कामना सिद्धि गणपति साधना (Wish Fulfilling Ganapati Sadhana)

कामना सिद्धि गणपति साधना

कामना सिद्धि गणपति साधना के लिए साधक निम्न सामग्री को पहले से ही तैयार कर लें, जिसमें जल पात्र, केसर, कुंकुम, अक्षत, पुष्प, पुष्पमाला, नारियल, दूध का बना हुआ प्रसाद, फल और घी का दीपक और अगरबत्ती आदि हैं।
इसके अलावा इस प्रयोग में प्राण प्रतिष्ठित ‘कामना सिद्धि गणपति यंत्र’ और ‘तांत्रोक्त मूंगा माला’ की नितान्त आवश्यकता होती है।

साधना विधान

गणेश चतुर्थी (05 सितम्बर 2016) अथवा किसी भी बुधवार को प्रातःकाल स्नान कर पीली धोती धारण कर पूर्व दिशा की ओर मुख कर बैठ जाय और अपने सामने एक बाजोट पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर गुरु चित्र, गुरु पादुका, गुरु यंत्र स्थापित कर गुरुदेव निखिल का पंचोपचार पूजन करें। पूजन क्रम में गुरु ध्यान करें –

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

निखिल ध्यान के पश्‍चात् गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को जल से स्नान करावें –

ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥

इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पंचोपचार पूजन करें –

ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान् समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।  (धूप, दीप दिखाएं)

अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें। इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –

ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः

गुरु पूजन के पश्‍चात् हाथ जोड़कर निम्न गणपति ध्यान मंत्र का उच्चारण करें –

ॐ गणानां त्वा गणपति (गूं) हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपति (गूं) हवामहे निधिनां त्वा निधिपति (गूं) हवामहे वसो मम आहमजानि गर्भधमा त्वम जासि गर्भधम्। ॐ गं गणपते नमः ध्यान। समर्पयामि।  

गणपति ध्यान के पश्‍चात् एक पात्र में कुंकुम से स्वस्तिक बनाकर उसमें पुष्पों का आसन प्रदान कर निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए प्राणप्रतिष्ठित कामना पूर्ति गणपति यंत्र को स्थापित कर दें

ॐ गणपतये नमः आसनं समर्पयामि।

गणपति को आसन प्रदान करने के पश्‍चात् पैर धोने के लिये दो आचमनी जल निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए प्रदान करें –

ॐ गं गणपतये नमः पाद्यम् समर्पयामि।

इसके पश्‍चात् भगवान गणपति को आचमन हेतु दो आचमनी जल प्रदान करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करें –

ॐ गं गणपतये नमः आचमनीयम् समर्पयामि।

निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए भगवान गणपति को शुद्ध जल, उसके पश्‍चात् पंचामृत और फिर पुनः शुद्ध जल से स्नान करायें –

ॐ गं गणपतये स्नानं सर्मपयामि।
ॐ गं गणपतये पंचामृत स्नानं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि।

शुद्ध जल से स्नान कराने के पश्‍चात् यंत्र को पौंछ कर बाजोट पर ही पुष्पों का आसन देकर स्थापित कर दें।

नोट – जो साधक गणेश चतुर्थी को अपने घर में गणपति प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं, वे साधक शुद्धोदक स्नान के पश्‍चात् गणपति मूर्ति को यंत्र के ऊपर स्थापित कर सकते हैं और आगे का पूजन गणपति मूर्ति अर्थात् यंत्र का पूजन ही है। इसके पश्‍चात् भगवान गणपति को निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए वस्त्र स्वरूप मौली अर्पित करें –

ॐ गणपतये वस्त्रोपवस्त्रं समर्पयामि।

इसके पश्‍चात् भगवान गणपति को निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए यज्ञोपवित, चन्दन, अक्षत, पुष्प, दुर्वा, इत्र इत्यादि से पूजन सम्पन्न करें –

ॐ गं गणपतये यज्ञोपवीतं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये चन्दनं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये अक्षतान्  समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये पुष्पाणि समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये दूर्वांकुरान् समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये सौभाग्य द्रव्याणि समर्पयामि।

इसके पश्‍चात् भगवान गणपति को निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए धूप, दीप के दर्शन करायें –

ॐ गं गणपतये धूपम् आघ्रपयामि।
ॐ गं गणपतये दीपं दर्शयामि।

इसके पश्‍चात् भगवान गणपति को नैवेद्य और फल अर्पित करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करें –

ॐ गं गणपतये नमः नैवेद्यं निवेदयामि।
ॐ गं गणपतये नमः फलानि समर्पयामि।

इसके पश्‍चात् आचमन करें –

ॐ प्राणाय स्वाहा, ॐ अपानाय स्वाहा, ॐ व्यानाय स्वाहा, ॐ उदानाय स्वाहा, ॐ समानाय स्वाहा, ॐ गं गणपतये नमः आचमनीयं समर्पयामि।

इसके पश्‍चात् भगवान गणपति को मुख शुद्धि हेतु निम्न मंत्र का उच्चारण कर लौंग, इलाचयी, पान अर्पित करें –

पूगीफलं महादिव्यं नागवल्ली दलैर्युक्तम्। 
एलाचूर्णादि संयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृहताम्॥

ॐ गं गणपतये नमः मुख शुद्धयर्थं ताम्बूलं समर्पयामि।

इसके पश्‍चात् हाथ जोड़कर निम्नालिखित नामों का स्मरण कर भगवान गणपति को दूर्वादल समर्पित करें, इससे समस्त प्रकार की कामना सिद्धि होती है –

सुमुखाय नमः, एकदंताय नमः
कपिलाय नमः, गजकर्णकाय नमः
लम्बोदराय नमः, विकटाय नमः
विघ्ननाशाय नमः, विनायकाय नमः,
धूम्रकेतवे नमः, गणाध्यक्षाय नमः,
भालचन्द्राय नमः, गजाननाय नमः।

इन नामों से गणपति विग्रह पर दूर्वा चढ़ाने से गणपति शीघ्र प्रसन्न होते हैं तथा साधक की समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं। इस साधना में प्रथम दिन (गणेश चतुर्थी) अर्थात् यंत्र स्थापन के समय ही केवल इतना पूजन करना है इस साधना की मूल बात यह है कि भगवान गणपति के सामने साधक जितना अधिक मंत्र जप करता है उसी से उसकी कामना शीघ्र पूरी होती है। शास्त्रों में गणपति से सम्बन्धित निम्न तीव्र मंत्र है, इस मंत्र का जप तांत्रोक्त मूंगा माला से करें –

मंत्र

॥ ॐ गं गौं गणपतये विघ्नविनाशिने स्वाहा॥

यह मंत्र विशेष महत्वपूर्ण माना गया है। साधक अपनी  सुविधानुसार नित्य 11 से लेकर 108 माला मंत्र जप तक सम्पन्न कर सकता है। 11 दिवसीय इस साधना में मंत्र जप को विशेष महत्व दिया गया है। यह भी आवश्यक नहीं है कि नित्य एक ही बार में साधक द्वारा लिये गये संकल्प के अनुसार माला जप करें। जैसे कि कोई साधक नित्य 108 माला मंत्र जप करना चाहता है तो वह इन 108 माला मंत्र जप को दो या तीन बार में भी सम्पन्न कर सकता है। परन्तु एक बात का विशेष ध्यान रखें कि साधक जितनी भी माला नित्य क्रम में करने का संकल्प करें, उसे 11 दिनों तक नियमित रूप से अवश्य सम्पन्न करें।

ब्रह्मवैवर्त पुराण में सवा लाख जप बताया गया है, जिससे कि जीवन में अपनी कामना को तुरन्त पूर्ण करने में साधक सफलता प्राप्त कर लेता है।

नित्य मंत्र जप के पश्‍चात् भगवान गणपति की आरती सम्पन्न करें तथा 11 वें दिन अर्थात् अनन्त चतुदर्शी (15 सितम्बर 2016) को गणेश आरती सम्पन्न कर, कामना पूर्ति गणपति यंत्र और माला को वस्त्र में बांधकर किसी जल सरोवर में विसर्जित कर दें। भगवान गणपति आपकी सभी मनोकामनाएं अवश्य ही पूर्ण करेंगे।

नोट – उपरोक्त वर्णित सम्पूर्ण विधान को गणेश चतुर्थी के दिन ही सम्पन्न करना है। नित्य के क्रम में गुरु पूजन और भगवान गणपति का पंचोपचार पूजन एवं धूप-दीप प्रज्वलित कर उपरोक्त मंत्र का जप ही करना है। प्रति दिन मंत्र जप के पश्‍चात् गणेश आरती अवश्य सम्पन्न करनी है।
साधना सामग्री – 480/-

विसर्जन क्यों?
सनातन धर्म सदैव कर्म प्रधान जीवन पर ही बल देता है। इसलिये हमारे यहां कर्म को विशेष महत्व दिया गया है। साधना और पूजा का मूल भाव क्या है? साधना पूजा में देवता के प्रतीक स्वरूप उनके विग्रह के स्वरूप यंत्र को स्थापित किया जाता है। यंत्र केवल रेखाएं नहीं हैं, यंत्र तो अभिष्ट देवता का चैतन्य साध्य स्वरूप है। इस यंत्र पर मंत्र की भावना दी जाती है। साधक द्वारा किये गये मंत्र जप इस यंत्र को अपने प्राणों के साथ जोड़ते हुए सम्पन्न किये जाते हैं। इस प्रकार दैवीय शक्ति और साधक की मानसिक तरंगों का सम्बन्ध बन जाता है।
जब एक बार साधना पूर्ण हो जाती है तो वह दैवीय शक्ति साधक में चैतन्य हो जाती है और साधक अपनी शक्ति के साथ इस दैवीय शक्ति को जोड़कर संसार में क्रियाशील हो जाता है। उसकी क्रिया में तीव्रता आ जाती है। जब क्रिया में तीव्रता आ जाती है तो दोष अपने आप समाप्त हो जाते हैं और जब दोष समाप्त हो जाते हैं तो निश्‍चित रूप से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल में वृद्धि होती है।
इस क्रिया के पश्‍चात् यंत्र की शक्ति व्यक्ति में प्रवाहित होने लगती है और व्यक्ति अपनी शक्ति से आगे कार्य करे, हर समय मानसिक रूप से आश्रित न रहे इस हेतु यंत्र का विसर्जन आवश्यक हो जाता है। जैसे ही साधना पूर्ण होने पर यंत्र का विसर्जन किया जाता है तो साधक के भीतर वह दैवीय शक्ति जाग्रत हो जाती है।
अतः साधना पूर्ण होते ही यंत्र और माला का विसर्जन अवश्य कर दें। हर बार साधना नवीन माला, नवीन यंत्र से ही सम्पन्न करें।
 Ganesh Chaturthi – 05 September 2016

Wish Fulfilling Ganpati Sadhana

 

The Sadhak should already prepare the following Sadhana articles for the Kaamna Siddhi Ganpati Sadhana, which are Water-Tumbler, Kesar (Saffron), Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken Rice), Pushpa (Flowers), Pushpa-mala (Flower Garland), Naariyal (Coconut), Offerings made of milk, Fruits, Ghee Lamp and Incense sticks etc.

Moreover Praan Pratishthit “Kaamna Siddhi Ganpati Yantra” and “Tantrokt Moonga Mala” are also required in this Prayog.

 

Sadhana Procedure

On Ganesh Chaturthi (September 5, 2016) or on any Wednesday morning, after taking bath in early morning, sit facing east wearing Yellow Dhoti, and spreading a Yellow cloth on a Wooden board, setup Guru Picture, Guru Paduka, Guru Yantra and perform Panchopchaar poojan of Gurudev Nikhil. Meditate on the divine form of Gurudev-

GururBrahmaa GururVishnuH Gururdevo MaheshwaraH |

GuruH Saakshaat Par Brahmaa Tasmei Shree Guruve NamaH ||

 

Bathe the Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka with water after Nikhil meditation –

Om Nikhilam Snaanam Samarpayaami ||

Then wipe with a clean cloth. Perform Panchopchaar worship-poojan with Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken rice), Pushpa (Flowers), Neivedh (Sweets/Fruit offering), Dhoop (Incense) – Deep (Lamp) chanting following mantras –

Om Nikhilam Kumkum Samarpayaami |

Om Nikhilam Akshtaan Samarpayaami ||

Om Nikhilam Pushpam Samarpayaami ||

Om Nikhilam Neivedhyam Nivedayaami ||

Om Nikhilam Dhoopam Aardhyaapayaami, Deepam Darshayaami ||

(Show Dhoop, Deep)

 

Now rotate three Achmaani (spoonful) water around the  Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka and drop it on ground. Then chant 1 rosary-round of Guru Mantra with Guru Mala –

Om Param Tatvaaya Naaraayanaaya Gurubhayo Namah

 

After completing Guru poojan, utter following Ganpati Dhyaan Mantra with folded hands-

Om Ganaanaan Twaa Ganapati (Gun) Havamahe Priyaanaan Twaa Priyapati (Gun) Havamahe Nidhinaan Twaa Nidhipati (Gun) Havamahe Vaso Mam Aahamajaani Garbhadhamaa Tvam Jaasi Garbhadham | Om Gam Ganapate NamaH Dhyaan | Samarpayaami |

 

After completion of Ganpati meditation, make a Swastika using Kumkum in a plate, create a seat of flowers, and setup Praan Pratishtit Kaamna Poorti Ganpati Yantra chanting following mantra –

Om Ganapataye NamaH Aasanan Samarpayaami |

 

After providing seat to Ganpati, offer two spoonfuls of water to wash feet, chanting following mantra –

Om Gam Ganpataye NamaH Paadhayam Samarpayaami |

 

After this, offer two spoonfuls of water for Aachman,  chanting following mantra –

Om Gam Ganpataye NamaH Aachamaniyam Samarpayaami |

 

Chanting following mantras, bathe Ganpati first with pure water, then with Panchamrit, and then again with pure water –

Om Gam Ganapataye Snaanam Samarpayaami |

Om Gam Ganapataye Panchamrit Snaanam Samarpayaami |

Om Gam Ganapataye Shudhodhak Shaanam Samarpayaami |

After bathing with pure water, wiping the Yantra, establish It on the wooden board on a seat of flowers.

 

Note: Those Sadhaks desirous of setting up Ganpati Statue in their home on Ganesh Chaturthi, should setup Ganpati Statue above Ganpati Yantra after pure Snaan (bathing) and the following worship is worship of Ganpati Statue i.e. Yantra. Then offer Mouli (symbol of clothing) chanting following mantra-

Om Ganapataye Vastropavastram Samarpayaami |

 

Thereafter perform worship of Lord Ganpati with Yagyopavit (sacred thread), Chandan (sandalwood), Akshat, Pushpa, Durvaa, Itra etc. chanting following mantras –

Om Gam Ganapataye Yagyopavitam Samarpayaami |

Om Gam Ganapataye Chandanam Samarpayaami |

Om Gam Ganapataye Akshataan Samarpayaami |

Om Gam Ganapataye Pushpaani Samarpayaami |

Om Gam Ganapataye Durvaakuraan Samarpayaami |

Om Gam Ganapataye Soubhagya Dravyaani Samarpayaami |

 

Thereafter show Dhoop, Deep to Lord Ganpati chanting following mantras-

Om Gam Ganapataye Dhoopam Aaghrapayaami |

Om Gam Ganapataye Deepam Darshayaami |

 

Then offer Neivedhya and fruits to Lord Ganpati chanting following mantras –

Om Gam Ganpataye NamaH Neivedhyam Nivedayaami |

Om Gam Ganpataye NamaH Falaani Samarpayaami |

 

Then perform Aachman –

Om Praanaaya Swaaha, Om Apaanaaya Swaaha, Om Vyaanaaya Swaaha, Om Udaanaaya Swaaha, Om Samaanaaya Swaaha, Om Gam Ganapataya NamaH Aachamaniyam Samarpayaami |

 

Thereafter offer Loung (cloves), Eilaichi (Cardamom), Paan as mouth-freshner to Lord Ganpati chanting following mantras –

Pugifalam Mahadiwyam Naagvalli Daleiryuktam |

Elaachurnaadi Sanyuktam Taambulam Pratigrihataam ||

Om Gam Ganapataye NamaH Mukh Shuddhayartham Taambulam Samarapayaami |

 

Then with folded hands, chanting following names, offer Durvaadal to Lord Ganpati, this fulfils all kinds of wishes –

Sumukhaaya NamaH, Ekadantaaya NamaH

Kapilaaya NamaH, Gajkarnakaaya NamaH

Lambodaraaya NamaH, Vikataaya NamaH

Vighnanaashaaya NamaH, Vinaayakaaya NamaH

Dhroomketave NamaH, Ganaadhyakshaaya NamaH

Bhaalchandraaya NamaH, Gajananaaya NamaH |

 

Lord Ganpati gets quickly pleased by offering Durvaa on Ganpati idol whilest chanting these names, and fulfils all wishes of the Sadhak. The Sadhak has to perform only this much poojan worship on the first day (Ganesh chaturthi) i.e. during Yantra setup; the main point in this Sadhana is that the more Sadhak chants mantra in front of Lord Ganpati, the quicker his wishes get fulfilled. The scriptures quote following intense Mantra concerning Ganpati, chant this Mantra using Tantrokt Moonga Mala

Mantra

|| Om Gam Gaoum Ganapataye Vighnavinaashine Swaaha ||

 

This Mantra is considered especially significant. The Sadhak can chant any number of malas from 11 to 108 daily as per his convenience. The Mantra chanting is highly significant in this 11 day Sadhana. It is also not necessary to complete the required number of pledged malas at a single sitting. For example if a Sadhak has resolved to complete 108 malas Mantra chanting daily, then he can complete these 108 malas in two or even three sittings. But ensure that whatever mala the Sadhak resolves to complete daily, he should chant that number of malas regularly for the 11 days.

The BrahmVeivarta Puraana has recommended 1.25 lakh mantra chantings, which enables a Sadhak to obtain success in fulfilling wishes very rapidly in his life.

Perform Lord Ganpati’s Aarti daily after completion of Mantra chanting, and on the eleventh day i.e. Anant Chaturdashi (15 September 2016) after completing Lord Ganpati’s Aarti; wrap the Kaamna Poorti Ganpati Yantra and Mala in a cloth and immerse it in a water pond. Lord Ganpati will certainly fulfil all your wishes.

Note- The above-mentioned whole Sadhana-procedure should be accomplished on Ganesh Chaturthi. You should chant above Mantra daily only after performing Guru worship and accomplishing Lord Ganpati Panchopchaar poojan after lighting Dhoop-deep. It is mandatory to do Ganesh Aarti daily after completion of Mantra japa.

Sadhana Materials – 480 /-

 


Why immersion?

The Sanatana Dharma  always emphasizes on action oriented life .Therefore there is a special significance of Action-Work (Karma) in our life.What is the basic essence of meditation and worship?  The Yantra is setup in Sadhana-worship as a symbol of the Deity. Yantra is not a mere formation of geometric lines, rather Yantra is the conscious Saadhya form of the divine Deity God. The spirit of Mantras is transmitted into the Yantra. The Mantra japa chanting is performed by the Sadhak by joining this Yantra with his living spirit. Thus a connection is established between the divine powers and the mental psyche of the Sadhak.

When the Sadhana gets completed,  then the divine power attains actively consciousness within the Sadhak. And the Sadhak becomes active in this world by merging his own power with this Divine energy. His actions become intense. The intensity of the actions cause termination of faults and deficiencies, and when the faults get eliminated, then certainly the physical, mental and spiritual strength enhances.

After this process, the energy of the Yantra  starts transmitting into the person, and to ensure that the person utilizes the extremes of his energy, and comes out of mental dependencies, it is necessary to immerse the Yantra. When the Yantra is immersed in water after completion of the Sadhana, that divine energy starts flowing into the Sadhak.

Therefore, you should immerse the Yantra and mala into water after completion of the Sadhana. Always start Sadhana with a new Yantra and a new Mala.

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