तीसरा सुख – सुयोग्य संतान (Worthy Child)

तीसरा सुख – सुयोग्य संतान
कुल – परिवार में वृद्धि
पारिवारिक सामन्जस्य
पारदेश्‍वर शिवलिंग स्थापन

 

यदि शरीर स्वस्थ है, किसी प्रकार का कोई रोग नहीं है, घर में भी सभी निरोगी हैं और धन भी प्रचुरता से उपलब्ध है, परन्तु यदि संतानें कुमार्गी हैं अथवा आज्ञाकारी नहीं हैं, परिवार में वैचारिक एकता नहीं है तो सारे सुख अपने आप में बेकार हो जाते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है कि जिसके घर में पुत्र-पुत्री कुमार्गी  होते हैं उनका यह लोक तो बिगड़ता ही है अगली जिन्दगी भी बिगड़ जाती है, क्योंकि ऐसे व्यक्ति को समाज के सैकड़ों ताने सुनने पड़ते हैं, ऐसे व्यक्ति का बुढ़ापा बेसहारा हो जाता है।
मैंने ऊपर आज्ञाकारी पुत्र शब्द का प्रयोग किया है, यदि घर में पुत्र हो और वह कपूत हो, आज्ञा नहीं मानता हो, लड़ाई-झगड़े करता हो, चोरी, जुआ या शराब की लत रखता हो, या पढ़ाई नहीं करता, आवारागर्दी करता हो तो निरन्तर अपमान सहना पड़ता है लोगों की शिकायतें सुननी पड़ती है, घर में लड़ाई-झगड़े बने रहते हैं और व्यक्ति ने समाज में जो सम्मान अर्जित किया है, वह बर्बाद हो जाता है।
इसीलिए शास्त्रों में तीसरा सुख आज्ञाकारी संतान माना है, इसके लिए भी महत्वपूर्ण प्रयोग दिया गया है, जिससे कि यदि पुत्र नहीं होता तो इस प्रयोग से पुत्र हो जाता है और यदि घर में कुपुत्र है, तो उसकी आदतें और स्वभाव अनुकूल बन जाता है, और वह आज्ञाकारी बन जाता है। यदि संतान के जीवन में इस प्रकार की परेशानी है, तो वह इस प्रयोग से दूर हो जाती है।

 

साधना विधान
इसके लिए शास्त्रों में पारद शिवलिंग का विशेष महत्व बताया है, यह वानस्पतिक पारद शिवलिंग कहा जाता है, यह शिवलिंग केवल पारे का ही नहीं बना होता, अपितु इसमें कुछ विशेष वनस्पतियां मिला कर उसके सहयोग से शिवलिंग का निर्माण किया जाता है।

 

इस शिवलिंग की पांच विशेषताएं होनी चाहिए तब ही वह फलप्रद होता है –
1. यह शिवलिंग विशेष वनस्पतियों को पारे में मिलाकर विशेष विधि से निर्मित किया हुआ हो।
2. इसका वजन कम से कम आठ तोले अवश्य हो,
3. यह शिवलिंग मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठिायुक्त हो,
4. यह शिवलिंग चमकदार हो,
5. ऐसा शिवलिंग रूद्राभिषेक मंत्रों से अभिमंत्रित हो।
इस साधना को आप किसी भी सोमवार अथवा सर्वार्थ सिद्धि योग में प्रारम्भ कर सकते हैं।
यह तीन दिवसीय साधना है, इसे लगतार तीन दिनों तक सम्पन्न किया जाता है।
साधना जिस दिन प्रारम्भ करनी हो उस दिन प्रातः 8 बजे से पूर्व उत्तर दिशा की ओर मुंह कर बैठ जाएं।
साधक अपने सामने एक बाजोट पर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर गुरु चित्र/चरण पादुकाएं स्थापित करे।
सर्वप्रथम गुरुदेव का संक्षिप्त पूजन सम्पन्न करें।
उसके पश्‍चात् स्टील की बड़ी प्लेट या थाली में कुंकुम से त्रिभुज का चिन्ह बनाकर मध्य में बिन्दी लगाएं तथा उस पर पुष्पों का आसन देकर पारद शिवलिंग स्थापित करें।
पारद शिवलिंग का पंचोपचार पूजन सम्पन्न करें।
इसके पश्‍चात् ‘ॐ सुदर्शनाय नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए पारदेश्‍वर शिवलिंग पर 11 बिल्व पत्र चढ़ाएं।
अब पारद शिवलिंग पर दुग्ध मिश्रित जल चढ़ाते हुए निम्न मंत्र का 21 मिनट (कम से कम या 21 मिनट से अधिक भी कर सकते हैं) तक उच्चारण करें।

 

मंत्र

 

ॐ पारदेश्‍वर्य पुत्र सुखं देहि देहि सह गौर्ये नमः।

 

इस प्रकार यह प्रयोग सम्पन्न होता है। पारदेश्‍वर शिवलिंग का यह प्रयोग संतान को श्रेष्ठ मार्ग पर लाने तथा उसे सुयोग्य संतान बनाने का अचूक प्रयोग है। इस साधना को आपको लगातार तीन दिवस तक सम्पन्न करने के पश्‍चात् सभी साधना सामग्री को जल सरोवर में विसर्जित कर देनी है।

 

साधना सामग्री – ₹. 450/-
The Third Pleasure – Worthy Child Development of Family Harmony in Family Installation of Paardeshwar Shivling 

If the body is healthy, there is no ailment, all are disease-free in the house and the money is also available in abundance; but if the children are wayward or disobedient, mental compatibility is absent in family,  then all the pleasures are completely useless.

The Holy Scriptures state that if the children in family are wayward, his current life as well as the next life gets ruined and such a person has to bear the hundreds of taunts of society, such a person becomes destitute in old age.

I have used the word obedient son, if there is a son and he is defiant, does not obey, keeps quarreling, is addicted to wine, gamble or theft, or does not study, loafs away his time, then one has to undergo humiliation,  listen to the complaints of people, suffer constant fighting at home; and whatever respect or reputation that one has earned in the society, all of that gets ruined.

Therefore, the third pleasure in the Holy Scriptures is an obedient child; there is an important Sadhana method for this, so that a childless person begets a child and if the son is defiant or insolent, then his habits and nature changes and he becomes obedient. All the problems of such type in the  child’s life gets removed with this Sadhana method.

Sadhana Procedure 

The Holy Scriptures have emphasized Parad Shivling for this, it is called vegetative Parad Shivling, the Shivling is made not only of mercury, but some special plants are also added to create it.

Such a Shivling should have following five features, only then it is fruitful –

  1. The Shivling should be created by a special process by mixing specific plants in mercury,
  2. The weight must be at least eight Tola (80 gms),
  3. The Shivling should be properly  energized with life mantras,
  4. The Shivling should be bright and shiny,
  5. Such a Shivling should be properly consecrated with Rudrabhisek mantras.

You may start this Sadhana on any Monday or in a Sarwarth Siddhi Yoga moment. It is a three-day Sadhana, and should be practiced regularly for three days.

On the day of Sadhana, sit facing North direction at 8 am.

Spread White cloth on a Wooden Board in front of you, and place Guru Photograph and/or Guru Paduka on it.

First, perform a small worship of Gurudev.

Then draw a big triangle symbol using Kumkum in a large steel plate or thali. Mark a dot in center, and place Parad Shivling on a seat of flowers on it.

Perform Panchopchaar Pujan of Parad Shivling.

Then offer 11 Bilwa-patra on Paardeshwar Shivling while chanting following Mantra –

|| Om Sudarshanaaye Namah ||

Now offer milk-mixed-water on Parad Shivling chanting following Mantra for 21 minutes (at least 21 minutes, and more if possible) :

Mantra-

|| Om Paardeshwarye Putra Sukham Dehi Dehi Sah Gourya Namah ||

Then this Sadhana gets accomplished. This Sadhana method of Paardeshwar Shivling is an infallible and excellent method to bring progeny to correct path and to make the child fully capable. You have to continue this practice for three days. Then drop the entire Sadhana articles into a running water-stream or a river.

Sadhana material – ₹. 450 / –

 जीवन के सात सुख (Seven pleasures of life) – जीवन इन्द्रधनुष के सात रंग
 1. पहला सुख – आरोग्य (Health)
 2. दूसरा सुख – घर में माया (Wealth in home)
 3. तीसरा सुख – सुयोग्य संतान (Worthy Child)
4. चौथा सुख – राज्य सम्मान, राज मे पासा (Honors and Glory by Government)
5. पांचवां सुख-श्रेष्ठ गृहस्थ जीवन (Excellent Family Life)
6. छठा सुख – बाधाओं पर विजय – शत्रु मर्दन (Triumph over Obstacles)
7. सातवां सुख – गुरु देवता और ईश्‍वर की कृपा (Divine Blessings of Guru and Almighty God)
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