पूर्ण गृहस्थ सुख (Complete Family Happiness)

पूर्ण गृहस्थ सुख
चन्द्र साधना से रस सिद्धि
कायाकल्प सौन्दर्य क्रिया
अपने जीवन में प्रेम का संचार करें

  • प्रेम में पूर्णता, सफलता प्राप्त करने के लिये चन्द्र सिद्धि साधना सम्पन्न करनी चाहिए।
  • अविवाहित युवक-युवतियों को अपने भावी गृहस्थ जीवन में अनुकूलता प्राप्त करने तथा इच्छित वर, कन्या प्राप्ति हेतु चन्द्र साधना सम्पन्न करनी चाहिए।
  • यदि जीवन में आकर्षण तत्व क्षीण हो रहा है और नीरसता का भाव अनुभव हो रहा है तो स्त्री-पुरुष दोनों को चन्द्र साधना सम्पन्न करनी चाहिए।
  • किसी भी साधना पर्व में भूखे रहने अथवा व्रत करने से ज्यादा महत्व उस देवता की आराधना करने का है, उसका मंत्र जप करने का है। चन्द्रमा मन के देवता है और मन में सौन्दर्य, आनन्द, सम्मोहन, वशीकरण भाव लाने के लिये चन्द्र सौभाग्य साधना सम्पन्न करनी चाहिए।


सौभाग्य सिद्धि दिवस पूर्ण सौभाग्य प्राप्ति का साधना दिवस है। इस दिन चन्द्रमा की विशेष पूजा की जाती है। चन्द्रमा मन के देव हैं, चन्द्रमा शीतलता के देव हैं, चन्द्रमा कला के देव हैं, चन्द्रमा अमृत प्रदान करने वाले हैं। इसीलिये इस दिन पुरुष एवं स्त्री दोनों को चन्द्रमा की साधना करनी चाहिए।

चन्द्र देव महर्षि अत्रि के पुत्र हैं, और वे सर्वमय अर्थात् सोलह कलाओं से युक्त हैं। इनकी सोलह कलाओं का अनुभव तो हमें नित्य इनकी घटती-बढ़ती आकृति को देखकर होता ही रहता है। इसके साथ ही साथ ये अमृतमय पुरुष स्वरूप भगवान् हैं। चन्द्रमा के इन्हीं गुणों के कारण ब्रह्मा ने इन्हें बीज, औषधि, जल तथा ब्राह्मणों का राजा घोषित किया है। प्रजापति दक्ष ने अपनी अश्‍विनी, भरिणी आदि नाम वाली 27 कन्याओं का विवाह चन्द्रमा के साथ किया है, जो नक्षत्रों का बोध कराती हैं। इस तरह चन्द्रदेव अपने नक्षत्रों के साथ पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए सभी प्राणियों का पोषण करते हैं। चन्द्र देवता का वर्ण श्‍वेत है, इनका वाहन दस घोड़ों वाला रथ है, जो कि शंख के समान उज्ज्वल हैं, ‘मत्स्य पुराण’ में ऐसा वर्णन आता है।

श्‍वेतः श्‍वेताम्बरधरः श्‍वेताश्‍वः श्‍वेतवाहनः।
गदापाणिर्द्विबाहुश्‍च कर्त्तव्यो वरदः शशि ॥

अर्थात् ‘चन्द्र देवता गौर वर्णीय हैं, इनके वस्त्र, अश्‍व और रथ तीनों ही श्‍वेत हैं, चन्द्र देव ने अपने एक हाथ में गदा धारण कर रखी है और दूसरे हाथ से वर प्रदान कर रहे हैं।

चन्द्रमा का अमृतमय स्वरूप में ही वर्णन प्राप्त होता है, इसीलिए शास्त्रों में उचित मुहूर्त में चन्द्र पूजन विधान रखा गया है, उस दिन चन्द्रमा की जिस कला की रश्मियां पृथ्वी को आप्लावित करती हैं, उनका यह गुण है, कि वे विशेष मंत्रों के माध्यम से साधना करने वाले साधक अथवा साधिका को पूर्ण सौभाग्य एवं पूर्ण आयु प्राप्त करने की क्षमता प्रदान करती हैं, इसी तथ्य को ध्यान में रखकर अखण्ड रसेश्‍वर सौभाग्य पर्व – पूजन का विधान निर्मित किया गया है।

पूर्वकाल में यह पूजन पुुरुष एवं स्त्री अर्थात् पति-पत्नी दोनों ही सम्मिलित रूप से करते थे। यह कहने की आवश्यकता नहीं रही, कि ये दोनों मिलकर ही एक हैं। समय के प्रवाह में बहुत सी परम्पराएं लुप्त हो गईं, आधुनिकता के प्रवाह के कारण पुरुषों को व्रत, उपवास रखने में बहुत ही हीन भावना महसूस होने लगी, इसीलिए धीरे-धीरे वे अपने दायित्व से दूर होते चले गये, किन्तु ऐसा करके उन्होंने कोई उत्तम कार्य नहीं किया है। यह बात तो सर्वविदित है, कि कोई भी यज्ञ, पूजा आदि पति-पत्नी दोनों को एक साथ मिलकर ही करनी चाहिये, इसीलिए अखण्ड सौभाग्य रसेश्‍वर पर्व की सम्पूर्ण सौभाग्य साधना भी पति-पत्नी दोनों को ही मिलकर करनी चाहिये।

साधना विधान

1. इस साधना को सम्पन्न करने के लिए अमृतोपम चन्देश यंत्र, शशांक माला, सोलह उदधि चन्द्र गुटिकाओं की आवश्यकता पड़ती है।

2. इस सौभाग्य प्रदायक साधना को (हरियाली तृतीया – 5 अगस्त 2016, कज्जली तृतीया – 21 अगस्त 2016, हरतालिका तृतीया – 4 सितम्बर 2016 अथवा सौभाग्यतत्व करवा चतुर्थी – 19 अक्टूबर 2016) के दिन सम्पन्न करना चाहिए, और यदि उस दिवस विशेष पर सम्पन्न नहीं कर सकें, तो किसी भी मास में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की तृतीया अथवा पंचमी को यह साधना सम्पन्न करनी चाहिए।

3. यह साधना रात्रि को 8 से 10 बजे के मध्य कभी भी प्रारम्भ कर सकते हैं।

4. यह साधना पूर्व दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिये।

5. साधना प्रारम्भ करने से पूर्व स्नान करने वाले जल में आठ-दस दाने तिल के तथा दस चम्मच दूध डालते हुए दस बार – ‘ॐ सोमाय नमः वरदाय नमः’ मंत्र का उच्चारण करना चाहिये, फिर इस जल से स्नान कर श्‍वेत वस्त्र धारण कर लें।

6. साधना कक्ष में श्‍वेत आसन पर बैठ जायें तथा अपने सामने बाजोट पर भी श्‍वेत वस्त्र बिछाकर, उस पर गुरु चित्र/विग्रह/ गुरु यंत्र/ गुरु पादुका स्थापित कर साधना में सफलता हेतु दोनों हाथ जोड़कर गुरुदेव निखिल का ध्यान करें –

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

7. निखिल ध्यान के पश्‍चात् गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को जल से स्नान करावें –
ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥

8. इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पंचोपचार पूजन करें –

ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान् समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।
(धूप, दीप दिखाएं)

9. अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें। इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –
ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः।

10. गुरु पूजन के पश्‍चात् गुरु चित्र के सामने ही अक्षत से अर्द्धचन्द्र की आकृति निर्मित कर ‘अमृतोपम चन्द्रेश यंत्र’ को स्थापित करें।

11. यंत्र की दाहिनी ओर ‘शशांक माला’ तथा बाईं ओर सभी उदधि चन्द्र गुटिकाएं स्थापित करें।

12. इन सभी सामग्रियों का श्‍वेत पुष्प या जो भी सुगन्धित पुष्प उपलब्ध हों (वैसे चन्द्रमा को कदम्ब, कमल, केवड़ा, चम्पा, तथा चमेली के पुष्प चढ़ाने का विधान है) के द्वारा पूजन करें।

13. तत्पश्‍चात् सोलह उदधि चन्द्र गुटिकाओं को अपने बाएं हाथ में ले लें, और दाहिने हाथ में एक-एक गुटिका को लेते हुए एक-एक मंत्र का क्रमशः उच्चारण करते हुए गुटिका को यंत्र पर अर्पित करें –

सोमाय शान्ताय नमः।
अनन्त धान्याय नमः।
कामसुख प्रदाय नमः।
अमृतोपमाय नमः।
शशांकाय नमः।
चन्द्राय नमः।
द्विजेश्‍वराय नमः।
कौमादवनप्रियाय नमः।
आनन्द बीजाय नमः।
वनौषधिनामधिनाथाय नमः।
इन्दीवरव्यासकराय नमः।
उदधिप्रियायनमः।
सुषुम्नाधिपतये नमः।
विश्‍वेश्‍वराय नमः।
जलोदराय नमः ।
लक्ष्मी सौभाग्य सौख्यामृत सागराय पद्श्रिये नमः।

14. इस प्रकार पूजन करने के पश्‍चात् ‘शशांक माला’ से निम्न मंत्र का 16 माला मंत्र जप करें।
मंत्र
ॐ श्रीं सौभाग्य सिद्धिं देहि देहि नमः।

15. इस प्रकार मंत्र जप पूर्ण करने के पश्‍चात् एक तांबे के बर्तन में जल, घी, अक्षत, कपूर, श्‍वेत चंदन तथा श्‍वेत पुष्प डाल कर चन्द्रमा को अर्घ्य प्रदान करें, तथा वहां खड़े-खड़े हाथ जोड़ कर प्रार्थना करें –

‘हे चन्द्र देव! आप ही सबको परम आनन्द और मुक्ति प्रदान करने वाले हैं। आपकी कृपा से हमें भी सम्पूर्ण सौभाग्य, दीर्घायु, सम्पन्नता एवं पूर्ण दाम्पत्य सुख प्राप्त हो।’

12. इस प्रकार पूजन करने के पश्‍चात् बाजोट पर बिछे श्‍वेत वस्त्र में ही यंत्र, माला तथा सभी गुटिकाओं को लपेट कर पोटली बना लें एवं उसी रात्रि को अथवा अगले दिन ही नदी में उन्हें विसर्जित कर दें।

13. चन्द्र-पूजन पूर्ण होने के पश्‍चात् पूरे परिवार के साथ बैठकर आनन्द पूर्वक भोजन ग्रहण करें।

14. मूल मंत्र का जप यदि पति-पत्नी दोनों मिलकर करते हैं, तो 8 माला पति और 8 माला पत्नी को मंत्र-जप करना है, किसी प्रकार की यदि कोई असुविधा हो तो पति या पत्नी दोनों में से कोई एक भी इस साधना को सम्पन्न कर सकता है।

15. प्रत्येक साधना या पूजन प्रारम्भ करने से पूर्व गुुरु पूजन तथा गुरु मंत्र की एक माला जप करना आवश्यक है, अनुष्ठान पूर्ण होने के पश्‍चात् गुरु चित्र के सम्मुख भक्ति भाव से नमन कर गुरु आरती सम्पन्न करना तो प्रत्येक साधक का कर्त्तव्य है ही।

वेदों में यह विशिष्ट निर्देश दिया गया है कि अपनी पत्नी के साथ के अभाव में कोई भी विवाहित पुरुष किसी भी प्रकार का धार्मिक संस्कार, समारोह अथवा बलिदान नहीं कर सकता, पत्नी को पति के आध्यात्मिक जीवन का अंश निरुपित किया गया है। संस्कृति में वह सहधर्मिणी, आध्यात्मिक सहायक कहलाती है।

साधना सामग्री – 400/-
Total Domestic Happiness
Ras Siddhi through Chandra Sadhana
Kayakalp Soundarya Kriya
Transmit LOVE into your Life

The Chandra Siddhi Sadhana should be performed to obtain perfection, success in love.
The unmarried boys-girls should accomplish Chandra Sadhana to achieve compatibility in their future family life and to obtain desired life partner.

If the attraction element is ebbing away in life and sombre melancholy is setting in, then both men and women should perform the Chandra Sadhana.

It is more important in any Sadhana to worship the deity, to perform the Mantra chanting, instead of staying hungry or fasting during the Sadhana day. Chandrama is the lord of the mind, and one should accomplish Chandra Soubhagya Sadhana to imbibe beauty, joy, attraction and captivation emotions into the mind.


Soubhagya Siddhi Diwas is the Sadhana day to attain perfect fortune. A special worship of Moon is performed on this day. Chandrama (Moon) is the Deity of mind, or coolness, or art, Chandrama is the provider of holy Nectar. Therefore both men and women should perform Chandrama Sadhana on this day.

Lord Chandra is son of Maharshi Atri and He is Sarvmaya i.e. equipped with sixteen arts. We can experience these sixteen arts by seeing His increasing-decreasing form daily. Moreover He is Amritmaya Purush Swaroop God. Lord Brahma has proclaimed Him as Lord of Seeds, Medicines, Water and Brahmins due to these attributes. Prajapati Daksha has married His 27 daughters named Ashwini, Bharni etc. to Lord Chandrama, which signifies the star-constellations. Thus Lord Chandra nurture all the beings while revolving around the earth with his Nakshatras. The colour of Lord Chandra is White, His vehicle is a chariot of ten horses, which is bright like a conch, the “Matsya Purana” describes –

ShwetaH SwetaambardharaH ShwetaaswaH SwetvaahanaH |
Gadaapaanirdwibaahusch Kartavyo VaradaH Shashi ||

 
meaning “Lord Chandra has white complexion, His clothes, horses and chariot are all white, Lord Chandra holds a mace in one hand, and He blesses with the other hand.
Lord Chandra is generally described in the nectarous form, therefore the holy scriptures have ordained some specific Muhuraths to perform Lord Chandra worship, the day the bright rays of the specific art suffuses the earth, He has a quality that, He provides Perfect Fortune and Full Life to any Sadhak or Sadhika who performs Sadhana with special Mantras, the procedure of Akhand Raseshwar soubhagya Parv – Poojan has been created keeping this fact in mind.

In the old ages, both men and women i.e. husband-wife used to collectively perform this worship. It is needless to state that both are one, collectively. Many customs-traditions got lost in the flow of time, due to the modernity, the men began to feel inferiority complex in keeping fasts, so they gradually moved away from their responsibilities, but they have not earned any stripes by doing so. It is well known that both husband-wife should collectively perform any Yagya-sacrifice, pooja-worship, so both husband-wife should collectively perform the entire Soubhagya Sadhana of Akhand Soubhagya Raseshwar Parv.

Sadhana Procedure

1. Amritopam Chandesh Yantra, Shashank Mala, sixteen Udadhi Chandra Gutikas are required to perform this Sadhana.

2. This fortune bestower Sadhana should be performed on (Hariyali Tritiya – 5 August 2016, Kajjali Tritiya – 21 August 2016, Hartaalika Tritiya – 4 September 2016 or Soubhagyatatva Karwa Chaturthi – 19 October 2016) , and if it is not possible to perform the Sadhana on this specific day, then this Sadhana should be accomplished on Krishna Paksha Tritiya or Panchami of any month.

3. This Sadhana can be started in the night any time between 8 pm and 10 pm.

4. This Sadhana should be performed facing East direction.

5. Before taking bath, before starting the Sadhana, while pouring 8-10 grains of Til, and 10 spoonful of milk in water, chant ‘Om Somaaye NamaH Varadaaye NamaH‘ mantra ten times, then wear white clothes after bathing in this water.

6. Sit on a white asana seat in the Sadhana room, and spreading a white cloth on a wooden board in front, setup Guru picture/statue/Guru Yantra/Guru Paduka; and with folded hands meditate on divine form of Gurudev Nikhil to obtain success –

GururBrahmaa GururVishnuH Gururdevo MaheshwaraH |
GuruH Saakshaat Par Brahmaa Tasmei Shree Guruve NamaH ||

7. After Nikhil meditation, bathe the Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka with water –
Om Nikhilam Snaanam Samarpayaami ||

8. Then wipe with a clean cloth. Perform Panchopchaar worship-poojan with Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken rice), Pushpa (Flowers), Neivedh (Sweets/Fruit offering), Dhoop (Incense) – Deep (Lamp) chanting following mantras –

Om Nikhilam Kumkum Samarpayaami |
Om Nikhilam Akshtaan Samarpayaami ||
Om Nikhilam Pushpam Samarpayaami ||
Om Nikhilam Neivedhyam Nivedayaami ||
Om Nikhilam Dhoopam Aardhyaapayaami, Deepam Darshayaami ||

(Show Dhoop, Deep)

9. Now rotate three Achmaani (spoonful) water around the  Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka and drop it on ground. Then chant 1 rosary-round of Guru Mantra with Guru Mala –

Om Param Tatvaaya Naaraayanaaya Gurubhayo Namah|

10. After Guru worship, setup “Amritopan Chandresh Yantra” on a half-moon made with (Akshat rice) in front of Guru picture.

11. Setup “Shashank Mala” on the right side and Udadhi Chandra Gutikas on the left side of the Yantra.

12. Perform worship of all these Sadhana materials with white flowers or any other fragrant flower (generally the process is to offer Kadamb, Kamal (lotus), Kewra, Champa and Chameli flowers to Lord Chandra).

13. Then take the sixteen Udadhi Chandra Gutikas in your left hand, and taking one-one Gutika in your right hand, offer the Gutika on the Yantra chanting the Mantra serially –

Somaaye Shantaaya NamaH |
Anant Dhaanyaaya NamaH |
Kaamsukh Pradaaya NamaH |
Amritopamaaya NamaH |
Shashaankaaya NamaH |
Chandraaya NamaH |
Dwijeshwaraaya NamaH |
Koumaadavanapriyaaya NamaH |
Aanand Beejaaya NamaH |
Vanoushadhinaamadhinaathaaya NamaH |
Indivaravyaasakaraaya NamaH |
UdadhipriyaayanamaH |
Sushumnaadhipataya NamaH |
Vishweshvaraaya NamaH |
Jalodaraaya NamaH |
Lakshmi Soubhagya Soukhyaamrit Saagaraaye Padshriye NamaH |

14. After performing the above poojan, chant 16 mala of following mantra with “Shashank mala

Mantra

Om Shreem Soubhaagya Siddhim Dehi Dehi NamaH |

15. After completing the Mantra chanting, offer Ardhya to Chandrama in a copper utensil containing water, Ghee, Akshat, Kapoor (camphor), White Chandan and White flowers, and while standing there, pray with folded hands –

O Chandra Dev! You are the sole provider of ultimate joy and liberation to everyone. We pray to obtain complete fortune, longevity, prosperity and total domestic happiness with your divine grace.

16. After completing the above worship, tie the Yantra, mala and all Gutikas using the white cloth spread on the wooden board, make a bundle, and immerse it in a river either on the same night, or on the next day.

17. After completion of the Chandra-worship, eat food with the whole family joyfully.

18. If both husband and wife chant the main mantra together, then the husband has to chant 8 malas and the wife has to chant 8 malas, if there is any inconvenience, then either of the husband or wife can accomplish this Sadhana.

19. It is mandatory to perform Guru poojan and chant one mala of Guru Mantra before starting any Sadhana or worship, after completion of the Anusthaan, it is the duty of every Sadhak to perform Guru Aarti with full devotion.

The Vedas have specifically instructed that any married man cannot perform any religious rite, ceremony or sacrifice in the absence of his wife, the wife has been assigned as a constituent part of the spiritual life of the man. She is termed as co-religious spiritual partner.
Sadhana Materials – 400 /-

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