakarapristhabhyaam NamaH |

Iti KaranyaasyaH |

 

Then to purify the heart, the Sadhak, taking water in left palm will touch the following following body-parts with water using right hand chanting following mantras –

 

HridyaadikshadanganyaasaH

Om Shreem Hridyaaya NamaH |

Swapneshwari Shirase Swaha |

Kaarya Shikhaayei Vakshat |

Me Kavachaaya Hum |

Vad Netratrayaaya Voukshat |

Swaaha Ashtraaya Phat |

Iti HridyaadikshadanganyaasaH |

 

Thereafter the Sadhak will meditate on the divine form of Goddess Swapneshwari chanting following Mantra –

Dhyaan-Meditation

Om Varaabhaye Padmayugam Dadhaanaan

KareikshaturbhiH Kanakaasanashthanam |

Sitaambaraam Shaaradachandrakaanti

Swapneshwari Noumi Vibhukshanaathayaam ||

 

After meditating on Goddess Swapneshwari, the Sadhak will setup nine suparis on yellow mustard mound as a nine Peeth Shakti of Goddess Swapneshwari. Make a mark using Kumkum on each while chanting the Peeth Shakti Mantra.

Start from East Direction –

Om Jayaayei NamaH ||1||

Om Vijayaayei NamaH ||2||

Om Ajitaayei NamaH ||3||

Om Aparajitaayei NamaH ||4||

Om Nityaayei NamaH ||5||

Om Vilaasinyei NamaH ||6||

Om Dogdhrayei NamaH ||7||

Om Aghoraayei NamaH ||8||

Madhyei Om Mangalaayei NamaH ||9||

 

Thereafter setup Swapneshwari Yantra in the middle of the suparis, and perform its poojan as per Dainik Pooja Vidhaan (Daily Worship Process). After the poojan-worship, chant 11 malas of following mantra using Swapna Siddhi Vijay Mala –

Mantra

Om Shreem Swapneshwari Kaarya Me Vad Swaha ||

 

This Sadhana should be performed from Friday to next Friday, and one thus accomplishes “Swapneshwari Siddhi“, Then when one needs to obtain answer to any question, he should write the question on  a paper, and place the paper in front of the Yantra, and chant 1 mala of mantra. After mantra jap, he should place the paper under the pillow and go to sleep.

After accomplishing the Sadhana, immerse the Yantra in a running-water, and keep the mala safely. Whenever there is a big problem, chant 1 mala mantra japa before sleeping, you will definitely obtain the answer to the question.

Goddess Swapneshwari appears in the night to clearly provide him the answer to the question, which he remembers clearly. Sadhaks have attained many amazing achievements and gained popularity through this Sadhana.

Sadhana Materials – 330 /-

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