दूसरा सुख – घर में माया (Wealth in home)

दूसरा सुख – घर में माया
निरन्तर धन का आगमन
कार्य-व्यापार में वृद्धि
दक्षिणावर्ती शंख स्थापना

 

जहां शरीर स्वस्थ है, पर यदि घर में धन का अभाव और आर्थिक न्यूनता है, तो स्वस्थ शरीर भी काटने को दौड़ता है और स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। जब हम अपने छोटे-छोटे बच्चों की इच्छाएं पूरी नहीं कर पाते, जब हम पत्नी की कामना को पूर्णता नहीं दे पाते, जब हम अपने स्वयं के लिए मकान नहीं बना पाते तो मन में यह विचार आता है कि यह जीवन तो पशुओं के समान हो गया है।
और यह बात सही भी है कि जीवन में धन की महत्ता है और रहेगी भी। धन प्राप्ति के सैकड़ों प्रयोग हैं, परन्तु इन प्रयोगों में श्रेष्ठतम् प्रयोग दक्षिणावर्ती शंख है। दक्षिणावर्ती शंख जिसके घर, व्यापार स्थल में स्थापित होता है, वे आर्थिक उलझनों में नहीं उलझते हैं।

 

दक्षिणावर्ती शंख
प्राणतोषिनी ऊर्जा से संचरित प्राणप्रतिष्ठित दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी का रूप माना गया है।
जिस घर में प्राणप्रतिष्ठित दक्षिणावर्ती शंख होता है, उसके घर में लक्ष्मी का निवास बना रहता है। दरिद्र व्यक्ति के हाथ में भी ऐसा शंख आ जाता है, तो उसके जीवन में समृद्धि और सम्पन्नता कुछ ही दिनों में प्राप्त हो जाती है। ऐसे व्यक्ति को अचानक और अप्रत्याशित रूप से धन प्राप्त होता है। यश, सम्मान आदि की जीवन में कोई कमी नहीं रहती।
शंख जितना बड़ा हो, उतना अधिक फलदायक होता है। शंख ऐसा होना चाहिए जिसमें कम से कम पाव या आधा किलो पानी समा सके, ऐसे शंख पर प्रयोग करने पर पूर्ण सफलता प्राप्त होती है वह सुख-समृद्धि पाता है। उसके यहां से दरिद्रता, असफलता पलायन कर जाती है। नियमित रूप से इसके दर्शन, विधि-विधान पूर्वक पूजा करने से अभीष्ट मनोरथ सिद्ध होते हैं। इसे दुकान में रखने से व्यापार में वृद्धि, तिजोरी में रखने से धन वृद्धि और अन्न में रखने से अन्न वृद्धि होती है। वृद्धिदायक दक्षिणावर्ती शंख जिस घर, दुकान, व्यापार स्थल पर स्थापित होता है वहां साक्षात् लक्ष्मी निवास करती हैं इसीलिए इसको वैभव और ऐश्‍वर्य का प्रतीक माना जाता है।

 

साधना विधान – दक्षिणावर्ती शंख स्थापन
दक्षिणावर्ती शंख का स्थापन किसी पूर्णिमा अथवा शुक्रवार को किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसी भी शुभ, श्रेष्ठ मुहूर्त में भी इसका स्थापन किया जा सकता है।
दक्षिणावर्ती शंख का स्थापन प्रातः काल करना चाहिए। उस दिन प्रातः स्नान कर शुद्ध श्‍वेत अथवा पीले वस्त्र धारण कर, दक्षिण दिशा की ओर मुंह कर बैठ जाएं।
अपने सामने एक लाल वस्त्र बिछाकर उस पर पुष्पों का आसन देकर दक्षिणावर्ती शंख स्थापित करें।
इसके पश्‍चात कुंकुम से दक्षिणावर्ती शंख पर स्वस्तिक चिन्ह का अंकन करें।
अब दाहिने हाथ से अक्षत का एक-एक दाना शंख में अर्पित करते जाएं साथ ही प्रत्येक अक्षत अर्पण के साथ निम्न मंत्र का उच्चारण करते रहें।

 

॥ ॐ श्रीं ह्रीं दारिद्र्य विनाशिनी धनधान्य समृद्धिं देहि देहि कुबेर शंख विध्यै नमः॥

 

एक घण्टे तक इस मंत्र का जप करें और एक-एक अक्षत को शंख में अर्पित करते रहें। अगले दिन पुनः इसी मंत्र का जप करें। इस प्रयोग में दिन की कोई निर्धारित अवधि नहीं है। जब तक शंख भर न जाए, तब तक इस प्रयोग को करते रहें। जिस दिन शंख पूरा भर जाए, तब मंत्र प्रयोग बंद कर दें और चावल के दानों के साथ शंख को लाल वस्त्र में बांधकर अपने घर के पूजा स्थान में रख दें या कारखाने, फैक्ट्री अथवा व्यापारिक स्थान पर स्थापित कर दे। एक वर्ष बाद इस शंख का विसर्जन कर पुनः नया दक्षिणावर्ती शंख स्थापित कर दें।
इस सौभाग्यशाली शंख के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में निरन्तर आर्थिक उन्नति होती रहती है। यदि साधक पर किसी प्रकार का कोई ॠण है, तो वह इस प्रयोग से उतर जाता है एवं साधक सभी दृष्टियों से उन्नति करता हुआ पूर्ण भौतिक सुख प्राप्त करता है।

 

दक्षिणावर्ती शंख – ₹. 600/-, ₹. 1100/-, ₹. 2100/-,
The Second Pleasure – Wealth in Home
Continuous influx of money
Growth in Business and Profession
Installation of Dakshinavarti Shankh
If the body is healthy, but there is paucity of money and economic depression in the house, then one becomes irritable and the healthy body is of no use. When we cannot fulfill the desires of little children, we are unable to satisfy the wishes of wife, when we cannot build a house of our own, then the only idea which comes to mind is – This life has turned into life of an animal.And it is a universal truth that money has a distinct importance in life and it will always remain so. There are hundreds of Sadhana methods to obtain wealth and prosperity, but the best is the Dakshinavarti Shankh method. One whose house or business place has Dakshinavarti Shankh, he or she is always free from monetary problems.

Dakshinavarti ShankhThe Dakshinavarti Shankh consecrated and energized with the life giving energy is itself called as a form of Goddess Lakshmi.

Goddess Lakshmi is permanently based in a house, where a Pranpratishtit Dakshinavarti Shankh is installed. If a poor person obtains such a Shankh, even he can obtain wealth and prosperity in his life within days. Such a person obtains money unexpectedly and quickly. There is no lack of fame and glory in such a person’s life.

The bigger the Shankh, the more fruitful it is. It should be so big that at least 250 ml or 500 ml of water can be filled within it. One achieves complete success by performing Sadhana on such a Shankh and gets wealth and prosperity.  The poverty and failure vanish from his life. One can fulfill the intended desires by regularly performing worship with all rites and rituals. Placing it in shop leads to enhanced business, placing it in money chest leads to influx of wealth, and placing it in granary leads to increase in grains. Whenever a Vridhdhidayak Dakshinavarti Shankh is setup in a home, shop or business, Goddess Lakshmi Herself manifests there, so it is known as a symbol of splendor and opulence.

Sadhana Process – Dakshinavarti Shankh setup

You may install Dakshinavarti Shankh on any full moon or Friday. You may also set it up on any Shubh or good muhurath.

The Dakshinavarti Shankh should be setup during early morning. In the morning, wear pure white or yellow clothes after taking bath. You should sit facing South direction.

Spread a Red Cloth in front of you and create a seat by laying flowers. Install the Dakshinavarti Shankh on this floral seat.

Then draw a mark of Swastika symbol on the Dakshinavarti Shankh using Kumkum.

Now start offering a grain of Akshat (unbroken rice) into Dakshinavarti Shankh one by one. Chant following Mantra with offering of each grain:

||Om Shreem Hreem Daaridraye Vinashini Dhan Dhaanaye Samriddhi Dehi Dehi Kuber Shankh Vidhaye Namah ||

Chant this mantra for one hour and keep offering a grain into Dakshinavarti Shankh.

Perform similar process next day and chant the Mantra. There is no fixed duration of days for this Sadhana procedure. You should continue this daily till the Dakshinavarti Shankh gets filled.  When the Shankh gets filled, then stop Mantra chanting;  wrap the rice grains and Dakshinavarti Shankh in the red cloth and set it up either in your worship-place at home, or set it up in factory, shop or business place. Drop this Shankh in running water-stream or river after a year, and set up a new Dakshinavarti Shankh similarly.

The person keeps attaining steady economic growth with the beneficial effects of this fortunate Shankh. If one owes loans, then the loans get paid, and one keeps obtaining complete happiness while progressing in all spheres.

Dakshinavarti Shankh – ₹. 600 /-, ₹. 1100 /-, ₹. 2100 /-.

जीवन के सात सुख (Seven pleasures of life) – जीवन इन्द्रधनुष के सात रंग
1. पहला सुख – आरोग्य (Health)
2. दूसरा सुख – घर में माया (Wealth in home)
3. तीसरा सुख – सुयोग्य संतान (Worthy Child)
4. चौथा सुख – राज्य सम्मान, राज मे पासा (Honors and Glory by Government)
5. पांचवां सुख-श्रेष्ठ गृहस्थ जीवन (Excellent Family Life)
6. छठा सुख – बाधाओं पर विजय – शत्रु मर्दन (Triumph over Obstacles)
7. सातवां सुख – गुरु देवता और ईश्‍वर की कृपा (Divine Blessings of Guru and Almighty God)
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