Gurudevs Message – Nov 14

अपनों से अपनी बात…
प्रिय आत्मन्,
शुभाशीर्वाद,
इस बात की मुझे प्रसन्नता है कि आप सबने मेरी आज्ञा का पालन करते हुए इस बार पूर्ण विधि-विधान सहित शक्तिपर्व नवरात्रि और लक्ष्मी पर्व दीपावली को सम्पन्न किया। इस बार आपने दीपावली पर्व को वास्तविक रूप से साधनात्मक पर्व के रूप में सम्पन्न किया है। निखिल मंत्र विज्ञान परिवार के कार्यकर्ता बनकर आप जिस प्रकार कार्य कर रहे हैं, उस पर मुझे गर्व है। साधना के पर्व के माध्यम से आपका और मेरा जो सम्पर्क होता है वही मेरे लिये सबसे बड़ी धरोहर है।

 

मैं इन सम्बन्धों को और भी अधिक गहरा करना चाहता हूं, इसलिये मुझे पग-पग पर आपकी आवश्यकता है। मैं अपने सामने एक ऐसे विराट् भारत को देखना चाहता हूं जहां पुनः साधना, मंत्र और उत्सव अपनी श्रेष्ठ भाव भूमि में स्थापित हों। कहा जाता है कि सपने वे नहीं होते सोते समय दिखते हो बल्कि सपने वे होते हैं जो इंसान को सोने नहीं दें और मैं इसी भाव के साथ जाग्रत सपने देखता हूं। हमारी सफलता प्रगति की कहानी सपनों से ही प्रारम्भ होती है। हम अपने जीवन में नये-नये प्रयोग करते रहेंगे। कई बार सफलताएं आएंगी, कई बार असफलताएं आएंगी लेकिन हमारे लिये एक दिशा निर्धारित होती चली जायेगी इसके लिये सबसे बड़ी आवश्यकता अथक परिश्रम और लक्ष्य में अडिग आस्था है।

 

आप सभी यही सपने देखते हैं कि आपका परिवार समृद्ध हो, घर में कोई अभाव न हो, सबको अच्छा वातावरण मिले, प्रगति का भरपूर अवसर मिले और साथ ही रोग, दुःख, शोक, पीड़ा न आये। हर व्यक्ति अपने जीवन में इन्हीं सपनों को साकार करने की कोशिश करता रहता है।

 

इसके लिये कार्य में लगन और इच्छा शक्ति की आवश्यकता है इन दोनों के साथ जब आपका और मेरा मिलन है तथा ईश्‍वर और देवताओं का आशीर्वाद है तो हमारा स्वप्न एक दिन अवश्य ही हकीकत बनेगा।

 

एक दार्शनिक ने कहा है कि – मनुष्य के हजारों वर्ष के इतिहास को एक लाईन में बांधा जा सकता है, ‘मनुष्य ने सोचा, इच्छा की, इरादा किया और फिर वह पीठ के बल पर सीधा खड़ा हो गया और चलता ही रहा।’ यही विचार हमारे जीवन में स्थापित होना चाहिए। सफलता के लिये विचार, इच्छा, संकल्प और कार्य क्षमता में पूरी तरह से तालमेल बिठाना है। सबसे पहले विचार कीजिये, अपने विचार को इच्छा की ऊर्जा दीजिये, अपनी इच्छा की ऊर्जा को संकल्प रूपी इस्पात के सांचे में डालकर। अपने इस इस्पात रूपी संकल्प को कर्म के द्वारा वह स्वरूप दीजिये जो आप देना चाहते है।

 

लेकिन इसके लिये सबसे पहले आवश्यक है कि आप जीवन्त जाग्रत व्यक्तित्व बनकर स्वप्न देखिए, नींद में नहीं, जागते हुए।
अब तक क्या हो रहा है, छोटे-छोटे सुख, छोटे-छोटे दुःख आपके जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। जो कुछ आप अपने चारों ओर देख रहे हैं तो उसे अनुभव कर तत्काल निर्णय ले लेते हैं। आप भी जानते हैं कि किसी भी पहाड़ की चढ़ाई में सीधी चढ़ाई नहीं होती, चाहे ऐवरेस्ट पर पहुंचना हो, चढ़ाई, उतराई, चढ़ाई का यह क्रम चलता ही रहता है। इसी तरह जीवन में आने वाले छोटे-छोटे दुःखों परेशानियों से, छोटे-छोटे सुखों से प्रभावित मत होईये। जो आपका लक्ष्य है, उसे निरन्तर याद रखिये और उस लक्ष्य से कभी डिगना नहीं है।

 

मैं आज फिर आपसे कहता हूं कि आपको खुशियां देने कोई बाहर का व्यक्ति नहीं आयेगा, हर जगह ईर्ष्या, द्वेष का बोल-बाला है। हर कोई आपको अपने अनुसार चलाना चाहता है, उन सब के बीच में आज आपको विचार करना है कि – ‘मैं किस तरह चलना चाहता हूं, दुनिया की खुशी से अधिक यह महत्वपूर्ण है कि मैं खुश रहूं। दुनिया मुझे सांत्वना दे अथवा प्रसन्नता दे, उससे अधिक आवश्यकता इस बात की है कि मैं स्वयं अपने आपको आत्मिक प्रशंसा प्रदान कर सकूं। यदि आज आप अपने-आप में ही खुश नहीं हैं तो क्या आप अपने जीवन में आने वाले समय में खुश रह सकते हैं अथवा आगे आपको खुशी, शांति, संतोष प्राप्त हो सकता है? इस महत्वपूर्ण प्रश्‍न पर निरन्तर विचार करते रहिए।
हर महान् कार्य की शुरुआत अच्छे विचार से प्रारम्भ होती है, आपका विचार आपके मन को उत्साहित करता है और जब मन में उत्साह हो तो प्रत्येक कार्य में हमें आनन्द आता ही है। कई लोग मुझसे मिलने आते हैं और बड़े ही जोश के साथ कहते हैं कि मैं अपने जीवन को आपके लिये न्यौछावर करना चाहता हूं, उत्सर्ग करना चाहता हूं। मैं कहता हूं कि तुम्हारे न्यौछावर का सार्थक भाव यही होगा जब तुम स्वयं दीपक बनो। जिस प्रकार एक दीपक धीरे-धीरे जलता है और हजारों दीपकों को प्रकाश दे सकता है उसी प्रकार तुम्हें अपने जीवन में प्रकाशित होना है। अपने जीवन प्रकाश को इस समाज की बलिवेदी पर बलिदान नहीं कर देना है। अपने जीवन प्रकाश को बुझने नहीं देना है। अपने जीवन के आनन्द पर निराशा, हताशा, उदासी की लहरें नहीं आने देनी हैं। सीधी-सरल बात है कि –
‘पूर्णमदः पूर्ण मिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते’…

 

आप पूर्णत्व से उत्पन्न हुए हैं, पूर्ण जीवन जीना है और पूर्णता में ही विलीन होना है। यही इस जीवन की सुन्दरता है। जो भी आपकी मान्यताएं हैं, घिसी-पिटी धारणाएं हैं, उन पर समय की मांग अनुसार नये रूप से सोचिए। हर समय मुक्ति का विचार कीजिये। मैं आपको आपके किसी भी उत्तरदायित्व से भागने का नहीं कह रहा हूं। आपको अपनी जिम्मेदारियां निभानी हैं लेकिन उससे भी ज्यादा आवश्यक यह है कि आपको अपनी प्रत्येक जिम्मेदारी में बोझ का अनुभव नहीं अपितु आनन्द का अनुभव होना चाहिए।

 

नववर्ष की पूर्व संध्या पर 27-28 दिसम्बर को मैं आपको आरोग्यधाम दिल्ली में आमंत्रित कर रहा हूं, इस बार हम विराट अश्‍वमेघ क्रिया सम्पन्न करेंगे और एक नया अध्याय अपने जीवन में लिखेंगे, संकल्पों से युक्त हमारा जीवन होगा। इसकी शुरुआत तो सद्गुरुदेव ने बहुत पहले कर दी थी, अब उन विचारों को मूर्त रूप में प्रवर्तित करने का समय आया है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर आपकी अनुपस्थिति के लिये किसी भी बहाने को मैं स्वीकार नहीं करूंगा। मेरा आदेश है कि आपको आना ही है।
मुझे मालूम है कि आपके जीवन में बहुत जिम्मेदारियां हैं बहुत व्यस्तताएं हैं लेकिन इससे भी ज्यादा आवश्यक है कि आपका मेरे से निरन्तर सम्पर्क में रहना। आप नित्य प्रति निखिल मंत्र विज्ञान को पढ़ सकें इस हेतु आपके सहयोगी कार्यकर्त्ताओं ने ही हमारी वेब साईट का नये तरीके से निर्माण किया है। अब अपनी इस वेब साईट www.nikhilmantravigyan.org में पत्रिका सम्बन्धित सभी जानकारियां उपलब्ध हैं। प्रमुख लेख, आप देख सकते हैं मेरे प्रत्येक कार्यक्रम की नवीनतम जानकारी भी इस वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी।

 

मैं कई बार आपको पत्र लिखने का कहता हूं लेकिन फिर आप आलस कर जाते हैं तो अब आप मुझे nmv.guruji@gmail.com पत्र लिख सकते हैं। आपके लिखे प्रत्येक पत्र को मैं स्वयं व्यक्तिगत रूप से देखूंगा और समय पर उत्तर देने का प्रयास करूंगा

 

मेरे पास आपका पूर्ण बायोडेटा, जानकारी अवश्य रहनी चाहिए। इस हेतु इसी अंक में एक साधक परिचय पत्र छाप रहा हूं, इसे पूरा भरकर अपना एक सुन्दर सा फोटो लगाकर मेरे पास अवश्य भेज दें। मैं तो चाहता हूं कि मैं अपने प्रत्येक शिष्य का नाम, पता और उसके परिवार के सदस्यों के नाम अपने मस्तिष्क में जमा दूं। जिस प्रकार आपके होंठों पर मेरा नाम है, उसी प्रकार मेरे होंठों पर भी आपका नाम रहे।
अरे! मैं और आप अलग-अलग थोड़े ही हैं, गुरु हैं तो शिष्य हैं और शिष्य हैं तो गुरु हैं। एक दूसरे का हाथ पकड़कर श्रेष्ठ विचार के साथ, श्रेष्ठ इच्छा के साथ, श्रेष्ठ ऊर्जा के साथ, श्रेष्ठ संकल्प के साथ हम चलते रहें… चलते रहें… चलते रहें…
सदैव खुश रहो।

 

सस्नेह आपका अपना
नन्दकिशोर श्रीमाली
Speak with loved ones …

Dear Loved ones,

Divine Blessings

I am glad to note that you completely accomplished Shakti-parv Navraatri and Lakshmi-parv Deepavali Poojan properly with full rites and rituals, as per my instructions. You have realistically celebrated Deepavali-parv through Sadhanas. I am proud of your accomplishments as a member of Nikhil Mantra Vigyan family. Our mutual interactions through Sadhanas is my greatest asset.

I wish to deepen this relationship and, therefore, I require your assistance at every step. I have a vision of a Great Spiritual India, with a strong foundation of Sadhanas, Mantras and Joy. It is said that real dreams are not what you experience in sleep, rather the real dreams are those, which do not let you sleep. And I envision alive and powerful dreams with this thought. The story of our success starts with dreams. We will continue to conduct new experiments in our life. Sometimes we will achieve success and sometimes we will taste failure. These experiences will set up a direction for our life and we will require tireless efforts and complete trust in our goals.

All of you wish for a rich and prosperous family, without any scarcity at home, a comfortable environment and multiple opportunities for progress without any illness, sorrow, grief or pain. Every person continuously tries to fulfill these wishes.

Achieving this will requires sincerity in actions and strong determination. The combination of these two along with our Guru-disciple partnership and divine blessings of Gods will surely turn our dream into reality.

A Philosopher has once said – Thousands of years of human history can be condensed in a single line – “Man thought, desired, decided, stood up and started walking…” We should engrain this thought in our life. Success requires a proper balance of Thought, Desire, Determination and Action. First contemplate thoughts, energize them with wishes, cast this energy of wishes into a robust frame of willpower and then translate this into desired results through your actions and efforts.

But to achieve this, you need to see dreams though a strong and energetic personality, while awake, and not during sleeping.

What is happening now – small occasions of pleasures and sorrows are influencing your life. You take decisions immediately on the basis of what you perceive and experience around you. You also know that a mountain climb is never just ascent. Climbing Everest requires multiple repetitions of ascent and descent on slopes. Similarly, do not get undue influenced by tiny obstacles, sorrows and pleasures. Always remember your goal and do not dither from your goal.

I convey to you again that any other person is not going to come to grant you happiness. This world is full of jealousy and hatred. Everyone wants you to live life as per their directions. You yourself have to decide – how do I live? My happiness in much more important than the society’s happiness. Society can console or cheer me… However, it is much better that I provide happiness to my own soul. If you are not happy today, then will you be able to become happy in future days, or will you be able to obtain happiness, peace and contentment in future. You should always keep pondering on this important thought.

 

Every great task starts with a good thought. Your thought invigorates your mind and when mind is full of passion, then we get joy from our every action. Many people meet me and enthusiastically state that they wish to dedicate their life to me, for elevation. I advise them that your dedication will become realistic only when you become a lamp-light. You have to live life like a lamp-light, as it slowly burns itself and distributes light to thousands of other lamp-lights. Do not sacrifice your life light to whims of this society. Do not let your life light extinguish. Do not pollute your joyful life with sadness, anxiety and desperation. Simply stated –

“Poornmadah Poorna Midam Poornaat Poornamuchayete…’

You have sprung up from totality, will live a full life and will merge into totality. This is the beauty of this life. Whatever be your beliefs and dogmas, think anew about them, as per changing times. Contemplate about freedom at all times. I am not telling you to run away from your responsibilities. You have to shoulder all your responsibilities, but it is important that you feel joy and not burden whilst performing these duties.

I am inviting you to Arogyadham, Delhi on 27-28 December before the New Year. We will perform Grand Ashwamedh Kriya and will write a new chapter in our life full on resolves. SadGurudev had initiated this process much earlier, we have to now translate those thoughts into actions. I will not accept any excuse for your absence. I order you to come.

I know that you have many responsibilities in your life, and are busy with many demanding duties, but it is important for us to stay in touch. Your associate volunteers have redesigned our website so that you can regularly read Nikhil Mantra Vigyan. Our website (www.nikhilmantravigyan.org) contains entire information about our magazine. You can read important articles and obtain details about forthcoming programs.

I advise you to write letters many times, but you have become lazy. You can send me emails on nmv.guruji@gmail.com. I will personally read all emails and will try to respond in a timely manner.

I should have your complete bio data information. I am printing a Sadhak Parichay in this issue. Please fill it up and send it to me along with a nice photograph of yours. I wish to ingrain the name, address and family of each disciple in my mind. Your name should be on my lips like my name is on yours.

Eh! You and I are not separate. Guru and disciple exist due to each other. Let us continue to walk hand–in-hand, with excellent thoughts, wonderful wishes, enthralling energy and devoted determination. Continue on your path. Continue on your path. Continue on your path….

Always stay happy

Cordially yours

NandKishore Shrimali

You can download the Parichay Patra and fill in your details along with your latest photograph.
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