Dialog with Loved ones – Jan 2019

अपनों से अपनी बात…

प्रिय आत्मन्,
आशीर्वाद,
आ गया नया साल, सुहावना है मौसम, हल्की-हल्की ठण्ड में अपने ही मन की गर्माहट का अहसास है।

 

क्या खोया, क्या पाया, बहुत विचार कर लिया…
चलना है आगे, पानी हैं खुशियां
कुछ मिला-कुछ खो गया.. 
क्यों गम का बोझ उठाए हम घूमें.. हम तो सदा देखेंगे आगे..
अपने हाथों से बनाएंगे अपना जहां…

 

कुछ निश्‍चय, कुछ संकल्प, कुछ अरमान, कुछ सपने देखने का नाम ही हमारी जिन्दगी है और हम इसी निश्‍चय के साथ एक दूसरे का हाथ थामे, एक दूसरे को मुस्कुराहट प्रदान करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। कौन रोक सका है किसी को, जब सीने में आग हो, पैरों में गति हो और मन में निश्‍चय हो।

 

उदासी की तो कोई बात ही नहीं है। उदास तो जर्जर मन को, बूढ़े मन को कहते हैं जो हर समय एक शिकायत के भाव से ग्रस्त रहता है। जो मिला उसकी कद्र नहीं करता और हर समय एक मृग मरीचिका में भटकता ही रहता है।

 

हमें तो जिन्दगी ने बहुत कुछ दिया है, बहुत कुछ आगे भी मिलेगा। आशा हमारा संबल है, निश्‍चय हमारी शक्ति है, संकल्प हमारा आयुध है। शरीर हमारा माध्यम है तो फिर किस बात की निराशा। जीवन की इस राह में जो पाया उसको याद करें या जो खो गया उसे याद करें। देखो जो हमारा है, वो हमें प्राप्त होकर के रहेगा और जो हमारा नहीं है वह नहीं मिलेगा। तो उस बात की चिन्ता क्यों की जाए?

 

अच्छा मुझे बताओ तुम कब अपने आप पर मुस्कुराए थे, कब तुम अपने आप से खुश हुए थे और तुम खुशियों के बारे में क्यों कोई विचार, कोई मुकाम बनाते हो? बस खुशी के बारे में ही विचार करें। यह तो मन की एक स्थिति है। बस हमें तो खुश रहना है और जब हम खुश रहेंगे तो दुनिया क्या सोचती है, उसकी हम चिन्ता क्यों करें। बस हमें तो खुश रहना है, खुश रहना है।

 

चलो कोई निशा ढूंढ़ते हैं
दिल का बहता हुआ कारवां ढूंढ़ते हैं
मुद्दत हो गयी है मुस्कुराए हुए
चलो खुशी का कोई जहां ढूंढ़ते हैं

 

बहुत छोटी समस्या है तुम्हारी, तुम खुशी दूसरों में ढूंढ़ रहे हो। तुम्हारे पड़ोसी, सहकर्मी, रिश्तेदार तुम्हारी खुशियों का माप-दण्ड तय कर रहे हैं। अरे! उन्हें क्या अधिकार कि वे तुम्हारी खुशियों का माप-दण्ड तय करें। तुम्हारी खुशी है, तुम्हारा मन है, जिसका निर्णय तुम ही तो लोगे। क्या कोई दूसरा आकर के कहेगा, अरे! भाई तुम्हें यह चीज मिल गई, मैंने तुमसे बात कर ली, अब तुम खुश हो जाओ। तुम खुशियों को मील का पत्थर क्यों बनाते हो। बहुत छोटी-छोटी बातों में भी खुशियां हैं। ये जिन्दगी छोटे-छोटे पलों से जुड़कर ही तो बनी है। तुम खुशियों की प्रतीक्षा करते हो, प्रतीक्षा क्यों करें? हमारे रोज के जीवन में खुशियों के हजारों पल हैं। उन पलों का आनन्द लो, आज का काम आज कर लिया। आज परिवार के साथ बैठ गये, आज देव पूजन कर लिया। आज गुरु का ध्यान कर लिया। आज व्रत कर लिया, आज चाव से भोजन कर लिया। हर पल में खुशी है।

 

तुम सोचते हो कि – जवानी में ही खुशी है, तुम सोचते हो कि बस 18-30 साल का ही व्यक्ति खुश है। तुम हर पल युवा हो। तुम्हारा हर एक पल जिन्दगी का नया पल है, कोई पुराना पल लौटकर वापिस नहीं आता, नया तरोताजा स्वस्थ पल हरा-भरा बसन्ती पर्व तुम्हारी जिन्दगी में हर समय आ रहा है। फिर क्यों अपनी खुशियों को, निराशाओं की गर्त में डाल देते हो। आज सोचो कि तुम निराशावादी बनना चाहते हो या आशावादी। तुम यदि आशावादी बन गए तो तुम्हारी हजार बाधाएं तो एक क्षण में दूर हो जाएगी, क्योंकि खुशियों की चाबी तुम्हारे पास है और यदि तुम हर बात में मीन-मेख ही निकालते रहे तो यदि ईश्‍वर भी तुम्हें हजार वरदान दे दें तो भी तुम उन पर निराशाओं का काला आवरण डाल दोगे।

 

मैं बताता हूं, तुम्हारी खुशियों की चाबी कहां है – बस तीन बातें तुम्हारे पास हैं। उनका ध्यान रखो -1. स्वास्थ्य, 3. परिवार में प्रेम और 3. अपने कार्य के प्रति समर्पण। बस तुम्हारी खुशियों का भण्डार खुल जाएगा। मुझे शिकायत है कि तुम बिना बात के अपनी जिन्दगी में दौड़ते बहुत हो। जीवन में चलना है, अपनी ताकत से दौड़ना है पर ये दौड़ना, खुशी प्राप्त करने के लिये होना चाहिए, न कि किसी और के लिये।

 

यह तुम्हारी प्रसन्नता का सागर, तुम्हारे भीतर ही निहित है। तुम तो साधक हो, निरन्तर साधना करते हो, तुम्हें गुरु का सान्निध्य मिलता है। मैं तो तुम्हारे भीतर बालपन देखना चाहता हूं। तुम एक बालक बन जाओ, प्रेम करो अपने आप से, परिवार से, अपने कार्य से कि तुम्हें हर पल आनन्द आए। छोड़ो चिन्ताओं की बातों को। बहुत बातें कर ली, तुम अपने मन में बिठा लो गुरु की शक्ति को। तुम किन्हीं परिस्थितियों पर निर्भर मत बनो। अपने जीवन में आने वाले हर पल को ताजा पल मानकर अपना कार्य करते रहो।

 

आ गया है, नया साल तो कुछ अपने लिये नया करो। कुछ अपनी उपलब्धियों का लेखा-जोखा लो। कोई और तो तुम्हें बताने नहीं आएगा, तुम खुद ही अपने आप में बेहतर कर सकते हो। एक बात मैं अपनी ओर से कहूंगा कि – अपनी गलतियों से निराश मत होना। नया सीखने में गलतियां तो होती ही हैं, हमेशा खुश रहना एक नया अहसास, नया अनुभव है। यही विद्या तुम अपना लो, गुरु तुम्हें खुश रहने की विद्या दे रहे हैं। तुम खुश रहोगे तो तुम्हारे मन में उदासी नहीं आएगी।
केवल सोचना मत, अमल में भी लाना, केवल संकल्प मत लेना, उस पर चलना भी। निश्‍चय कर लिया है तो उस निश्‍चित पथ पर ही चलना। अपने भीतर जो आशा का अमृत है उस आशा के अमृत कलश को सदैव जाग्रत रखना। यह तुम्हारे लिये –

 

आए आप सब जिन्दगी में कि खुशी मिल गई
मुश्किल राहों पर चलने की वजह मिल गई
हर एक लम्हा पुनः खुशनुमा बन गया
मेरी उम्मीदों को नई मंजिल मिल गई।
सदैव खुश रहो।
नन्द किशोर श्रीमाली
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