भैरव साधना (Bhairav Sadhana)

कामना पूर्ति भय बाधा निवारण
बटुक भैरव साधना

 

जीवन में सुख और दुःख आते ही रहते हैं। जहां आदमी सुख प्राप्त होने पर प्रसन्न होता है, वहीं दुःख आने पर वह घोर चिन्ता और परेशानियों से घिर जाता है, परन्तु धैर्यवान व्यक्ति ऐसे क्षणों में भी शांत चित्त होकर उस समस्या का निराकरण कर लेते हैं।
कलियुग में पग-पग पर मनुष्य को बाधाओं, परेशानियों और शत्रुओं से सामना करना पड़ता है, ऐसी स्थिति में उसके लिए मंत्र साधना ही एक ऐसा मार्ग रह जाता है, जिसके द्वारा वह शत्रुओं और समस्याओं पर पूर्ण विजय प्राप्त कर सकता है, इस प्रकार की साधनाओं में ‘आपत्ति उद्धारक बटुक भैरव साधना’ अत्यन्त ही सरल, उपयोगी और अचूक फलप्रद मानी गई है, कहा जाता है कि भैरव साधना का फल हाथों-हाथ प्राप्त होता है।
भैरव को भगवान शंकर का ही अवतार माना गया है, शिव महापुराण में बताया गया है –
भैरवः पूर्णरूपो हि शंकरः परात्मनः।
मूढ़ास्ते वै न जानन्ति मोहिता शिवमायया।
देवताओं ने भैरव की उपासना करते हुए बताया है कि काल की भांति रौद्र होने के कारण ही आप ‘कालराज’ हैं, भीषण होने से आप ‘भैरव’ हैं, मृत्यु भी आप से भयभीत रहती है, अतः आप काल भैरव हैं, दुष्टात्माओं का मर्दन करने में आप सक्षम हैं, इसलिए आपको ‘आमर्दक’ कहा गया है, आप समर्थ हैं और शीघ्र ही प्रसन्न होने वाले हैं।

 

आपदा-उद्धारक बटुक भैरव
‘शक्ति संगम तंत्र’ के ‘काली खण्ड’ में भैरव की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है कि ‘आपद’ नामक राक्षस कठोर तपस्या कर अजेय बन गया था, जिसके कारण सभी देवता त्रस्त हो गये, और वे सभी एकत्र होकर इस आपत्ति से बचने के बारे में उपाय सोचने लगे, अकस्मात् उन सभी के देह से एक-एक तेजोधारा निकली और उसका युग्म रूप पंचवर्षीय बटुक का प्रादुर्भाव हुआ, इस बटुक ने – ‘आपद’ नामक राक्षस को मारकर देवताओं को संकट मुक्त किया, इसी कारण इन्हें ‘आपदुद्धारक बटुक भैरव’ कहा गया है।
‘तंत्रालोक’ में भैरव शब्द की उत्पत्ति भैभीमादिभिः अवतीति भैरेव अर्थात् भीमादि भीषण साधनों से रक्षा करने वाला भैरव है, ‘रुद्रयामल तंत्र’ में दस महाविद्याओं के साथ भैरव के दस रूपों का वर्णन है और कहा गया है कि कोई भी महाविद्या तब तक सिद्ध नहीं होती जब तक उनसे सम्बन्धित भैरव की सिद्धि न कर ली जाय।

 

‘रुद्रयामल तंत्र’ के अनुसार दस महाविद्याएं और सम्बन्धित भैरव के नाम इस प्रकार हैं –
1. कालिका – महाकाल भैरव
2. त्रिपुर सुन्दरी – ललितेश्‍वर भैरव
3. तारा – अक्षभ्य भैरव
4. छिन्नमस्ता – विकराल भैरव
5. भुवनेश्‍वरी – महादेव भैरव
6. धूमावती – काल भैरव
7. कमला – नारायण भैरव
8. भैरवी – बटुक भैरव
9. मातंगी – मतंग भैरव
10. बगलामुखी – मृत्युंजय भैरव

 

भैरव से सम्बन्धित कई साधनाएं प्राचीन तांत्रिक ग्रंथों में वर्णित हैं, जैन ग्रंथों में भी भैरव के विशिष्ट प्रयोग दिये हैं। प्राचीनकाल से अब तक लगभग सभी ग्रंथों में एक स्वर से यह स्वीकार किया गया है कि जब तक साधक भैरव साधना सम्पन्न नहीं कर लेता, तब तक उसे अन्य साधनाओं में प्रवेश करने का अधिकार ही नहीं प्राप्त होता।
‘शिव पुराण’ में भैरव को शिव का ही अवतार माना है तो ‘विष्णु पुराण’ में बताया गया है कि विष्णु के अंश ही भैरव के रूप में विश्‍व विख्यात हैं, दुर्गा सप्तशती के पाठ के प्रारम्भ और अंत में भी भैरव की उपासना आवश्यक और महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भैरव साधना के बारे में लोगों के मानस में काफी भ्रम और भय है, परन्तु यह साधना अत्यन्त ही सरल, सौम्य और सुखदायक है, इस प्रकार की साधना को कोई भी साधक कर सकता है।
भैरव साधना के बारे में कुछ मूलभूत तथ्य साधक को जान लेने चाहिये –
1. भैरव साधना सकाम्य साधना है, अतः कामना के साथ ही इस प्रकार की साधना की जानी चाहिए।
2. भैरव साधना मुख्यतः रात्रि में ही सम्पन्न की जाती है।
3. कुछ विशिष्ट वाममार्गी तांत्रिक प्रयोग में ही भैरव को सुरा का नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
4. भैरव की पूजा में दैनिक नैवेद्य साधना के अनुरूप बदलता रहता है। मुख्य रूप से भैरव को रविवार को दूध की खीर, सोमवार को मोदक (लड्डू), मंगलवार को घी-गुड़ से बनी हुई लापसी, बुधवार को दही-चिवड़ा, गुरुवार को बेसन के लड्डू, शुक्रवार को भुने हुए चने तथा शनिवार को उड़द के बने हुए पकौड़े का नैवेद्य लगाते हैं, इसके अतिरिक्त जलेबी, सेव, तले हुए पापड़ आदिका नैवेद्य लगाते हैं।

 

साधना के लिए आवश्यक
ऊपर लिखे गये नियमों के अलावा कुछ अन्य नियमों की जानकारी साधक के लिए आवश्यक है, जिनका पालन किये बिना भैरव साधना पूरी नहीं हो पाती।
1. भैरव की पूजा में अर्पित नैवेद्य प्रसाद को उसी स्थान पर पूजा के कुछ समय बाद ग्रहण करना चाहिए, इसे पूजा स्थान से बाहर नहीं ले जाया जा सकता, सम्पूर्ण प्रसाद उसी समय पूर्ण कर देना चाहिए।
2. भैरव साधना में केवल तेल के दीपक का ही प्रयोग किया जाता है, इसके अतिरिक्त गुग्गुल, धूप-अगरबत्ती जलाई जाती है।
3. इस महत्वपूर्ण साधना हेतु मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त ‘बटुक भैरव यंत्र’ तथा ‘चित्र’ आवश्यक है, इस ताम्र यंत्र तथा चित्र को स्थापित कर साधना क्रम प्रारम्भ करना चाहिए।
4. भैरव साधना में केवल ‘काली हकीक माला’ का ही प्रयोग किया जाता है।

 

साधना विधान
इस साधना को बटुक भैरव सिद्धि दिवस (23 मई 2015) अथवा किसी भी रविवार को सम्पन्न किया जा सकता है। भैरव शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। साधकों को नियमानुसार वर्ष में एक-दो बार तो भैरव साधनाएं अवश्य ही सम्पन्न करनी चाहिए।
साधना वाले दिन साधक रात्रि में स्नान कर, स्वच्छ गहरे रंग के वस्त्र धारण कर लें। अपना पूजा स्थल साधना के पूर्व ही धौ-पौछ कर साफ कर लें। भैरव साधना दक्षिणाभिमुख होकर सम्पन्न करने से साधना में शीघ्र सफलता प्राप्त होती है।
अपने सामने एक बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर सर्वप्रथम गुरु चित्र, गुरु विग्रह अथवा गुुरु चरण पादुका स्थापित करें। गुरु चित्र के निकट ही भैरव का चित्र अथवा विग्रह स्थापित कर दें। सर्वप्रथम गुरु चित्र का पंचोपचार पूजन सम्पन्न करें। उसके पश्‍चात् भैरव चित्र के सामने एक ताम्र प्लेट में कुंकुम से त्रिभुज बनाकर उस पर ‘बटुक भैरव यंत्र’ स्थापित कर दें।
भैरव साधना में तेल का ही दीपक प्रज्जवलित करना चाहिए। यंत्र स्थापन के पश्‍चात् बाजोट पर ही तेल का दीपक प्रज्ज्वलित कर उसका पूजन कुंकुम, अक्षत, पुष्प इत्यादि से करें।
इसके पश्‍चात् दोनों हाथ जोड़कर सर्वप्रथम बटुक भैरव का ध्यान करें-
बटुक भैरव ध्यान
वन्दे बालं स्फटिक-सदृशम्, कुन्तलोल्लासि-वक्त्रम्।
दिव्याकल्पैर्नव-मणि-मयैः, किंकिणी-नूपुराढ्यैः॥
दीप्ताकारं विशद-वदनं, सुप्रसन्नं त्रि-नेत्रम्।
हस्ताब्जाभ्यां बटुकमनिशं, शूल-दण्डौ दधानम्॥
अर्थात् भगवान् श्री बटुक भैरव बालक रूप ही हैं। उनकी देह-कान्ति स्फटिक की तरह है। घुंघराले केशों से उनका चेहरा प्रदीप्त है। उनकी कमर और चरणों में नव-मणियों के अलंकार जैसे किंकिणी, नूपुर आदि विभूषित हैं। वे उज्ज्वल रूपवाले, भव्य मुखवाले, प्रसन्न-चित्त और त्रिनेत्र-युक्त हैं। कमल के समान सुन्दर दोनों हाथों में वे शूल और दण्ड धारण किए हुए हैं। भगवान श्री बटुक भैरव के इस सात्विक ध्यान से सभी प्रकार की अप-मृत्यु का नाश होता है, आपदाओं का निवारण होता है, आयु की वृद्धि होती है, आरोग्य और मुक्ति-पद लाभ होता है।
भगवान भैरव के ध्यान के बाल स्वरूप, आपदा उद्धारक स्वरूप के ध्यान के पश्‍चात् गंध, पुष्प, धूप, दीप, इत्यादि से निम्न मंत्रों के साथ ‘बटुक भैरव यंत्र’ का पूजन सम्पन्न करें –
ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भैरव-प्रीत्यर्थे समर्पयामि नमः।
ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भैरव-प्रीत्यर्थे समर्पयामि नमः।
ॐ यं वायु तत्त्वात्मकं धूपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भैरव-प्रीत्यर्थे घ्रापयामि नमः।
ॐ रं अग्नि तत्त्वात्मकं दीपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भैरव-प्रीत्यर्थे निवेदयामि नमः।
ॐ सं सर्व तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भैरव-प्रीत्यर्थे समर्पयामि नमः।
बटुक भैरव यंत्र पूजन के पश्‍चात् ‘काली हकीक माला’ से निम्न बटुक भैरव मंत्र की 7 माला मंत्र जप करें।

 

बटुक भैरव मंत्र
॥ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा॥
यह इक्कीस अक्षरों का मंत्र अत्यन्त ही महत्वपूर्ण माना गया है, एक दिवसीय इस साधना की समाप्ति के पश्‍चात् नित्य बटुक भैरव यंत्र अपने सामने स्थापित कर उसका संक्षिप्त पूजन कर एक माह तक नित्य उपरोक्त बटुक भैरव मंत्र की एक माला जप करने से साधक की मनोकामना पूर्ण हो जाती है।
एक माह अर्थात् 30 दिन मंत्र जप के पश्‍चात् यंत्र एवं माला को जल में विसर्जित कर दें।

 

साधना सामग्री – 450/-
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भैरव से सम्बन्धित विशेष प्रयोग
शत्रु बाधा निवारण भैरव प्रयोग
तीव्र भैरव वशीकरण-सम्मोहन प्रयोग

 

शत्रु-बाधा-निवारण-प्रयोग
भगवान भैरव की साधना वशीकरण, उच्चाटन, सम्मोहन, स्तंभन, आकर्षण और मारण जैसी तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव को नष्ट करने के लिए भैरव साधना की जाती है। भैरव साधना से सभी प्रकार की तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। जन्म कुण्डली में छठा भाव शत्रु का भाव होता है। लग्न में षट भाव भी शत्रु का है। इस भाव के अधिपति, भाव में स्थित ग्रह और उनकी दृष्टि से शत्रु सम्बन्धी कष्ट उत्पन्न होते हैं। षष्ठस्थ-षष्ठेश सम्बन्धियों को शत्रु बनाता है। यह शत्रुता कई कारणें से हो सकती है। आपकी प्रगति कभी-कभी दूसरों को अच्छी नहीं लगती और आपकी प्रगति को प्रभावित करने के लिए तांत्रिक क्रियाओं का सहारा लेकर आपको प्रभावित करते हैं।
तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव से व्यवसाय, धंधे में आशानुरूप प्रगति नहीं होती। दिया हुआ रुपया नहीं लौटता, रोग या विघ्न से आप पीड़ित रहते हैं अथवा बेकार के मुकद्मेबाजी में धन और समय की बर्बादी हो सकती है। इस प्रकार के शत्रु बाधा निवारण के लिए भैरव साधना फलदायी मानी गई।
साधना विधान
  • भैरव शत्रु बाधा निवारण यह प्रयोग किसी भी रविवार,  मंगलवार अथवा कृष्ण पक्ष की अष्टमी को सम्पन्न किया जा सकता है।
  • भैरव साधना मुख्यतः रात्रि काल में ही सम्पन्न की जाती है परन्तु इस प्रयोग को आप अपनी सुविधानुसार दिन में भी सम्पन्न कर सकते हैं।
  • साधना काल में साधक स्नान कर स्वच्छ लाल वस्त्र धारण कर, दक्षिणाभिमुख होकर बैठ जाए।
  • अपने सामने एक बाजोट पर सर्वप्रथम गीली मिट्टी की ढेरी बनाकर उस पर ‘काल भैरव गुटिका’ स्थापित करें।
  • उसके चारों ओर तिल की पांच ढेरियां बना लें तथा प्रत्येक पर एक-एक आक्रान्त चक्र स्थापित करें।
  • बाजोट पर तेल का दीपक प्रज्वलित करें तथा गुग्गल धूप तथा अगरबत्ती जला दें।
  • सर्वप्रथम निम्न मंत्र बोलकर भैरव का आह्वान करें –

 

आह्वान मंत्र
आयाहि भगवन् रुद्रो भैरवः भैरवीपते।
प्रसन्नोभव देवेश नमस्तुभ्यं कृपानिधि॥
  • भैरव आह्वान के पश्‍चात् साधक भैरव का ध्यान करते हुए अपनी शत्रु बाधा शांति हेतु भैरव से प्रार्थना करें तथा हाथ में जल लेकर निम्न संकल्प करें –

 

संकल्प
मैं अपनी अमुक शत्रु-बाधा के निवारण हेतु काल भैरव प्रयोग सम्पन्न कर रहा हूं।
  • बाधा निवारण संकल्प के पश्‍चात् ‘काल भैरव गुटिका’ का सिन्दूर लगाकर पूजन करें। उस सिन्दूर से स्वयं के मस्तक पर भी तिलक लगाये।
  • इसके पश्‍चात् पांचों आक्रान्त चक्र का सिन्दूर, कुंकुम, काजल, सफेद पुष्प से पूजन करें।
  • अब एक पात्र में काली सरसों, काले तिल मिलाएं, उसमें थोड़ा तेल डालें, थोड़ा सिन्दूर डालकर उसे मिला दें, इस मिश्रण को निम्न भैरव मंत्र का जप करते हुए ‘काल भैरव गुटिका’ के समक्ष थोड़ा-थोड़ा कर 21 बार अर्पित करते रहें –
विभूति भूति नाशाय, दुष्ट क्षय कारकं, महाभैरव नमः। सर्व दुष्ट विनाशनं सेवकं सर्वसिद्धि कुरु। ॐ काल भैरव, बटुक भैरव, भूत-भैरव, महा-भैरव महा-भय विनाशनं देवता सर्व सिद्धिर्भवेत्।
उपरोक्त मंत्र जप के पश्‍चात् भैरव के निम्न मंत्र का 15 मिनट तक जप करें –

 

मंत्र
॥ॐ हृीं भैरव भैरव भयकरहर मां रक्ष रक्ष हुं फट् स्वाहा॥

 

इस प्रकार जप पूर्ण कर भैरव को दूध से बना नैवेद्य अर्पित करें। आप स्वयं भी इस नैवेद्य को ग्रहण करें। इस प्रकार यह प्रयोग सम्पन्न होता है। प्रयोग समाप्ति के पश्‍चात् समस्त सामग्री को किसी काले वस्त्र में बांध कर अगले दिन जल में विसर्जित कर दें।
शत्रु बाधा निवारण का यह बहुत ही तीव्र प्रयोग है, साधकों ने इस प्रयोग को सम्पन्न कर अपनी बाधाओं को जड़ मूल से समाप्त किया है। इस सम्बन्ध में अनेक साधकों के पत्र निरन्तर पत्रिका कार्यालय में प्राप्त होते रहते हैं। भैरव के इस विशिष्ट प्रयोग को किसी को हानि पहुंचाने या उसको नुकसान कराने के लिये नहीं करना चाहिए।

 

साधना सामग्री – 350/-
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भैरव तीव्र वशीकरण सम्मोहन प्रयोग
नौकरी, व्यापार, जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं कि आप चाह कर भी किसी को अपनी बात स्पष्ट नहीं कर पाते। ऐसे कई लोग हैं जिनको इस बात का दुःख होता है कि जीवन में उन्हें ‘चांस’ नहीं मिला। अक्सर लोग इस बात को कहते हैं कि – उसे अपनी बात कहने का अवसर ही प्राप्त नहीं हुआ, इसलिये काम नहीं हुआ।
जीवन में आने वाले अवसरों अर्थात् ‘चांस’ को सुअवसर में बदलने के लिये सम्पन्न करें भगवान भैरव का यह अति विशिष्ट वशीकरण प्रयोग। जिसको सम्पन्न करने के पश्‍चात् आप जिस किसी को भी अपने वश में करना चाहते हैं अथवा अपनी बात को उसके सामने स्पष्ट करना चाहते हैं कर सकते हैं। यह प्रयोग बालक-वृद्ध, स्त्री-पुरुष किसी पर भी सम्पन्न किया जा सकता है। भगवान भैरव का तंत्र वशीकरण प्रयोग कोई टोटका नहीं बल्कि शुद्ध तंत्र प्रयोग है जिसका प्रभाव तत्काल रूप से देखा जा सकता है।

 

साधना विधान
  • तंत्र वशीकरण प्रयोग किसी भी रविवार अथवा मंगलवार को सम्पन्न किया जा सकता है।
  • यह रात्रिकालीन प्रयोग है जिसे रात्रि में 10 बजे के बाद ही सम्पन्न करना चाहिए।
  • इस प्रयोग हेतु  मंत्रसिद्ध प्राण प्रतिष्ठायुक्त ‘भैरव वशीकरण गुटिका’ तथा ‘काली हकीक माला’ की आवश्यकता होती है।
  • रात्रि में साधक स्नान, ध्यान कर किसी शांत स्थान पर बैठकर यह साधना सम्पन्न करें। साधना स्थल को पहले से ही साफ-स्वच्छ कर लें।
  • भैरव का यह प्रयोग उत्तर दिशा की ओर मुख करके सम्पन्न करना चाहिए।
  • अपने सामने एक बाजोट पर लाल वस्त्र बिछा कर उस पर एक पीपल का पत्ता रखें। पत्ते पर कुंकुम से उस व्यक्ति के नाम का प्रथम अक्षर लिख दें जिसे आप वशीभूत करना चाहते हैं।
  • इसके पश्‍चात् इस पत्ते पर ‘भैरव वशीकरण गुटिका’ स्थापित कर दें।
  • गुटिका का संक्षिप्त पूजन कुंकुम, अक्षत, पुष्प इत्यादि से करें तथा धूप, दीप प्रज्जवलित कर लें।
  • इसके पश्‍चात् काली हकीक माला से निम्न मंत्र की 3 माला मंत्र जप करें।
ॐ नमो रुद्राय कपिलाय भैरवाय त्रिलोक-नाथाय ह्रीं फट् स्वाहा।
मंत्र जप समाप्ति के पश्‍चात् गुटिका पर 21 लौंग अर्पित करते हुए उपरोक्त मंत्र का उच्चारण करें। इस प्रकार भैरव वशीकरण प्रयोग सम्पन्न होता है। प्रयोग समाप्ति के पश्‍चात् समस्त सामग्री को उसी लाल वस्त्र में बांधकर प्रातः किसी चौराहे पर रख दें।

 

साधना सामग्री – 300/-
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ये दोनों प्रयोग सिद्ध सरल प्रयोग हैं, जीवन में जब भी स्थिति प्रतिकूल हो अर्थात् शत्रु बाधा बढ़ती ही जा रही हो, अनावश्यक वाद-विवाद बढ़ता ही जा रहा हो तो यह प्रयोग अवश्य करना चाहिये, निरन्तर कार्य सिद्धि के लिये अपने आपको स्थापित करने के लिये व्यक्ति विशेष को पूर्ण अनुकूल बनाने के लिये यह साधना प्रयोग अवश्य सम्पन्न करें।
Wish fulfillment and Riddance from fears and obstacles

 

Batuk Bhairav ​​Sadhana

 

Life is full of  joys and sorrows. A person feels happy in pleasures, but gets filled with pain and tensions when confronted with adversity. However tolerant and patient individuals resolve such situations by thinking and acting calmly and coolly.

Man has to face obstacles, troubles and enemies at each step in this Kaliyuga, and Mantra Sadhana remains the only path to  obtain complete victory over enemies and problems. One such exceedingly simple, useful and accurate Sadhana is “Aapatti Udhwarak Batuk Bhairav Sadhana”. It is said that one gets instant results by performing  Bhairav Sadhanas.

 

Lord Bhairav ​​is considered as an  incarnation of Lord Shiva, Shiva Mahapuraana states that-

 

BhairavaH Poornroopo Hi ShankaraH ParaatmanaH |

Mudhaaste Ve Na Jaananti Mohitaa Shivmayayaa ||

 

While worshipping Lord Bhairava, the Gods have described that –  You are “Kaalraaj” being  similarly full of anger and rage; you are “Bhairav” being ever-powerful; even death is always afraid of you; so you are called Kaal Bhairav; you are capable of annihilating evil spirits; so you are known as “Aamardak”; you are fully proficient and you get pleased very quickly.

 

Aapada Udhwarak Batuk Bhairav

The Kali-Khanda of “Shakti Sangam Tantra” text while describing origin of Lord Bhairav states that a demon called “Aapad” became invincible after performing many austerities; due to which all the Gods were stricken, and they collectively thought about ways to counter this calamity; then a strong power oozed out of their bodies and the combination of these powers yielded five years aged Batuk; this Batuk freed Gods from this crisis by destroying Aapad; and therefore He is called “Aapduddhwarak Batuk Bhairav”.

“Tantralok” text explains origin of Bhairav word as “BhebhimadibhiH Avatiti Bheirev” i.e. Lord Bhairav  protects from gigantic horrible evil effects. Rudryamal Tantra describes ten forms of Bhairav along with ten Mahavidhyas and states that no one can perfectly accomplish Mahavidhya Sadhana  until he has successfully accomplished the corresponding Bhairav Sadhana.

“Rudrayamal Tantra” states following ten Mahavidhyas and their corresponding Bhairavs –

1. Kaalika – Mahakala Bhairav

2. Tripur Sundari – Laliteshwar Bhairav

3 Tara – Akshabhya Bhairav

4. Chinnmasta – Vikraal Bhairav

5. Bhuvaneshwari – Mahadev Bhairava

6. Dhumavati – Kaal Bhairav

7. Kamla – Narayan Bhairav

8. Bhairavi – Batuk Bhairav

9. Matangi – Matang Bhairav

10 Baglamukhi – Mrityunjayi Bhairav

 

Many Bhairav Sadhana practices have been described in ancient Tantric texts; Jain texts  also explain specific prayogs of Bhairav. Since ancient times it has been accepted by almost all the texts that unless one has accomplished Bhairav Sadhana, he doesn’t get the right to practice any other Sadhana.

“Shiva Purana” describes Lord Bhairav has an incarnation of Lord Shiva and “Vishnu Purana” states that Lord Bhairav is famous worldwide as a unit of Lord Vishnu, It is important and significant to perform worship of Lord Bhairav at the start and end of Durga Saptshati recitation.

 

Many people have fear and confusion regarding Sadhana of Lord Bhairav, but it is quite simple,  gentle and soothing, any Sadhak can perform this type of Sadhana.

The Sadhak should understand some basic primary facts about Bhairav Sadhana-

1. Bhairav Sadhana is a willful Sadhana, so such a Sadhana should be performed with a wish.

2. Bhairav ​​Sadhana is primarily performed at night.

3. The Neivedeya of wine or beer is offered only in some specific Vammargi Sadhanas

4. The daily neivedeya offering in Bhairav Sadhana is different for each day. Mainly

Milk-Pudding on Sunday, Modak (laddu) on Monday, Lapasi prepared with ghee-gur on Tuesday, Dahi-Chiwra on Wednesday, Besan-Laddu on Thursday, roasted-chane (grams) on Friday and Pakode of Urad on Saturday. Moreover, offerings of jalebi, sev, fried papad etc are also done.

 

Important for Sadhana

In addition to the above rules, the Sadhak also needs to understand other important rules, one cannot attain accomplishment in Bhairav Sadhana without following these rules.

1. The offerings made in Bhairav worship should be partaken after some time. These cannot be taken away from the worship space, the entire offering should be consumed at that time itself.

2. Only oil Deepak/lamp is used in Bhairav ​​Sadhana. Guggul and Dhoop-agarbatti is also lighted.

3. The Mantra Siddh Prana Pratisthtita Yukt “Batuk Bhairav Yantra” and “Picture” are important in this Sadhana, the Sadhana should be started only after consecrating and worshipping this copper yantra and picture.

4. Only Black Hakeek Mala is used in Bhairav ​​Sadhana.

 

Sadhana Procedure

This Sadhana can be performed on Batuk Bhairav Siddhi Diwas (23 May 2015) or on any Sunday. Lord Bhairav is a quick pleasing deity. Sadhaks should practice Bhairav Sadhana at least couple of times every year.

After taking bath in night, wear clean dark colored robes. Clean and purify your worship-space before the Sadhana. One gets quick success by performing Bhairav Sadhana while seated facing South direction.

Spread red cloth on a wooden plank, and first setup Guru-picture, Guru-statue or Guru Charan Paduka. Setup Bhairav picture or statue near the Guru-picture.  First perform Panchopchaar worship of Gurudev. Then place “Batuk Bhairav Yantra” on a copper plate after drawing a triangle with Kumkum on it. Place copper plate in front of Bhairav picture.

Only oil lamp should be lighted in  Bhairav ​​Sadhana. After establishing Bhairav Yantra, light the oil lamp on wooden plank itself and worship it with Kumkum, rice and flowers.

Thereafter, meditate on Batuk Bhairav with folded hands-

 

Batuk Bhairav ​​Dhyaan –

Vande Balam Sfatik-Sdrisham, Kuntlolalaasi-Vaktram |

Diwyaakalpernava-Mani-MayeH, Kinkani-nupooradhyeiH ||

Deeptaakaram Vishad-Vandanam, Suprassanam Tri-Netram |

Hastaabjabhyam Batukmanisham, Shul-Dando Dadhanam ||

 

i.e. Lord Shree Batuk Bhairav is a child form. His body has crystal like luster. His face is illuminated with curly hairs. Various valuable stones like Kinkini, Nupur etc. decorate his waist and feet. He has a bright beauty,  gorgeous face, and is full of joy with three eyes. He holds a spear and baton in his lotus like hands. All kinds of untimely deaths are destroyed by this sacred meditation of Lord Shree Batuk Bhairav, disasters get prevented, age gets increased and one obtains long life and freedom.

 

After meditation on child form and disaster-destroyer form of Lord Bhairav, worship “Batuk Bhairav Yantra” with fragrance, flowers, incense, lamp etc. with following mantras–

 

Om Lam Prithvi–Tattvatmakam Gandham Shreemad Aapdudhwaran-Batuk-Bhairav-Prityarthe Samarpayaami Namah |

Om Ham Aakash-Tattvatmakam Pushpam Shreemad Aapdudhwaran-Batuk-Bhairav-Prityarthe Samarpayaami Namah |

Om Yam Vayu-Tattvatmakam Dhoopam Shreemad Aapdudhwaran-Batuk-Bhairav-Prityarthe Samarpayaami Namah |

Om Ram Agni-Tattvatmakam Deepam Shreemad Aapdudhwaran-Batuk-Bhairav-Prityarthe Samarpayaami Namah |

Om Sam Sarv-Tattvatmakam Taambulam Shreemad Aapdudhwaran-Batuk-Bhairav-Prityarthe Samarpayaami Namah |

 

After Batuk Bhairav Yantra worship, chant 7 malas (rosary-rounds) of following Batuk Bhairav Mantra with Black Hakeek Mala-

 

Batuk Bhairav Mantra

|| Om Hreem Batukaaye Aapdudhwaranaye Kuru Kuru Batukaaye Hreem Om Swaha ||

 

This twenty-one letters mantra is considered very important. After completion of this single day Sadhana, daily worship of Batuk Bhairav Yantra after setting it up in front of you, followed by one mala chanting of Batuk Bhairav Mantra will surely help the Sadhak in fulfilling his or her wishes.

After a month i.e. 30-days, immerse the Yantra and Mala in a running stream of water.

Sadhana material – Rs. 450 / –

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Special Prayogs related to Bhairav

Shatru Badhaa Nivarann Bhairav Prayog (Riddance of enemy-obstacle)

Teevra Bhairav Vashikaran-Sammohan Prayog (for Hypnotism)

 

Shatru Badhaa Nivarann Prayog

Lord Bhairav Sadhana is performed to eliminate the evil effects of Tantrik processes like Vashikaran (Captivate), Uchchatan (Repel), Sammohan (Hypnotise), Stambhan (Deter), Aakarshan (Enchant) and Maaran (Destroy) etc. Hypnotism, All malevolent impacts of such Tantrik processes get destroyed by Bhairav Sadhana. The sixth house in horoscope is Enemy-house. The sixth form of Lagna is also that of enemy. The Lord of this house, the residing planet and the planet’s perspective cause enemy related problems. The Sshatasth-Sshashtesh turn relatives into enemies. This hostility may be due to various reasons. Sometimes others do not like your progress and take support of Tantric practices to stifle your progress.

Tantric actions impact business, the growth in business is not as per the expectations. The debts do not get repaid, you suffer from illness or disturbances,  or your time and money may be wasted in needless court-suits. Bhairav Sadhana is considered ideal to resolve such type of enemy problems.

 

Sadhana Process

• This Bhairav Shatru Badhaa Nivarann Prayog can be accomplished on any Sunday, Tuesday or Eighth day of Dark Lunar fortnight.

• Bhairav ​​Sadhana is performed mainly during the night, but you may perform this prayog even during daytime as per your convenience

• After taking bath, adorn Red robes and sit facing South direction

• Setup a  mound of wet mud on a wooden plank in front of you, and setup “Kaal Bhairav Gutika” on it.

• Make five mounds of Til (Sesame) around it and setup one “Aakraant Chakra” on each.

• Light oil lamp on the wooden plank and burn guggal dhoop (incense) and agarbatti.

• First, invoke Lord Bhairav by chanting following Mantra –

 

Aahvaan Mantra

Aayahi Bhagwan Rudro BhairavaH Bhairavipate |

Prassanobhav Devesh Namastubhayam Kripanidhi ||

 

• After invoking Lord Bhairav, pray to Lord Bhairav to resolve your enemy problem while meditating on  Lord Bhairav. Take following pledge ​after taking water in your hand –

 

Resolution

I am accomplishing Kaal Bhairav Prayog to resolve my <CERTAIN> enemy problem.

 

• After the pledge for obstacle-resolution, worship “Kaal Bhairav Gutika” by making a mark with Sindur (vermilion). Make a mark of vermilion on your forehead also.

• After this, worship the five Aakrant Chakras with sindur, Kumkum, kajal and white flowers.

• Now mix black mustard and black sesame in a pot, pour some oil in it, and add a little vermilion to the mix. Offer a little portion of this mixture 21 times to “Kaal Bhairav Gutika” while chanting following Bhairav Mantra –

 

Vibhuti Bhuti Naashaye, Dushta Kshaye Kaarakam, MahaBhairav NamaH | Sarv Dusht Vinaashanam Sewakam Sarvsidhhi Kuru | Om Kaal Bhairav, Batuk Bhairav, Bhut-Bhairav, Maha-Bhairav Maha-Bhay Vinaashanam Devta Sarv Siddhibharvet |

 

After chanting above mantra, chant following Bhairav Mantra for 15 minutes –

 

Mantra

||Om Hreem Bhairav Bhairav Bhaykarhar Maam Raksh Raksh Hoom Phat Swaha ||

 

Then, after completion of this Mantra chanting, offer neivedya made from milk. Partake this Neivedya yourself too. Thus this Prayog gets accomplished. After completion of Prayog, tie all material in a black cloth and immerse  in  water.

This is a very strong quick-acting prayog for obtaining riddance from the enemy obstacles, Sadhaks have eradicated their enemy problems from the basic roots by practicing this prayog. We keep on getting multiple such letters in our magazine office. You should not use this special Bhairav prayog to cause harm or damage to anyone.

 

Sadhana material – Rs. 350 / –

 

 

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Bhairav Teevra Vashikaran Sammohan Prayog

 

Sometimes we get into some situations in our profession, business or life, when we cannot explain our desire to anyone, even if we want to. There are many people who are sad because they did not get “Chance” in their life. Often people say that – he could not get an opportunity to speak his mind, and so the work did not get done.

Accomplish this significant Vashikaran Prayog to convert the situations (or chance) in life into suitable opportunities. After accomplishing this, you may captivate anyone, or clarify your thoughts to anyone, whom you wish to. This prayog can be used on anyone – child-adult or male-female. This Lord Bhairav Tantra Vashikaran Prayog is not a mere spell, but a pure Tantrik prayog, whose impact can be immediately witnessed.

 

Sadhana Process

• The Tantra Vashikaran Prayog can be accomplished on any Sunday or Tuesday.

• This is a night-time prayog and should be performed after 10 o’clock at night.

• You will require Mantrasiddha Prana-pratisthita yukt “Bhairav Vashikaran Gutika” and “Black Hakeek Mala” to perform this prayog.

• The Sadhak should take bath at night, and sit in a quiet place to meditate and perform this prayog. The worship space should have been cleaned up earlier.

• This Bhairav Prayog should be performed while sitting facing North direction.

• Spread a red cloth on a wooden plank in front of you. Place a Pipal leaf on it. Write the first letter of name of person you wish to captivate , on the pipal leaf using Kumkum.

• Thereafter, setup “Bhairav Vashikaran Gutika” on the  leaf

• Perform a small worship of Gutika using Kumkum, Akshat (unbroken rice) and flowers etc. and light lamp and incense.

• Thereafter chant 3 mala of following mantra with Black Hakeek Mala.

 

Om Namo Rudraaye Kapilaaye Bheirvaye Trilok-Nathaaye Hreem Phat Swaha ||

 

After completion of Mantra-chanting, offer 21 pieces of loung (cloves) on Gutika whilest chanting above mantra. Thus this  Bhairav Vashikaran Prayog gets accomplished. After completion of Prayog, tie all Sadhana materials in the same red cloth and place it on a four-way crossing in the early morning.

Sadhana Materials: Rs. 300/-

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Both of these are easy and quick acting prayogs, Whenever situation in life become adverse i.e. the enemy obstacle increase or unnecessary arguments increase, then one should surely perform this prayog. This Sadhana Prayog should be performed to make someone completely favorable to you to get your work accomplished.

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