Your unrealized values

शक्ति का महाभण्डार
आपका अचेतन मन
अचेतन मन की शक्ति का उपयोग करें
अचेतन मन को आज्ञा दें
अचेतन मन में विश्‍वास जगाएं
जब इस अचेतन मन को संकल्प के द्वारा श्रद्धा दी जाती है तो यह अपने चेतन मन को उन्नति की ओर ले जाता है। जो भी कार्य करें, उसके लिये संकल्प, विश्‍वास और श्रद्धा होनी आवश्यक है।

प्रत्येक मनुष्य में शक्ति का अकूत भण्डार होता है अर्थात् मनुष्य अपने इस भण्डार से जीवन पर्यन्त शक्ति प्राप्त करता रहता है और यह जितना इस शक्ति का देाहन करता है या इस शक्ति को काम में लेता है यह शक्ति उतनी ही गति से बढ़ती जाती है। मनुष्य के शरीर में शक्ति के दो स्रोत हैं पहला उसका मस्तिष्क जिसे बुद्धि कहा गया है, इस बुद्धि को निरन्तर तराशना पड़ता है। जिससे यह बुद्धि तीव्र और तीक्ष्ण होती है। मस्तिष्क का कार्य ही निरन्तर सोचना, विचार करना और शरीर को निर्देशित करना है।
शक्ति का दूसरा भण्डार, स्रोत मनुष्य का मन है। इस मन में असीम शक्ति होती है। मस्तिष्क में बुद्धि की क्षमता किसी व्यक्ति में कम या अधिक हो सकती है, यह भी संभव है कि कोई अपनी बुद्धि को नित्य-नित्य नहीं तराशता है, जो विद्या ज्ञान उसने सीखा है उसका बार-बार अभ्यास नहीं करता है तो वह बुद्धि मन्द हो जाती है लेकिन मन की शक्ति निरन्तर और निरन्तर तीव्र होती जाती है। जैसे-जैसे आयु बढ़ती है, वैसे-वैसे मन में शक्ति बढ़ती जाती है। इसीलिये एक कहावत है कि ‘मन के जीते जीत है और मन के हारे हार’ अर्थात् मनुष्य का मन ही शक्ति का सबसे प्रबलतम स्रोत एवं भण्डार है, प्रत्येक मनुष्य के मन में कई प्रकार की परतें होती हैं। वह अपने मन में हजारों रहस्य छुपा कर रख सकता है, मन में हजारों प्रकार के भाव आ सकते हैं। इसलिये मन की व्याख्या करते हुए चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों आदि सभी ज्ञानियों ने मुख्यतः मन को दो भागों में बांटा है – चेतन मन और अचेतन मन।

 

1. चेतन मन के द्वारा मनुष्य जाग्रत अवस्था में सोचता है और बाहरी दुनिया को अनुभव करता है।

 

2. अचेतन मन इन्हीं सब बातों को ग्रहण कर सुरक्षित रख लेता है। एक प्रकार से अचेतन मन को आत्म तत्व के साथ जोड़कर देखा जाता है।

 

विचार नियम के अनुसार- हर चीज की दो बार रचना होती है। यदि आप अपने जीवन में कुछ चाहते हैं और आपने अपने मन में उसकी साकार कल्पना नहीं की है तो वह चीज आपको नहीं मिल सकती। सकारात्मक विचारों के बार-बार दोहराने से यह कल्पना सहज ही साकार होती हुई दिखाई देने लगती है। यदि आपको कोई चीज चाहिए तो उसके लिए आपको क्या करना होगा? सबसे पहले तो अपने मन में उसका सृजन करना होगा, तभी वह वास्तविक जीवन में प्रकट हो सकती है। विचारों का यह नियम कभी असफल नहीं होता।

 

रात को अगर आप यह सोचकर सोएं कि सुबह छह बजे उठना है तो अचेतन मन की अलार्म घड़ी आपको जगा देती है। आपकी आंख छह बजे के करीब खुल जाती है। कई बार तो ठीक छह बजे ही आप जाग जाते हैं। यह आपके अचेतन मन का काम है। आप उसे जो आदेश देते हैं, वह उसे पूरा कर देता है, हालांकि आपको खुद यह पता नहीं रहता कि आपने उसे आदेश दे दिया है।

 

पिछली सदी में एक बड़ा रहस्य उद्घाटित हुआ है, वह यह है कि हमारा अचेतन मन मजाक को नहीं समझ पाता। यह हर बात को सच मान लेता है। मान लीजिए, आपसे कोई काम गड़बड़ हो या और आपने खुद से कहा, मैं इतना मूर्ख कैसे हो सकता हूं? आप यह बात नहीं जानते, लेकिन आपने अपने अचेतन मन को यह बताकर अनर्थ कर दिया है। इसके बाद होगा यह कि अचेतन मन आपके जीवन की सारी घटनाओं की छानबीन करके, आपके सामने तस्वीरें पेश करके यह साबित कर देगा कि आप सचमुच मूर्ख हैं। इसके बाद अचेतन मन आपके माध्यम से ऐसे काम ज्यादा करवाएगा, जिनसे आप मूर्ख साबित हों। यही अचेतन मन की शक्ति है, यही विचार और कल्पना की शक्ति है।

 

मन की शक्ति इस्तेमाल कैसे करें

 

कल्पना शक्ति का सही उपयोग मानसिक चित्रों के रूप में किया जा सकता है। मान लीजिए, आप कोई चीज चाहते हैं, जैसे मकान या अच्छी सी नौकरी। इस तरह अंतिम परिणाम तय हो गया। उस तक पहुंचने का एक तरीका तो यह है कि उस परिणाम का मानसिक चित्र देखना जैसे आप मंच पर खड़े होकर घोषणा कर रहे हैं कि मैंने ये-ये रचनात्मक कल्पना की थी, जो साकार हो गई। दूसरा तरीका यह है कि उस मानसिक चित्र को सच में साकार होते देखें और अगर वह आपको प्राप्त हो जाए तो आप कैसे व्यवहार करते वह व्यवहार करें उसी अहसास के साथ जीएं जैसे कि यह देखना कि आप वाकई उसी घर में रह रहे हैं और अपने दोस्त को बता रहे हैं कि यह पूरा घर आपके नाम है। इस पर कोई लोन नहीं है। मैंने इसे खुद अपने नाम से खरीदा है। जब आप यह करेंगे तो कुछ समय उपरांत आप हैरान रह जाएंगे कि आपको अपनी मनचाही चीज कितनी आसानी से मिल गई। आपको अपना मनचाहा घर या अच्छी नौकरी कल्पना के उपयोग से मिली है। वैसे आपका अंतिम परिणाम चाहे जो हो, कल्पना उसे साकार करने में आपकी मदद कर सकती है।

 

यदि आपको डॉक्टर बनना है तो मानसिक चित्र देखें कि आपका क्लीनिक है, जिसकी दीवार पर आपका सर्टिफिकेट लगा है। और हां, तारीख का ध्यान रखें। अगर मानसिक चित्र में साल यानी सन का ध्यान नहीं रखा तो उस चित्र के साकार होने में देर लग सकती है। चित्र देखते समय अगर सारी बातें ध्यान में न रखी जाएं तो गड़बड़ी की आशंका रहती है।

 

मान लें, किसी को अमीर बनना है और वह यह मानसिक चित्र देखने लगता है कि वह नोट गिन रहा है। वह इस चित्र को लगातार देखता है। आगे चलकर होता यह है कि वह बैंक में कैशियर बन जाता है।
मन को आज्ञा दीजिये

 

इस स्थिति में मानसिक चित्रों की शक्ति ने काम तो किया, लेकिन उसे अपना मनचाहा परिणाम नहीं मिला। दोष कल्पना का नहीं था, दोष तो उसके मानसिक चित्र का था। उसका मानसिक चित्र स्पष्ट नहीं था। वह जो चाहता था, उसका मतलब उसने अचेतन मन को स्पष्टता से यह नहीं बताया कि वास्तव में उसे चाहिए क्या? उसने यह नहीं बताया कि मैं अमीर बनना चाहता हूं और जो नोट मैं गिन रहा हूं, वह मेरा पैसा होना चाहिए और चित्र में ऐसी कल्पना करनी चाहिए थी कि ये जो नोटो कि गड्डियां गिन रहा हूं, उनको मैं अपनी अलमारी या तिजोरी में रख रहा हूं और उसकी चाबियों का छल्ला मैंने अपने हाथों से अपने पूजा स्थान में गुरु चरणों में रख दिया है और अब मैं चैन से अपने परिवार के साथ समय बिता रहा हूं और उत्साह के साथ जीवन जी रहा हूं। इस प्रकार पूरा चित्र स्पष्ट करने पर कोई भी सेंसर बोर्ड उसके चित्र पर कैंची नहीं चला सकेगा अपितु उसने जैसा चाहा था, वैसा ही चलचित्र की भांति उसके जीवन में घटित होता चला जायेगा।

 

आपकी कल्पना स्पष्ट हो

 

तो महत्वपूर्ण बात यह है कि आप पूरी स्पष्टता से अचेतन मन को बताएं कि आप क्या चाहते हैं। इसी तरह का एक और उदाहरण देखें। एक इंसान जो एक सफल डॉक्टर बनना चाहता था उस इंसान ने मानसिक चित्र में देखा कि वह मरीजों का इलाज कर रहा है, उनका ब्लड प्रेशर ले रहा है, मरहम-पट्टी कर रहा है, सुई लगा रहा है। उसने बार-बार जब इस मानसिक चित्र को देखा तो कल्पना साकार हो गई, वह कंपाउंडर बन गया। इस तरह उसका यह मानसिक चित्र साकार हो गया। जबकि वह बनना तो चाहता था डॉक्टर, लेकिन कंपाउंडर बन गया। एक बार फिर, गलत मानसिक चित्र देखने की वजह से उसे अनचाहे परिणाम मिले। उसने अपने अंतिम परिणाम को पूरी स्पष्टता से नहीं फिल्माया और उसे अच्छी तरह से देखा भी नहीं, इसीलिए अनर्थ हो गया। इसी तरह एक इंसान ने यह चित्र देखा कि वह डॉक्टर बन रहा है। चित्र सही था, लेकिन उसमें समय अवधि का उल्लेख नहीं था। परिणाम यह हुआ कि उसे डॉक्टर बनने में कई साल लग गए।

 

अचेतन मन को सही अवधि बताना बहुत महत्वपूर्ण है। आप अमुक परिणाम कब तक चाहते हैं, इसकी अवधि निर्धारित करना भी जरूरी है। मानसिक चित्र देखते समय आपको उस भावना को भी महसूस करना होगा, जो अंतिम परिणाम पाने पर आपको मिलेगी।

 

खुशी की भी कल्पना करें

 

अगर आप अपने सपनों का मकान खरीद लें या आपको मनचाही नौकरी मिल जाए तो उस समय आप कितने खुश होंगे? बस उसी खुशी को कल्पना-चित्र में महसूस करें। जिस खुशी को आप पाना चाहते हैं, जब आप उस खुशी को महसूस करते हैं तो आप चुंबक बन जाते हैं और उस अंतिम परिणाम को ज्यादा तेजी से अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यह बात बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। वे कल्पना तो करते हैं, चित्र तो देखते हैं, लेकिन आनंद की भावना को महसूस नहीं करते। वे यह भूल जाते हैं कि भावना ही तो वह ट्रिगर है, जिससे अंतिम परिणाम साकार होना शुरू होता है।

 

दूसरों के लिये श्रेष्ठ कल्पना करें, आपके लिये अपने आप श्रेष्ठ हो जायेगा –

 

मानसिक चित्रों की शक्ति का उपयोग दूसरों के लिए भी किया जा सकता है। वस्तुत: करना ही चाहिए। अपने लिए कल्पना करते समय मन में बहुत से नकारात्मक विचार आते हैं। डर लगता है कि होगा कि नहीं होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि आप अपनी समस्याओं से बहुत जुड़े होते हैं। लेकिन जब आप यही काम दूसरों के लिए करते हैं, तो इसे आप अलगाव से करते हैं। तब आपके मन में ज्यादा नकारात्मक विचार नहीं आते। यह बड़ी महत्वपूर्ण बात है। इसलिए दूसरों के लिए कल्पना करें और उसमें वे चीजें देखें, जो आपको चाहिए। यदि आप नौकरी चाहते हैं, तो कल्पना करें कि आपके बेरोजगार दोस्त को नौकरी मिल गई है। ऐसा करने पर आप निमित्त बन जाएंगे। हां, यह बात जरूर ध्यान रखें कि आपको अंतिम परिणाम ही तय करना है, तरीका तय नहीं करना है। आपको सिर्फ लक्ष्य तय करना है,उस लक्ष्य तक कैसे पहुंचें, यह तय नहीं करना है। यह तय मत कीजिए कि मुझे अमुक कंपनी में नौकरी मिलनी चाहिए और अमुक पद पर अमुक चैम्बर में जाकर बैठूंगा और अपना काम करूंगा। मुझे नौकरी ऐसे ही मिलनी चाहिए यह तय करना आपका काम नहीं है। फलां इंसान इस कार्य में मुझे मदद करेगा, तभी नौकरी मिलेगी या नहीं मिलेगी ये बातें उस लक्ष्य को पाने के साधन (सहायक) मात्र हैं आप अपना ध्यान साधनों की बजाय साध्य पर केन्द्रित करें। कुदरत आपकी इच्छा पूरी करने के लिए सबसे अच्छा, सरल, सुगम और सीधा रास्ता खोज लेगी। आपको तो उसे बस इतना बताना भर है कि आप अंतिम परिणाम के रूप में क्या चाहते हैं। यदि आप अपने अचेतन मन से कहते हैं कि मेरी मदद करो, मुझे एक अच्छी नौकरी की सख्त जरूरत है तो इतने भर से ही आपके अचेतन मन तक संदेश पहुंच जाता है कि आपको क्या चाहिए। यह महत्वपूर्ण है। केवल मंजिल का निर्धारण करें, रास्ता निर्धारित न करें। केवल लक्ष्य तय करें, तरीका तय न करें। वह सब अचेतन मन पर छोड़ दें।

 

आपका सकारात्मक विश्‍वास, सबसे बड़ी शक्ति है – 

 

दुनिया के सभी धर्म विश्‍वास के रूप हैं और विश्‍वास कई तरीकों से स्पष्ट किए जाते हैं। अपने जीवन और ब्रह्मांड के बारे में जैसा विश्‍वास होगा, मनुष्य को वैसा ही मिलता है। मनुष्य अगर विश्‍वास कर सके, तो उसके लिए हर चीज संभव है। नेपोलियन को विश्‍वास था कि दुनिया में असंभव शब्द है ही नहीं और इसी विश्‍वास के चलते उसने बडे़-बड़े युद्ध जीते। जहां पर सकारात्मक सोच मनुष्य को सफलता दिलाती है, वहीं पर नकारात्मक व निराशाजनक सोच मनुष्य को असफलता, संदेह व आत्मविश्‍वास में कमी की ओर ले जाती है। आज चारों तरफ आपाधापी व स्वार्थपरायणता ने अनेक नौैजवानों को नकारात्मक सोच की तरफ अग्रसर कर दिया है। जब यह सोच ज्यादा बढ़ जाती है, तो अचेतन मन ऐसी स्थिति में उनसे आत्महत्या जैसा अपराध करा देता है। इससे यह सिद्ध होता है कि मनुष्य का अचेतन मन शक्ति का भंडार है, जिसमें मनुष्य जैसा कच्चा माल या रॉ मेटेरियल एकत्र करेगा, उसका कई गुना वह तैयार माल पाएगा। इसीलिए कहा गया है कि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत।

 

अचेतन मन गजब की शक्ति देता है

 

अमेरिका के डॉ. जोसेफ मर्फी ने शोध से पता लगाया कि यदि चेतन मन को विश्‍वास हो जाता है कि वह अब ठीक हो सकता है, तो अचेतन मन उसे पूरा करने के लिए शक्ति पैदा करता है और अचेतन मन के आदेश पर मस्तिक उसी प्रकार के हार्मोन पैदा करके उस कार्य को पूरा करता है। ऐसी मान्यता है कि अचेतन मन केवल वर्तमान जीवन को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि आत्मा के साथ दूसरे शरीर धारण के समय भी साथ रहता है। दूसरे जन्म में इसी अचेतन मन के कारण व्यक्तित्व निर्माण व संस्कार प्राप्त होते हैं। इसीलिए यदि मनुष्य वर्तमान जीवन और अगले जीवन में आनंद चाहता है, तो उसे अपने चेतन मन व अचेतन मन को सकारात्मक सोच व विचारों से परिपूर्ण करना होगा।

 

यह कहा जा सकता है कि अचेतन मन को बार-बार विश्‍वास रूपी खाद देनी पड़ती है तब अचेतन मन तीव्र होकर चेतन मन से सब प्रकार के कार्य करा सकता है। इस अचेतन मन को शक्ति प्रदान करने के लिये तीन बातें प्रमुख हैंै – 1. संकल्प, 2. विश्‍वास, 3. श्रद्धा

 

अचेतन मन बिल्कुल स्वच्छ निर्मल और पवित्र होता है, जब इस पर अविश्‍वास की परत चढ़ाई जाती है तो यह अपने चेतन मन को अविश्‍वास ही देता है। इसी प्रकार जब इस अचेतन मन को संकल्प के द्वारा श्रद्धा दी जाती है तो यह अपने चेतन मन को उन्नति की ओर ले जाता है। जो भी कार्य करें, उसके लिये संकल्प, विश्‍वास और श्रद्धा होनी आवश्यक है। इसके अभाव में जीवन में किसी प्रकार का लाभ नहीं हो सकता है, अपितु हानि हो सकती है। इसीलिये भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यही कहा
श्रद्धावाल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।

 

ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति॥

 

हे अर्जुन! तू जो कार्य कर रहा है, उससे तेरा चेतन मन तुझे रोक रहा है लेकिन तू अपने अचेतन मन पर विचार कर और अपने आपको श्रद्धा के साथ क्रिया में लगा दे। अब तक तू अपने चेतन मन की बात सुनता आया है और तेरे चेतन मन ने जो प्रत्यक्ष देखा है, अनुभव किया है उसी प्रकार क्रिया करने के लिये तुझे कह रहा है। जबकि सत्य तो तेरे अचेतन मन में छुपा हुआ है। उस अचेतन मन की बात सुन और पूरी श्रद्धा और विश्‍वास के साथ कार्य कर।

 

योगियों ने इसी अचेतन मन के जागरण की क्रिया को ध्यान, धारणा और समाधि कहा है। समाधि का अर्थ नेत्र बंद कर अपने अचेतन मन की बात को समझना है, सुनना है, उस पर मनन करना है और उसके अनुसार अपने शरीर के अचेतन चक्रों को जाग्रत करना है। यही कुण्डलिनी जागरण की क्रिया है।

 

जिसने अपने अचेतन मन को समझ लिया, जान लिया वह संसार में आनन्द योग पथ पर अग्रसर हो जाता है। उसके साथ उसकी श्रद्धा और विश्‍वास उसे निरन्तर शक्ति, गति और मति प्रदान करते रहते हैं।

Major reserves of Energy

Your Sub-conscious Mind

Utilize the power of the sub-conscious mind

Command your sub-conscious mind

Develop faith in the sub-conscious mind

 

When this sub-conscious mind is intrusted through determination, it develops the conscious mind towards progress and development. Whatever task you undertake; determination, faith and trust is certainly required.


Each person has vast reserves of energy within himself, i.e. a person keeps receiving human-spirit energy from this powerhouse throughout his life, and the more he consumes this energy, or utilizes this power, the faster the capacity of this energy treasure-trove enhances correspondingly.  There are two sources of energy in the human body; first is his brain which has been termed as the intellect, this intellect has to be continuously exercised; to make it sharper and incisive. It is the duty of the intellect to constantly think, to imagine and to direct various organs of the body.

The second reserve of power, the source, is the human mind. There is immense power within the mind. The  intelligence level may differ among different individuals, it is quite possible that someone might not have regularly or continuously exercised his intellect, has not frequently practised whatever knowledge he has learned, then that intellect may become dull; but the power of the mind intensifies continuously incessantly. The power of mind keeps enhancing with age. There is a famous proverb that “You win in the mind and lose too in the mind” i.e the human mind is the strongest source and reservoir of energy, there are multiple layers within each human mind. He can conceal thousands of secrets in his mind, and thousands of different emotional expressions may enter his mind. Therefore the physicians, psychologists and enlightened experts have explained the mind by dividing it into two parts – the conscious mind and the sub-conscious mind.

  1. A person thinks in the awakened state through his conscious mind and perceives the outer world.
  2. The sub-conscious mind safely stores all these experiences. In a way, the sub-conscious mind can be analyzed in combination with the soul.

 

According to the laws of thought, every thing undergoes two cycles of composition. If you wish for something in your life, and if you have not imagined it adequately in your mind, then you can not achieve it. Constant repetition of positive thoughts make it easier to naturally fulfil this imagination. If you desire anything, then what do you need to do? First, you must create it in your mind, only then will you be able to achieve it in reality. This law of thoughts never fails.

If you go to sleep with a thought to wake up at six in the morning, then the alarm clock of the sub-conscious mind awakes you. Your eyes open at around 6 am in the morning. This is done by your sub-conscious mind. Whatever you command it to do, it fulfils that order, even though you yourself may not know that you had given it that command.

A new secret has been discovered in the last century, that our sub-conscious mind can not understand jokes. It assumes everything as gospel truth. Imagine, if you made a mistake, and told yourself, how can I be so stupid? You are not aware of it, but you have invited disaster by telling it to your  sub-conscious mind. After this, your sub-conscious mind will scrutinize all events of your life, and will provide evidence to you to prove that you indeed are stupid. Then, your sub-conscious mind will get such tasks done through you, which prove that you are a fool. This is the power of the sub-conscious mind, this is the power of thoughts and imagination.

 

How to utilize the power of the mind –

The proper utilization of the imagination can be done through mental pictures. Suppose, you desire something, such as a house or a good job. Thus the final outcome has been decided. One way to achieve this is to visualize the mental picture of that result, for example, you are announcing on the stage that I had this creative imagination, which has now turned into a reality. The second method is to see that mental picture turning into a reality, and to behave as if you have already achieved that, you live as if you already are living in that house, and are telling your friend that this entire house is mine. There is no outstanding loan on this home. I have myself purchased this house in my name. When you start doing this, you will yourself be amazed how easy it is to get anything you desire. You have obtained your desired house or a good job by utilizing imagination. Whatever be the end result, the imagination will assist you to realise it.

If you wish to become a doctor, then you should draw a mental picture that you are operating a clinic, and your medical license certificate is displayed on the wall. And yes, take care of the date. If you do not include the year in the mental picture, then the realization of that mental picture will get delayed. If all details are not considered while drawing the mental picture, then there is a possibility of slippage.

Now assume that someone wants to get rich, and he draws a mental picture in which he is counting notes. He continuously sees this mental picture. It future, he will become a cashier at the bank.

Command your mind

In this case the power of mental images did the job, but he did not get the desired results. The fault was not in the imagination, his mental visualization was incorrect. His mental picture was not clear. Whatever he desired, he did not properly and clearly supply the adequate details to his sub-conscious, of what he wanted in reality. He did not specify that he wanted to become rich and whatever notes I am counting, these should be mine, and the mental image should also contain imagination that whatever bundles of notes he is counting, he is storing them in a safe or cupboard, and that he has kept the key-ring at Gurudev’s feet in the worship-altar with his own hands, and that now he is spending time peacefully with his family and is leading life with gusto and energy. Thus by clarifying all the details in the mental picture, it cannot be censored out by any authority, rather whatever he wished for,  all those incidents take place in his life, like a movie.

 

Your imagination should be crystal clear –

Therefore it is highly significant that you should state your requirements clearly to the sub-conscious mind. Let us look at another similar example. A person who desired to become a successful doctor, drew a mental picture that he is treating patients, taking their blood pressure, tying their bandage, and giving injections. When he repeatedly saw this mental picture, this became a reality, he became a compounder. Thus his mental picture became true.  He wanted to become a doctor, but became a compounder. Once again, drawing a wrong mental picture led to unwanted results. He did not accurately perceive his final outcome, and did not visualize it correctly, so it led to ruin. Similarly another person visualized that he was becoming a doctor. The mental picture was correct, but it did not have the details of duration. As a result it took him many years to become a doctor.

It is very important to specify correct duration to the sub-conscious mind. It is important to specify the date by which you wish to realize the final outcome. You should also feel the emotions while visualizing the mental picture, which you will undergo when you realize the end-result.

 

Visualize happiness too –

If you purchase your dream house or obtain your desired job, then how happy will you be? Just imaging that joy and happiness in the mental-imagination. The joy which you wish to attain, when you feel that joy, then you exert a magnetic force, and you manage to attract that final outcome faster towards you. This is a very significant topic, but people tend to ignore it. They do imagination, visualize the mental picture, but do not sense that feeling of joy. They forget that emotion is the trigger, which initiates the realization of the final result.

 

Imagine good for others, it will be good for you, automatically –

The power of mental-picture can also be utilized for others. In fact, you must. Many negative thoughts come in the mind while imagining for self. There is a fear whether it will happen or not. This occurs, because you are very tightly linked with your own problems. But when you do the same for others, then you do it in isolation. Negative thoughts do not crowd your mind. This is a very important point. So imagine for others and look for those objects, which you need. If you desire a job, then imagine that yours unemployed friend has got a job. Thus you will become a medium. However, you must remember that you will specify only the final outcome, and not the method or process to use. You just have to set the goal, you do not have to decide how to reach that goal. Do not decide that I should definitely get a job in a particular company and that I will sit in particular chamber at a particular position, and will do my work. It is not for you to decide the mode to get that job. A particular person will help me, only then I shall get that job or will not get that job; all of these are the methods and means (assistants) to realize that goal, you should focus your mind on the overall target instead of on the mediums. The mother nature will identify the best, simplest, easiest and straightforward method for it. You just need to specify  what you desire as the final result. If you tell your sub-conscious mind to help you, you desperately require a job, then this itself will convey the message to your sub-conscious mind of what  you require.  It is significant. Only determine the goal, do not specify the path. Just set the target, do not decide the process. Leave all of it to the subconscious mind.

 

Your positive belief, the greatest power –

All religions of the world are a form of beliefs, and the faith can be expressed in multiple ways. Whatever a person believes about his life and universe, he will obtain the same. If a person can believe, then everything is possible for him. Napoleon was convinced that the word impossible does not exist in the world and because of this belief, he won many major victories. The positive thoughts bring success to a man, however the negative and hopeless thoughts lead a person to failure, doubt and lack of confidence. Today’s environment of rush and self-centredness has pushed many young people towards negative thinking. When such thinking increases, then in such situations, the sub-conscious mind even causes them to commit a crime like suicide. This proves that the sub-conscious mind is a vast repository of power, whatever raw material is input, a similar output is generated. at a multiple scale. Therefore it is said that “It is all in the mind. You win in the mind and you fail too in the mind.”

 

The sub-conscious mind provides amazing powers –

Dr. Joseph Murphy of America discovered during his research that if the conscious mind develops confidence for cure, then the sub-conscious mind generates energy to fulfil this trust, and the brain generates appropriate hormones on command of sub-conscious mind to complete the cure. It is believed that the sub-conscious mind not only affects the present life, but it accompanies the soul while taking the next birth. This sub-conscious mind builds the personality and develops the person’s basic nature in the next life. So if a man wishes to enjoy the present life and the future life, then he should fill his conscious mind and the sub-conscious mind with positive thoughts and ideas.

It can be said that the sub-conscious mind should be often fertilized with faith and trust, the  sub-conscious mind can develop intensity to get everything done through the conscious mind. Three things are necessary to provide energy to the  subliminal mind –

  1. Determination,
  2. Trust
  3. Faith.

 

The sub-conscious mind is completely pure and holy, and when a layer of mistrust is coated on it, then it gives mistrust to the conscious mind. Similarly when faith is imparted on sub-conscious mind through determination, then it leads the conscious mind to progress and development. Whatever be the task, determination, trust and faith are mandatory. You cannot gain anything in life in their absence. Hence Lord Krishna advised Arjun –

Shraddhavaallabhte Gyanam TatparaH SanyatendriyaH |

Gyaanam Labhdhwa Paraam Shaantimachirenaadhigachchati ||

 

O Arjuna! Whatever you are doing, your conscious mind is inhibiting  you, but now you should focus on the sub-conscious mind and immerse yourself in action with full faith. You have only heard from your conscious mind until now, and your conscious mind will direct you for your actions only within the limitation of whatever it has seen or experienced. However the real truth is hidden within your  sub-conscious mind. Listen to the sub-conscious mind and act with full faith and confidence.

The Yogis have termed this awakening of the sub-conscious mind as Dhyaan (focus), Dhaarna (perception) and Samaadhi (meditation). The samadhi means closing the eyes, and listening to our sub-conscious thoughts, comprehending them, following them; and awakening our body’s sub-conscious chakras accordingly. This is the process of Kundalini Jagran (activation).

Whoever comprehends his sub-conscious mind, understands it, he progresses of the path of joyful Yoga in the world. His faith and trust keeps providing him continuous power, speed and psyche.

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