सातवां सुख – गुरु देवता और ईश्‍वर की कृपा (Divine Blessings of Guru and Almighty God)

सातवां सुख – गुरु देवता और ईश्‍वर की कृपा
भक्ति-ध्यान में एकाग्रता
चित्त में निरन्तर शांति-संतोष
गुरु चरण पादुका स्थापन

 

यदि घर में सब कुछ हो, पर जीवन का उद्देश्य ही पूर्ण नहीं हो रहा हो अथवा जीवन में गुुरु, इष्ट की कृपा न हो तो यह सारा जीवन एक प्रकार से बेकार हो जाता है, इसीलिए जीवन का अंतिम सुख अपने जीवन में ही गुरु की कृपा प्राप्त कर स्वयं को उनके चरणों में अपने आपको लीन करता हुआ, पूर्ण तनाव रहित होकर समर्पित कर देने को ही सातवां सुख कहते हैं।

 

गुरु का साक्षात् स्वरूप गुरु चरण पादुकाएं –

 

जब गुरु से आत्मसात् होकर शिष्य के रोम-रोम में शक्ति और प्रेम रूपी अमृत तत्व व्याप्त हो जाता है तो उसे संसार के सारे कष्टों से लड़ने और उन्हें जीतने की क्षमता प्राप्त हो जाती है। प्रेम रूपी अमृत तत्व जाग्रत होने से देह और मन का कायाकल्प हो जाता है और शिष्य संसार को प्रेम भाव से देखने लगता है और उसकी दृष्टि ही बदल जाती है।
इसीलिये गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और श्रद्धा का वर्णन शास्त्रों में विशेष रूप से आया है। श्रद्धा और समर्पण का प्रत्यक्ष स्वरूप गुरु विग्रह और गुरु चरण पादुकाएं ही हैं।
गुरु चरण पादुकाओं को स्पर्श कर शिष्य अपने आपको पूर्ण रूप से गुरु को समर्पित कर देता है और वह अपने भीतर के व्याप्त दुःख, पीड़ा को गुरु चरणों में अर्पित कर दुःख मुक्त, पीड़ा मुक्त हो जाता है।

 

गुरु चरणों को, गुरु पादुका का स्पर्श करने पर उसे नित्य नवीन ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
गुरु पादुका का नित्य स्पर्श कर, पुष्प चढ़ाकर अर्चन एवं गुरु चरणों में कुंकुम अर्पण कर वह शक्ति से संचित हो जाता है। शिष्य निश्‍चिन्त हो जाता है। शिष्य को गुरु का आधार प्राप्त हो गया और गुरु सदैव की भांति उसके साथ हैं। जब शिष्य अपने आपको गुरु चरणों में समर्पित कर देता है तो गुरु उसे अपने हृदय से लगाकर उसकी सब ओर से रक्षा करते हैं।

 

‘गुरु चरण पादुकाएं तो अग्नि का स्वरूप हैं जो पाप-दोष को भस्म कर देती हैं। नित्य जीवन में दोष आते रहते हैं और गुरु चरण पादुकाओं का स्पर्श कर उन दोषों के दुष्प्रभाव से मुक्ति प्राप्त होती है।’

 

यह धु्रव सत्य है कि शिष्य वही है जो कि गुरु का नियमित रूप से पूजन करे।
गुरु पूजन का तात्पर्य है, गुरु विग्रह, गुरु मूर्ति, गुरु चरण पादुका एवं गुरु यंत्र को घर में स्थापन करना।
गुरु विग्रह का सर्वोत्तम स्वरूप गुरु चरण पादुकाएं हैं। जिस प्रकार भक्त की भक्ति भगवान के श्रीचरणों में रहती है, उसी प्रकार शिष्य की भक्ति निरन्तर गुरु चरण पादुकाओं में ही होनी चाहिये।

 

पादुका स्थापन विधान

 

गुरु चरण पादुका किसी भी गुरुवार अथवा सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग या गुरु पुष्य योग में स्थापित कर सकते हैं। प्राणप्रतिष्ठित श्री गुरु चरण पादुकाएं आत्मचैतन्य मंत्रों से सम्पुटित होती हैं।
श्रीगुरु चरण पादुकाएं प्रातः 9 बजे से पहले स्थापित कर देनी चाहिए।
साधक जिस दिन पादुकाएं स्थापित करे, उस दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व ही उठकर स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण कर लें और पूर्व दिशा की ओर मुख कर पीले आसन पर गुरु चादर ओढ़ कर बैठ जाएं।
अपने सामने एक बाजोट पर पुष्पों का आसन देकर ‘श्री गुरु चरण पादुका’ स्थापित कर दें।
कुंकुम, अक्षत, मौली, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पादुकाओं का पंचोपचार पूजन सम्पन्न कर लें।
इसके उपरान्त गुरु मंत्र की 4 माला मंत्र जप करें।

 

॥ॐ परमतत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः॥

 

मंत्र जप के पश्‍चात् गुरु आरती कर, नैवेद्य परिवार के सभी सदस्यों में वितरित कर स्वयं भी ग्रहण करें और पादुकाओं को अपने पूजा स्थल में रख दें।

 

साधना सामग्री – ₹. 360/-
The Seventh Pleasure – Divine Blessings of Guru and Almighty God

Concentration in Meditation and Prayer

Continuous Peace and Satisfaction in Mind

Installation of Guru Charan Paduka

If one has everything in the house, but if the purpose of life is not getting complete or if there is absence of Divine or Guru blessings, then the  entire life becomes worthless.  So the ultimate happiness in your life is to obtain Guru’s grace and to dedicate yourself completely to His feet, to offer yourself completely without any worry or tension.

Guru Charan Paadukayein are the Divine Form of Guru Himself –

When after connecting with Guru, the entire body of the disciple gets energized with the holy nectar of love; then the disciple obtains the capability and power to fight and win against all sufferings of the world. The activation of the Love like nectar rejuvenates and renovates his mind and body; and he starts looking at the world with benign love, and his vision transforms.

Therefore, the Holy Scriptures have especially described the complete dedication and devotion to Guru. The Guru Photographs and Guru Charan Padukas are the manifestations of this faith and dedication to Guru.

The disciple surrenders himself completely to Guru after touching the Guru Charan Padukas; and he becomes relieved and pain-free after offering his entire inner sorrows and pains to the Guru.

He daily obtains new energy by touching the Guru feet, the Guru Charan Padukas.

He accumulates divine energy by daily touching and worshipping through flowers and offering Kumkum to Guru Charan Padukas. The disciple becomes relaxed. The disciple receives the basic foundation from the Gurudev and the Guru is always with him. When the disciple surrenders himself to Guru, He takes him into His heart and protects him from everything.

Guru Charan Padukas are the expression of fire which annihilates all the sins and defects of the disciple. The defects in life keep coming and the disciple gets liberated from the malefic effects of these flaws by continuously touching the Guru Charan Padukas.

It is a universal truth that a disciple is one who worships his Guru daily.

Guru worship implies, setting up Guru Photo, Guru Statue, Guru Charan Paduka and Guru Yantra in the home.

The best form of Guru Photo are Guru Charan Padukas. The devotion of a devotee always stays at the feet of the Divine, similarly the devotion of a disciple should always remain in the Guru Charan Padukas.

Paduka Installation Procedure

You may install Guru Charan Padukas on any Thursday or during Sarwaarth Siddhi Yoga, Amrit Yoga or Guru Pushya Yoga moments. Praanpratisthit Guru Charan Padukas are sanctified with Aatmacheitanya Mantras.

The Guru Charan Padukas should be set up before 9 am in the morning.

On the day of installation of Guru Charan Padukas, the Sadhak should take bath before sunrise and wear clean and pure clothes. He should sit facing East direction on a Yellow Asana after wrapping Guru-Chadar.

Make a seat of flowers on a Wooden Board and place “Shree Guru Charan Padukas”.

Perform Panchoopchaar Poojan of Padukas by Kumkum, Akshat (unbroken rice), Mouli, Dhoop, Deep and Neiveidya.

Thereafter chant 4 malas of Guru Mantra :

|| Om Paramtatvaye Narayanaye Gurubhayo Namah ||

Perform Guru Aarti after Mantra chanting. Distribute the Neiveidya among the family members, take some for self too and place the Padukas in the Worship-place.

Sadhana material – ₹. 360 / –

जीवन के सात सुख (Seven pleasures of life) – जीवन इन्द्रधनुष के सात रंग
1. पहला सुख – आरोग्य (Health)
2. दूसरा सुख – घर में माया (Wealth in home)
3. तीसरा सुख – सुयोग्य संतान (Worthy Child)
4. चौथा सुख – राज्य सम्मान, राज मे पासा (Honors and Glory by Government)
5. पांचवां सुख-श्रेष्ठ गृहस्थ जीवन (Excellent Family Life)
6. छठा सुख – बाधाओं पर विजय – शत्रु मर्दन (Triumph over Obstacles)
7. सातवां सुख – गुरु देवता और ईश्‍वर की कृपा (Divine Blessings of Guru and Almighty God)
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