Kailash Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा
सद्गुरुदेव के साथ
मई-जून 2017 में

 

कैलाश मानसरोवर वह पवित्र स्थान हैं, जिसे भगवान शिव का निवास स्थान कहा जाता है। यह पर्वत स्वयं भू है और सृष्टि के उद्भव के समय से ही इसका प्रमाण है। इस स्थान पर प्रकाश तंरगो और ध्वनि तंरगो का समागम होने से —ॐ की ध्वनि हमेशा निकलती रहती है। इस पर्वत के केन्द्र में कल्पवृक्ष लगा हुआ है, जिस कारण यहां जिस मनोकामना की पूर्ति के लिये ध्यान मंत्र जप किया जाये वह अवश्य पूर्ण होती है।

 

कैलाश पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, पूर्वी भाग को क्रिस्टल, पश्‍चिम को रुबी तथा उत्तर को स्वर्ण रुप में माना जाता है, हमारे पुराणों में इस स्थान को कुबेर की नगरी भी कहा जाता है। इसी स्थान से गंगा महाविष्णु के कर कमलों से निकलकर कैलाश पर्वत की चोटी पर गिरती है, जहां सदाशिव उसे अपनी जटाओं में भरकर धरती पर धारा के रुप में प्रवाहित करते है। कैलाश पर्वत पर स्थित मानसरोवर झील में स्नान करना अपने आप में भाग्योदय है उस झील में स्नान करने से जन्म जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है।

 

सद्गुरुदेव ने अपने प्रवचनों में अनेक बार इस झील का वर्णन किया है। सद्गुरुदेव ने कहा कि – ‘‘मैं तुम्हें उस मानसरोवर पर ले जाना चाहता हूं लेकिन तुम पोखरों में स्नान करके अपने आपको धन्य मानने लगे, किंतु जान लो कि वह अनिर्वचनीय तृप्ति तुम्हें तभी मिल सकेगी जब तुम मानसरोवर का स्पर्श कर लोगे। तुम्हारे सामने अथाह मानसरोवर झील फैली हुई है, जो कि स्वच्छ है, निर्मल है, पवित्र है, जिसमें डुबकी लगाना ही तुम्हारे जीवन का अहोभाग्य है। उस झील के मध्य में खड़ा होकर मैं तुम्हें आवाज दे रहा हूं’’

 

इस झील में स्नान करना अपने आप में दिव्य है, इस स्थान को ही सिद्धाश्रम का द्वार कहा जाता है। कैलाश मानसरोवर के उत्तर दिशा की और 33 योजन पर सिद्धाश्रम स्थापित है। इस स्थान पर बैठकर मंत्र जप साधना दीक्षा लेना अलौकिक है।

 

इसीलिये शिष्य कई वर्षों से गुरुदेव के चरणों में निवेदन कर रहे थे कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा गुरुदेव के साथ सम्पन्न की जाये और गुरुदेव ने शिष्यों की भावना और उनके मन के भावों को पढ़ते हुये वर्ष 2017 में इस यात्रा की स्वीकृति दी है।

 

इतने पवित्र स्थान पर सद्गुरुदेव के संग जो साधक यात्रा और साधना सम्पन्न करेंगे। उनके भाग्य का तो वर्णन ही नहीं किया जा सकता, गुरु पूर्णिमा शिविर, हरिद्वार में जब से गुरुदेव ने घोषणा की तब से पूरे भारत वर्ष के शिष्यों के फोन यात्रा के लिये आ रहे है। इस यात्रा के लिये चीन से वीजा लेना पड़ता है। जिसके लिये अनेक कागजी कार्यवाही सम्पन्न करनी पड़ती है।

 

1. सर्वप्रथम जो साधक यात्रा में भाग लेना चाहते है। अपना पासपोर्ट की कॉपी मेल कर दे, जिन साधकों का पासपोर्ट नहीं बना वह अपने क्षेत्र के पासपोर्ट कार्यालय में अभी से आवेदन कर दे, क्योंकि इस कार्यवाही में दो माह का समय लगता है।

 

2. अपने-अपने क्षेत्र में संगठन की मिटिंग कर साधकों को जानकारी दे दे।

 

विस्तृत जानकारी के लिये मनोज भारद्वाज, दिल्ली कार्यालय (09891051707, 011-27029044) सम्पर्क करे।
Kailash Mansarovar Yatra

With SadGurudev

May-June 2017

 

The holy Kailash Mansarovar is called as the abode of Lord Shiva. The mountain originated by itself and there is proof of its presence since the emergence of creation. The combination of light waves and sound waves at this spot causes ever-present Om vibrations. The holy Kalpvriksha is planted at the centre of this mountain, and therefore, any meditation Mantra chanting performed here for any specific wish definitely gets fulfilled.

The Southern part of Mount Kailash is called as Amethyst, the Eastern part is called as Crystal, the Western as Ruby and the Eastern as Gold. Our scripture Puraanas also call it as the city of Lord Kubera. At this spot, the holy Ganga falls on the peak of Kailash mountain after leaving the lotus-hands of Lord Vishnu and Lord Shiva fills Her in His locks to flow the stream to earth. It is indeed good fortune to get an opportunity to bathe in the Mansarovar lake on Kailash mountain, as it grants liberation from multiple sins of past lives.

SadGurudev has described this lake several times in his discourses. SadGurudev stated that – “ I wish to take you to that Mansarovar lake, but you believe yourself fortunate by bathing in ordinary ponds due to your ignorance. You will obtain inexpressible satiation only after touching the Mansarovar. The immeasurable Mansarovar lake lies in front of you, which is clean, pure and holy. A dip in this lake is most fortunate moment of your life. I am inviting you while standing in the middle of this lake.

It is a divine experience to bathe in the lake itself, this place is called the gateway to the Siddhashram. Siddhashram is located at 33 Yojans North of Kailash Mansarovar. Mantra Chanting Sadhana Diksha here is a supernatural experience.

Therefore, the disciples had been requesting SadGurudev for a journey to Kailash Mansarovar along with SadGurudev. Gurudev has acknowledged the feelings of the disciples and has granted permission for this journey in 2017.

It is not possible to express the fortune of those who will accompany SadGurudev in this journey and Sadhana. We have been receiving many phone-calls from all across India since Gurudev’s announcement during Guru Poornima Shivir at Haridwar. One requires visa from China for this journey, and this entails some formal paperwork.

  1. Those Sadhaks willing to participate in this journey, should email a copy of their passport. Please apply for passport at your regional passport office if you do not have a passport. It takes 2 months to get a new passport.
  2. Organize meetings in your own areas and provide us information about the Sadhaks.

Please contact Manoj Bhardwaj at Delhi office (09891051707, 011-27029044) for detailed information.

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