Kapila Yogini

मित्र रूपा
कपिला योगिनी

 

पूरे-पूरे तंत्र-शास्त्र को अपने में आत्मसात् किये, कपिला योगिनी अपने सिद्ध साधक में भर देती है ऐसा तेज, बल और उत्साह जो केवल तंत्र के द्वारा ही संभव हो…
कपिला योगिनी साधना में लाल रंग का बहुत अधिक महत्व है। अतः साधक-साधिका यथासंभव लाल रंग के वस्त्रों को धारण करें…

 


तांत्रोक्त साधनाओं की आधारभूता देवियों, योगिनियों को लेकर समाज में विचित्र, रोमांचक कथाएं प्रचलित हैं लेकिन योगिनियां तो अपने-आप में पूर्ण रूप से चैतन्य और सौम्य स्वरूपा हैं, जिनके रोम-रोम में समाया है साधनाओं का बल और तंत्र की प्रखरता, जो आधार हैं प्रत्येक तांत्रिक साधना का, साधक की सहयोगिनियां बन पूर्ण रूप से मित्र स्वरूपा बन… मधुर और आत्मीयता से परिपूर्ण होती हैं योगिनियां।

 

तेजस्वी सौन्दर्य और दिव्य आभा का मेल ही सही स्वरूप है योगिनी का। तनुकाय और शरीर पर अवलोकित स्वर्णिम आभा उनका विन्यास रच देता है किसी स्वर्णिम मूर्ति का। उनकी शांत किन्तु तीखी काली आभा से युक्त आंखों से ही स्पष्ट होती है उनके अन्दर छुपी तंत्र की विलक्षण तीव्रता… अन्दर तक उतरती पैनी दृष्टि, साधनाओं का बल लिए – भगवान शिव की साक्षात् कृति, जो काम या उपभोग की वस्तु नहीं हैं; और इसी से जब किसी साधक ने साधना काल में इनके प्रति कोई कुदृष्टि या कुविचार रखा, तो साधना में असफल होने के साथ मृत्यु तक को भी प्राप्त हो गया… और फिर जुड़ गयी अनोखी कथाएं वीभत्स कथाएं, विकृत मानसिकताओं की उपज, गढ़े-गढ़ाये सनसनीखेज संस्मरण…

 

‘दीर्घकाय, भीषण आकृति वाली, जिनका वर्ण श्याम है – ऐसी स्थूलकाय जिसके विशाल वक्ष-स्थल पर बाल गज के समान स्तनद्वय शोभायमान हैं… जिनकी मुख मुद्रा अत्यंत रक्तिम और नेत्र भयोत्पादक हैं, ऐसी रक्त-वर्णीय वस्त्रों को धारण करने वाली प्रचण्ड योगिनी मातेश्‍वरियों की मैं वन्दना करता हूं।’

 

‘एक हाथ में भाला और दूसरे में खड्ग धारण कर क्रोधातुर हो रही, शेष दोनों हाथों में शत्रु के शव से निकले रक्त को अपने वस्त्रों में विलीन करती देवी! मेरे जीवन में सहायक हों…’

 

कई-कई रूप वर्णित हैं योगिनी के साधकों के मध्य और यह स्वरूप है उनके मातृरूप का। प्रेमिका का रूप भी वर्णित है योगिनी का, लेकिन वह सामान्य साधक-जगत की बात नहीं, क्योंकि वहां वासना के लिए किंचित् मात्र भी स्थान नहीं।

 

सौम्यतम स्वरूप है योगिनी का मित्रवत् स्वरूप में, और क्या-क्या नहीं जुड़ जाता साधक के जीवन में योगिनी के मित्ररूप में सिद्ध हो जाने से, जो आतुर हो जाती हैं अपने साधक को जीवन के सभी सुख देने में, भले ही वे इच्छा प्रकट करें या न करें। किसी मनोकामना की पूर्णता हो या धन का भण्डार खोल देने जैसी कृपा, मनोनुकूल विवाह सम्पन्न कराने या प्रेमी का मिलन कराने जैसी घटना… योगिनी से तो कुछ भी गोपनीय रह ही नहीं जाता। पग-पग पर अपना स्नेह और मार्ग दर्शन के साथ-साथ वह करती रहती हैं साधक की प्रतिपल रक्षा और सचेत कर देती हैं किसी भी षडयंत्र या धोखे के प्रति पहले से ही…।

 

पूरे-पूरे तंत्र-शास्त्र को अपने में आत्मसात् किये, कपिला योगिनी अपने सिद्ध साधक में भर देती है ऐसा तेज, बल और उत्साह जो केवल तंत्र के द्वारा ही संभव हो… आकाश से गिरी कड़कती बिजली जैसा यौवन या आंखों में मस्ती के वे लाल डोरे, जो सही अर्थों में किसी पुरुष के यौवन का प्रमाण हो या फिर तना हुआ सीना, साधक में सभी विशिष्टताएं उतार देती हैं यह योगिनी, जिससे उनका साधक छा जाए सारे वातावरण में…।

 

शिव कल्प (28 जनवरी 2017 से 12 मार्च 2017)  ही सही अवसर है ऐसी वरदायक और मित्र स्वरूपा कपिला योगिनी को अपने जीवन में सादर निमंत्रित करने का, क्योंकि योगिनी तो एक ही आधार ढू़ंढती हैं कि जहां उसे सही साधक मिले, स्नेह पूर्ण वातावरण मिले, वहां वह अपनी शक्तियां प्रकट कर दें। उन्हें जीवन का समस्त सुख, वैभव और आनन्द दे दें। अन्य देवी-देतवाओं की अपेक्षा कपिला अपना प्रभाव देती हैं तीक्ष्ण बल देकर, जिससे साधक में भर जाता है ओज और संघर्षशीलता। जीवन में ऐसा अवसर बार-बार उपस्थित नहीं होता। जीवन में साधना ऐसी वस्तु नहीं होती कि जिसे जब चाहें तब बाजार में जाकर पैसे देकर खरीद लें या तेज, बल, सौन्दर्य और आकर्षण पैसों से प्राप्त कर लें। इसके लिए तो आधार लेना पड़ता है ऐसी वरदायक साधनाओं का, और जो चूक जाते हैं उन्हें फिर प्रतीक्षा करनी पड़ती है एक लम्बे समय तक।

 

योगिनी की साधना करने का अर्थ है अपने जीवन से सभी अनिष्टों को, चाहे वे वर्तमान में साथ चल रहे हों अथवा काल के गर्भ में पल रहे हों। ॠण, चौर्य, भय, आकस्मिक दुर्घटना, गुप्त-घात या जीवन के छोटे-छोटे अनेक विवाद, जो जीवन में विष घोलते रहते हैं, उनका निराकरण पूर्णता से होता है योगिनी साधना से।

 

मात्र एक दिवस की साधना, लेकिन उस रूप में चमत्कार प्रधान या अनुभूति प्रधान नहीं, जैसा कि योगिनी से जुड़ी विचित्र कथाओं और कामोत्पादक स्वरूप का वर्णन पढ़कर मानस में चित्र बनता है… एक सौम्य साधना, मन में पूर्ण आह्लाद और आत्मीयता की भावना लेकर की जाने वाली साधना। इस साधना का प्रभाव दूसरे दिन प्रातः से ही साधक को मिलना प्रारम्भ हो जाता है और यदि साधक कुछ समय तक नियम-बद्ध ढंग से साधना में रत रहे तो उसे साक्षात् योगिनी-मिलाप भी संभव होता है।

 

यह रात्रिकालीन साधना है, जिसे किसी भी शुक्रवार की रात्रि को सम्पन्न किया जा सकता है। यों तो विधान है कि इस साधना को एकांत में, वृक्ष के नीचे बैठकर सम्पन्न किया जाए लेकिन उसके प्रतीक रूप में साधक किसी वृक्ष की डाल प्रातः काल ही लाकर अपने पूजा स्थान में गीली मिट्टी के एक ढेर में गाड़ दे अथवा आपके घर आंगन में कोई पौधा हो तो उसे अपने पूजा स्थान में रखकर उसके पास बैठकर भी साधना सम्पन्न की जा सकती है।

 

साधना विधान

 

कपिला योगिनी साधना में लाल रंग का बहुत अधिक महत्व है। अतः साधक-साधिका यथासंभव लाल रंग के वस्त्रों को धारण करें। पुरुष साधक लाल रंग की धोती पहन सकते हैं और स्त्री साधिकाएं लाल रंग की साड़ी पहनकर ही साधना में बैठैं। रात्रि में दक्षिण दिशा की ओर मुंह कर अपने सामने एक बाजोट पर लाल वस्त्र बिछा दें और स्वयं भी किसी लाल आसन पर बैठ जाएं।

 

भगवान शिव की विशिष्ट शक्ति स्वरूपा कपिला योगिनी की साधना में सफलता हेतु सर्वप्रथम गुरु पूजन सम्पन्न करें। इस हेतु बाजोट पर शिव चित्र के साथ ही साथ गुरु चित्र, पादुका, गुरु यंत्र स्थापित कर गुरु पूजन सम्पन्न करें। सर्वप्रथम निखिल ध्यान करें –

 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

 

निखिल ध्यान के पश्‍चात् गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका को जल से स्नान करावें –

 

ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि॥

 

इसके पश्‍चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप से पंचोपचार पूजन करें –

 

ॐ निखिलम् कुंकुम समर्पयामि।
ॐ निखिलम् अक्षतान समर्पयामि।
ॐ निखिलम्  पुष्पम् समर्पयामि।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि।
ॐ निखिलम् धूपम् आघ्रापयामि, दीपम् दर्शयामि।                        (धूप, दीप दिखाएं)

 

अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र/विग्रह/यंत्र/पादुका पर घुमाकर छोड़ दें। इसके पश्‍चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें –

 

ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः

 

गुरु पूजन के पश्‍चात् बाजोट पर एक तांबे के पात्र में ‘योगिनी यंत्र’ स्थापित कर उसका पूजन कुंकुम, अक्षत, सिन्दूर से करें तथा एक तेल का दीपक प्रज्वलित कर दें।

 

जिस पौधे या पेड़ की डाल को आपने पूजन हेतु प्रयुक्त किया है, उसका भी पूजन करें। पूजन हेतु घी का दीपक प्रज्वलित कर, कुंकुम, अक्षत, सिन्दूर अर्पित करें ।

 

पूजन के पश्‍चात् के पश्‍चात् 16 बार निम्न मंत्र का जप करते हुए 16 लाल पुष्प यंत्र पर अर्पित करें।

 

॥ॐ सिद्ध योगिनी शक्ति रूपाययै नमः॥

 

इसके पश्‍चात् उपरोक्त मंत्र का उच्चारण करते हुए यंत्र पर ‘दस योगिनी कृतवाह’ अर्पित करें और प्रार्थना करें कि कपिला योगिनी अपनी समस्त शक्तियों के साथ दसों दिशाओं से मेरी रक्षा करें। एक बड़ा फल बलि रूप में समर्पित करें। वातावरण को धूप अथवा लोबान की सुगंध से भरा रखें। इसके पश्‍चात् ‘रक्तवर्णीय माला’ से निम्न मंत्र का 11 माला मंत्र जप करें। मंत्र जप के काल में दृष्टि दीपक की लौ पर एकाग्र रहे।

 

मंत्र

 

॥ॐ श्रीं क्लीं क्रीं कपिला योगिन्यै हुं फट्॥

 

यह एक दिवस की साधना है, लेकिन साधक की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह आगामी कितने दिनों तक इस साधना को करे। यदि साधक को दूसरे दिन से ऐसा अनुभव हो कि कोई उसके साथ प्रतिक्षण रहता है या अपने आस-पास किसी का आभास अनुभव करे तो न आश्‍चर्य-चकित हो न भयभीत। इस घटना की चर्चा तो भूल कर भी किसी से न करें।

 

साधना की पूर्णता के पश्‍चात् समस्त साधना सामग्री को जल में विसर्जित कर दें।

 

साधना सामग्री – 475/-
Friendly Form

Kapila Yogini

Assimilating the entire sets of Tantrik scriptures within self, Kapila Yogini grants such highly intense energy, strength and enthusiasm, which is possible only through Tantra …

Red colour is very significant in the Kapila Yogini Sadhana. Therefore the Sadhak should wear as much red colour garments as possible …


 

Many strange, romantic tales are prevalent in the society about the Goddesses and Yoginis who are the foundation of Tantrik Sadhanas. However the Yoginis are fully conscious gentle forms, imbibed with the intensity of Sadhanas and the energy of Tantra in their entire being. This is the basis of each Tantrik Sadhana, the Yoginis assist the Sadhaks by becoming their partners and friends… the Yoginis are full of sweetness and love.

The real nature of Yogini is the combination of stunning beauty and divine aura. The golden halo on their perfect beautiful body gives the illusion of a golden statue. The sharp intensity of their Tantrik powers is revealed only through their quiet sharp eyes covered within a black aura … the piercing gaze, strengthened by the Sadhanas – an embodiment masterpiece of Lord Shiva, which is not for consumption or lust; and therefore any Sadhak who thinks any envious, evil or erotic thoughts about them during Sadhana, fails in the Sadhana, even perishes during the Sadhana … and this added to the stock of gruesome stories, creations of distorted mindsets, fabricated  sensational memoirs …

“Large-framed body, with a fierce shape, having black complexion – a hulking giant on whose chest the breasts look as beautiful as elephant-calves, whose facial expression is extremely sanguine and eyes invoke fears, adorned with blood-coloured garments, I pray to such fierce Yogini Maateshwari mothers.”

“Fierce with anger, holding a spear in one hand and a sword in the other, using her remaining two hands to mix-merge the blood from the corpse of enemy into her garments!, oh mother Goddess please help me in life …”

The Yoginis are described in various different forms to the Sadhaks, and this is their motherhood form. There is a description of a lover form as well, but it is beyond the capability of a general Sadhak, because it does not have any space for even an iota of lust.

The most gentle form of the Yogini is her friendly form, and a Sadhak aspirant elevates his life after accomplishing Yogini as a friend, a friend who is ever enthusiastic to grant all types of pleasures to the Sadhak in his life, whether he wishes for them or not. Fulfilment of wishes, or opening the stock of wealth-treasures, marriage as per wishes or loving union with a lover … nothing remains secret from a Yogini. She grants her affection and guidance at every step, ever-protective, and warning before any conspiracy or deception …

Assimilating the entire system of Tantra scriptures within self, Kapila Yogini fills within her Sadhak, such an intensity, energy and enthusiasm, which is possible only through Tantra… Youth like the flash of lightening, or eyes bubbling with love, which shows the onset of youth, or puffed up chest, this Yogini grants all the attributes of youth to the Sadhak, so that his youth permeates all around everywhere …

 

Shiva Kalpa (January 28, 2017 to March 12, 2017) is the perfect opportunity  to humbly invite such a boon-granting friend Kapila Yogini into your life, because the Yogini is always seeking for a true Sadhak, where she gets pure affection and an opportunity to manifest her powers. She wishes to grant all the pleasures of life, luxuries and joy. Unlike other Gods-Goddesses, Kapila grants Her impact by granting an intense energy, which fills the Sadhak with vitality and power. Such  opportunities do not come again in life. Sadhana is not a commodity in life which you can go and purchase from the market by spending some money, similarly you cannot purchase intensity, strength, beauty or charm with money. One needs to take the basis of such boon-bestowing Sadhanas, and those who miss, have to wait for a very long time.

The practice of Yogini Sadhana means to destroy all the misfortunes, which you are either currently saddled with, or which are waiting to arrive. The Yogini Sadhana completely resolves the problems of loans, theft, fear, accidents, secret-conspiracies, or little disputes poisoning the life.

This is just a single day Sadhana practice, but it is not full of miracles or sensations which bizarre tales and descriptions make you believe. This is a gentle Sadhana, which ought to be performed with full joy and intimacy. The Sadhak starts receiving the benefits of the Sadhana from the next day onwards, and if the Sadhak continues the Sadhana with full discipline, then he certainly gets an opportunity to meet the Yogini.

This is a night time Sadhana, which can be accomplished on any Friday night. The rule is to perform this Sadhana at a lonely quiet place under the shade of a tree, however you can meditate by either setting-up a tree-branch on wet-mud in your worship-place or by keeping any house-plant in the worship-place near you.

 

Sadhana Procedure

The red colour is very significant in Kapila Yogini Sadhana. Therefore the Sadhak-Sadhika should adorn red colour clothes. The men Sadhaks can wear red coloured dhoti and the women Sadhikas can wear red coloured sari for this Sadhana. At night, sit facing south direction on a red asana-mat, and spread red cloth on a wooden board in front of you.

First perform Guru poojan to obtain success in the Sadhana of Kapila Yogini who is a special Shakti form of Lord Shiva. Perform Guru-worship by setting up Guru-picture, Paduka, Guru Yantra along with Shiva-picture. First meditate on the divine form of Gurudev Nikhil to pray for success in the Sadhana-

GururBrahmaa GururVishnuH Gururdevo MaheshwaraH |

GuruH Saakshaat Par Brahmaa Tasmei Shree Guruve NamaH ||

 

Bathe the Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka with water after Nikhil meditation –

Om Nikhilam Snaanam Samarpayaami ||

 

Then wipe with a clean cloth. Perform Panchopchaar worship-poojan with Kumkum (Vermilion), Akshat (Unbroken rice), Pushpa (Flowers), Neivedh (Sweets/Fruit offering), Dhoop (Incense) – Deep (Lamp); chanting following mantras –

Om Nikhilam Kumkum Samarpayaami |

Om Nikhilam Akshtaan Samarpayaami ||

Om Nikhilam Pushpam Samarpayaami ||

Om Nikhilam Neivedhyam Nivedayaami ||

Om Nikhilam Dhoopam Aardhyaapayaami, Deepam Darshayaami ||

(Show Dhoop, Deep)

 

Now rotate three Achmaani (spoonful) water around the  Guru Picture / Statue/ Yantra / Paduka and drop it on ground. Then chant 1 rosary-round of Guru Mantra with Guru Mala –

Om Param Tatvaaya Naaraayanaaya Gurubhayo Namah

 

After completing Guru poojan, set up “Yogini Yantra” on a copper plate on the wooden board, and worship it with Kumkum, Akshat and Sindur. Light an oil lamp.

Also worship the plant or the tree-branch which you have used for your worship. Light a ghee lamp and offer kumkum, Akshat and sindur.

After worship, chanting the following mantra 16 times, offer red flowers on the Yantra –

|| Om Siddh Yogini Shakti Roopaayayei NamaH ||

 

Thereafter offer “Das Yogini Kritvaaha” on the Yantra chanting the above mantra and pray to Kapila Yogini to protect you on all ten sides with Her entire Shakti powers. Offer a large fruit as a sacrifice. Fill the environment with fragrance of either incense or lobaan. Then chant 11 mala (rosary-rounds)  of following Mantra with “Raktvarniya Mala“. Focus your gaze on the flame of the lamp during the mantra chanting.

 

Mantra

|| Om Shreem Kleem Kreem Kapilaa Yoginyei Hum Phat ||

 

This is a single day Sadhana. However, depending on his wish, the Sadhak can continue the Sadhana for further days. The Sadhak should neither get surprised nor get afraid, if he senses presence of anyone besides him at all times; from the next day onwards. He should never discuss this topic with anyone, not even by mistake.

After accomplishing the Sadhana, immerse the entire Sadhana materials in a running stream of water.

 

Sadhana Materials – 475/-

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