Dialog with Loved ones – August 2018

 

अपनों से अपनी बात…

प्रिय आत्मन्,
आशीर्वाद,

 

मैं तो सदैव अपने मन की बात आपसे खुलकर करता हूं। जब आपका मेरे प्रति अपार प्रेम देखता हूं तो अभिभूत हो जाता हूं। आपका प्रेम एक अभिव्यक्ति है, आपके और मेरे बीच एक अटूट विश्‍वास है और आपका यह विश्‍वास, आपका यह प्रेम ही मेरे जीवन की सबसे बड़ी धरोहर है। आत्मीय हैं आप और मैं, आपके विश्‍वास पुञ्ज की मशाल लिये आपका हाथ थामकर मैं निरन्तर गतिशील हूं। मेरा मान, मेरा अभिमान मेरी पूंजी बहुत विशाल है, क्योंकि यह सब आपका अटूट विश्‍वास है। आप मुझमें है और मैं आपमें।

 

धन-सम्पत्ति, जगत् प्रशंसा, ख्याति, सम्मान सबसे बड़ी पूंजी नहीं हैं। ये सब अक्षय ऊर्जा के स्रोत नहीं हैं। हमारी सबसे बड़ी पूंजी विश्‍वास है, विश्‍वास है तो सबकुछ हमारे पास हैं।

 

कई बार तुम विश्‍वास से हिले-हिले, टूटे-टूटे, निराश-हताश आते हो और कहते हो, गुरुदेव मेरा विश्‍वास टूट गया है। किसी पर विश्‍वास नहीं रहा। मैं क्या करूं? मैं टूट चुका हूं।

 

तुम इतने दिशाहीन दिग्भ्रमित क्यों हो जाते हो?

 

तुम्हारा विश्‍वास किससे उठ गया है? क्या दूसरों ने तुम्हारा विश्‍वास तोड़ा है या तुम्हें अपने आप पर विश्‍वास नहीं रहा? दूसरों का विश्‍वास टूट सकता है लेकिन तुम्हारा अपने स्वयं पर विश्‍वास, जिसे आत्मविश्‍वास कहते हैं उसे तुम खण्डित मत होने दो। तुम थक गये हो लेकिन थकान को हार मत समझो। गुरु तुम्हारे साथ हैं, इष्ट तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारे गुरु तुम्हारे भीतर स्थापित हैं। तुम्हारे इष्ट तुम्हारे भीतर स्थापित हैं, वे ही तुम्हारे विश्‍वास के आधार स्तम्भ हैं।

 

इन जगत में कामनाओं की पूर्ति के मार्ग पर सफलता-असफलता की धूप-छांव का खेल चल रहा है। इसलिये असफलता मिलते ही तुम्हें लगता है कि तुम्हारा विश्‍वास तुमसे रूठ गया है। विश्‍वास रूठकर कहां जाएगा? वह विश्‍वास तुम्हारे भीतर के इष्ट को बार-बार ठकठकाता है और तुम्हारी बुद्धि में यह आ जाता है कि अब मैं क्या करूं? मैं अकेला पड़ गया, कोई मेरा नहीं। इतने लोगों ने मेरे विश्‍वास को चोट पहुंचाई!

 

अरे! क्या हुआ? तुम अपना विश्‍वास अपने पास बहुत सुरक्षित रखो। पहली बात, जब तक जीत नहीं होती तब तक खेल जारी है। जीवन को कई लोग रण कहते हैं, पर मैं इसे खेल समझता हूं। पहली पारी में परिस्थितियां जीत गईं, पर इसका अर्थ यह तो कत्तई नहीं है कि आप हार गए।

 

तो किस पर विश्‍वास करें और कब तक करें? इसका सीधा सा उपाय है, जब तक तुम्हारा मन कहे तब तक विश्‍वास करो, भरोसा करो। किसी दूसरे की वाणी की अपेक्षा, मन की तरंगें तुम्हारे मन में पहले पहुंच जाती हैं इसलिये शब्दों से पहले अपने मन में उतरो। उस मन में जो तरंगें उत्पन्न हो रही हैं वे तुम्हें अपने आप बता देंगी कि – किस प्रकार से अपने विश्‍वास के सहारे आगे बढ़ना है।

 

ये जो विश्‍वास है यह मन में बसता है और जब तक आपको अपने मन के शिव पर, मन के इष्ट पर विश्‍वास है तब तक अविश्‍वास का प्रश्‍न ही नहीं उठता है? यह संसार विश्‍वास के सहारे ही चल रहा है। सूरज जब ढ़लता है तो हमें पक्का विश्‍वास होता है कि वह अगली सुबह अवश्य निकलेगा। इसलिये विश्‍वास डगमगा सकता है पर टूटता नहीं है क्योंकि श्‍वास के साथ जुड़ा है विश्‍वास। आस से लबालब श्‍वास है क्योंकि विश्‍वास का ही दूसरा नाम आस है।

 

कभी तुम कहते हो कि – खुद पर विश्‍वास नहीं पर ईश्‍वर पर विश्‍वास पर है, क्या तुम्हारा ईश्‍वर तुमसे अलग हैं। ईश्‍वर का निवास तो तुम्हारे मन के भीतर ही है। तुम्हारा मन ही तो सबसे बड़ा मन्दिर है जिसमें तुम खुशी-खुशी अपने ईश्‍वर को, गुरु को बसाते हो।

 

तुम्हारे लिये तो क्या, किसी के भी लिये, किताबों की उक्तियां, महापुरुषों के वचन पूरी तरह से सार्थक नहीं होते। जब तुम्हारा मन स्वयं साक्षी होने लगता है, तब तुम्हारे मन में स्वयं प्रेरक वचन विश्‍वास के रूप में आ जाते हैं तभी वे वचन तुम्हारे लिये सार्थक होते हैं। इस विश्‍वास की उत्पत्ति तुम्हारे मन में ही होती है। विश्‍वास ही तुम्हारा आत्मविश्‍वास बनता है लेकिन आत्मविश्‍वास और अहंकार में बड़ा ही अन्तर है। अहंकार यह सोचता है कि – सबकुछ मैं कर रहा हूं। सबकुछ मेरे ही भरोसे चल रहा है। जबकि  आत्मविश्‍वास यह कहता है कि – मैं क्रियाशील हूं, मैं कर्म कर रहा हूं और मैं ईश्‍वर द्वारा प्रदत्त शक्ति, गुरु द्वारा प्रदत्त आशीर्वाद के सहारे कार्य कर रहा हूं। यदि तुम्हारे भीतर आत्मविश्‍वास है तो तुम ईश्‍वर को पल-पल अपने भीतर जानोगे और यदि तुम्हारे पास विश्‍वास ही नहीं है तो वे तुम्हारे मन में, तुम्हारी आत्मा में, तुम्हारे चित्त में किस प्रकार से स्थापित होंगे। इसलिये सबसे पहले अपने मन की प्रतिष्ठा स्थापित करो।

 

परिस्थितियां विकट होती रहती हैं, कठिनाईयां जीवन में आती रहती हैं और उन्हें तुम्हीं तो हल करते हो। मैं तुम्हारे साथ हूं, तुमने बालक बनकर अपना हाथ मेरे हाथ में सौंपा है तो मैं तुम्हें हारने कैसे दूंगा? मजबूती से हाथ पकड़कर रखूंगा लेकिन तुम्हें संघर्ष अवश्य दूंगा। तुम संघर्ष करोगे तो जीत में तुम्हें बहुत खुशी मिलेगी। हर, हार को तुम जीत में परिवर्तित कर सकते हो। जीवन में कठिनाई तो एक ऐसे रास्ते के समान होती है जिसमें लगता है कि आगे कोई मार्ग नहीं है लेकिन कठिनाईयां रास्ते के मोड़ के समान होती हैं।

 

जिस प्रकार से एक बालक अपने माता-पिता की अंगुली पकड़ता है, उसी प्रकार से तुम गुरु की अंगुली पकड़ो, गुरु का हाथ थामों और कसकर के पकड़े रखो। ईश्‍वर तुम्हारी ओर देख रहे हैं, गुरु तुम्हारी ओर देख रहे हैं या नहीं देख रहे हैं, इस बात को तुम अपने विचार में मत लाओ। तुमने हाथ पकड़ लिया है तो मजबूती से पकड़े रहो।

 

मानस में हर समय तुम और मैं एक साथ हैं, इसलिये प्रत्येक क्षण आत्मविश्‍वास के साथ, अपने विश्‍वास के साथ, मेरे साथ यात्रा करते रहो। जीवन के सारे अज्ञात रहस्यों को हम सुलझा लेंगे। बाधाएं छोटी हैं, आप और मैं दोनों मिलकर इनसे बहुत बड़े…।

 

यह संसार तुम्हारे लिये है, इस संसार की, इस प्रकृति की और ईश्‍वर की प्रत्येक क्रिया का आनन्द लो केवल जीवन व्यतीत करने के लिये नहीं, पल-पल अपने ही विश्‍वास द्वारा, अपने ही आत्मविश्‍वास द्वारा जीवन के अज्ञात रहस्यों को सुलझाने के लिये जीएं।

 

यह मैं नहीं तुम्हारा आत्मविश्‍वास कह रहा है क्योंकि तुम्हारे आत्मविश्‍वास में ही ईश्‍वर का अंश है।
नन्द किशोर श्रीमाली

Dear loved one,

 

Blessings,

 

I love to have an open hearted conversation with my disciples. You are my greatest assets. When I see your phenomenal love for me, it humbles me. And this love springs from the unshakeable bond of trust that we share. On this journey called life we are inseparable. Together we are traversing and your abundant love fuels my passion and energy.  Your affection and love for me is my wealth.

 

As much as we crave for money, fame and appreciation, they motivate us for a short while. But, love and trust keeps us going even in the most trying times. As long as we have faith in ourselves, we can tackle even the most trying circumstances.

 

Yet, there are times when our belief falters. And in those hours you tell me that there is nothing much left to trust in the life.  Your distress breaks my heart. Yet, I am tempted to ask why you have nothing left to trust? And, whom were you trusting in the first place?

 

After all, who broke your trust? Have you stopped believing in others? Or, are you doubting yourself? Even if the whole world is pitted against you, you can not let your self confidence falter.

 

It is okay to get tired during struggles. But, losing your confidence and faith in yourself in the event of failures is just not acceptable because you are my disciple. I am there to support you and nourish you whenever situations will become tough for you. That’s my promise. Moreover, if you have faith in the Shiva, you have to trust yourself because you are an expression of him.

 

Such is life that successes and failures will keep eluding you. However, failures should not be taken to heart. Rather, view them as stepping stones of success.

Whenever you fail you tend to dis-believe your abilities. You feel that the whole world is conspiring against you and you are alone in your struggles. I agree people can get mean and nasty but how you deal with the failures is entirely up to you.

 

Most people view life as a battle. But it is not true. Life is a game and like all games, you win some, you lose some.   It is quite possible that you might not succeed in the first attempt, but if you are determined you will embrace success. The maze of success becomes easier to navigate for someone who has embraced trust.

Are you wondering whom should you trust? And, for how long? There is a simple litmus test. Follow your heart. It always cautions you when it smells deceit. Listen to your inner voice. It will guide you when the going gets tough.

 

Always remember faith can move mountains. As long as you trust your Guru and have faith in the Shiva you can bounce back from any circumstance. Think about it, when the sun sets in the evening, we are certain it is going to rise in the morning. This certainty springs from the trust. And it has kept the mankind going since time immemorial.

 

 

At times you tell me that you don’t trust yourself, but you believe in the God. I find it a contradictory statement because God lives in our heart. If you don’t trust yourself, you are basically doubting your God. No amount of motivational literature can inspire you if you doubt yourself.

 

You have got into the habit of seeking validation from others. When you do something,  you want someone should approve of it. Too much emphasis on external validation undermines your faith in yourself.

 

When you trust yourself you get in touch with your inner magic. You start manifesting your desires because you believe in yourself.

 

Self belief keeps you focused and steady during your struggles. While arrogance revels in taking credit for what it does, self belief is focused on actions.

 

If you believe in yourself you will feel the presence of God within you. Passion follows self belief.  The challenges in life will not intimidate you. Rather, you will inspired to overcome those because you know that the force is with you. I have blessed your endeavours. Success will certainly be yours. Always.

 

Do remember that I am there to hold you, comfort you whenever you need me. This is my promise to you. For me, all my disciples are my children. And, as a Guru I will not let you down. But, that doesn’t mean, I will guard you against your struggles. You will have your battles and I will not fight them for you. Struggles are essential for evolution. Eventually, when you win it will be a proud and happy moment for us.

 

I view hardships as a bend on the road. A difficult situation is not the end. Overcoming hardships becomes easier with a Guru.  Like a child tugs strongly at his parent’s finger, you need to hold on to the Guru. Only then, I will be able to help you. And, even for a second don’t have doubts in your mind regarding our bond. Even if we don’t meet often our relationship continues to grow stronger.

 

I am always with you – in your thoughts, in your beliefs, and in your deeds. You have to trust me wholeheartedly. Together, we will unravel the mysteries of life. There will be difficulties, but when we are together the difficulties will be no more than petty interruptions. As we hold the hands of each other and walk together, life will unfold its true nature, meaning and perspective to us.  All we need is each other and a generous dose of self belief because the God speaks to us through it!

 

Nand Kishore Shrimali
error: Content is protected !!