दीपावली और स्वच्छता (Deepavali and Cleanliness)

दीपावली और स्वच्छता

 

दीपावली भगवती महालक्ष्मी का ऐसा पर्व है, जिसकी तैयारी बड़े ही जोश के साथ की जाती है और सभी अपने-अपने घरों को स्वच्छ करते हैं। घर का साज-श्रृंगार करते हैं। नई वस्तुएं खरीद कर लाते हैं, इसे उत्सव के रूप में सम्पन्न करते हैं। दीपावली और स्वच्छता आपस में जुड़े हुए हैं।

 

इस दीपावली पर क्या करें? किस प्रकार से स्वच्छता के वातावरण का निर्माण करें? किस प्रकार इस स्वच्छता को प्राप्त करें और इसे अपने जीवन का हिस्सा बना सकें, उसके कुछ सटीक उपाय आप सभी के लिए यहां पत्रिका के माध्यम से दिए जा रहे हैं।

 

स्वच्छता का अर्थ है, शुद्धता। स्वच्छता का अर्थ है, गंदगी, कूड़ा, कर्कट, मल, मैल को हटाना। आईये जानें इस दीपावली पर घर के साथ-साथ चार अन्य पक्षों की भी स्वच्छता के उपाय।
घर तो एक ऐसा स्थान है जहां आप निवास करते है, आपने अपने घौंसले को बनाया है उसमें सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति आप स्वयं हैं इसलिये अपने-आपको श्रेष्ठ और उत्तम बनाना है। इसी से घर अपने आप शुद्ध, स्वच्छ, पवित्र, आनन्ददायक, आरामदायक, शांति प्रदायक बन पाएगा।

 

जीवन के चार पक्ष हैं – तन, मन, व्यवहार और वाणी। ऐसा कुछ करें कि ये चारों पक्ष स्वच्छ और साफ हो जाएं। इन पर जमे हुए सारे मलीनता रूपी दोष समाप्त हो जाएं एवं धुल जाएं।

 

मन – 
ज्ञानवर्द्धक साहित्य पढ़े और सुनें।
मन में श्रेष्ठ विचारों का अंकुरण करें। 
मैत्रीभाव के विचारों का बीजारोपण करें।
कड़वी और कटु स्मृतियों को भूला दें।
मधुर स्मृतियों को बार-बार याद करें। 

 

तन – 
नित्य स्नान करें, स्वच्छ रहें। 
नित्य 1 घंटा शारीरिक व्यायाम अवश्य करें। 
भोजन समय पर हल्का और ताजा पका ही ग्रहण करें।
बीमारी का तत्काल उपचार करें, निरोगी रहे। 
भोजन, जल, शौच, श्‍वास की शुद्धता का सदैव ध्यान रखें। 

 

व्यवहार – 
उम्र में बड़े और ज्ञानीयों का आदर करें।
अपने विचारों और निर्णेयों में स्पष्टता रखें।
जिसको उधार चुकाना है, समय पर चुका दें
और जिससे आपका बाकी है, उससे समय पर ले लें।
चापलूसी से बचें और दूसरों के श्रेष्ठ कार्यों की सराहना करें। 
इसके अलावा और भी हजारों बातें आप स्वयं अपने तन, मन, वाणी और व्यवहार के बारे में आप ही सबसे अधिक जानते हैं। 

 

इनकी स्वच्छता का आप ही सर्वश्रेष्ठ निर्णय कर सकते हैं।
वाणी – 
सदैव कम तथा अच्छा ही बोलें। 
मधुर एवं श्रेष्ठ बोलें। 
नित्य बोलचाल में श्रेष्ठ शब्दों का चयन करें।
बोलने से पहले विचारों को मन में दोहरा लें।
ज्ञान होने पर ही किसी विषय पर बोलें।
Deepawali and Hygiene

Deepawali is a  great festival of Goddess MahaLakshmi. Everyone prepares for Deepawali with great enthusiasm and  clean their homes. We decorate and adorn our homes. We purchase new articles and celebrate this occasion with delightful festivities. Deepawali and Cleanliness are interlinked.

What to do on this Deepawali? How to create an environment of cleanliness? How to obtain this cleanliness and make it a part of life? We are providing some specific techniques to all of you through the magazine.

Cleanliness has one meaning – Purity. Cleanliness means removal of dirt, garbage, rubbish, junk and trash. Come, let us learn how to clean four other aspects, along with the home.

Home is the place where you reside, where you have built your own nest. You are the most significant person in it, and so you have to make yourself exceptional and outstanding. This will enable your house to automatically become pure, clean, holy, enjoyable, comfortable and peaceful.

The four aspects of life are – body, mind, behavior and speech. You should do something to make all four aspects clean and tidy. Exterminate and rinse-out all the junk faults accumulated in these four spans.

 

Mind –

Read and listen to informative literature.

Germinate brilliant thoughts in mind.

Grow the seeds of harmonious and cooperative ideas.

Forget bad and bitter memories.

Remember the sweet memories again and again.

 

Body –

Take bath daily, stay clean.

1 hour of physical exercise daily is a must.

Eat fresh-cooked light food on time.

Take immediate steps to cure diseases, stay healthy and disease-free.

Always take care of purity of food, water, hygiene and air.

 

Behavior –

Accord respect to those older in age and learned persons.

Always be clear in your  thoughts and decisions.

Whatever debts you owe, pay them on time, and whatever loans  you need to settle,  take it from the debtors on time.

Beware of flattery and commend excellent efforts of others.

 

Voice –

Always speak less and utter good words.

Choose finest words during dialog.

Repeat the thoughts in mind before speaking aloud.

Speak on any topic only if you have enough knowledge.

 

There are thousands of other things besides these. You yourself know the best about your own body, mind, speech and behavior. You can take the best decisions about their cleanliness and purity.

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